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29 मई : अंतर्राष्ट्रीय एवरेस्ट दिवस (International Everest Day)

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First Published: May 29, 2022 | Last Updated:May 29, 2022 अंतर्राष्ट्रीय एवरेस्ट दिवस (International Everest Day) हर साल 29 मई को मनाया जाता है। यह दिन काठमांडू, नेपाल और एवरेस्ट क्षेत्र में जुलूसों, स्मारक कार्यक्रमों और विशेष कार्यक्रमों के साथ मनाया जाता है। पृष्ठभूमि यह दिन हर साल माउंट की पहली चढ़ाई की याद में मनाया जाता है। 29 मई 1953 को एवरेस्ट की चढ़ाई न्यूजीलैंड के सर एडमंड हिलेरी (Sir Edmund Hillary) और नेपाल के तेनजिंग नोर्गे शेरपा (Tenzing Norgay Sherpa) ने की, जो यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले इंसान बने तय। 2008 में, नेपाल सरकार ने उस दिन को अंतर्राष्ट्रीय एवरेस्ट दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया था। माउंट एवरेस्ट यह समुद्र तल से दुनिया का सबसे ऊंचा पर्वत है जिसकी ऊंचाई 8,848 मीटर है। इसे नेपाली में सागरमाथा (Sagarmatha) और तिब्बती में चोमोलुंगमा (Chomolungma) के नाम से जाना जाता है । 1830 से 1843 तक भारत के सर्वेयर जनरल सर जॉर्ज एवरेस्ट को श्रद्धांजलि के रूप में पहाड़ को ‘एवरेस्ट’ के रूप में नामित किया गया था। Categories: ...

चीन ने माउंट एवरेस्ट के ऊपर उड़ाया एयरशिप और बना दिया वर्ल्ड रिकॉर्ड, जानें क्या था मकसद?

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चीन ने वायुमंडलीय संरचना से संबंधित डेटा और सतह से वाटर वैपर ट्रांस्पोर्टिंग प्रोसेस के बारे में अधिक जानकारी जुटाने और उसका अध्ययन करने के लिए रिकॉर्ड ऊंचाई के साथ माउंट एवरेस्ट पर एक एयरशिप उड़ाया है। मीडिया रिपोर्ट्स से जानकारी मिली है कि यह एयरशिप माउंट एवरेस्ट (Mount Everest) से 9,032 मीटर ऊपर उड़ान भरी। बता दें कि माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई 8,849 मीटर है। चीन के इंटरनेशनल TV चैनल CGTN के अनुसार, चीन के एयरशिप ने माउंट एवरेस्ट के ऊपर 30 मीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से उड़ान भरी। यह उड़ान दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर 4,300 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक बेस कैंप से उड़ान भरी गई। इस एयरशिप का नाम Jimu No. 1 बताया जा रहा है, जो 2.625 टन वजनी है और इसका वॉल्यूम 9,060 क्यूबिक मीटर है। इसके नीचे जुड़े वाहन का वजन 90 टन है। मीडिया चैनल की रिपोर्ट के अनुसार, एयरशिप का इस्तेमाल मुख्य रूप से वातावरण संरचना डेटा रिकॉर्ड करने के लिए किया जाता है, जिसमें पर्यावरण में मौजूद ब्लैक कार्बन, धूल, कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन की जानकारी मिल सके। वैज्ञानिक सतह से 9,000 मीटर की ऊंचाई तक वाटर वैपर के ट्रांस्पोर...

माउंट एवरेस्ट पर सबसे ऊंचा ग्लेशियर तेज़ी से पिघल रहा है : अध्ययन

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First Published: February 9, 2022 | Last Updated:February 9, 2022 हाल ही में वैज्ञानिकों ने पाया कि दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर सबसे ऊंचा ग्लेशियर तेजी से पिघल रहा है। यह ग्लेशियर साउथ कोल ग्लेशियर (South Col Glacier) है और पिछले 25 वर्षों में यह ग्लेशियर 54 मीटर मोटाई खो चुका है। मुख्य बिंदु  साउथ कोल ग्लेशियर 7,906 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह ग्लेशियर तेजी से पतला हो रहा है। इस ग्लेशियर के पिघलने को प्रेरित करने वाले प्रमुख जलवायु कारक तेज हवाएं और गर्म तापमान हैं। 1990 से 2020 के बीच जिस बर्फ को बनने में 2000 साल लगे, वो पिघल चुकी थी। ग्लेशियर पर बर्फ की परत मिट गई है। इसने कुछ क्षेत्रों में अंतर्निहित काली बर्फ को उजागर कर दिया है। इससे पिघलन और तेज हो रही है। काली बर्फ, पर्वत की सतह पर परत है। यदि काली बर्फ पिघलती है, तो पर्वत सूर्य के संपर्क में आ जाता है। पर्वत बर्फ की तुलना में अधिक समय तक अधिक ताप धारण करता है। इससे पिघलने में और तेजी आएगी। इस क्षेत्र की जलवायु स्थिर है। क्षेत्र की जलवायु परिस्थितियों में कोई परिवर्तन नहीं हुआ ह...