यह एक मिथक है कि ‘न्यायाधीश ही न्यायाधीशों को नियुक्त कर रहे हैं’ : CJI
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सीजेआई ने कहा कि हाल के दिनों में न्यायिक अधिकारियों पर शारीरिक हमले बढ़े हैं और कई बार अनुकूल फैसला नहीं आने पर कुछ पक्षकार प्रिंट और सोशल मीडिया पर न्यायाधीशों के खिलाफ अभियान चलाते हैं और ये हमले ‘‘प्रायोजित और समकालिक' प्रतीत होते हैं. उन्होंने कहा कि लोक अभियोजकों के संस्थान को स्वतंत्र करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि उन्हें पूर्ण आजादी दी जानी चाहिए और उन्हें केवल अदालतों के प्रति जवाबदेह बनाने की जरूरत है. न्यायमूर्ति रमना ने कहा, ‘‘इन दिनों ‘‘न्यायाधीश खुद न्यायाधीशों की नियुक्ति कर रहे हैं'' जैसे जुमलों को दोहराना चलन हो गया है. मेरा मनाना है कि यह बड़े पैमाने पर फैलाए जाने वाले मिथकों में से एक है. तथ्य यह है कि न्यायपालिका इस प्रक्रिया में शामिल कई हितधारकों में से महज एक हितधारक है.'' उल्लेखनीय है कि हाल में केरल से सांसद जॉन ब्रिट्टस ने उच्च और उच्चतम न्यायालयों के न्यायाधीश (वेतन और सेवा शर्त) संशोधन विधयेक-2021 पर चर्चा के दौरान संसद में कथित तौर पर कहा था कि न्यायाधीशों के ही न्यायाधीशों की नियुक्ति करने की बात दुनिया के कहीं सुनाई नही...