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चंद्रमा पर कहां से आया पानी? चीनी वैज्ञानिकों ने खोज निकाला सुराग!

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चंद्रमा पर पानी की मौजूदगी को लेकर दुनियाभर में रिसर्च चल रही है। बीते दिनों हमने आपको जानकारी दी थी कि चीनी साइंटिस्‍ट चंद्रमा से लाए गए सैंपल्‍स का परीक्षण कर रहे हैं। इन सैंपलों का विश्‍लेषण करने के बाद वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि चंद्रमा के एक हिस्‍से में मिट्टी में पानी की मात्रा पहले के मुकाबले कम लगती है। इंटरनेशनल जरनल- नेचर कम्‍युनिकेशंस में पब्लिश एक पेपर में उनकी ओर से कहा गया है कि चांद से लाए गए सैंपल्‍स में मिले पानी का अहम हिस्‍सा चंद्रमा के इंटीरियर से आया होगा।   साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्‍ट की खबर के अनुसार, वैज्ञानिकों की टीम ने Chang'e 5 मिशन के जरिए चंद्रमा से लाए गए सैंपल्‍स को टेस्‍ट किया। ये सैंपल साल 2020 में पृथ्‍वी पर लाए गए थे। इस चीनी लैंडर ने चंद्रमा की सतह को स्‍कैन किया और सैंपल्‍स को इकट्ठा किया था।   वैज्ञानिकों ने पहले जो विश्‍लेषण किया था, उसकी तुलना में यह रिजल्‍ट कम था। बीजिंग में नेशनल एस्ट्रोनॉमिकल ऑब्जर्वेट्री में कार्यरत लियू जियानजुन ने कहा कि Chang'e 5 के इक्विपमेंट ने वहां हाइड्रॉक्सिल की उपस्थिति को मापा, जो पानी का एक कर...

खारा पानी 1 हजार गुना तेजी से होगा फ‍िल्‍टर! वैज्ञानिकों ने ईजाद किया नया तरीका

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मीठे पानी की कमी की समस्या को हल करने की दिशा में बड़ा कदम क्या हो सकता है? वैज्ञानिकों ने एक ऐसी डिवाइस डेवलप की है, जो ट्रेडिशनल रूप से इस्‍तेमाल की जाने वाली डिवाइसेज की तुलना में खारे पानी को एक हजार गुना तेजी से फ‍िल्‍टर करती है। इंडस्ट्रियल स्‍केल में समुद्री पानी को विलवणीकरण (desalination) प्रक्रिया के जरिए पीने योग्य बनाया जाता है। इस प्रक्रिया में पानी से नमक को अलग किया जाता है और बचे हुए पानी को सिंचाई के लिए उपयोग किया जाता है। हाल के एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने खारे पानी को तेजी से और अधिक प्रभावी तरीके से साफ करने के लिए एक नया तरीका ईजाद किया है।  वैज्ञानिकों ने अपने नए प्रकाशित अध्ययन में खारे पानी को तेजी से और अधिक प्रभावी तरीके से शुद्ध करने के लिए एक नए तरीके के बारे में बताया है। उन्होंने फ्लोरीन-बेस्‍ड नैनोस्ट्रक्चर का इस्‍तेमाल करके नमक को पानी से सफलतापूर्वक अलग किया। टोक्यो यूनिवर्सिटी के रसायन विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर योशिमित्सु इटोह और उनके सहयोगियों ने नैनोस्केल पर फ्लोरीन पाइपलाइनों की क्षमता की खोज करके अपने अध्‍ययन की श...

उस ‘खजाने’ तक पहुंचे साइंटिस्‍ट जहां से निकलते हैं ब्‍लैक होल, सुलझेगा हमारी आकाशगंगा का रहस्‍य!

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ब्लैक होल (Black holes) के बारे में माना जाता है कि ये हमारी आकाशगंगा समेत ज्‍यादातर आकाशगंगाओं के केंद्र में मौजूद रहते हैं और उनके कामकाज में भूमिका निभाते हैं। अब रिसर्चर्स के एक ग्रुप ने बौनी (dwarf) आकाशगंगाओं में बड़े पैमाने पर ब्लैक होल छुपे होने का पता लगाया है। आमतौर पर ब्लैक होल का पता तब चलता है, जब वो अपने चारों ओर मौजूद गैस को खाकर बहुत तेजी से बढ़ते हैं और चमकने लगते हैं। रिसर्चर्स का मानना ​​है कि ये ब्लैक होल, आकाशगंगा के केंद्र में मौजूद विशालकाय ब्लैक होल के बारे में अहम जानकारी दे सकते हैं।  यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना (UNC)-चैपल हिल डिपार्टमेंट ऑफ फिजिक्स एंड एस्ट्रोनॉमी के खगोलविदों द्वारा की गई रिसर्च से हमारी आकाशगंगा के ब्लैक होल पर जानकारी मिलने की उम्‍मीद है।  माना जाता है कि हमारी ‘मिल्‍की वे' का निर्माण कई छोटी बौनी आकाशगंगाओं के विलय से हुआ है। लेकिन क्या सभी बौनी आकाशगंगाओं में एक बड़ा ब्लैक होल होता है, इसके बारे में अभी तक ज्‍यादा जानकारी नहीं थी, इसीलिए कई वैज्ञानिक यह जानने में जुटे हैं कि ब्‍लैक होल और आकाशगंगा एकसाथ कैसे डेवलप होते हैं।  ए...

क्‍या सचमुच एलियंस ने हमें भेजा था 'Wow! सिग्‍नल? वैज्ञानिकों ने खोज निकाली वह जगह

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एलियंस हमारी दुनिया के लिए हमेशा से रहस्‍य और उत्‍सुकता बने हुए हैं। ऐसे दावों की कमी नहीं है, जिनमें एलियंस के होने की बात कही जाती है। रिसर्चर्स इन दावों की पड़ताल में जुटे हुए हैं। इन्‍हीं में से एक है वो ब्रॉडकास्‍ट, जिसे ‘एलियन ब्रॉडकास्‍ट' कहा जाता है। यह बात साल 1977 की है। अमेरिका में एक रेडियो टेलीस्कोप को नैरोबैंड रेडियो सिग्नल मिला। इसे वाव (Wow) सिग्‍नल के रूप में जाना जाता है। इस सिग्‍नल ने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया था क्‍योंकि साइंटिस्‍ट इसकी उत्पत्ति का पता नहीं लगा पाए थे। कहा जा रहा है कि अब वैज्ञानिकों को इसका जवाब मिल गया है।  आधी सदी पहले आए इस सिग्‍नल के सोर्स को लेकर वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि यह 1800 प्रकाश-वर्ष दूर सैजिटेरीअस तारामंडल में स्थित एक सूर्य जैसे तारे से आया होगा। खगोलशास्त्री अल्बर्टो कैबलेरो ने लाइव साइंस को बताया कि "वाव! सिग्नल को सबसे बेस्‍ट SETI कैंडिडेट रेडियो सिग्नल माना जाता है, जिसे हमारे टेलीस्‍कोपों ने पिक किया है। नासा के अनुसार, SETI या दूसरे ग्रहों की खोज वह क्षेत्र है, जिसके तहत 20वीं सदी के मध्य से ऐसे संदेशों ...

2 अरब साल पहले मंगल ग्रह पर थे महासागर! वैज्ञानिकों ने ऐसे लगाया अनुमान

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पृथ्‍वी से बाहर जीवन की संभावना की बात आती है, तो इसका सबसे बड़ा दावेदार नजर आता है मंगल (Mars) ग्रह। वर्षों से वैज्ञानिक यह जानने में जुटे हैं कि क्‍या कभी मंगल ग्रह पर जीवन था। क्‍या भविष्‍य में ऐसी कोई उम्‍मीद है? तमाम अध्‍ययन संकेत तो देते हैं, लेकिन अभी बहुत शोध बाकी है। अब पेरिस यूनिवर्सिटी की एक स्‍टडी में पता चला है कि 2 अरब साल पहले मंगल ग्रह पर तरल महासागर हो सकते थे। वैज्ञानिकों का कहना है कि तरल महासागर संभव हो सकता है अगर तापमान जमाव बिंदु यानी 4.5 डिग्री सेल्सियस से ज्‍यादा होता है। मंगल ग्रह पर ऐसी स्थितियां आज से करीब 3 अरब साल पहले मुमकिन थीं।  हालांकि साल 2016 के एक रिव्‍यू कहा गया था कि लो सोलर रेडिएशन के कारण मंगल ग्रह की प्राचीन जलवायु बेहद ठंडी थी और एक महासागर को बरकरार नहीं रख सकती थी। वहीं, साल 2021 के एक अन्य अध्ययन में कहा गया है कि ग्रह का अपना वॉर्मिंग मैकेनिज्‍म है, जो झीलों और नदियों को पनपने दे सकता है।  मौजूदा अध्ययन में रिसर्चर्स ने पृथ्वी के जलवायु मॉडल पर बेस्‍ड त्रि-आयामी मॉडल का इस्‍तेमाल करके मंगल की प्राचीन जलवायु को दोबारा से तैयार किया। इस...

27 साल पहले आसमान में दिखे ‘UFO’ का सच सामने आया, वैज्ञानिकों ने किया यह दावा

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यूएफओ (UFO) जिन्‍हें ‘अनआइडेंटिफाइड फ्लाइंग ऑब्‍जेक्‍ट' भी कहा जाता है, वर्षों से दुनिया के लिए रहस्‍य बने हुए हैं। ऐसी कई घटनाएं हैं, जिनमें लोगों ने यह दावा किया है कि उन्‍होंने UFO को देखा। ऐसी ही एक घटना साल 1995 की है। अमेरिका की ‘वेस्ट फ्लाइट 564', टेक्‍सास से लास वेगास जा रही थी। इसके दो पायलटों ने दावा किया था कि सफर के दौरान उनका सामना एक UFO से हुआ था। अब इतने साल बाद वैज्ञानिकों ने इस वाकये से पर्दा हटाया है। एस्‍ट्रोनॉमर्स ने कहा है कि वह ऑब्‍जेक्‍ट कोई UFO नहीं, बल्कि खगोलीय पिंड रहा होगा।   उस वाकये की बात करें, तो फ्लाइट में यात्रियों और केबिन क्रू के साथ कैप्टन यूजीन टॉलेफसन और उनके को-पायलट जॉन वालर मौजूद थे। उनके फ्लाइट अटेंडेंट ने आकाश में कुछ अजीब देखा। मिरर यूके की खबर के मुताबिक, विमान और UFO के बीच कोई बातचीत नहीं हुई थी, लेकिन चालक दल ने आसमान में एक अजीब रोशनी देखने की जानकारी दी। जॉन वालर ने इसके बारे में अधिक जानकारी चाही और न्यू मैक्सिको में एयर ट्रैफिक कंट्रोल को बताया।  वालर ने ATC से कहा कि हमें कुछ स्ट्रोब दिखे हैं, क्या आप हमें बता सकते हैं ...

Nasa के पूर्व साइंटिस्‍ट का दावा- अगले कुछ साल में इंसान को मिल जाएंगे एलियंस

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क्‍या पृथ्‍वी के बाहर भी जीवन मौजूद है? यह सवाल वर्षों से हमारे सामने बना हुआ है। इसी के साथ एक और प्रश्‍न सामने आता है कि क्‍या एलियंस हैं? अगर हैं तो उनका अस्तित्‍व कहां है और कब से है? वैज्ञानिक इन सवालों के जवाब खोजने में जुटे हैं। हालांकि उनके सामने अबतक कोई पुख्‍ता तथ्‍य नहीं आ पाया है। दुनिया में यह मानने वालों की कमी नहीं है कि पृथ्‍वी के बाहर भी जीवन है और एलियंस का वजूद है। ऐसा मानने वालों में नासा के एक पूर्व प्रमुख वैज्ञानिक भी शामिल हैं। एक टीवी इंटरव्‍यू में बीते दिनों उन्‍होंने कहा कि अगले कुछ साल में इंसान की मुलाकात एलियंस से होगी।     बीबीसी से बातचीत में जिम ग्रीन ने समझाया कि पृथ्वी के बाहर भी जीवन मौजूद है, इस विश्वास को व्यक्त करने के बाद इंसान वास्तव में आश्चर्यजनक खोज के करीब है। करीब 40 साल तक अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी में काम कर चुके जिम ने कहा, उन्‍हें उम्‍मीद है कि उनके जीवनकाल में एलियंस की खोज हो जाएगी। जिम ने कहा कि हम बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। अब हम यह जानते हैं कि हमारी आकाशगंगा में जितने ग्रह हैं, उससे भी कहीं अधिक तारे हैं। उन्होंने कहा कि उनमे...

वैज्ञानिकों ने खोजी नई तरकीब, ब्‍लैक होल की जोड़ी को समझना होगा और आसान

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तीन साल पहले एक ब्‍लैक होल की तस्‍वीर ने दुनिया को हैरान कर दिया था। इवेंट होराइजन टेलीस्कोप ने मेसियर 87 आकाशगंगा के केंद्र में स्थित उस ब्‍लैक होल की इमेज को कैप्‍चर किया था। इस तस्‍वीर में ब्‍लैक होल का वह जोड़ा किसी जलती हुई रिंग की तरह दिखाई दे रहा था, जिसके बीच में गहरा काला गड्ढा था। अब कोलंबिया यूनिवर्सिटी के दो रिसर्चर्स ने ऐसे ब्‍लैक होल के बारे में और समझने के लिए एक तरकीब का आविष्कार किया है। इसकी मदद से आने वाले समय में खगोलविद मेसियर 87 जैसे छोटे ब्लैक होल का अध्ययन करने में सक्षम हो सकते हैं। इस अप्रोच के सिर्फ दो क्राइटेरिया हैं। इस आविष्‍कार को शुरू करने के लिए विशायलकाय ब्लैक होल की एक जोड़ी होनी चाहिए। यह जोड़ी एक दूसरे के साइड में होनी चाहिए। उस पॉइंट पर जब एक ब्लैक होल दूसरे के सामने से गुजरता है, तब व्यक्ति को प्रकाश की तेज चमक देखने में काबिल होना चाहिए। यह स्‍टडी फिजिकल रिव्यू डी जर्नल में प्रकाशित हुई है। कोलंबिया में पोस्ट-डॉक्टरेट फेलो और कम्प्यूटेशनल एस्ट्रोफिजिक्स के फ्लैटिरॉन इंस्टीट्यूट के सेंटर और इस स्‍टडी के पहले लेखक ने कहा कि M87 ब्लैक होल की हा...

Captain Marvel 2 Casting Spoils Kree Scientist Role

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Unlike its potential companion Disney+ series, Secret Invasion , production on  The Marvels  has been kept under wraps, aside from some set photos leaking showing off a new costume for Iman Vellani's Kamala Khan. Outside of that costume, fans know little about the Captain Marvel sequel, but there was one small role that potentially leaked.  Last year, One Take News reported that Marvel Studios was looking for an actor in their early 30s to early 50s to play the role of  "Scientist Friend," who the outlet believed would appear in  The Marvels . There was a lot of speculation about who this "friend" could be, but it soon fell off the wayside until recently. ADVERTISEMENT The same outlet has recently found evidence of their previous scoop being correct with the Captain Marvel sequel planning to introduce an obscure and minor Marvel character stemming from the Kree. New Casting for Captain Marvel Sequel One Take News found evid...

वैज्ञानिकों ने खोजे अनोखे जुड़वां एस्‍टरॉयड, उम्र में हो सकते हैं सबसे छोटे

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एक अजीबोगरीब खोज के तहत वैज्ञानिकों को जुड़वां एस्‍टरॉयड (asteroid) मिले हैं। ये पृथ्वी के सबसे नए पड़ोसी हो सकते हैं। अनुमान है कि लगभग 6 लाख मील की दूरी पर ये एस्‍टरॉयड कुछ सदियों पहले अपने पैरंट एस्‍टरॉयड से अलग हुए। अगस्‍त 2019 में इन एस्‍टरॉयड को अलग-अलग संस्थाओं (entities) के रूप में खोजा गया था। हालांकि उसके बाद शोधकर्ताओं ने इनके परिक्रमा पैटर्न में समानता को देखा। एस्‍टरॉयड 2019 PR2 और 2019 QR6 ने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया जब वैज्ञानिकों ने इनके इतिहास को टटोला। साल 2005 से स्‍टोर ‘कैटालिना स्काई सर्वे डेटा' को देखते हुए वैज्ञानिकों को इन एस्‍टरॉयड के बारे में एक दिलचस्प संभावना दिखाई दी। एडिशनल ऑब्‍जर्वेशन ने वैज्ञानिकों को इन एस्‍टरॉयड की पुरानी लोकेशन में जाने में मदद की। इसके बाद ऑर्बिटल कैलकुलेशन से यह निर्धारित किया गया कि अतीत में दो एस्‍टरॉयड सिर्फ एक इकाई थे। वैज्ञानिकों ने दो मॉडल का इस्तेमाल किया जिसके अनुसार, पैरंट एस्‍टरॉयड 230 और 420 साल पहले या 265 और 280 साल पहले टूट गया होगा। इसी वजह से ये दो एस्‍टरॉयड बन गए।  यह रिसर्च पेपर 2 फरवरी को रॉयल एस्ट्रो...

वैज्ञानिकों ने खोजा आलू के आकार का ग्रह, 22 घंटे में कर लेता है अपने सूर्य की परिक्रमा

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अब तक हम यही पढ़ते आए हैं कि ग्रह गोलाकार होते हैं। जिन ग्रहों के बारे में हम जानते हैं, वो सभी गोलाकार हैं। बृहस्‍पति ग्रह, जिसके चारों ओर कई रिंग्‍स हैं, वह भी एक ग्लोब की तरह दिखाई देता है। लेकिन क्या हमारे सौर मंडल के बाहर के ग्रहों समेत सभी ग्रहों का आकार गोलाकार है? एक नए रिसर्च पेपर के अनुसार, ऐसा नहीं है। कुछ ग्रह आलू की तरह भी दिखाई दे सकते हैं। रिसर्चर्स ने WASP-103b नाम के एक ग्रह की खोज की है, जो पृथ्वी से लगभग 1,500 प्रकाश वर्ष दूर है। इसके बारे में वैज्ञानिकों का कहना है कि इसका आकार आलू या रग्बी बॉल जैसा है। लेकिन यह ग्रह अजीब आकार का क्‍यों है? खगोलविदों का कहना है कि WASP-103b एक F-प्रकार के तारे के चारों ओर स्थित है। यह तारा हमारे सूर्य से बड़ा है। यह ग्रह भी बड़ा है। बृहस्पति से भी डेढ़ गुना है। ग्रह अपने तारे के नजदीक होने की वजह से आलू के आकार का है।  एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि WASP-103b अपने घरेलू तारे से सिर्फ 20,000 मील की दूरी पर स्थित है। इसकी तुलना में पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी लगभग 93 मिलियन मील है। पृ...

वैज्ञानिकों ने खोजा आलू के आकार का ग्रह, 22 घंटे में कर लेता है अपने सूर्य की परिक्रमा

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अब तक हम यही पढ़ते आए हैं कि ग्रह गोलाकार होते हैं। जिन ग्रहों के बारे में हम जानते हैं, वो सभी गोलाकार हैं। बृहस्‍पति ग्रह, जिसके चारों ओर कई रिंग्‍स हैं, वह भी एक ग्लोब की तरह दिखाई देता है। लेकिन क्या हमारे सौर मंडल के बाहर के ग्रहों समेत सभी ग्रहों का आकार गोलाकार है? एक नए रिसर्च पेपर के अनुसार, ऐसा नहीं है। कुछ ग्रह आलू की तरह भी दिखाई दे सकते हैं। रिसर्चर्स ने WASP-103b नाम के एक ग्रह की खोज की है, जो पृथ्वी से लगभग 1,500 प्रकाश वर्ष दूर है। इसके बारे में वैज्ञानिकों का कहना है कि इसका आकार आलू या रग्बी बॉल जैसा है। लेकिन यह ग्रह अजीब आकार का क्‍यों है? खगोलविदों का कहना है कि WASP-103b एक F-प्रकार के तारे के चारों ओर स्थित है। यह तारा हमारे सूर्य से बड़ा है। यह ग्रह भी बड़ा है। बृहस्पति से भी डेढ़ गुना है। ग्रह अपने तारे के नजदीक होने की वजह से आलू के आकार का है।  एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि WASP-103b अपने घरेलू तारे से सिर्फ 20,000 मील की दूरी पर स्थित है। इसकी तुलना में पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी लगभग 93 मिलियन मील है। पृ...

वैज्ञानिकों ने दी ट्रेनिंग, goldfish ने चलाई रोबोटिक कार

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सुनने में अजीब लगेगा, लेकिन गोल्‍डफ‍िश (goldfish) भी कार चला सकती है। अपने एक एक्‍सपेरिमेंट में वैज्ञानिकों ने एक गोल्‍डफ‍िश को रोबोटिक कार चलाना सिखाया है। यह प्रयोग गोल्‍डफ‍िश की नेव‍िगेशनल क्षमताओं को परखने और जानवरों के बिहेवियर की स्‍टडी करने की एक कोशिश थी। रोबोटिक कार को भी इसी मकसद के साथ डिजाइन किया गया था। इजरायल की बेन गुरियन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने इस कार को डिजाइन किया था। इस फ‍िश ऑपरेटेड व्‍हीकल (FOV) यानी कार के पहियों पर एक ट्रांसपैरंट आयताकार प्‍लेटफॉर्म था। इस प्‍लेटफॉर्म में गोल्‍डफ‍िश का वॉटर टैंक और कैमरा सिस्टम लगा था। यह मछली के मूवमेंट्स को रिकॉर्ड और ट्रांसलेट करता था। गोल्‍डफ‍िश के मूवमेंट्स के अनुसार ही गाड़ी के पहिए आगे-पीछे और साइडों में चलते थे। वैज्ञानिकों ने गोल्‍डफ‍िश के मूवमेंट्स को स्‍टडी किया। वैज्ञानिकों को उम्‍मीद है कि कार को उसके लक्ष्‍य तक पहुंचाने की गोल्‍डफ‍िश की काबिलियत जानवरों की नेविगेशनल क्षमता के महत्‍वपूर्ण गुणों को निर्धारित करेगी।  बिहेवियरल ब्रेन रिसर्च जर्नल (Behavioural Brain Research journal) में पिछले महीने यह स्‍टडी प...

NASA ने अधिक एनर्जी वाले ऑब्जेक्ट्स की स्टडी के लिए लॉन्च किया नया X-Ray टेलीस्कोप

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अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA के पास बहुत से पावरफुल टेलीस्कोप हैं जो वैज्ञानिकों की धरती से दूर के वातावरण को बेहतर तरीके से समझने में मदद करते हैं। NASA ने एक इमेजिंग X-ray पोलरिमेटरी एक्सप्लोरर (IXPE) कहा जाने वाला एक नया टेलीस्कोप लॉन्च किया है। इससे वैज्ञानिकों को ब्लैक होल के अंदर के वातावरण की बेहतर समझ मिल सकेगी। इसके साथ ही यह अंतरिक्ष में अधिक एनर्जी वाले ऑब्जेक्ट्स की जांच भी करेगा।  इस टेलीस्कोप की घोषणा सबसे पहले 2017 में की गई थी। यह पोलराइजेशन को समझने की क्षमता रखने वाला पहला X-ray टेलीस्कोप होगा। X-ray इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन से बनी हाई-एनर्जी लाइट वेव्स होती हैं। हम अपने आसपास जो लाइट देखते हैं वह अनपोलराइज्ड होती है, जिसका मतलब है कि वह इलेक्ट्रिक और मैग्नेटिक एनर्जी से बनती है जिसकी कोई विशेष दिशा नहीं होती। इसके विपरीत, पोलराइज्ड लाइट में इलेक्ट्रिक और मैग्नेटिक एनर्जी एक विशेष दिशा में जाती है। पोलराइज्ड लाइट महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मैग्नेटिक फील्ड्स और केमिकल मेकअप की जानकारी दे सकती है। NASA ने अमेरिका के SpaceX की ओर से डिवेलप किए गए Falcon 9 रॉकेट पर IXPE...