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अंतरिक्ष में तैनात सबसे बड़ी दूरबीन खोलेगी पृथ्‍वी जैसे दो ग्रहों का राज!

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अमेरिकी स्‍पेस एजेंसी नासा (Nasa) ने पिछले साल दिसंबर में अंतरिक्ष में अबतक के सबसे बड़े टेलीस्‍कोप जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (James Webb Space Telescope) को लॉन्‍च किया था। यह टेलीस्‍कोप वहां खुद को सेटअप करने की प्रक्रिया पूरी करने वाला है और जल्‍द अपना काम शुरू कर सकता है। खबरों की मानें, तो इस टेलीस्‍कोप ने एक नई चट्टानी दुनिया का पता लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। बताया जाता है कि यह टेलीस्‍कोप 50 प्रकाश वर्ष दूर दो छोटे ग्रहों पर स्‍टडी करेगा।  space.com ने लिखा है कि मौजूदा टेलीस्‍कोप टेक्‍नॉलजी में गैसीय आवरण वाले ग्रहों के मुकाबले चट्टानी ग्रहों को देखना ज्‍यादा कठिन है। लेकिन जेम्‍स वेब टेलीस्‍कोप में लगे पावरफुल मिरर और डीप स्‍पेस लोकेशन की वजह से पृथ्‍वी से थोड़े बड़े दो ग्रहों को टटोलने का काम जल्‍द शुरू हो सकता है। खास बात यह है कि इन ग्रहों को ‘सुपर अर्थ' के रूप में जाना जाता है।    इन ग्रहों को भले ही सुपर अर्थ के तौर पर पहचाना  जाता है, लेकिन यहां जीवन मुमकिन नहीं है। इनमें से एक ग्रह तो बेहद गर्म लावा से ढका हुआ है, जिसका नाम 55 कैनरी ई है। वहीं दूसरे ग्रह का...

73km प्रति सेकंड की स्पीड से फैल रहा यूनिवर्स! NASA बोला- "कुछ तो गड़बड़ है"

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हब्बल टेलीस्कोप (Hubble telescope) सबसे पावरफुल ऑब्जर्वेट्रीज (अंतरिक्ष पर नजर रखने वाली वेधशाला) में से एक है जिसने वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड के कई बड़े रहस्यों को समझने और सुलझाने में मदद की है। पिछले 30 सालों के दौरान टेलीस्कोप ने 130 करोड़ से ज्यादा तस्वीरें खींची हैं। अब यह अपने सबसे चुनौती भरे मिशन पर है, जिसमें पता लगाया जा रहा है कि ब्रह्मांड कितनी तेजी से फैलता जा रहा है। इस बारे में NASA ने एक चौंकाने वाला बयान जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि हमारे यूनिवर्स में जरूर कुछ असामान्य हो रहा है।   पिछले कुछ सालों में तकनीकी ने जिस तरह से विकास किया है, उससे होना ये चाहिए था कि वैज्ञानिक और अच्छे तरीके से ब्रह्मांड के फैलने की घटना की स्टडी कर पाते। लेकिन ऐसा नहीं होता मालूम हो रहा। नासा का कहना है कि ब्रह्मांड के फैलने की दर में अंतर है। यह वैसा नहीं है जैसा कि वैज्ञानिक गणना के अनुसार होना चाहिए। इसमें कुछ असामान्य है। हालिया ऑब्जर्वेशन बताती है कि बिग बैंग (Big Bang) के बाद यूनिवर्स में कुछ असाधारण घटित हो रहा है।  इससे वैज्ञानिक असमंजस में पड़ गए हैं। इस अजीब घटना को समझने...

अमेरिका को चीन की चुनौती, लॉन्‍च करेगा 2.5 अरब पिक्‍सल कैमरे वाला स्‍पेस टेलीस्‍कोप, यह है तैयारी

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अमेरिका और यूरोपीय स्‍पेस एजेंस‍ियों को अंतरिक्ष में चीन से चुनौती मिल रही है। हाल में चीनी वैज्ञानिकों ने बड़ा दावा करते हुए कहा था कि चंद्रमा की मिट्टी में ऑक्सीजन और ईंधन को पैदा करने की क्षमता है। चीन के Chang'e 5 स्‍पेसक्राफ्ट द्वारा लाई गई चंद्रमा की मिट्टी का विश्लेषण करने के बाद वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुंचे। चीन मंगल मिशन पर भी काम कर रहा है। यही नहीं, अब उसकी तैयारी साल 2023 तक अपना पहला बड़ा स्‍पेस टेलीस्‍कोप लॉन्‍च करने की है। इस टेलीस्‍कोप के जरिए चीन, अंतरिक्ष का सर्वेक्षण करना चाहता है। आकाशगंगाओं को एक्‍स्‍प्‍लोर करना चाहता है और तो और डार्क मैटर व डार्क एनर्जी के रहस्‍यों को उजागर करना चाहता है। चीन का यह टेलीस्‍कोप सीधे तौर पर अमेरिका और यूरोप के हबल टेलीस्‍कोप और हाल में लॉन्‍च किए गए जेम्‍स वेब टेलीस्‍कोप को टक्‍कर देगा।  space.com के मुताबिक, चीन की नेशनल एस्‍ट्रोनॉमिकल ऑब्‍जर्वेट्री के डेप्‍युटी डायरेक्‍टर लियू जिफेंग ने न्‍यूज एजेंसी सिन्हुआ को बताया है कि चीनी स्‍पेस स्‍टेशन टेलीस्कोप (CSST) एक ऑप्टिकल और अल्‍ट्रावॉयलेट स्‍पेस ऑब्‍जर्वेट्री है। इसमें ...

नासा ने 5000 बाह्यग्रहों (Exoplanets) की पुष्टि की

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First Published: March 24, 2022 | Last Updated:March 24, 2022 नासा ने पृथ्वी के सौर मंडल के बाहर 65 नए ग्रहों की खोज की है।  इस नई खोज के बाद अब तक खोजे गए बाह्यग्रहों की कुल संख्या 5000 से अधिक हो गई है। इनमें से कुछ खोजे गए ग्रह पृथ्वी जैसे हैं। मुख्य बिंदु  इन नए खोजे गए 65 ग्रहों ने अंतरिक्ष अन्वेषण (space exploration) में एक मील का पत्थर चिह्नित किया है। इन 65 नए खोजे गए ग्रहों का अध्ययन ग्रह की सतह पर रोगाणुओं, पानी, गैसों या यहां तक ​​कि जीवन की उपस्थिति का पता लगाने के लिए किया जाएगा। खगोलविदों के अनुसार मिल्की वे गैलेक्सी ऐसे अरबों ग्रहों का घर है और अंतरिक्ष में इतनी सारी आकाशगंगाएँ मौजूद हैं। जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (James Webb Space Telescope) ने एक ऐसा चित्र लिया है, जिसमें हजारों आकाशगंगाएँ दिखाई दे रही थीं और इस बात की संभावना है कि उनमें से प्रत्येक में पृथ्वी जैसा ग्रह हो सकता है, जिसके जानकारी हमें अभी तक शायद न हो। खोजे गए ग्रहों की विशेषताएं खोजे गए ग्रहों में विभिन्न प्रकार की विशेषताएं और रचनाएं हैं जैसे गैसीय ग्रह जो बृहस्प...

NASA की अहम खोज : हमारे सोलर सिस्‍टम के बाहर मौजूद हैं 5 हजार से ज्‍यादा ग्रह

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने हमारे सौर मंडल के बाहर 5000 से ज्‍यादा ग्रहों के होने की पुष्टि की है। आज से कई साल पहले तक वैज्ञानिकों को चुनिंदा ग्रहों के बारे में जानकारी थी, लेकिन दुनिया को जानने की उत्‍सुकता ने उन्‍हें इस मुकाम तक पहुंचा दिया है। अपने एक्सोप्लैनेट आर्काइव में नासा ने 65 ग्रहों का नया बैच शामिल किया है, जो हमारी मौजूदा सोलर फैमिली के बाहर हैं। इस तरह सौर मंडल के बाहर 5000 से ज्‍यादा ग्रह बीते 30 साल में खोजे जा चुके हैं। एक्सोप्लैनेट आर्काइव उन खोजों को रिकॉर्ड करता है, जिन्‍हें पहचानने के लिए कई तरीके इस्‍तेमाल किए जाते हैं और फ‍िर उनके होने की पुष्टि की जाती है।   नासा ने कहा है कि इन एक्सोप्लैनेट में पृथ्वी जैसी छोटी और चट्टानी दुनिया से लेकर ‘सुपर अर्थ' शामिल हैं, जो हमारे सौर मंडल के ग्रहों से भी बड़े हैं। इनमें बृहस्पति और ‘मिनी-नेप्च्यून्स' से बड़े ग्रह भी हैं। कुछ ग्रह तो एकसाथ दो तारों की परिक्रमा करते हैं, जबकि कई ग्रह मरे हुए तारों अवशेषों के चारों ओर घूमते हैं। नासा एक्सोप्लैनेट साइंस इंस्टीट्यूट के एक रिसर्च साइंटिस्‍ट जेसी क्रिस्टिय...

पृथ्वी से 200 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर करीब आईं दो आकाशगंगाएं, ऐसा है नजारा

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नासा (NASA) के हबल स्पेस टेलीस्कोप ने पृथ्वी से लगभग 200 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर एक-दूसरे से इंटरेक्‍ट करने वालीं दो आकाशगंगाओं को कैमरे में कैद किया है। यह ‘पेगासस तारामंडल' में स्थित हैं। अपने इंस्टाग्राम पेज पर शेयर की गई इमेज में नासा ने एक बड़ी चक्राकार आकाशगंगा (NGC 7469) और इसके छोटे साथी (IC 5283) को दिखाया है। ‘NGC 7469' आकाशगंगा काफी बड़ी है। यह एक विशाल ब्‍लैक होल और तारों के समूह की चमकदार रिंग को भी रिप्रजेंट करती है।  वैसे एकसाथ इन आकाशगंगाओं को ‘Arp 298' कहा जाता है। यह नाम इन्‍हें खगोलविद् ‘हाल्टन Arp' के नाम से मिला है। उन्‍होंने अजीबोगरीब आकाशगंगाओं की एक लिस्‍ट बनाई है, जिसमें ‘Arp 298' भी शामिल है। इसे एटलस कहा जाता है। एटलस में अजीबोगरीब और अद्भुत आकाशगंगाओं की एक गैलरी है। इन सभी की संरचनाएं काफी अलग हैं। नासा ने बताया है कि Arp 298 में जो दो आकाशगंगाएं आपस में इंटरेक्‍ट कर रही हैं, उनमें से NGC 7469 आकाशगंगा बड़ी है। इसके पास विशाल ब्‍लैक होल और चमकदार रिंग वाले तारों का एक समूह भी है।  इस तरह की आकाशगंगाओं का अध्ययन वैज्ञानिक यह समझने के ...

जेम्‍स वेब टेलीस्‍कोप के 18 मिरर्स ने खींची एक ही तारे की फोटो, जानिए क्‍या दिखा

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पिछले साल दिसंबर में अंतरिक्ष में भेजा गया दुनिया का सबसे बड़ा टेलीस्‍कोप ‘जेम्‍स बेव स्‍पेस टेलीस्‍कोप' (James Webb Space Telescope) वहां खुद को सेटअप कर रहा है। इस टेलीस्कोप की ऑब्‍जर्वेट्री के 18-सेगमेंट वाले प्राइमरी मिरर्स (दर्पणों) को एक सीध (aligning) में करने की प्रक्रिया का पहला चरण पूरा होने वाला है। यह प्रक्रिया कई महीनों से चल रही है, जिसे ‘सेगमेंट इमेज आइडेंटिफिकेशन' के रूप में जाना जाता है। बहरहाल, जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप ने अपने 18 प्राइमरी मिरर्स सेगमेंट्स के साथ हेक्सागोनल फॉर्मेशन में एक ही तारे की 18 अनफोकस्‍ड इमेज रिकॉर्ड की हैं। यह विजुअल्‍स पर ज्‍यादा फोकस करने में मदद करेगा। सभी 18 प्राइमरी मिरर्स सेगमेंट्स ने डॉट्स के रूप में तारे की तस्‍वीर खींची। आखिर में इसे एक सिंगल, शार्प और फोकस्‍ड इमेज में तैयार किया जाएगा।  फ‍िलहाल इसके हेक्सागोनल पैटर्न को सामने लाया गया है। NASA Webb Telescope के ऑफ‍िशियल ट्विटर हैंडल से इस बारे में जानकारी दी गई है। पिछले हफ्ते यह कन्‍फर्म हुआ था कि टेलीस्‍कोप के सभी 18 मिरर सेगमेंट स्‍टारलाइट को देख सकते हैं। अब एक अपड...

जेम्‍स वेब टेलीस्‍कोप के लेंस में ‘नमक’ क्‍यों? नासा ने बताई वजह

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नासा (NASA) के जेम्‍स वेब टेलीस्‍कोप (James Webb Telescope) ने अपने सभी अहम डिप्‍लॉयमेंट्स पूरे कर लिए हैं। इसके तहत टेलीस्‍कोप के सनशील्ड और सेकेंडरी मिरर को उनकी जगह पर सेट किया जा चुका है। अब यह ऑब्‍जर्वेट्री ‘कूलिंग पीरियड' में दाखिल हो गई है। ऐसे में नासा 74,100 करोड़ रुपये की इस ऑब्‍जर्वेट्री के बारे में कुछ दिलचस्‍प तथ्‍य शेयर कर रही है। इनमें कुछ लेंस शामिल हैं, जो नमक से बने हैं। सवाल यह है कि इस इन्फ्रारेड टेलीस्कोप को ‘नमकीन' लेंस की जरूरत क्यों है? टेलीस्कोप पर काम कर रहे वैज्ञानिकों ने एक नए वीडियो के जरिए बताया है कि इस ऑब्‍जर्वेट्री के लिए नमक क्यों महत्वपूर्ण है। खास बात यह भी है कि जेम्स वेब टेलिस्कोप एक नहीं, बल्कि तीन तरह के सॉल्‍ट लेंस का इस्तेमाल करता है। लेंस कई तरह के हैं। मिरर्स यानी दर्पण, परावर्तक (reflective) लेंस होते हैं। यह लाइट को मोड़ते हैं। जबक‍ि ट्रांसमिसिव लेंस रोशनी को उनके माध्यम से गुजरने देते हैं। जेम्स वेब टेलीस्‍कोप के लिए इन्फ्रारेड लाइट, ‘दृश्य प्रकाश' (visible light) से अलग तरह से व्यवहार करती है और इस ऑब्‍जर्वेट्री के लिए अहम...

25 दिसंबर को अंतरिक्ष में लॉन्‍च होगा अब तक का सबसे बड़ा टेलीस्‍कोप

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नासा NASA के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप James Webb Space Telescope का लॉन्च एक दिन की देरी से होगा। यह टेलीस्‍कोप हबल Hubble की जगह लेने वाला है। नासा ने कहा है यह लॉन्‍च पहले से तय समय से एक दिन बाद क्रिसमस के दिन 25 दिसंबर को होगा। फ्रेंच गयाना के कौरो स्पेसपोर्ट से होने वाले लॉन्‍च में देरी की वजह तेज हवाएं हैं। अब शनिवार को Ariane 5 रॉकेट नेक्‍स्‍ट जेनरेशन वाली स्‍पेस ऑब्‍जर्वेट्री को लेकर उड़ान भरेगा।  10 अरब डॉलर (लगभग 75,330 करोड़ रुपये) का जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप अब तक का बनाया गया सबसे बड़ा टेलीस्‍कोप है। इसका मकसद खगोलविदों को सफल खोजों में मदद करना है। हबल की तुलना में इसे ब्रह्मांड में गहराई से देखने और 13.5 अरब साल पहले तक की घटनाओं का पता लगाने के लिए डिजाइन किया गया है। फ‍िलहाल हबल स्पेस टेलीस्कोप अंतरिक्ष में सबसे शक्तिशाली टेलीस्कोप है। पिछले 30 साल से इसने खगोलविदों को बड़ी जानकारियां दी हैं। काफी समय हो जाने की वजह से इसे बदलने की जरूरत महसूस की गई थी। हबल प्रोजेक्‍ट को पूरा करने में नासा और ESA (यूरोपियन स्‍पेस एजेंसी) दोनों की भूमिका थी। दोनों ने मिलकर और बड़...