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हमारी आकाशगंगा के अंदर एक और गैलेक्‍सी? इस तस्‍वीर ने वैज्ञानिकों को भी हैरान किया

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रहस्‍यों से भरा हमारा ब्रह्मांड हर रोज कुछ नए आयाम पेश करता है। अब खगोलविदों ने हमारी आकाशगंगा के केंद्र में एक ऑब्‍जेक्‍ट को देखा है। यह एक छोटी सर्पिल आकार की आकाशगंगा लगती है। लेकिन ज्‍यादा संभावना इस बात की है कि यह एक तारा है। बताया जाता है कि यह तारा धूल से भरे गैलेक्टिक सेंटर में पृथ्‍वी से लगभग 26,000 प्रकाशवर्ष की दूरी पर स्थित है। यह तारा सूर्य से लगभग 32 गुना बड़ा है और वहां एक घूमती हुई गैस की विशाल डिस्‍क के अंदर बैठता है।  लाइव साइंस की रिपोर्ट के अनुसार, इस डिस्‍क को ‘प्रोटोस्टेलर डिस्क' के रूप में जाना जाता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि ब्रह्मांड में इस तरह की डिस्‍क व्‍यापक रूप से फैली हुई हैं। ये तारों के लिए फ्यूल का काम करती हैं और युवा तारों को लाखों साल में एक बड़ा और चमकीला सूरज बनने में मदद करती हैं। लेकिन खगोलविदों ने ऐसा पहले कभी नहीं देखा कि एक आकार में एक छोटी आकाशगंगा दिखने वाली यह चीज हमारी आकाशगंगा के केंद्र में खतरनाक तरीके से परिक्रमा कर रही हो।  सवाल उठता है कि यह छोटी सर्पाकार आकृति कैसे आई और क्‍या ऐसी और भी हैं। नेचर एस्‍ट्रोनॉमी में प्रक...

वैज्ञानिकों ने खोज निकाले पृथ्‍वी जैसे दो ग्रह, क्‍या मुमकिन होगी एक और दुनिया?

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पृथ्‍वी से बाहर जीवन की खोज और पृथ्‍वी जैसे ग्रहों की तलाश में वैज्ञानिक जुटे हुए हैं। इसी कड़ी में नई कामयाबी हाथ लगी है। पृथ्‍वी जैसे दो ग्रहों वाला एक सौर मंडल हमसे काफी करीब लगभग 33 प्रकाश वर्ष दूर खोज लिया गया है। वैसे यह खोज पिछले साल अक्‍टूबर में ही हो गई थी, लेकिन साइंटिस्‍ट इसे पुख्‍ता कर रहे थे। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) के ट्रांजिटिंग एक्सोप्लेनेट सर्वे सैटेलाइट (TESS) ने इसे देखा था। आखिरकार 16 जून को कैलिफोर्निया में अमेरिकन एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी की एक बैठक में इसकी घोषणा की गई। इस खोज के बाद अहम सवाल यह उठता है कि क्‍या इन ग्रहों में जीवन संभव है? क्‍या पृथ्‍वी की तरह एक और दुनिया आने वाले वक्‍त में मुमकिन हो सकती है?  रिपोर्ट के अनुसार, इस सवाल का जवाब फ‍िलहाल तो ‘नहीं' में उत्‍तर देता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि हमारे पड़ोसी सौर मंडल में पृथ्वी के आकार वाले कम से कम दो चट्टानी ग्रह भले मौजूद हों, लेकिन इनमें से किसी के भी जीवन की मेजबानी करने की संभावना नहीं है।  इन दो ग्रहों में से एक का नाम HD 260655b बताया गया है। यह पृथ्वी से लगभग 1.2 गुना बड़ा ...

Milky Way गैलेक्सी में एक अनजान चीज से निकल रही हैं X-Ray, वैज्ञानिक बोले- है नया तारा!

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अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को हमारी गैलेक्सी Milky Way में एक अजब वस्तु खोज में पता चली है। इसे MAXI J1816-195 नाम दिया गया है और यह X-ray लाइट छोड़ रही है। वैज्ञानिकों को पहली बार इसके बारे में 7 जून को पता चला था। इसे जापान की स्पेस एजेंसी के ऑल स्काई एक्स रे इमेज (MAXI) के माध्यम कैप्चर किया गया है। इस खोज पर प्रकाश खगोल भौतिक शास्त्री हितोशी निगेरो और उनकी टीम ने डाला जो जापान की निहोन यूनिवर्सिटी से हैं। उन्होंने एस्ट्रोनॉमर टेलीग्राम में एक नोटिस के रूप में पोस्ट किया कि एक नए एक्स-रे स्रोत का पता लगाया गया है।   एस्ट्रोनॉमर एलेस्सांडरो पेट्रूनो द्वारा संकलित किए गए पल्सर डेटाबेस के अनुसार, यह वस्तु 30 हजार प्रकाश वर्ष की दूरी में स्थित है। उन्होंने बताया कि इसकी लोकेशन Serpens, Scutum और Sagittarius तारामंडल के प्लेन में कहीं है। यह वस्तु यूं तो काफी अधिक चमकीली दिखाई दे रही थी लेकिन वैज्ञानिक MAXI डेटा के माध्यम से इसकी पहचान नहीं कर सके। बाद में, पेंसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के एक खगोल भौतिकशास्त्री, जेमी केनेआ और उनके सहयोगियों ने इसके असल स्थान का निरीक्षण करने के लिए नील ...

पृथ्वी से 240 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर मौजूद गैलेक्सी में ढूंढा गया एक रहस्यमई स्ट्रक्चर

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इस यूनिवर्स में बहुत सी चीजें हैं, जो हम अभी तक नहीं जानते हैं। लेकिन दुनिया भर के एस्ट्रोनोमर्स लगातार उन रहस्यों को सुलझाने में लगे हैं। उन्होंने हाल ही में एक पहले से अज्ञात स्ट्रक्चर की खोज की है, जिसमें एक विशाल गैलेक्सी को कवर करने वाला एक रेडियो एमिशन था, जो छाया में छिपा हुआ था। इस गैलेक्सी 3C 273 में रेडियो एमिशन हजारों लाइट-ईयर दूर तक फैला हुआ है। रिसर्चर्स का कहना है कि गैलेक्सी के सेंटर में एक ऊर्जावान ब्लैक होल है। उन्होंने वर्तमान में सबसे बड़ी खगोलीय प्रोजेक्ट, अटाकामा लार्ज मिलिमीटर/सबमिलिमीटर एरे (ALMA) का इस्तेमाल कर यह खोज की है। पृथ्वी से 2.4 अरब लाइट ईयर की दूरी पर 3C 273 गैलेक्सी स्थित है। यह गैलेक्सी एक क्वासर है, जिसका मतलब है कि यह एक आकाशगंगा का केंद्रक है जिसके सेंटर में एक बड़ा ब्लैक होल है। यह ब्लैक होल अपने आसपास के मैटीरियल को निगल लेता है, और उससे भारी मात्रा में रेडिएशन निकलती है। रिसर्चर्स के अनुसार, इस गैलेक्सी को अक्सर दूरबीनों से देखा जाता है, क्योंकि इसे आकाश में एक रेफरेंस पॉइन्ट के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। 3C273 दूसरे शब्दों में एक र...

चांद पर जीवन की तलाश में चीन निकला एक कदम आगे, तैयार कर रहा खास सिस्टम!

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पृथ्वी के अलावा कहीं दूसरे ग्रह पर जीवन को संभव बनाया जा सकता है, इसे लेकर सालों से गहन शोध किया जा रहा है। धरती के अलावा किसी दूसरी दुनिया में रहने की बात जब आती है तो सबसे पहली संभावना चांद पर तलाशी जाती है। चांद ही पृथ्वी के नजदीक एक मात्र ऐसा उपग्रह है जहां पर मनुष्य इस कोशिश को हकीकत बनाने का सपना देखता आया है। चांद पर मनुष्य के रहने लायक वातावरण बनाने के लिए गहन शोध किए जा रहे हैं। इसमें जीवन की कुछ मूलभूत जरूरतें जैसे कि पानी, हवा और लम्बे वक्त चलने वाले ऊर्जा स्रोत आदि के बारे में अध्य्यन किया जा रहा है।  चीन के वैज्ञानिकों ने इसी संबंध में एक स्टडी की है जिसमें उन्होंने कहा है कि चांद की मिट्टी में ऐसे एक्टिव तत्व हैं जो कार्बन डाइऑक्साइड को ऑक्सीजन और ईंधन या ऊर्जा में बदल सकते हैं। चीन की ओर से पिछले साल चांद पर एक बेनाम मिशन भेजा गया था। यह स्टडी चांद पर से पिछले साल लाई गई उसी मिट्टी के नमूनों पर की गई है। Joule नाम के जर्नल में इस स्टडी को प्रकाशित भी किया गया है। अब शोधकर्ता इस बारे में जांच करने में लगे हुए हैं कि क्या चांद पर मौजूद मिट्टी मानव बस्ती बसाने के लिए उ...

NASA से एक कदम आगे निकलेगा ISRO, शुक्र ग्रह पर भेजेगा शुक्रयान

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ISRO जल्द एक नया मील का पत्थर स्थापित करने की तैयारी कर चुका है। चांद और मंगल ग्रह पर अपने मिशन की सफलता के बाद, अब अब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन शुक्र ग्रह (Venus) पर अपना शुक्रयान भेजने की तैयारी कर रहा है। यह यान शुक्र ग्रह के बारे में सभी जरूरी जानकारियां इकट्ठा करेगा, जैसे उसकी सतह के नीचे क्या है? या सबसे गर्म ग्रह पर जीवन की संभावना कितनी है?  India Today की रिपोर्ट में बताया गया है कि ISRO चेयरमैन एस. सोमनाथ ने शुक्र ग्रह पर हुई एक मीटिंग के बाद बताया कि इसरो के वैज्ञानिकों ने शुक्र ग्रह के मिशन की प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कर ली है। इस मिशन की लागत का अनुमान भी लगा लिया गया है। इसके अलावा, यह भी पुष्टि कर दी गई है कि भारत सरकार भी इस प्रोजेक्ट को लेकर सहमत हैं। सोमनाथ का कहना है कि सही उपकरणों के साथ सैटेलाइट को बनाने का काम अभी बाकी है, जिसके बाद मिशन को लॉन्च कर दिया जाएगा। उन्होंने आगे यह भी कहा कि भारत के लिए शुक्र ग्रह पर मिशन भेजना आसान काम है। इसरो का कहना है कि यदि इस मिशन को 2024 में लॉन्च नहीं कर पाए, तो अगला मौका 2031 में मिलेगा। ऐसा इसलिए,  क्योंकि दोनों ग्र...

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लिथुआनिया में एक नया भारतीय दूतावास खोलने के प्रस्ताव को मंजूरी दी

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First Published: April 30, 2022 | Last Updated:April 30, 2022 27 अप्रैल, 2022 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लिथुआनिया में एक नया भारतीय दूतावास खोलने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। यह बाल्टिक क्षेत्र में भारत का पहला पूर्ण दूतावास होगा। मुख्य बिंदु  ताइवान द्वारा एक वास्तविक दूतावास खोलने की अनुमति देने के बाद लिथुआनिया चीन के साथ एक राजनयिक विवाद के केंद्र में है। लिथुआनिया पहला बाल्टिक देश था जिसने वर्ष 2008 में भारत में एक दूतावास खोला था। भारतीय अधिकारियों ने इससे पहले वर्ष 2005 में दूतावास खोलने की मंशा जाहिर की थी। लिथुआनिया की राजधानी विलनियस ने अब तक केवल भारत के मानद वाणिज्य दूतावास की मेजबानी की है जिसे 2015 में खोला गया था। भारतीय मिशन के खुलने से कैसे मदद मिलेगी? लिथुआनिया में भारतीय मिशन के खुलने से भारत को लिथुआनिया के साथ अपने रणनीतिक, राजनीतिक और आर्थिक संबंधों का विस्तार करने में मदद मिलेगी। यह मिशन भारत की विदेश नीति के उद्देश्यों के लिए समर्थन जुटाने और अधिक निरंतर राजनीतिक पहुंच प्रदान करने में मदद करेगा। भारतीय मिशन भारतीय समुदाय की बेह...

अब एक साथ दो डिग्री कर सकेंगे छात्र : UGC

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First Published: April 14, 2022 | Last Updated:April 14, 2022 विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grants Commission) द्वारा देश के छात्रों को एक साथ दो डिग्री करने की अनुमति दी गई है। 2022-23 के शैक्षणिक सत्र से, छात्र इन दोहरी डिग्री कार्यक्रमों के लिए आवेदन करना शुरू कर सकते हैं। दोनों डिग्री या तो अलग-अलग विश्वविद्यालयों से या एक ही विश्वविद्यालय से प्राप्त की जा सकती हैं। मुख्य बिंदु  देश के छात्रों को दो मास्टर कार्यक्रम, एक डिप्लोमा और एक यूजी कार्यक्रम, या दो स्नातक कार्यक्रम चुनने की अनुमति होगी। छात्र PG और UG प्रोग्राम के लिए भी आवेदन कर सकते हैं। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि छात्रों की कक्षाओं के समय में कोई टकराव न हो। दो पूर्णकालिक डिग्री कार्यक्रमों के संबंध में दिशानिर्देश कार्यक्रमों को केवल उन्हीं संस्थानों में चलाया जाना चाहिए जो वैधानिक परिषद या UGC या भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त हैं। एक छात्र दोनों कार्यक्रमों को एक भौतिक मोड में और दूसरा ऑनलाइन या मुक्त और दूरस्थ शिक्षा मोड में कर सकता है। इसके अलावा, छात्र एक साथ दो...

आज पृथ्‍वी से टकरा सकता है एक सौर तूफान, हो सकता है बड़ा नुकसान

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एक बड़ा सौर तूफान (solar storm) 14 अप्रैल को पृथ्वी से टकरा सकता है। वैज्ञानिक इसकी उम्‍मीद कर रहे हैं। उनका मानना है कि इस इस घटना से पृथ्वी को संभावित नुकसान हो सकता है। अंतरिक्ष एजेंसियों का कहना है कि यह भू-चुंबकीय सौर तूफान शक्तिशाली हो सकता है, क्योंकि हाल ही में सूर्य काफी एक्टिव रहा है। वह अधिक चमक भी रहा है। यह सब इसलिए भी है, क्‍योंकि 11 साल के सौर चक्र में सूर्य अपनी सोलर मैक्सिमा के करीब पहुंच रहा है। इस वजह से पिछले कुछ महीनों में वह कई बार कोरोनल मास इजेक्शन (CME) के साथ चमक रहा है। नासा (NASA) और नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) सूर्य के CME फ्लेयर्स की लगातार निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने भविष्यवाणी की है कि सबसे प्रभावशाली तूफान 14 अप्रैल को पृथ्वी को प्रभावित करेगा। इस बार सौर फ्लेयर्स में बेहद तेज हवा होगी। नासा ने संभावना जताई है कि पृथ्वी से टकराने के बाद यह तूफान तेज हो जाएगा। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन स्पेस साइंसेज इंडिया (CESSI) ने एक ट्वीट में लिखा है कि 14 अप्रैल 2022 को 429 से 575 किलोमीटर प्रति सेकंड के बीच की गति के साथ पृथ्वी पर इस तूफान का...

सूर्य में एक के बाद एक हलचल, Nasa ने ग्राफ‍िक्‍स से समझाया- क्‍या हुआ था

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वैज्ञानिकों के लिए ब्रह्मांड में सबसे उत्‍सुकता वाली चीज सूर्य (Sun) है। इस धधकते आग के गोले के बारे में जानने के लिए वह दिन-रात जुटे रहते हैं। कई अंतरिक्ष यान इस मकसद से अंतरिक्ष में हैं कि वह सूर्य के बारे में और जानकारी जुटा सकें। दुनियाभर की स्‍पेस एजेंसियां, सूर्य से जुड़ी नई घटनाओं को हमारे सामने लेकर आती हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) और यूरोपियन अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) इसमें सबसे आगे हैं। नासा के हालिया इंस्‍टाग्राम पोस्‍ट से पता चलता है कि बीते दिनों सूर्य एक के बाद एक कई घटनाओं का गवाह बना।       नासा ने अपने इंस्‍टाग्राम पेज पर बताया है कि पिछले हफ्ते हमारे सूर्य ने बैक टू बैक परफॉर्मेंस दी। एजेंसी के मुताबिक, 30 मार्च 2022 को सूर्य से बहुत तेज चमक निकली। यह दोपहर होते-होते अपने पीक पर थी। इसके बाद एक मध्‍यम दर्जे की हलचल और रिकॉर्ड की गई। सूर्य में हुई हलचल को हमारी सोलर डायनेमिक्स ऑब्जर्वेटरी ने कैप्‍चर किया। यह लगातार सूर्य को देखती है और इसमें होने वाली घटनाओं को कवर करती है।    नासा की ओर से शेयर किए गए पहले ग्राफिक में अहम सौर चमक दिखाई देती है। इसके तहत ट...

इंसान को दोबारा चंद्रमा पर उतारने के लिए Nasa तैयार करेगी एक और मून लैंडर

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) अपने आर्टिमिस प्रोजेक्‍ट (Artemis project) के तहत एक बार फ‍िर से इंसान को चंद्रमा पर भेजने की तैयारी कर रही है। अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर उतारने के लिए नासा ने कई प्राइवेट स्‍पेसक्राफ्ट इस्‍तेमाल करने की योजना बनाई है। शुरुआत में उसने सिर्फ एलन मस्क के मालिकाना हक वाली स्पेसएक्स (SpaceX) को चुना था। अब ऐसा लगता है कि नासा अपनी रणनीति पर फ‍िर विचार कर रही है। नासा ने इस हफ्ते ऐलान किया कि वह अंतरिक्ष यात्रियों के लिए एक अन्‍य प्राइवेट मून लैंडर के डेवलपमेंट को सपोर्ट करना चाहती है। आर्टेमिस प्रोग्राम का मकसद लगभग तीन दशक बाद इंसान को चंद्रमा पर उतारना है और इस दशक के आखिर तक वहां एक स्थायी उपस्थिति तैयार करना है। नासा ने फ्यूचर के अंतरिक्ष मिशन के लिए चंद्रमा को एक लॉन्‍चपैड की तरह इस्‍तेमाल करने की योजना भी बनाई है। वह चंद्रमा से मंगल ग्रह पर पहुंचना चाहती है।  अगले कुछ हफ्तों में नासा एक ड्राफ्ट जारी करेगी, ताकि स्पेसएक्स के साथ-साथ लूनार लैंडर को डेवलप करने के लिए मार्केट में दूसरा दावेदार लाया जा सके। इससे आगे चलकर चंद्रमा पर लैंडिंग स...

भारत ने एक वर्ष में $400 बिलियन का निर्यात करके रचा इतिहास

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First Published: March 25, 2022 | Last Updated:March 25, 2022 भारत ने एक साल में 400 बिलियन डॉलर की वस्तुओं के निर्यात के लक्ष्य को हासिल करके इतिहास रच दिया है। वाणिज्य मंत्री श्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह युवा उद्यमियों, निर्यातकों और MSMEs के दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास और क्षमताओं का प्रमाण है। मुख्य बिंदु यह इतिहास में पहली बार है जब भारत ने वस्तुओं के निर्यात (merchandise exports) में 400 बिलियन डॉलर का आंकड़ा पार किया है। यह आत्मनिर्भर भारत की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। भारत ने वित्त वर्ष के लिए भारत ने 650 बिलियन डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखा था। 650 billion डॉलर में से सेवाओं के निर्यात का लक्ष्य 250 अरब डॉलर था और 400 बिलियन डॉलर का वस्तुओं के निर्यात का लक्ष्य तय किया गया था। रोचक बात यह है कि भारत ने यह लक्ष्य तय समय से 9 दिन पहले हासिल कर लिया है। औसतन, हर घंटे 46 मिलियन डालर का सामान निर्यात किया जाता है, हर दिन 1 बिलियन डालर का सामान निर्यात किया जाता है और हर महीने 33 बिलियन डालर का निर्यात किया जाता है। वित्त वर्ष 2020-21 में...

ए.के. सीकरी को चारधाम परियोजना पर समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया

First Published: March 13, 2022 | Last Updated:March 13, 2022 सुप्रीम कोर्ट ने ए.के. सीकरी को उच्चाधिकार प्राप्त समिति के अध्यक्ष के रूप में नामित किया, जो पूरे हिमालयी घाटी पर चारधाम परियोजना के संचयी और स्वतंत्र प्रभाव का आकलन करेगी। मुख्य बिंदु  2019 में, प्रोफेसर रवि चोपड़ा को सुप्रीम कोर्ट द्वारा उच्चाधिकार प्राप्त समिति के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था। प्रोफेसर रवि चोपड़ा ने जनवरी में इस पद से इस्तीफ़ा दे दिया था। प्रोफेसर चोपड़ा के इस्तीफे के बाद, ए.के. सीकरी को अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने 14 दिसम्बर,  2021 को उत्तराखंड में रणनीतिक चारधाम राजमार्ग परियोजना के डबल लेन को चौड़ा करने की अनुमति दी थी। चारधाम परियोजना चारधाम परियोजना का उद्देश्य हिमालय में चारधाम तीर्थस्थलों अर्थात केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री से संपर्क में सुधार करना है, जिससे इन केंद्रों की यात्रा तेज, सुरक्षित और अधिक सुविधाजनक हो सके। इस परियोजना के तहत कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग का हिस्सा राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) 125 के टनकपुर-पिथौरागढ़ खंड...

अमेरिकी राष्ट्रपति ने क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) पर एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए

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First Published: March 12, 2022 | Last Updated:March 12, 2022 9 मार्च, 2022 को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाईडेन ने क्रिप्टोकरेंसी पर एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किये। कार्यकारी आदेश (E xecutive Order) इस कार्यकारी आदेश ने अमेरिकी संघीय एजेंसियों से क्रिप्टोकरेंसी के जोखिमों और लाभों की जांच करने का आह्वान किया है। इस आदेश में डिजिटल संपत्ति के विनियमन और निगरानी के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता का भी उल्लेख किया गया है। फोकस क्षेत्र इस कार्यकारी आदेश में घोषित उपाय छह प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित हैं: उपभोक्ता संरक्षण वित्तीय स्थिरता अवैध गतिविधि प्रतिस्पर्धा वित्तीय समावेशन जिम्मेदार नवाचार उपभोक्ताओं की सुरक्षा कई क्रिप्टो घोटालों, साइबर हमलों आदि के मद्देनजर कार्यकारी आदेश ने उपभोक्ताओं की सुरक्षा पर बहुत जोर दिया है। क्रिप्टो स्कैमर द्वारा कई निवेशकों का शोषण किया जा रहा है। इस प्रकार, डिजिटल परिसंपत्तियों द्वारा उत्पन्न किसी भी प्रणालीगत वित्तीय जोखिम के खिलाफ पर्याप्त निगरानी सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। अवैध गतिविधियां क्रिप्टो...

जेम्‍स वेब टेलीस्‍कोप के 18 मिरर्स ने खींची एक ही तारे की फोटो, जानिए क्‍या दिखा

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पिछले साल दिसंबर में अंतरिक्ष में भेजा गया दुनिया का सबसे बड़ा टेलीस्‍कोप ‘जेम्‍स बेव स्‍पेस टेलीस्‍कोप' (James Webb Space Telescope) वहां खुद को सेटअप कर रहा है। इस टेलीस्कोप की ऑब्‍जर्वेट्री के 18-सेगमेंट वाले प्राइमरी मिरर्स (दर्पणों) को एक सीध (aligning) में करने की प्रक्रिया का पहला चरण पूरा होने वाला है। यह प्रक्रिया कई महीनों से चल रही है, जिसे ‘सेगमेंट इमेज आइडेंटिफिकेशन' के रूप में जाना जाता है। बहरहाल, जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप ने अपने 18 प्राइमरी मिरर्स सेगमेंट्स के साथ हेक्सागोनल फॉर्मेशन में एक ही तारे की 18 अनफोकस्‍ड इमेज रिकॉर्ड की हैं। यह विजुअल्‍स पर ज्‍यादा फोकस करने में मदद करेगा। सभी 18 प्राइमरी मिरर्स सेगमेंट्स ने डॉट्स के रूप में तारे की तस्‍वीर खींची। आखिर में इसे एक सिंगल, शार्प और फोकस्‍ड इमेज में तैयार किया जाएगा।  फ‍िलहाल इसके हेक्सागोनल पैटर्न को सामने लाया गया है। NASA Webb Telescope के ऑफ‍िशियल ट्विटर हैंडल से इस बारे में जानकारी दी गई है। पिछले हफ्ते यह कन्‍फर्म हुआ था कि टेलीस्‍कोप के सभी 18 मिरर सेगमेंट स्‍टारलाइट को देख सकते हैं। अब एक अपड...

पहली बार एक महिला ने HIV को हराया, स्‍टेम सेल ट्रांसप्‍लांट से मिली कामयाबी

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दुनिया में पहली बार एक महिला ने HIV (human immunodeficiency virus) को हरा दिया है। रिसर्चर्स ने मंगलवार को बताया कि ल्यूकेमिया (leukaemia) से पीड़ित एक अमेरिकी महिला अपने डोनर से स्टेम सेल ट्रांसप्लांट हासिल करने के बाद HIV से ठीक होने वाली पहली महिला और तीसरी व्यक्ति बन गई है। रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका के डेनवर में आयोजित एक कॉन्‍फ्रेंस में रिसर्चर्स ने बताया कि इलाज के तहत गर्भनाल के ब्‍लड का इस्‍तेमाल किया गया। रिसर्चर्स को उम्‍मीद है कि इलाज का यह तरीका ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों के लिए उपलब्‍ध हो सकता है और HIV से पीड़ि‍त लाखों लोगों की जिंदगी से इस बीमारी को दूर कर सकता है।   रिसर्चर्स के मुताबिक, एक्‍यूट मायलोइड ल्यूकेमिया के इलाज के लिए गर्भनाल ब्‍लड इस्‍तेमाल किया गया था। इसके बाद से यह महिला 14 महीने तक HIV वायरस से मुक्त रही। उसे कोई HIV ट्रीटमेंट नहीं दिया गया। इससे पहले दो पुरुषों के केस में एडल्‍ट स्टेम सेल के जरिए HIV का इलाज किया गया था, जिसका इस्‍तेमाल अक्‍सर बोन मैरो ट्रांसप्‍लांट में किया जाता है।  इंटरनेशनल एड्स सोसाइटी की प्रेसिडेंट-इलेक्‍ट शेरोन लेविन ने एक ब...

एक और ‘खतरनाक’ एस्‍टरॉयड बढ़ रहा है पृथ्‍वी की ओर

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करीब 1.3 किलोमीटर आकार का एक विशाल एस्‍टरॉयड पृथ्‍वी की ओर बढ़ रहा है। यह अगले महीने तक हमारे पास से गुजरेगा। 138971 (2001 CB21) नाम के इस एस्‍टरॉयड को संभावित खतरनाक माना गया है। जब यह पृथ्‍वी के करीब आएगा, तब इसके और हमारे ग्रह के बीच की दूरी 4.5 मिलियन किलोमीटर के करीब होगी। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि घबराने वाली कोई बात नहीं है। वजह यह है कि जब यह पृथ्‍वी के सबसे करीब होगा, तब भी यह चंद्रमा और पृथ्‍वी की दूरी के मुकाबले 13 गुना दूर होगा। अहम बात यह है कि एस्‍टरॉयड 26,800 मील प्रति घंटे से तेज रफ्तार से यात्रा करेगा। 4 मार्च को भारतीय समय के मुताबिक, दोपहर 1:30 बजे यह पृथ्‍वी के सबसे करीब होगा।  इटली में वर्चुअल टेलीस्कोप प्रोजेक्ट के एक खगोलशास्त्री ने 30 जनवरी को इस एस्‍टरॉयड को हमारी ओर आते हुए तस्‍वीर में कैद किया है। खगोलविद- जियानलुका मासी ने पृथ्वी-बेस्‍ड टेलीस्कोप का इस्‍तेमाल करके इसे नोट‍िस किया। तब यह पृथ्‍वी से 35 मिलियन किलोमीटर दूर था। वर्चुअल टेलीस्कोप प्रोजेक्ट की वेबसाइट पर शेयर की गई इमेज में एस्‍टरॉयड को एक छोटे सफेद बिंदु के रूप में देखा जा सकता है।  ...

जलवायु परिवर्तन: यूके में पौधे लगभग एक महीने पहले फूलने लगे हैं

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First Published: February 3, 2022 | Last Updated:February 3, 2022 एक अध्ययन के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण यूनाइटेड किंगडम (यूके) में पौधे औसतन लगभग एक महीने पहले फूलने लगे हैं। मुख्य बिंदु  गर्म मौसम के कारण पतझड़ के पत्ते गिरने लगे हैं और झाड़ियों और पेड़ों पर फूल पहले दिखने लगे हैं। हालांकि कुछ इन असामयिक खिलने का स्वागत कर रहे हैं, जबकि वैज्ञानिक जलवायु जोखिमों की चेतावनी दे रहे हैं। यदि प्रवृत्ति जारी रहती है, तो कीड़ों, पक्षियों और पूरे पारिस्थितिक तंत्र पर प्रभाव पड़ सकता है। पारिस्थितिक बेमेल का जोखिम ( Risk of Ecological Mismatch) असामयिक फूल आने से पारिस्थितिक असंतुलन हो सकता है। इसका खेती और प्रकृति के “कामकाज और उत्पादकता पर” नाटकीय प्रभाव पड़ेगा। ग्लोबल वार्मिंग के परिणामस्वरूप कई जगहों पर वसंत ऋतु का जल्दी आगमन और पतझड़ का देर से आगमन होता है। सभी जानवर और पौधे एक ही दर से अनुकूलन नहीं कर रहे हैं। यदि ये प्रजातियां एक-दूसरे के साथ तालमेल बिठाने में असफल रहती हैं, तो यह पारिस्थितिक बेमेल का कारण बन सकती है। खाद्य संसाधनों से जुड़े ...

पृथ्‍वी की कक्षा शेयर करने वाला एक और ट्रोजन एस्‍टरॉयड मिला, 3500 साल तक निभाएगा साथ

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पृथ्वी की कक्षा को शेयर करने वाले दूसरे ट्रोजन एस्‍टरॉयड (Trojan asteroid) के बारे में अटकलें खत्‍म हो गई हैं। रिसर्चर्स ने कन्‍फर्म किया है कि यह सच्‍चाई है। खगोलविदों ने साल 2020 में पृथ्वी की परिक्रमा करने वाले एक अन्‍य ट्रोजन एस्‍टरॉयड की खोज की थी। अब वैज्ञानिकों ने कन्‍फर्म किया है कि ट्रोजन एस्‍टरॉयड कोई असाधारण मामला नहीं है। यह छोटी अंतरिक्ष चट्टानें हैं, जो एक ग्रह के साथ ऑर्बिट शेयर करते हुए चक्कर लगाती हैं। ऐसे कई एस्‍टरॉयड को सौर मंडल के अन्य ग्रहों की परिक्रमा करते हुए खोजा गया है। पृथ्वी के साथ सूर्य की परिक्रमा करने के मामले में अब तक एस्‍टरॉयड 2010 TK7 को इकलौता ट्रोजन एस्‍टरॉयड माना जाता था। अब ‘2020 XL5' नाम का ट्रोजन एस्‍टरॉयड भी इस ग्रुप में शामिल हो गया है। 2020 XL5 एस्‍टरॉयड की लंबाई लगभग 1.2 किलोमीटर है। यह 2010 TK7 की तुलना में लगभग तीन गुना ज्‍यादा लंबा है। वैज्ञानिकों को यकीन है कि यह ट्रोजन एस्‍टरॉयड कम से कम 3500 साल तक इसी कक्षा में रहेगा और पृथ्‍वी के साथ-साथ सूर्य का चक्‍कर लगाता रहेगा।  2020 XL5 एस्‍टरॉयड को पहली बार दिसंबर 2020 में देखा गया था...

जर्मनी के एक स्कूल में थर्ड स्टैंडर्ड के बीमार स्टूडेंट की जगह पढ़ाई करने जाता है रोबोट!

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जर्मनी में एक 7 साल का बच्चा बीमार पड़ा तो उसकी जगह रोबोट स्कूल जाने लगा। यह रोबोट क्लास में उस बच्चे की जगह बैठता है। Joshua Martinangeli नाम के इस स्टूडेंट की पढ़ाई में रुकावट न आए इसके लिए उसका रोबोट अवतार स्कूल की क्लास में जाता है। जब भी जोशुआ को कुछ कहना होता है तो यह रोबोट पलकें झपकाता है।  बर्लिन में Pusteblume-Grundschule की हेडमिस्ट्रेस Ute Winterberg ने रॉयटर्स को एक इंटरव्यू में बताया, "क्लास के बच्चे उससे (रोबोट से) बात करते हैं, उसके साथ हंसते हैं और पढ़ाई के वक्त उससे चिट-चैट भी करते हैं।" जोशुआ की मां Simone Martinangeli ने बताया कि उसका बेटा स्कूल में क्लासेज अटेंड नहीं कर सकता है क्योंकि फेफड़ों की गंभीर बीमारी के कारण उसकी गर्दन में एक ट्यूब पहनाई गई है।  रोबोट अवतार का यह प्रोजेक्ट बर्लिन के Marzahn-Hellersdorf डिस्ट्रिक्ट में एक लोकल काउंसिल के माध्यम से प्राइवेट पेड बेसिस पर चलाया जा रहा है। काउंसिल का कहना है कि जिले में इसने स्कूलों के लिए इस तरह के 4 रोबोट अवतार उपलब्ध करवाए हैं। इसके पीछे की प्रेरणा थी- कोरोना महामारी। काउंसिल का मानना है कि महाम...