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चांद पर नाम भेज रहा है NASA, आप भी यहां कर सकते हैं रजिस्टर

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नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) ने बीते रविवार को सोशल मीडिया पर अपने फॉलोअर्स के लिए एक जबरदस्त ऑफर निकाला, जिसके बाद स्पेस टेक्नोलॉजी फैन्स को चौंका दिया। अमेरिकी स्पेस एजेंसी ने यूजर्स को Artemis I मिशन के जरिए लाखों लोगों का नाम चांद पर भेजने का फैसला लिया है, जिसके लिए रजिस्ट्रेशन भी चालू है। इस घोषणा के साथ ही ट्विटर पर कई मजेदार प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। NASA ने ट्विटर पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि 3 मिलियन (30 लाख) लोगों के नाम को Artemis I के साथ चांद पर ले जाया जाएगा। स्पेस एजेंसी ने लिखा, (अनुवादित) "आप अपना नाम चंद्रमा पर भेज सकते हैं। कैसे? अपना बोर्डिंग पास प्राप्त करने के लिए साइन अप करें और इस वर्ष #Artemis I पर चंद्रमा के चारों ओर उड़ने वाले लगभग 3 मिलियन "यात्रियों" में शामिल हों। " इस पोस्ट में एक वीडियो भी है, जिसमें चंद्रमा घूमता दिखाई दे रहा है।   Artemis I मिशन में 30 लाख लोगों के नामों को एक फ्लैश ड्राइव में स्टोर करके स्पेस में ले जाया जाएगा। आप अपने नाम को रजिस्टर कराने के लिए इस वेबसाइट पर जा सकते हैं और अपना नाम...

ये बायोसीमेंट कम कर देगा घर बनाने का खर्च, वीडियो में दिखाया गया बनाने का तरीका

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सिंगापुर में नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (NTU Singapore) के वैज्ञानिकों ने कचरे से बायोसीमेंट बनाने का एक तरीका खोजा है, जिससे यह साधारण सीमेंट के लिए एक ग्रीनर और अधिक टिकाऊ विकल्प बन गया है। बायोसीमेंट एक प्रकार का रिन्यूएबल सीमेंट है, जो हार्डनिंग रिएक्शन के लिए बैक्टीरिया का इस्तेमाल करके मिट्टी को एक ठोस ब्लॉक में बांधता है। बायोसीमेंट अब एनटीयू के वैज्ञानिकों द्वारा दो सामान्य वेस्ट मटेरियल - औद्योगिक कार्बाइड स्लज (कीचड़) और यूरिया (स्तनधारी मूत्र से निकला) का उपयोग करके बनाया गया है। उन्होंने यूरिया को कैल्शियम आयनों के साथ मिलाकर औद्योगिक कार्बाइड कीचड़ में एक कठोर सॉलिड बनाने के लिए एक विधि का आविष्कार किया है। अवक्षेप मिट्टी के कणों को एक साथ बांधता है और जब यह प्रतिक्रिया मिट्टी में होती है, तो उनके बीच गैप को भर देता है, जिसके कारण मिट्टी का एक कॉम्पैक्ट मास होता है। इससे एक बायोसीमेंट ब्लॉक बनता है, जो मजबूत होने के साथ-साथ लंबे समय तक चलने वाला और पानी के लिए अभेद्य होता है। यह रिसर्च Journal of Environmental Chemical Engineering में पब्लिश हुई था। रिसर्चर्स का ...

यूरोपीय संसद ने पेट्रोल और डीजल कारों पर प्रतिबंध लगाने के लिए मतदान किया

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First Published: June 13, 2022 | Last Updated:June 13, 2022 यूरोपीय संसद के सदस्यों ने हाल ही में 2035 तक नई पेट्रोल और डीजल कारों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के लिए मतदान किया। मुख्य बिंदु  यह मतदान एक संशोधन पर आयोजित किया गया था, जिसने 2035 के बाद नए वाहनों के माध्यम से कुछ ऑटो उत्सर्जन की अनुमति दी थी। इस संशोधन को संसद सदस्यों द्वारा अस्वीकार कर दिया गया था। यूरोपीय संघ विधानसभा ने अगले दशक के मध्य तक वाहन निर्माताओं को 100% कार्बन-डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कटौती करने की आवश्यकता के लिए स्ट्रासबर्ग, फ्रांस में मतदान किया। यह यूरोपीय संघ के 27 देशों में पेट्रोल या डीजल से चलने वाली नई कारों की बिक्री पर प्रतिबंध के समान होगा। ऐसा क्यों हुआ? यूरोप इलेक्ट्रिक वाहनों के तेजी से विकास द्वारा जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से जीवाश्म ईंधन बिक्री पर प्रतिबंध लगाना चाहता है। यूरोपीय संसद के सदस्यों को अभी भी यूरोप में 27 राष्ट्रीय सरकारों के मंत्रियों के साथ अंतिम कानून पर बातचीत करनी होगी। इस कानून का अंतिम स्वरूप 2022...

चांद पर जीवन की तलाश में चीन निकला एक कदम आगे, तैयार कर रहा खास सिस्टम!

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पृथ्वी के अलावा कहीं दूसरे ग्रह पर जीवन को संभव बनाया जा सकता है, इसे लेकर सालों से गहन शोध किया जा रहा है। धरती के अलावा किसी दूसरी दुनिया में रहने की बात जब आती है तो सबसे पहली संभावना चांद पर तलाशी जाती है। चांद ही पृथ्वी के नजदीक एक मात्र ऐसा उपग्रह है जहां पर मनुष्य इस कोशिश को हकीकत बनाने का सपना देखता आया है। चांद पर मनुष्य के रहने लायक वातावरण बनाने के लिए गहन शोध किए जा रहे हैं। इसमें जीवन की कुछ मूलभूत जरूरतें जैसे कि पानी, हवा और लम्बे वक्त चलने वाले ऊर्जा स्रोत आदि के बारे में अध्य्यन किया जा रहा है।  चीन के वैज्ञानिकों ने इसी संबंध में एक स्टडी की है जिसमें उन्होंने कहा है कि चांद की मिट्टी में ऐसे एक्टिव तत्व हैं जो कार्बन डाइऑक्साइड को ऑक्सीजन और ईंधन या ऊर्जा में बदल सकते हैं। चीन की ओर से पिछले साल चांद पर एक बेनाम मिशन भेजा गया था। यह स्टडी चांद पर से पिछले साल लाई गई उसी मिट्टी के नमूनों पर की गई है। Joule नाम के जर्नल में इस स्टडी को प्रकाशित भी किया गया है। अब शोधकर्ता इस बारे में जांच करने में लगे हुए हैं कि क्या चांद पर मौजूद मिट्टी मानव बस्ती बसाने के लिए उ...

रिसर्च में दावा- हमारी आकाशगंगा में मौजूद हैं एलियंस की 4 सभ्‍यताएं, पृथ्‍वी पर कर सकती हैं हमला

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एलियंस हमारी दुनिया के लिए हमेशा से ही बहस का विषय रहे हैं। वैज्ञानिक इनके वजूद को ना तो नकारते हैं, ना ही पुख्‍ता तौर पर इनके होने की पुष्टि करते हैं। हमारी आकाशगंगा जिसे मिल्‍की वे भी कहते हैं, उसमें ऐसे लाखों ग्रहों के होने का अनुमान है, जो रहने लायक हो सकते हैं। अब एक नई रिसर्च से पता चलता है कि ऐसे लगभग चार ग्रह दुष्‍ट एलियन सभ्‍यताओं को शरण दे सकते हैं। ये एलियंस पृथ्‍वी पर हमला कर सकते हैं। प्रीप्रिंट डेटाबेस arXiv में इस रिसर्च को पोस्‍ट किया गया है। हालांकि इस रिसर्च पेपर को अभी तक रिव्‍यू नहीं किया गया है, पर इससे सवाल पैदा होता है कि आखिर ऐसी कौन सी संभावनाएं हैं कि इंसान एक दिन दुश्‍मन एलियंस से संपर्क कर सकता है, जो हमारे ग्रह पर हमला करने की ताकत रखते हैं।  livescience ने अपनी रिपोर्ट में रिसर्च के हवाले से लिखा है कि ऐसा मुमकिन है। स्‍टडी के इकलौते लेखक अल्बर्टो कैबलेरो स्पेन में विगो यूनिवर्सिटी में iपीएचडी के छात्र हैं। कैबलेरो कोई खगोल भौतिकीविद् नहीं हैं, लेकिन उन्होंने वाव! (Wow!) सिग्नल पर एक अध्ययन प्रकाशित किया है। वाव सिग्‍नल के बारे में भी कहा जाता है कि इ...

कार्डियक अटैक के बाद हमारा हार्ट खुद कर सकता है अपना ‘इलाज’, नई स्‍टडी में दावा

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इंसान का शरीर ऐसे सिस्‍टम पर काम करता है, जिसमें वह खुद की देखभाल कर सकता है। वैज्ञानिक इस बात पर रिसर्च कर रहे हैं कि हार्ट अटैक के बाद शरीर खुद को कैसे रिपेयर करता है। वैज्ञानिकों का मकसद उस नजरिए को सामने लाना है, जो ज्‍यादा प्रभावी कार्डियोवैस्कुलर थेरेपी के बारे में बताएगा। फ‍िलहाल एक नई रिसर्च में यह पता चला है कि शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया (immune response) और लसीका प्रणाली (lymphatic system यह हमारे इम्‍युन सिस्‍टम का हिस्‍सा होता है) हृदय की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचने के बाद उसकी मरम्मत करने की क्षमता रखते हैं। इसमें मैक्रोफेज की अहम भूमिका होती है। यह ऐसी विशेष कोशिकाएं हैं, जो बैक्टीरिया को खत्म कर सकती हैं। रिसर्च में पता चला है कि दिल का दौरा पड़ने के बाद मैक्रोफेज यानी विशेष कोशिकाएं VEGFC नाम का एक खास प्रकार का प्रोटीन रिलीज करती हैं। ये विशेष कोशिकाएं पीडि़त व्‍यक्ति के शरीर में मृत ऊतक या टिशू को ‘खाने' के लिए उसके हार्ट में जाती हैं। जहां वह वीईजीएफसी पैदा करती हैं। यह हार्ट से जुड़े इलाज में शरीर की मदद करता है।  दिल को पूरी तरह से ठीक करने के लिए मृ...

छोटी आकाशगंगाओं को ‘निगल’ कर बड़ी हो रही यह गैलेक्‍सी! हबल टेलीस्‍कोप ने खींची तस्‍वीर

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पिछले 30 साल से अंतरिक्ष में तैनात हबल स्‍पेस टेलीस्‍कोप (Hubble Space Telescope) हमें इस ब्रह्मांड की बारीकियों से रू-ब-रू करवा रहा है। कोई सप्‍ताह ऐसा नहीं होता, जब हमें इस टेलीस्‍कोप के द्वारा खींची गई इमेज देखने को ना मिले। अब इसने एक विशाल आकाशगंगा के शानदार नजारे को कैद किया है। यह हमारी आकाशगंगा- ‘मिल्‍की वे' से भी दोगुनी बड़ी है। यह एक अंडाकार आकाशगंगा है, जिसे NGC 474 के नाम से जाना जाता है, जो पृथ्वी से लगभग 100 मिलियन प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है। हबल टेलीस्‍कोप ने इस आकाशगंगा के सेंट्रल रीजन को नजदीक से कैप्‍चर किया, जिससे इसके आकार का पता चलता है। हालांकि इसकी एक और खूबी है।  अपने सर्वे के दौरान हबल टेलीस्‍कोप के एडवांस्‍ड कैमरों ने NGC 474 की नई इमेज को कैप्‍चर किया। इसके लिए टेलीस्‍कोप के वाइड फील्ड और प्लैनेटरी कैमरा 2 और वाइड फील्ड कैमरा 3 के डेटा का भी इस्‍तेमाल किया गया।  नासा के अनुसार, NGC 474, हमारी आकाशगंगा यानी मिल्की वे से 2.5 गुना बड़ी है। लेकिन इसका बड़ा आकार ही इस आकाशगंगा की इकलौती खूबी नहीं है। हबल टेलीस्‍कोप के हालिया ऑब्‍जर्वेशंस से पता चलता ह...

54 लाख रुपये कमाने का ऑफर दे रहा है NASA, यहां करे रजिस्ट्रेशन

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NASA ने एक नया चैलेंज लॉन्च किया है, जिसमें अमेरिकी स्पेस एसेंजी मंगल ग्रह का सिमुलेशन तैयार करने वाले को 70,000 डॉलर (करीब 54 लाख रुपये) का इनाम देगी। इस सिमुलेशन को तैयार करवाने का कारण अंतरिक्ष यात्रियों को मार्स (Mars) में हर एक कथिन परिस्थितियों के लिए तैयार करना है। इस चैलेंज को MarsXR नाम दिया गया है, जिसमें भाग लेने वाले व्यक्ति को मार्स का एक्सप्लोर किया जा चुका लगभग 400 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र का सिमुलेशन बनाना होगा। एक आधिकारिक बयान में NASA ने कहा है कि एजेंसी ने इमर्सिव टेक्नोलॉजी डेवलपर एपिक गेम्स (Epic Games) के साथ "मंगल पर आने वाले अनुभवों और स्थितियों के लिए अंतरिक्ष यात्रियों को तैयार करने में मदद करने के लिए अनुसंधान, विकास और परीक्षण वातावरण" बनाने के लिए भागीदारी की है। इस चैलेंज को जीतने वाले को NASA $70,000 का इनाम देगी। इस चैलेंज में भाग लेने की आखिरी तारीख  26 जुलाई है। भाग लेने के लिए इस वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करना होगा।    NASA MarsXR चैलेंज के लिए डेवलपर को Epic Games के Unreal Engine 5 का इस्तेमाल करते हुए नए Mars XR Operation Support System...

नई तकनीक पर काम कर रहे साइंटिस्‍ट, 100 प्रकाश वर्ष दूर स्थित ‘ग्रह’ भी साफ दिखाई देगा

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ऐसे ग्रह जो सूर्य के अलावा अन्य तारों की परिक्रमा करते हैं, एक्सोप्लैनेट कहलाते हैं। पहले एक्सोप्लैनेट की खोज साल 1992 में हुई थी। तब से खगोलविदों ने ऐसे लगभग 5,000 ग्रहों की खोज की है, जो दूसरे तारों की परिक्रमा कर रहे हैं। जब भी कोई नया एक्सोप्लैनेट खोजा जाता है, तब उसके बारे में बहुत कम जानकारी मिलती है। सिर्फ इतना ही कि एक एक्सोप्लैनेट मौजूद है और उसकी कुछ खूबियां हैं। बाकी सब एक रहस्‍य बना रहता है। इस इशू को सॉल्‍व करने के लिए स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के एस्‍ट्रोफ‍िजिसिस्‍ट एक नई कॉन्‍सेप्‍चुअल इमेजिंग तकनीक पर काम कर रहे हैं। यह अबतक इस्‍तेमाल में आ रही सबसे मजबूत इमेजिंग तकनीक की तुलना में 1,000 गुना ज्‍यादा सटीक होगी।  ऐसा लगता है कि रिसर्चर्स ने यह पता लगा लिया है कि हमारे सौर मंडल के बाहर के ग्रहों को देखने के लिए सौर गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग का इस्‍तेमाल कैसे किया जाए। वैज्ञानिक जिस तकनीक को डेवलप कर रहे हैं, वह मौजूदा तकनीक के मुकाबले ज्‍यादा एडवांस्‍ड हो सकती है।  एक्सोप्लैनेट से रोशनी को बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक सूर्य के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र का उपयोग कर सकते हैं। इसके लिए ...

अब एक साथ दो डिग्री कर सकेंगे छात्र : UGC

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First Published: April 14, 2022 | Last Updated:April 14, 2022 विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grants Commission) द्वारा देश के छात्रों को एक साथ दो डिग्री करने की अनुमति दी गई है। 2022-23 के शैक्षणिक सत्र से, छात्र इन दोहरी डिग्री कार्यक्रमों के लिए आवेदन करना शुरू कर सकते हैं। दोनों डिग्री या तो अलग-अलग विश्वविद्यालयों से या एक ही विश्वविद्यालय से प्राप्त की जा सकती हैं। मुख्य बिंदु  देश के छात्रों को दो मास्टर कार्यक्रम, एक डिप्लोमा और एक यूजी कार्यक्रम, या दो स्नातक कार्यक्रम चुनने की अनुमति होगी। छात्र PG और UG प्रोग्राम के लिए भी आवेदन कर सकते हैं। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि छात्रों की कक्षाओं के समय में कोई टकराव न हो। दो पूर्णकालिक डिग्री कार्यक्रमों के संबंध में दिशानिर्देश कार्यक्रमों को केवल उन्हीं संस्थानों में चलाया जाना चाहिए जो वैधानिक परिषद या UGC या भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त हैं। एक छात्र दोनों कार्यक्रमों को एक भौतिक मोड में और दूसरा ऑनलाइन या मुक्त और दूरस्थ शिक्षा मोड में कर सकता है। इसके अलावा, छात्र एक साथ दो...

रूस-यूक्रेन युद्ध सेमीकंडक्टर आपूर्ति को कैसे प्रभावित कर रहा है?

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First Published: March 16, 2022 | Last Updated:March 16, 2022 वैश्विक सेमीकंडक्टर चिप आपूर्ति श्रृंखला जो पहले COVID-19 महामारी की चपेट में थी, रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण फिर से संकट का सामना कर सकती है। रूस और यूक्रेन दोनों वैश्विक अर्धचालक आपूर्ति श्रृंखला में योगदान करते हैं। यूक्रेन का योगदान यूक्रेन नियॉन गैस के दुनिया के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ताओं में से एक है, जिसका उपयोग चिप निर्माण प्रक्रिया में किया जाता है। इस प्रकार, सेमीकंडक्टर के निर्माण के लिए नियॉन गैस का उपयोग महत्वपूर्ण है। 1991 में USSR के विघटन के बाद, यूक्रेन में नियॉन गैस का उत्पादन बढ़ा है। नियॉन गैस इस्पात उत्पादन का उपोत्पाद (byproduct) है। यह स्टील के निर्माण के दौरान निकलने वाली गैसों के निस्पंदन द्वारा निर्मित होता है। रूस का योगदान रूस पैलेडियम (Palladium) का दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक है और रूस पर मौजूदा प्रतिबंध और निर्यात नियंत्रण पैलेडियम की वैश्विक आपूर्ति को प्रभावित करेगा। पैलेडियम अपनी चालकता और गैर-संक्षारक क्षमता के लिए जाना जाता है और इस प्रकार सेमीकंडक्टर उद्योग...

वैज्ञानिकों ने खोजा आलू के आकार का ग्रह, 22 घंटे में कर लेता है अपने सूर्य की परिक्रमा

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अब तक हम यही पढ़ते आए हैं कि ग्रह गोलाकार होते हैं। जिन ग्रहों के बारे में हम जानते हैं, वो सभी गोलाकार हैं। बृहस्‍पति ग्रह, जिसके चारों ओर कई रिंग्‍स हैं, वह भी एक ग्लोब की तरह दिखाई देता है। लेकिन क्या हमारे सौर मंडल के बाहर के ग्रहों समेत सभी ग्रहों का आकार गोलाकार है? एक नए रिसर्च पेपर के अनुसार, ऐसा नहीं है। कुछ ग्रह आलू की तरह भी दिखाई दे सकते हैं। रिसर्चर्स ने WASP-103b नाम के एक ग्रह की खोज की है, जो पृथ्वी से लगभग 1,500 प्रकाश वर्ष दूर है। इसके बारे में वैज्ञानिकों का कहना है कि इसका आकार आलू या रग्बी बॉल जैसा है। लेकिन यह ग्रह अजीब आकार का क्‍यों है? खगोलविदों का कहना है कि WASP-103b एक F-प्रकार के तारे के चारों ओर स्थित है। यह तारा हमारे सूर्य से बड़ा है। यह ग्रह भी बड़ा है। बृहस्पति से भी डेढ़ गुना है। ग्रह अपने तारे के नजदीक होने की वजह से आलू के आकार का है।  एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि WASP-103b अपने घरेलू तारे से सिर्फ 20,000 मील की दूरी पर स्थित है। इसकी तुलना में पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी लगभग 93 मिलियन मील है। पृ...

वैज्ञानिकों ने खोजा आलू के आकार का ग्रह, 22 घंटे में कर लेता है अपने सूर्य की परिक्रमा

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अब तक हम यही पढ़ते आए हैं कि ग्रह गोलाकार होते हैं। जिन ग्रहों के बारे में हम जानते हैं, वो सभी गोलाकार हैं। बृहस्‍पति ग्रह, जिसके चारों ओर कई रिंग्‍स हैं, वह भी एक ग्लोब की तरह दिखाई देता है। लेकिन क्या हमारे सौर मंडल के बाहर के ग्रहों समेत सभी ग्रहों का आकार गोलाकार है? एक नए रिसर्च पेपर के अनुसार, ऐसा नहीं है। कुछ ग्रह आलू की तरह भी दिखाई दे सकते हैं। रिसर्चर्स ने WASP-103b नाम के एक ग्रह की खोज की है, जो पृथ्वी से लगभग 1,500 प्रकाश वर्ष दूर है। इसके बारे में वैज्ञानिकों का कहना है कि इसका आकार आलू या रग्बी बॉल जैसा है। लेकिन यह ग्रह अजीब आकार का क्‍यों है? खगोलविदों का कहना है कि WASP-103b एक F-प्रकार के तारे के चारों ओर स्थित है। यह तारा हमारे सूर्य से बड़ा है। यह ग्रह भी बड़ा है। बृहस्पति से भी डेढ़ गुना है। ग्रह अपने तारे के नजदीक होने की वजह से आलू के आकार का है।  एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि WASP-103b अपने घरेलू तारे से सिर्फ 20,000 मील की दूरी पर स्थित है। इसकी तुलना में पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी लगभग 93 मिलियन मील है। पृ...

वैज्ञानिकों ने दी ट्रेनिंग, goldfish ने चलाई रोबोटिक कार

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सुनने में अजीब लगेगा, लेकिन गोल्‍डफ‍िश (goldfish) भी कार चला सकती है। अपने एक एक्‍सपेरिमेंट में वैज्ञानिकों ने एक गोल्‍डफ‍िश को रोबोटिक कार चलाना सिखाया है। यह प्रयोग गोल्‍डफ‍िश की नेव‍िगेशनल क्षमताओं को परखने और जानवरों के बिहेवियर की स्‍टडी करने की एक कोशिश थी। रोबोटिक कार को भी इसी मकसद के साथ डिजाइन किया गया था। इजरायल की बेन गुरियन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने इस कार को डिजाइन किया था। इस फ‍िश ऑपरेटेड व्‍हीकल (FOV) यानी कार के पहियों पर एक ट्रांसपैरंट आयताकार प्‍लेटफॉर्म था। इस प्‍लेटफॉर्म में गोल्‍डफ‍िश का वॉटर टैंक और कैमरा सिस्टम लगा था। यह मछली के मूवमेंट्स को रिकॉर्ड और ट्रांसलेट करता था। गोल्‍डफ‍िश के मूवमेंट्स के अनुसार ही गाड़ी के पहिए आगे-पीछे और साइडों में चलते थे। वैज्ञानिकों ने गोल्‍डफ‍िश के मूवमेंट्स को स्‍टडी किया। वैज्ञानिकों को उम्‍मीद है कि कार को उसके लक्ष्‍य तक पहुंचाने की गोल्‍डफ‍िश की काबिलियत जानवरों की नेविगेशनल क्षमता के महत्‍वपूर्ण गुणों को निर्धारित करेगी।  बिहेवियरल ब्रेन रिसर्च जर्नल (Behavioural Brain Research journal) में पिछले महीने यह स्‍टडी प...