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आज पृथ्वी के बेहद करीब से गुजरेगा विशाल एस्ट्रॉयड, NASA को सता रही है चिंता

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190 फीट चौड़ा एक एस्टेरॉयड जल्द ही पृथ्वी के पास आने वाला है और NASA ने इसके आगमन की घोषणा कर दी है। आपको बता दें, यह एस्टेरॉयड रोम में स्थित कोलोसियम (157 फीट) से बड़ा है। अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार, बुधवार, 8 जून को एस्टेरॉयड हमारे ग्रह के सबसे करीब पहुंच जाएगा। एस्टेरॉयड का पृथ्वी के करीब से गुजरना असामान्य नहीं है। इससे पहले सोमवार को 160 फीट लंबा एक एस्टेरॉयड पृथ्वी के करीब पहुंच गया था। हालांकि, अपकमिंग एस्टेरॉयड थोड़ी चिंता बढ़ा रहा है। बुधवार को आने पर इस बड़े एस्टेरॉयड का हमारे ग्रह पर कुछ प्रभाव पड़ सकता है। NASA ने एस्टेरॉयड 2022 KV1 को 'नियर-अर्थ ऑब्जेक्ट' (NEO) के रूप में लेबल किया है। एस्टेरॉयड की यह कैटेगरी पृथ्वी के लिए खतरा पैदा कर सकती है और नासा द्वारा लगातार इसपर निगरानी रखी जा रही है। पृथ्वी के लिए एस्टेरॉयड का निकटतम फ्लाईबाई 2,660,000 मील/घंटा की दूरी पर होगा। नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी ने एस्टेरॉयड के बारे में अधिक जानकारी का खुलासा किया है। जैसा कि नाम से पता चलता है, इस एस्टेरॉयड को पहली बार 2022 में खोजा गया था। NASA की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी...

ब्‍लू व्‍हेल से भी 3 गुना बड़ा एस्‍टरॉयड आ रहा हमारे करीब, 6 जून को होगा ‘सामना’

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एस्‍टरॉयड जिज्ञासा जगाते हैं, जब ये पृथ्‍वी के पास से गुजरते हैं। कुछ ऐसा ही फ‍िर होने जा रहा है। नासा के अनुसार, ब्लू व्हेल से भी तीन गुना बड़ा एक एस्‍टरॉयड सोमवार को 26,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्‍वी के ऊपर से गुजरेगा। रिपोर्टों के अनुसार, 2021 GT2 नाम का यह एस्‍टरॉयड हमारी पृथ्‍वी से 35 लाख किलोमीटर की दूरी से पास होगा। यह पृथ्‍वी और चंद्रमा के बीच की औसत दूरी का 10 गुना है। इस हिसाब से यह माना जा सकता है कि यह एक सुरक्षित सफर होगा, जिसका पृथ्‍वी पर कोई असर दिखने की उम्‍मीद नहीं है।   हाल ही में एक और एस्‍टरॉयड- 7335 (1989 JA) भी पृथ्‍वी के करीब से गुजरा था। इसे संभावित रूप से खतरनाक की कैटिगरी में रखा गया था। यह इस साल का अबतक का सबसे बड़ा एस्‍टरॉयड था, जिसने हमारी पृथ्‍वी के पास से सफर किया।   बात करें एस्‍टरॉयड 2021 GT2 की, तो इस अंतरिक्ष चट्टान का पता पिछले साल लगा था। अनुमान है कि इसका आकार 121 से 272 फीट के बीच है। आसानी से समझने के लिए इसकी लंबाई एक ब्लू व्हेल की लंबाई से तीन गुना तक ज्‍यादा हो सकती है। क्‍योंकि यह साइज में बहुत बड़ा नहीं है, इसीलिए इसे पृथ...

कभी देखा है सूर्य को इतने करीब से? बुध ग्रह की कक्षा में जाकर 500 डिग्री तापमान में खींची गईं तस्‍वीरें

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यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) ने साल 2020 में अपना सोलर ऑर्बिटर अंतरिक्ष में भेजा था। हाल ही में इसने सूर्य के रिकॉर्ड करीब पहुंचकर हैरान करने वाली तस्‍वीरें खींची हैं। रिपोर्टों के अनुसार, 26 मार्च को ESA का सोलर ऑर्बिटर सूर्य के सबसे नजदीकी ग्रह बुध (Mercury) की कक्षा में पहुंचा। इस तरह की पहुंच को पेरिहेलियन (perihelion) के रूप में जाना जाता है, जिसमें कोई ग्रह सूर्य के सबसे करीब होता है। हालांकि अंतरिक्ष यान को पेरिहेलियन तक पहुंचने के लिए कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इनमें सबसे बड़ी चुनौती भीषण गर्मी की थी। सोलर ऑर्बिटर जब सूर्य के रिकॉर्ड करीब पहुंचा तो उसे 500 डिग्री सेल्सियस तक तापमान का सामना करना पड़ा। इस दौरान हीट शील्ड ने उसे बचाकर रखा।  उम्मीद है कि फ्यूचर में सोलर ऑर्बिटर सूर्य के और करीब जाएगा और उसे ज्‍यादा तापमान का सामना करना पड़ेगा। इस कोशिश का सबसे बड़ा फायदा यह है कि हमें सूर्य का वह रूप देखने को मिला है, जो आज से पहले कभी नहीं देखा गया। सूर्य के रिकॉर्ड करीब पहुंचकर ESA के ऑर्बिटर ने पावरफुल फ्लेयर्स, सौर ध्रुवों के शानदार दृश्य और एक रहस्यमयी सौर 'हे...

सूर्य को इतने करीब से देखा है? आज देख लीजिए

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दुनियाभर की एजेंसियां सूर्य से जुड़े रहस्‍यों का पता लगाने के लिए उसकी स्‍टडी कर रही हैं। इससे सोलर साइंस में नई रुचि जगी है। इस स्‍टडी में US नेशनल साइंस फाउंडेशन (NSF) का इनौये सोलर टेलीस्कोप (Inouye Solar Telescope) खगोलविदों की मदद कर रहा है। दुनिया के इस सबसे बड़े टेलीस्‍कोप ने हाल ही में अपने पहले आब्‍जर्वेशन को शुरू किया है, जिसे NSF ने ट्विटर पर शेयर किया है। इसमें सूर्य की नई सनस्‍पॉट इमेज की जानकारी दी गई है। हवाई में स्थित इनौये टेलीस्कोप को 25 साल से ज्‍यादा समय से तैयार किया जा रहा था। अब इसके जरिए सूर्य को समझने के तरीके में क्रांति लाई जा सकेगी।  सूर्य का सौर क्षेत्र जिसे कोरोना भी कहा जाता है, उसे समझने में वैज्ञानिकों की काफी दिलचस्‍पी है। वहां कई सौर गतिविधियां होती हैं। वैज्ञानिक यह भी समझना चाहते हैं कि सूर्य के इस क्षेत्र में चार्ज पार्टिकल्‍स का प्रवाह अचानक से क्‍यों तेज हो जाता है। इसमें वैज्ञानिकों की दिलचस्‍पी कोरोनल मास इजेक्शन (CME) की वजह से भी है, जिसका असर पृथ्‍वी तक हो सकता है। इस इजेक्‍शन की वजह से पृथ्‍वी पर बिजली ग्रिड, संचार नेटवर्क और कई उपग्रह...

पृथ्वी से 200 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर करीब आईं दो आकाशगंगाएं, ऐसा है नजारा

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नासा (NASA) के हबल स्पेस टेलीस्कोप ने पृथ्वी से लगभग 200 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर एक-दूसरे से इंटरेक्‍ट करने वालीं दो आकाशगंगाओं को कैमरे में कैद किया है। यह ‘पेगासस तारामंडल' में स्थित हैं। अपने इंस्टाग्राम पेज पर शेयर की गई इमेज में नासा ने एक बड़ी चक्राकार आकाशगंगा (NGC 7469) और इसके छोटे साथी (IC 5283) को दिखाया है। ‘NGC 7469' आकाशगंगा काफी बड़ी है। यह एक विशाल ब्‍लैक होल और तारों के समूह की चमकदार रिंग को भी रिप्रजेंट करती है।  वैसे एकसाथ इन आकाशगंगाओं को ‘Arp 298' कहा जाता है। यह नाम इन्‍हें खगोलविद् ‘हाल्टन Arp' के नाम से मिला है। उन्‍होंने अजीबोगरीब आकाशगंगाओं की एक लिस्‍ट बनाई है, जिसमें ‘Arp 298' भी शामिल है। इसे एटलस कहा जाता है। एटलस में अजीबोगरीब और अद्भुत आकाशगंगाओं की एक गैलरी है। इन सभी की संरचनाएं काफी अलग हैं। नासा ने बताया है कि Arp 298 में जो दो आकाशगंगाएं आपस में इंटरेक्‍ट कर रही हैं, उनमें से NGC 7469 आकाशगंगा बड़ी है। इसके पास विशाल ब्‍लैक होल और चमकदार रिंग वाले तारों का एक समूह भी है।  इस तरह की आकाशगंगाओं का अध्ययन वैज्ञानिक यह समझने के ...