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HomoSEP: सेप्टिक टैंक को साफ करने के लिए IIT मद्रास ने रोबोट बनाया

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First Published: June 21, 2022 | Last Updated:June 21, 2022 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास ने सेप्टिक टैंक को साफ करने और भारत में हाथ से मैला ढोने की प्रथा को खत्म करने के लिए एक रोबोट विकसित किया है। इसे फील्ड में लगाने की तैयारी है। इस रोबोट का नाम HomoSEP है। मुख्य बिंदु  पूरे तमिलनाडु में कुल दस रोबोट तैनात करने की योजना है। शोधकर्ता स्थानों की पहचान के लिए स्वच्छता कार्यकर्ताओं के संपर्क में हैं। महाराष्ट्र और गुजरात के कुछ स्थानों पर भी विचार किया जा रहा है। यह रोबोट किसने विकसित किया है? HomoSEP रोबोट को IIT मद्रास के प्रो. प्रभु राजगोपाल के नेतृत्व में एक टीम ने IIT मद्रास-इनक्यूबेटेड स्टार्ट-अप सोलिनास इंटीग्रिटी प्राइवेट लिमिटेड (Solinas Integrity Private Limited) के सहयोग से विकसित किया है। यह सफाई कर्मचारी आंदोलन  एनजीओ द्वारा भी समर्थित है, जो भारत में मैला ढोने की प्रथा को खत्म करने के लिए समर्पित है। सेप्टिक टैंक कैसे खतरनाक हैं? सेप्टिक टैंक एक जहरीला वातावरण है। यह अर्ध-ठोस और अर्ध-द्रव मानव मल सामग्री से भरा होता है।...

IIT रुड़की में ‘परम गंगा’ (PARAM Ganga) सुपर कंप्यूटर स्थापित किया गया

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First Published: March 10, 2022 | Last Updated:March 10, 2022 ‘परम गंगा’ एक ‘मेड इन इंडिया’ पेटास्केल सुपरकंप्यूटर है, इसे राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (National Supercomputing Mission – NSM) के तहत IIT रुड़की में स्थापित किया गया है। परम गंगा (PARAM Ganga) परम गंगा की सुपरकंप्यूटिंग क्षमता 1.66 PFLOPS (Peta Floating-Point Operations per Second) है। इसे राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन ( NSM ) के तहत C-DAC द्वारा डिजाइन और कमीशन किया गया है। परम गंगा के निर्माण के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण घटकों का निर्माण और संयोजन भारत में Centre for Development of Advanced Computing  – C-DAC) द्वारा विकसित एक स्वदेशी सॉफ्टवेयर स्टैक के साथ किया गया है। राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (National Supercomputing Mission – NSM) राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeiTY) और विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) की एक संयुक्त पहल है। इसे C-DAC और भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बैंगलोर द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है। सुपरकंप्यूटिंग...

IIT रुड़की ने ‘किसान’ (KISAN) मोबाइल एप्प लांच किया

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First Published: February 24, 2022 | Last Updated:February 24, 2022 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (IIT रुड़की) ने किसानों के लिए ‘किसान’ नाम से एक मोबाइल एप्प लॉन्च किया है। इस ऐप के माध्यम से किसानों को कृषि-मौसम संबंधी परामर्श सेवाएं प्रदान की जाएंगी। मुख्य बिंदु  ग्रामीण कृषि मौसम सेवा (GKMS) परियोजना के तहत IIT रुड़की द्वारा किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में देहरादून, हरिद्वार और पौड़ी गढ़वाल जिले के किसानों ने भाग लिया। भाग लेने वाले किसानों को एग्रोमेट एडवाइजरी सर्विसेज के बारे में सिखाया गया जो भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और AMFU रुड़की द्वारा संयुक्त रूप से प्रदान की जाती है। हरिद्वार के छह प्रखंडों के किसानों को पहले से ही सप्ताह में दो बार एग्रोमेट एडवाइजरी सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। इस किसान एप्प के जरिए मोबाइल फोन के जरिए बुलेटिनों तक पहुंचा जा सकता है। इस एप्प की एक अनूठी विशेषता यह है कि एडवाइजरी बुलेटिन और मौसम पूर्वानुमान केवल उस विशेष ब्लॉक के लिए प्रदर्शित किया जाएगा जिसे किसानों द्वारा चुना गया है...

jncasr: Bengaluru too to get national centre for carbon capture & utilisation; JNCASR got nod same day as IIT-B

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BENGALURU: A lab at the Jawaharlal Nehru Centre for Advanced Scientific Research (JNCASR) will soon set up a National Centre of Excellence on Carbon Capture and Utilisation (NCCCU). This first of its kind centre that is being established will be the one of the two such centres being supported by the Department of Science and Technology (DST). The other centre will come up at IIT-Bombay (IIT-B), which has announced “the establishment of a National Centre of Excellence in Carbon Capture and Utilisation (NCoE-CCU) with support from the DST.” Sources said that the national centre coming up at the JNCASR will To perform world class research, provide training and consultancy in the areas of carbon-di-oxide (CO2) capture and utilisation and translate this research excellence into solutions with global economic and social impact. “The vision of the centre is to be a centre of excellence and world leader in niche research areas of CO2 capture and utilisation through high socioeconomic impac...

अब चेस्ट X-Ray से लगाया जा सकेगा कोविड का पता, IIT जोधपुर ने विकसित की तकनीक

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First Published: January 31, 2022 | Last Updated:January 31, 2022 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जोधपुर (IIT-J) के शोधकर्ताओं द्वारा हाल ही में एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित छाती एक्स-रे तकनीक विकसित की गई थी। इस चेस्ट एक्स-रे तकनीक का इस्तेमाल कोविड-19 की स्क्रीनिंग के लिए किया जाएगा। मुख्य बिंदु शोधकर्ताओं की टीम ने COMiT-Net नामक एक गहन शिक्षण-आधारित एल्गोरिथम प्रस्तावित किया है। यह एल्गोरिथम गैर-कोविड प्रभावित फेफड़े को कोविड प्रभावित फेफड़े से अलग करने के लिए छाती के एक्स-रे छवियों में मौजूद असामान्यताओं (abnormalities) की जानकारी एकत्रित करेगा। प्रौद्योगिकी विकसित करने के लिए 2,500 से अधिक छाती एक्स-रे छवियों के साथ प्रयोग किया गया था। इसने लगभग 96.80% संवेदनशीलता हासिल की। इस शोध में इस्तेमाल AI समाधान चिकित्सा के साथ-साथ एल्गोरिथम दोनों दृष्टिकोणों से व्याख्या योग्य है। खोज का महत्व दुनिया भर में कई लहरों में कोविड -19 मामलों की बढ़ती संख्या के बीच, दूरस्थ क्षेत्रों में प्रसंस्करण केंद्रों और परीक्षण किटों की सीमित उपलब्धता के साथ देशों...