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भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का आकार 5 बिलियन डॉलर पर पहुंचा : अध्ययन

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First Published: March 30, 2022 | Last Updated:March 30, 2022 दो प्रमुख अनुसंधान और शैक्षणिक संस्थानों ने भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था (space economy) पर प्रकाश डालते हुए एक अध्ययन जारी किया है। भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम का कई गुना विस्तार होने के बावजूद, इसके आसपास के पैरामीटर अस्पष्ट हैं। मुख्य बिंदु  यह अध्ययन देश की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के आकार को मापने का अपनी तरह का पहला प्रयास है। यह अध्ययन भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (IIST) और सेंटर फॉर डेवलपमेंट स्टडीज (CDS) के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया है। इन निष्कर्षों को ‘The Space Economy of India: Its Size and Structure’ शीर्षक वाले एक पेपर में रिपोर्ट किया गया है। अध्ययन के निष्कर्ष 36,794 करोड़ रुपये का आंकड़ा शोधकर्ताओं ने वित्त वर्ष 2020-21 के लिए सामने रखा है। देश की अनुमानित अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का आकार देश के सकल घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के रूप में 2011-12 में 0.26 प्रतिशत  से घटकर 2020-21 में 0.19 प्रतिशत हो गया है। इस अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा 2020-21 में 27061 करोड...

अमेज़न वर्षावन का 75% हिस्सा विनाश की कगार पर पहुंचा : अध्ययन

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First Published: March 12, 2022 | Last Updated:March 12, 2022 हाल ही में नेचर क्लाइमेट चेंज जर्नल में अमेज़न वर्षावन पर एक अध्ययन प्रकाशित किया गया। मुख्य बिंदु  30 वर्षों के उपग्रह डेटा और सांख्यिकीय उपकरणों का उपयोग करते हुए, शोधकर्ताओं ने पाया कि अमेज़ॅन वर्षावन का लगभग 75% हिस्सा विनाश की की ओर बढ़ रहा है। अमेज़ॅन वर्षावन लंबे समय तक सूखे या जंगल की आग जैसी चरम घटनाओं से रिकवर करने की क्षमता खो रहा है। इस प्रकार, ऐसी सम्भावना भी है कि अमेज़ॅन वर्षावन शुष्क सवाना जैसे पारिस्थितिकी तंत्र में बदल सकता है। इस परिवर्तन का अमेज़न वन की अद्वितीय जैव विविधता और कार्बन सिंक के रूप में इसकी क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। यह वैश्विक जलवायु परिवर्तन में भी योगदान देगा। अमेज़न वर्षावन ( Amazon rainforest) अमेज़न वर्षावन दक्षिण अमेरिकी महाद्वीप में एक बड़ा उष्णकटिबंधीय वर्षावन है। उन्हें पृथ्वी के फेफड़े भी कहा जाता है। दुनिया की लगभग 30% प्रजातियाँ अमेज़न वर्षावन में पाई जाती हैं, इनमें 40,000 पौधों की प्रजातियाँ, 16,000 पेड़ की प्रजातियाँ, 1,300 पक्षी औ...

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (Kaziranga National Park) जितना कार्बन अवशोषित कर रहा है, उससे अधिक कार्बन जारी कर रहा है : अध्ययन

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First Published: February 11, 2022 | Last Updated:February 11, 2022 तेजपुर, असम में तेजपुर विश्वविद्यालय और पुणे के भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (Indian Institute of Tropical Meteorology) के वैज्ञानिकों के नवीनतम शोध के अनुसार, असम में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (Kaziranga National Park) जितना कार्बन अवशोषित कर रहा है उससे अधिक कार्बन जारी कर रहा है। मुख्य बिंदु  यह शोध 9 फरवरी, 2022 को “Agricultural and Forest Meteorology” पत्रिका में प्रकाशित हुआ था। इस शोध के अनुसार, जैसे-जैसे पृथ्वी गर्म होगी, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की कार्बन अवशोषित करने की क्षमता और कम होती जाएगी। इस क्षेत्र में वर्षा कम होने के कारण यह क्षमता घट जाएगी। इसके अलावा, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान पर्णपाती जंगल की अपनी अनूठी मिट्टी के कारण अवशोषित होने से अधिक कार्बन जारी करता है। मिट्टी बैक्टीरिया की विशाल आबादी का घर है, जो सांस लेते समय कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ती है। इसमें अन्य जीवों और पेड़ों द्वारा उत्सर्जित कार्बन डाइऑक्साइड भी शामिल है। शोधकर्ताओं ने पाया कि काजीरं...

माउंट एवरेस्ट पर सबसे ऊंचा ग्लेशियर तेज़ी से पिघल रहा है : अध्ययन

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First Published: February 9, 2022 | Last Updated:February 9, 2022 हाल ही में वैज्ञानिकों ने पाया कि दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर सबसे ऊंचा ग्लेशियर तेजी से पिघल रहा है। यह ग्लेशियर साउथ कोल ग्लेशियर (South Col Glacier) है और पिछले 25 वर्षों में यह ग्लेशियर 54 मीटर मोटाई खो चुका है। मुख्य बिंदु  साउथ कोल ग्लेशियर 7,906 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह ग्लेशियर तेजी से पतला हो रहा है। इस ग्लेशियर के पिघलने को प्रेरित करने वाले प्रमुख जलवायु कारक तेज हवाएं और गर्म तापमान हैं। 1990 से 2020 के बीच जिस बर्फ को बनने में 2000 साल लगे, वो पिघल चुकी थी। ग्लेशियर पर बर्फ की परत मिट गई है। इसने कुछ क्षेत्रों में अंतर्निहित काली बर्फ को उजागर कर दिया है। इससे पिघलन और तेज हो रही है। काली बर्फ, पर्वत की सतह पर परत है। यदि काली बर्फ पिघलती है, तो पर्वत सूर्य के संपर्क में आ जाता है। पर्वत बर्फ की तुलना में अधिक समय तक अधिक ताप धारण करता है। इससे पिघलने में और तेजी आएगी। इस क्षेत्र की जलवायु स्थिर है। क्षेत्र की जलवायु परिस्थितियों में कोई परिवर्तन नहीं हुआ ह...

वैश्विक तापमान में वृद्धि से श्रम उत्पादकता प्रभावित होगी : अध्ययन

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First Published: January 27, 2022 | Last Updated:January 27, 2022 ड्यूक यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में कहा गया है कि वैश्विक तापमान में वृद्धि से श्रम उत्पादकता प्रभावित होगी। तापमान में वृद्धि से 1.6 ट्रिलियन डालर का वैश्विक आर्थिक नुकसान होगा। अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष 12 घंटे के कार्य दिवस में, वर्तमान में लगभग 670 बिलियन डालर का नुकसान हो रहा है। पिछली सदी की तुलना में दुनिया पहले से ही एक डिग्री सेल्सियस गर्म है। हर अतिरिक्त वृद्धि लोगों की उत्पादकता को प्रभावित करेगी। 1979 और 2020 के बीच, प्रति वर्ष 101 बिलियन घंटे की दर से श्रम उत्पादकता का नुकसान हुआ था। आज दुनिया को गर्मी के कारण सालाना 259 अरब घंटे का नुकसान हो रहा है। दुनिया की तीन-चौथाई आबादी ऐसे स्थान पर रह रही है जहां काम के घंटों के साथ जलवायु की स्थिति जुड़ी हुई है। उष्ण कटिबंध में श्रम उत्पादकता सबसे अधिक है। यह उम्मीद की जाती है कि उष्णकटिबंधीय प्रति वर्ष 500 से 600 घंटे की श्रम उत्पादकता खो सकते हैं। पिछले चार दशकों में गर्मी से संबंधित श्रमिकों के नुकसान में चार गुना वृद्धि हुई है।...

AIIMS ने COVID-19 से पीड़ित बच्चों पर अध्ययन किया

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First Published: January 23, 2022 | Last Updated:January 23, 2022 अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (All India Institute of Medical Sciences – AIIMS) ने हाल ही में COVID-19 से पीड़ित बच्चों पर एक अध्ययन किया। इस अध्ययन के अनुसार, किशोरों में वयस्कों की तुलना में कम मृत्यु दर और कम लक्षणों का सामना करना पड़ा। मुख्य निष्कर्ष 1% किशोर मध्यम COVID-19 बीमारी से पीड़ित हैं। 84.6% हल्के COVID-19 से पीड़ित थे। 11.5% शरीर में दर्द से पीड़ित थे। 14.9% बच्चे बुखार और खांसी से पीड़ित थे। 6.3% गंभीर COVID-19 बीमारी से पीड़ित थे। 6.2% बच्चों को सांस लेने में तकलीफ का सामना करना पड़ा। इस अध्ययन में यह भी कहा गया है कि दूसरी लहर के दौरान 50.7% वयस्कों को सांस लेने में तकलीफ हुई। 7.3% बच्चों को ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत थी। 2.3% को इनवेसिव वेंटिलेशन की आवश्यकता थी। 2.8% नॉन-इनवेसिव वेंटिलेशन की ज़रुरत थी। 1% बच्चों को स्टेरॉयड की दवा दी गई। 16.9% बच्चों को रेमडेसिविर दी गई। वर्तमान में, 15 वर्ष से 17 वर्ष की आयु के बच्चों की अस्पताल में मृत्यु दर 3.1% है। दूसरी लहर के दौर...

वर्ष 2021 पृथ्वी का पांचवां सबसे गर्म साल था : अध्ययन

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First Published: January 12, 2022 | Last Updated:January 12, 2022 हाल ही में कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (Copernicus Climate Change Service) द्वारा एक रिपोर्ट सार्वजनिक की गई, जो एक यूरोपीय संघ का कार्यक्रम है। इस रिपोर्ट में पाया गया कि, 2021 पृथ्वी पर पांचवां सबसे गर्म वर्ष था। रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष इस रिपोर्ट के अनुसार, पिछले सात साल रिकॉर्ड पर सबसे गर्म रहे हैं। ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में निरंतर वृद्धि के कारण उन 12-महीने की अवधि में 2021 को पांचवें स्थान पर रखा गया है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में वृद्धि से पृथ्वी को अपरिवर्तनीय क्षति हो सकती है। इस रिपोर्ट में पाया गया कि, पूर्व-औद्योगिक स्तरों की तुलना में 2021 में औसत वैश्विक तापमान 1.1 से 1.2 डिग्री सेल्सियस अधिक था। वैज्ञानिकों के अनुसार औसत तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक की वृद्धि से पृथ्वी को स्थायी नुकसान हो सकता है और इसका भारी हानिकारक पर्यावरणीय प्रभाव हो सकता है। यूरोप में सबसे गर्म ग्रीष्मकाल 2021 यूरोप में अत्यधिक तापमान और गर्मी ...

ट्रैफिक से संबंधित प्रदूषण के कारण 2 मिलियन बच्चे अस्थमा से प्रभावित हुए : अध्ययन

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First Published: January 10, 2022 | Last Updated:January 10, 2022 बाल अस्थमा (Children Asthma) पर नए अध्ययन के अनुसार, मुंबई से लॉस एंजिल्स तक, यातायात से संबंधित वायु प्रदूषक (traffic-related air pollutants) बच्चों के अस्थमा के लगभग 2 मिलियन नए मामलों के लिए जिम्मेदार हैं। मुख्य बिंदु  अस्थमा एक पुरानी बीमारी है, जिससे फेफड़ों के वायुमार्ग में सूजन आ जाती है। शोधकर्ताओं ने नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) की जमीनी सांद्रता का अध्ययन किया, जो कि टेलपाइप वाहन उत्सर्जन, औद्योगिक स्थलों और बिजली संयंत्रों से आने वाला प्रदूषक है। उन्होंने 2000 से 2019 तक 13,000 शहरों में बच्चों में अस्थमा के नए मामलों पर नज़र रखी। रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष इस अध्ययन के अनुसार, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड बच्चों को अस्थमा के खतरे में डालती है। खासकर शहरी क्षेत्रों में यह समस्या विकट है। इस अध्ययन से पता चलता है कि बच्चों को स्वस्थ रखने के उद्देश्य से स्वच्छ हवा रणनीतियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए। 2019 में वैश्विक स्तर पर NO2 के कारण 1.85 मिलियन नए बाल अस्थमा के मामलों में...