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एलियंस की खोज में चीन! पृथ्‍वी से बाहर जीवन की तलाश के लिए बनाया मिशन

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साइंस बरसों से इस कोशिश में है कि पृथ्‍वी के नजदीक किसी ऐसे ग्रह का पता लगा सके, जहां जीवन मुमकिन हो। दुनियाभर के वैज्ञानिक कई साल से इन ग्रहों की खोज में जुटे हैं, लेकिन उन्‍हें कोई बड़ी कामयाबी अबतक नहीं मिल पाई है। बहरहाल अब चीन ने इस मिशन को अपने हाथ में लिया है। उसने एक ऐसे मिशन का प्रस्‍ताव रखा है, जो ऐसे ग्रहों की खोज में एक अलग रास्‍ता अपना सकता है। चीनी वैज्ञानिकों को उम्‍मीद है कि यह मिशन पृथ्‍वी से बाहर इन ग्रहों को लेकर पुख्‍ता नजर‍िया पेश कर सकता है। इस मिशन का नाम है क्लोजबाय हैबिटेबल एक्सोप्लैनेट सर्वे (CHES)। इस मिशन के तहत चीन हमारी पृथ्‍वी के आसपास स्थित तारों पर मौजूद ग्रहों की परिक्रमा के असर को जानेगा। इन ग्रहों को एक्‍सोप्‍लैनेट कहा जाता है। ऐसे ग्रह जो सूर्य के अलावा अन्य तारों की परिक्रमा करते हैं, वो एक्सोप्लैनेट कहलाते हैं। मिशन के जरिए यह समझने की कोशिश की जाएगी कि क्‍या फलां ग्रह में जीवन को बनाए रखने की क्षमता है। अगर ऐसा होता है, तो यह विज्ञान के लिए एक बड़ी उपलब्धि हो सकती है। बताया जाता है कि इस मिशन को एक स्‍पेसक्राफ्ट के जरिए पूरा किया जाएगा।  रिपो...

अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने सौर मंडल के बाहर खोज निकाला पृथ्वी से 4 गुना बड़ा ग्रह, जहां 1 साल है बस 11 दिन का!

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हाल ही में अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने एक एग्जोप्लेनेट (ऐसा ग्रह जो सौरमंडल के बाहर किसी तारे का चक्कर लगाता हो) या सुपरअर्थ (super-Earth) की खोज की है जो हमारे प्लेनेट यानि पृथ्वी से 4 गुणा बड़ा है। खगोलविदों ने इसे Ross 508 b नाम दिया है। यह भी पृथ्वी की तरह एक सूर्य जैसे तारे के गिर्द चक्कर लगाता है जिसका नाम Ross 508 बताया गया है। यह 36.5 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है इसलिए नंगी आंखों से नहीं देखा जा सकता है। वैज्ञानिकों ने पाया कि यह Ross 508 के हैबिटेबल जोन (तारे के समीप बने रहने योग्य जगह) में है। इस स्टडी को नाम दिया गया है- "M4.5 डवार्फ रॉस 508 के अंतरूनी छोर के पास हैबिटेबल जोन में घूमती सुपर अर्थ।" स्टडी को पब्लिकेशंस ऑफ द एस्ट्रॉनोमिकल सोसाइटी ऑफ जापान नाम के जर्नल में प्रकाशित करने के लिए स्वीकार किया गया है। Ross 508 b प्लेनेट तारे के पास उस दूरी पर घूमता है जिससे कि ग्रह पर पानी के बनने योग्य तापमान बना रहे। इससे पता चलता है कि रॉस 508 बी अपने तारे के हैबिटेबल जोन में है।  हालांकि, केवल हैबिटेबल जोन में चक्कर लगाने का ये मतलब नहीं है कि ग्रह पर जीवन होगा। यूं तो, म...

NASA की अहम खोज : हमारे सोलर सिस्‍टम के बाहर मौजूद हैं 5 हजार से ज्‍यादा ग्रह

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने हमारे सौर मंडल के बाहर 5000 से ज्‍यादा ग्रहों के होने की पुष्टि की है। आज से कई साल पहले तक वैज्ञानिकों को चुनिंदा ग्रहों के बारे में जानकारी थी, लेकिन दुनिया को जानने की उत्‍सुकता ने उन्‍हें इस मुकाम तक पहुंचा दिया है। अपने एक्सोप्लैनेट आर्काइव में नासा ने 65 ग्रहों का नया बैच शामिल किया है, जो हमारी मौजूदा सोलर फैमिली के बाहर हैं। इस तरह सौर मंडल के बाहर 5000 से ज्‍यादा ग्रह बीते 30 साल में खोजे जा चुके हैं। एक्सोप्लैनेट आर्काइव उन खोजों को रिकॉर्ड करता है, जिन्‍हें पहचानने के लिए कई तरीके इस्‍तेमाल किए जाते हैं और फ‍िर उनके होने की पुष्टि की जाती है।   नासा ने कहा है कि इन एक्सोप्लैनेट में पृथ्वी जैसी छोटी और चट्टानी दुनिया से लेकर ‘सुपर अर्थ' शामिल हैं, जो हमारे सौर मंडल के ग्रहों से भी बड़े हैं। इनमें बृहस्पति और ‘मिनी-नेप्च्यून्स' से बड़े ग्रह भी हैं। कुछ ग्रह तो एकसाथ दो तारों की परिक्रमा करते हैं, जबकि कई ग्रह मरे हुए तारों अवशेषों के चारों ओर घूमते हैं। नासा एक्सोप्लैनेट साइंस इंस्टीट्यूट के एक रिसर्च साइंटिस्‍ट जेसी क्रिस्टिय...

सौर मंडल के बाहर मिला ‘चंद्रमा’, बृहस्‍पति जितने बड़े एक्सोप्लैनेट के लगाता है चक्‍कर

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वैज्ञानिकों ने 10,000 से ज्‍यादा एक्सोप्लैनेट (exoplanets) की खोज की है, जो हमारे सौर मंडल से बाहर हैं। हालांकि वैज्ञानिक उनमें से किसी की परिक्रमा करते हुए चंद्रमा का पता नहीं लगा पाए हैं। एक नई स्‍टडी में वैज्ञानिकों ने खोज की नई रूपरेखा तैयार की है। शोधकर्ताओं को लगता है कि अब उन्हें जो खगोलीय पिंड मिला है, वह सौर मंडल के बाहर किसी ग्रह की परिक्रमा करने वाला विशाल चंद्रमा हो सकता है। यह चंद्रमा, बृहस्पति के आकार के एक एक्सोप्लैनेट की परिक्रमा करता है। अगर जांच में यह कन्‍फर्म हो जाता है, तो यह पहला ‘एक्सोमून' बन सकता है। हालांकि चार पहले भी एक खगोलीय पिंड के एक्‍सोमून होने की बात कही गई थी। उस खोज की अभी पुष्टि नहीं हो पाई है। कई विशेषज्ञों को लगता है कि इस खगोलीय पिंड के साथ भी यही हो सकता है। वैसे इन दोनों खगोलीय पिंडों में कई खासियत भी हैं। ये एक ही ग्रह के चक्‍कर लगाते हैं। हाल में मिला खगोलीय पिंड पहले मिले पिंड से थोड़ा छोटा है। वैज्ञानिकों को लगता है कि ये दोनों चीजें गैस से बनी हैं। यह ग्रह भी हो सकती थीं, लेकिन दूसरे ग्रह ने इन्‍हें अपनी कक्षा में खींच लिया।  नेचर ...

बृहस्‍पति से तीन गुना बड़ा ग्रह वॉलंटियर्स ने खोज निकाला

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बृहस्‍पति (Jupiter) हमारे सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है। अब नासा (NASA) ने बृहस्‍पति से भी तीन गुना बड़े ग्रह की खोज की है। खास बात यह है कि एस्‍ट्रोनॉमी में दिलचस्‍पी रखने वाले वॉलंटियर्स ने नासा को इस खोज में मदद की है। हालांकि यह ग्रह हमारे सौर मंडल के बाहर है। पृथ्वी से लगभग 379 प्रकाश वर्ष दूर स्थित यह ‘सुपर-बृहस्पति' हमारे सूर्य के समान द्रव्यमान वाले तारे की परिक्रमा करता है। आने वाले दिनों में इस ग्रह से जुड़े कई और दिलचस्‍प तथ्‍य सामने आने की उम्‍मीद है।  नासा ने कहा है कि यह खोज ‘सिटीजन साइंटिस्‍ट' के एक ग्रुप की वजह से संभव हुई है। इन वॉलंटियर्स ने नासा के ट्रांजिटिंग एक्सोप्लैनेट सर्वे सैटेलाइट (TESS) से डेटा का अध्ययन किया। नासा नियमित रूप से सिटीजन साइंटिस्‍ट को अपने टेलीस्कोप डेटा तक पहुंच की अनुमति देती है, जिससे वो सौर मंडल के बाहर दुनिया का पता लगा सकें।  वॉशिंगटन के एक पूर्व अमेरिकी नौसैनिक अधिकारी टॉम जैकब्स उन लोगों में शामिल थे, जिन्होंने इस ग्रह को खोजने में मदद की। नासा ने कहा कि यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह विशालकाय ग्रह अपने सूर्य की परिक...

बाह्यगृह (exoplanet) पर पहले चुंबकीय क्षेत्र की खोज की गई

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First Published: January 1, 2022 | Last Updated:January 1, 2022 हाल ही में, खगोलविदों की एक टीम ने  Hubble Space Telescope The Hubble Space Telescope (often referred to as Hubble or HST) is one of NASA's Great Observatories and was launched into low Earth orbit in 1990. It is one of the largest and most versatile space telescopes in use and features a 2.4-meter mirror and four main instruments that observe in the ultraviolet, visible, and near-infrared regions of the electromagnetic spectrum. It was named after astronomer Edwin Hubble. ">हबल स्पेस टेलीस्कोप (Hubble Space Telescope) के डेटा का उपयोग एक बाह्यगृह (exoplanet) पर एक चुंबकीय क्षेत्र के संकेत की खोज के लिए किया था। ‘नेचर एस्ट्रोनॉमी’ नामक पत्रिका में इसके निष्कर्षों का वर्णन किया गया था। मुख्य बिंदु ग्रह के चारों ओर एक चुंबकीय क्षेत्र आवेशित कार्बन कणों (charged carbon particles) के एक विस्तारित क्षेत्र के अवलोकन की व्याख्या करता है। ग्रह के वायुमंडल की सुरक्षा में चुंबकीय क्षेत्...