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पूर्णिमा पर नजर आया ‘स्‍ट्रॉबेरी मून’, देखें ये शानदार तस्‍वीरें, आपको भी पसंद आएंगी!

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भारत समेत दुनियाभर के देशों में मंगलवार को सुपरमून ने आसमान को रोशन किया। हमारे लिए यह पूर्णिमा का चंद्रमा था, जबकि कई देशों में इसे सुपरमून, स्‍ट्रॉबेरी मून और यहां तक कि हनीमून भी कहा जाता है। यह इस साल का पहला सुपरमून था, जब‍ चंद्रमा, पृथ्‍वी के चारों ओर अपनी कक्षा के सबसे नजदीकी पॉइंट पर आया। इस वजह से पूर्णिमा का चांद काफी बड़ा और हल्‍का लाल रंग लिए हुए दिखाई दे रहा था। 14 जून को शाम 5.22 बजे से इसे देखा गया और लोगों ने सोशल मीडिया पर तस्‍वीरें शेयर कीं।  नासा के अनुसार, मंगलवार को चंद्रमा, पृथ्वी के चारों ओर अपनी कक्षा में निकटतम बिंदु पर था। इसे पेरिगी (perigee) कहा जाता है। इसी वजह से चंद्रमा ‘सुपरमून' जैसा दिखाई दिया। इस दौरान चंद्रमा का आकार बड़ा और चमकीला नजर आया। देश के कई राज्‍यों में आसमान साफ होने पर लोगों ने इसका दीदार किया।  सुपरमून की इस प्रक्रिया में पृथ्‍वी और चंद्रमा के बीच की दूरी करीब 26 हजार किलोमीटर कम हो गई थी। इसी वजह से चांद का यह आकार दिखाई दिया। मंगलवार की पूर्णिमा का चंद्रमा बाकी महीनों की पूर्णिमा के मुकाबले 10 फीसदी ज्‍यादा रोशन दिखाई दिया।   जू...

Nasa ने खोज निकाला ‘नर्क’! जल्‍द नजर आएगी जलती दुनिया की पहली झलक

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अगले कुछ हफ्तों में दुनिया दो ऐसे ग्रहों को देख सकती है, जो कहने के लिए तो ‘सुपर अर्थ' हैं, पर किसी ‘नर्क' से कम नहीं हैं। अंतरिक्ष में तैनात दुनिया का सबसे बड़ा टेलीस्‍कोप- जेम्‍स वेब टेलीस्‍कोप इन ग्रहों को सामने ला सकता है। ये दोनों ‘सुपर अर्थ' हमसे 50 प्रकाश वर्ष दूर हैं। इनमें से एक ग्रह का नाम है ‘55 कैनरी ई' (55 Cancri e)। यह ग्रह अपने सूर्य के इतने करीब से चक्‍कर लगाता है कि इसकी सतह बेहद गर्म है। इतनी गर्म की आप इसे आग का गोला भी समझ सकते हैं।   रिपोर्टों के अनुसार, ‘55 कैनरी ई' अपने तारे से 15 लाख मील से भी कम दूरी पर स्थित है। नासा के मुताबिक, यह दूरी हमारे सूर्य और बुध ग्रह के बीच की दूरी का भी 1/25वां भाग है। इससे ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह ग्रह कितना गर्म होगा। माना जाता है कि यह ग्रह गर्म लावा के सागरों से ढका हुआ है। इसकी सतह का तापमान बेहिसाब हो सकता है, जो बुध ग्रह के तापमान से भी कई गुना ज्‍यादा हो सकता है।  सोचिए अगर पृथ्‍वी अपने सूर्य के इतने करीब होती, जिसमें एक साल का समय कुछ घंटों में ही पूरा हो जाता। इतनी गर्म होती कि महासागर उबल र...

लाखों किलोमीटर दूर तारों का सफर बिना स्‍पेसशिप के करेगा इंसान, यह तरीका आएगा काम!

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अगले 5 अरब साल में क्या होगा, जब सूर्य एक लाल ‘दानव' में बदल जाएगा यानी बहुत बड़ा और गर्म हो जाएगा व पृथ्वी को खा जाएगा? वैज्ञानिक लंबे समय से इस सवाल से जूझ रहे हैं। क्या यह घटना ब्रह्मांड से मानव जाति के खत्‍म होने की वजह बनेगी? क्या इस विनाश से प्रजातियों को बचाने का कोई तरीका है? इसका जवाब है एक ऐसे ग्रह की इंटरस्टेलर यात्रा जो मनुष्यों के लिए अगला घर हो सकता है। यह मानव जाति को बचाने का काल्पनिक तरीका है, लेकिन क्‍या ऐसा हकीकत में मुमकिन है? अगर हमें ऐसा कोई ग्रह मिल भी जाए, तो अंतरिक्ष यान से वहां तक पहुंचने में सैकड़ों और हजारों साल लग सकते हैं।  इसका मतलब है कि इंसान को पृथ्‍वी से बाहर अपना नया घर खोजने में कई पीढ़ियां लग जाएंगी। हालांकि एक रिसर्च पेपर से पता चलता है कि अंतरिक्ष यान के बिना भी इंटरस्टेलर यात्रा हो सकती है। अंतरतारकीय अंतरिक्ष उड़ान (interstellar travel) दो तारों या प्‍लेनेटरी सिस्‍टम के बीच अंतरिक्ष उड़ान द्वारा की गई यात्रा को कहते हैं। फि‍लहाल यह पूरी तरह काल्पनिक है। ह्यूस्टन कम्युनिटी कॉलेज में फ‍िजिक्‍स और एस्‍ट्रोनॉमी की प्रोफेसर इरिना रोमानोव्सक...

मंगल से सैंपल लेकर आएगा लॉकहीड मार्टिन का रॉकेट, Nasa ने दिया कॉन्‍ट्रैक्‍ट

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अमेरिकी स्‍पेस एजेंसी नासा (NASA) ने बताया है कि लॉकहीड मार्टिन (Lockheed Martin) के स्‍पेस डिविजन ने रॉकेट बनाने के लिए उसका कॉन्‍ट्रैक्‍ट हासिल किया है। यह रॉकेट 2030 के दशक में मंगल ग्रह से पहला रॉक सैंपल लेकर लौटेगा। नासा के मुताबिक, यह ‘छोटा, हल्का रॉकेट' दूसरे ग्रह से उड़ान भरने वाला पहला रॉकेट होगा, जो मंगल की सतह से सैंपल लाएगा। नासा का पर्सवेरेंस रोवर (Perseverance Rover) एक साल पहले मंगल ग्रह पर लैंड करने के बाद विभिन्न इलाकों से सैंपल इकट्ठा कर रहा है।  इस मिशन का मकसद मंगल ग्रह पर जीवन के निशान ढूंढना है। लेकिन यह तभी मुमकिन होगा, जब इन सैंपल्‍स का विश्‍लेषण पृथ्वी पर प्रयोगशालाओं में किया जाएगा। इन सैंपल्‍स को इकट्ठा करके एक जटिल ऑपरेशन के तहत पृथ्वी पर वापस लॉन्च किया जाएगा। लॉकहीड मार्टिन का रॉकेट इसमें प्रमुख भूमिका निभाएगा।  नासा के अनुसार, रॉकेट बनाने के लिए हुए कॉन्‍ट्रैक्‍ट का संभावित मूल्य 194 मिलियन डॉलर (लगभग 1451 करोड़ रुपये) है। नासा के हेडक्‍वॉर्टर में साइंस के एसोसिएट एडमिनिस्‍ट्रेटर थॉमस जुर्बुचेन ने कहा कि पृथ्वी पर लाए जाने के बाद उन सैंपल्‍स की स...

पृथ्‍वी के नजदीक से गुजरने वाला है ‘खतरनाक’ एस्‍टरॉयड, दोबारा साल 2105 में आएगा

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पृथ्‍वी के नजदीक अगले कुछ दिनों में एक बड़ी खगोलीय घटना होने वाली है। 1 किलोमीटर लंबा एक एस्‍टरॉयड (asteroid) अगले सप्ताह पृथ्वी के पास से गुजरने के लिए तैयार है। हालांकि आपको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। जब यह एस्‍टरॉयड पृथ्‍वी के पास से गुजरेगा, तब भी इसके और हमारे ग्रह के बीच 1.93 मिलियन किलोमीटर की दूरी होगी। इसका मतलब है कि यह एस्‍टरॉयड चंद्रमा की तुलना में पृथ्‍वी से 5.15 गुना अधिक दूर होगा। हमारे वैज्ञानिक और खगोलविद आने वाली खगोलीय घटनाओं पर नियमित नजर रखते हैं। इनके बारे में लोगों को अपडेट दिए जाते हैं, ताकि लोग भी इस घटनाओं के गवाह बन सकें। अब खगोलविदों ने पाया है कि एस्‍टरॉयड (7482) 1994 PC1 जल्द ही पृथ्वी के पास पहुंचेगा। वैज्ञानिकों ने इस एस्‍टरॉयड के आकार और पृथ्‍वी से कम दूरी को देखते हुए इसे ‘संभावित रूप से खतरनाक' के तौर पर क्‍लासीफाइड किया है। भारतीय समय के मुताबिक यह एस्‍टरॉयड 19 जनवरी की सुबह 3:21 बजे पृथ्वी के सबसे करीब होगा। करीब 89 साल बाद यह एस्‍टरॉयड पृथ्‍वी के इतने नजदीक से गुजर रहा है। 89 साल पहले 17 जनवरी 1933 को यह एस्‍टरॉयड पृथ्‍वी से 1.1 लाख ...

ऐसी होंगी Future cars, बिना हेडफोन सुन सकेंगे सॉन्‍ग, सामने वाले को नहीं आएगी आवाज

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रोड ट्र‍िप्‍स तब मुश्किलों से भर जाती हैं, जब उनमें किसी और की पसंद का म्‍यूजिक सुनना पड़ता है। जैसे- आपको पसंद हैं नाइंटीज के मेलॉडी सॉन्‍ग और सामने वाला दमदार बैस वाले पंजाबी गाने बजा दे। हेडफोन इसका एक सॉल्‍यूशन जरूर हैं, लेकिन लंबी रोड ट्रिप्‍स में उनके साथ बैठे रहना कानों के लिए दुखदायी हो जाता है। कैसा हो अगर आप गाड़ी में बिना हेडफोन के अपनी पसंद का गाना सुन पाएं और वह किसी और को भी ना सुनाई दे। साउंड की दुनिया की यह कल्‍पना फ्यूचर में हकीकत बन सकती है। फ्रांस में रिसर्चर्स ऐसा ही एक पर्सनल साउंड जोन देने पर काम कर रहे हैं, जो आपकी कार में कंडीशन के हिसाब से ढल जाता है।  रिसर्चर्स का मानना है कि कार में इस तरह के पर्सनल साउंड जोन से आपको बाहर की आवाज आए बिना अच्‍छी तरह से सुनने की तकनीक मिल सकती है। हर कोई कार में अपनी पसंद का म्‍यूजिक सुन सकेगा, वह भी बिना हेडफोन लगाए। जीपीएस का अलर्ट सिर्फ ड्राइवर को मिलेगा और आप इसी तरह फोन कॉल भी कर सकेंगे।    मल्‍टीपल लाउडस्पीकर की मदद से साइंटिस्‍ट पर्सनल साउंड जोन बनाने पर काम कर रहे हैं। इन मल्‍टीपल स्‍पीकर की खूबी यह है कि ये सभी एक...

NASA के नए सिस्‍टम की लॉन्‍चिंग 4 दिसंबर को, ‘लेजर’ की स्‍पीड से अंतरिक्ष से आएगा डेटा

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा स्‍पेस में एक लेजर तकनीक का परीक्षण करने के लिए तैयार है। इस मिशन का मकसद स्‍पेस कम्‍युनिकेशन को तेजी देना है। करीब दो साल की देरी के बाद 4 दिसंबर को  लेजर कम्युनिकेशंस रिले डिमॉन्स्ट्रेशन (एलसीआरडी) को लॉन्च किया जाएगा। रक्षा विभाग द्वारा, स्पेस टेस्ट प्रोग्राम सैटेलाइट-6 (STPSat-6) मिशन के दौरान यूनाइटेड लॉन्च अलायंस एटलस V रॉकेट पर इसे लॉन्‍च किया जाएगा। मिशन को फ्लोरिडा के केप कैनावेरल स्पेस फोर्स स्टेशन से लॉन्च किए जाने की उम्मीद है। इस मिशन में देरी के बावजूद इन्‍वेस्टिगेटर्स का मानना है कि एलसीआरडी को सही समय पर लॉन्च किया जाएगा, ताकि 2025 में लॉन्‍च होने वाले आर्टेमिस मून-लैंडिंग मिशन को इसका फायदा मिल सके। स्‍पेस कम्‍युन‍िकेशन में लेजर के इस्‍तेमाल पर नासा ने विस्तार से बताया है। कहा है कि इस तकनीक से रेडियो फ्रीक्वेंसी की तुलना में 10 से 100 गुना अधिक डेटा को पृथ्वी पर वापस भेजा जा सकता है। नासा के स्पेस कम्युनिकेशंस एंड नेविगेशन प्रोग्राम के डिप्टी एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर बद्री यूनुस ने कहा कि अगर मिशन ने लेजर का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया तो...

वैज्ञानिकों ने दी सौर तूफान की चेतावनी : सूर्य से आएंगी ज्वाला, जानें पृथ्वी पर क्या होगा असर

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वैज्ञानिकों ने एक सौर तूफान की चेतावनी जारी की है। एक विशेषज्ञ ने कहा है कि बहुत जल्‍द सूर्य से कम से कम दो "बिग-फ्लेयर प्लेयर्स" या कहें ज्‍वालाएं आ सकती हैं। अंतरिक्ष मौसम भौतिक विज्ञानी डॉ. तमिथा स्कोव ने कहा कि कई सनस्पॉट क्लस्टर को पृथ्‍वी से भी देखा जा सकता है। उन्‍होंने कहा कि फ‍िलहाल इस तूफान का फोकस पृथ्‍वी की तरफ नहीं है, लेकिन हम हाई अलर्ट पर हैं। सोलर एक्टिविटी के प्रमुख तौर पर 4 घटक हैं। इनमें शामिल हैं- सोलर फ्लेयर्स, कोरोनल मास इजेक्शन, हाई-स्पीड सोलर विंड और सोलर एनर्जी पार्टिकल्स। तो, क्या ये सौर गतिविधियां पृथ्वी को प्रभावित करती हैं? नासा के अनुसार, सौर ज्वालाएं पृथ्वी पर तभी असर डालती हैं, जब वो सूर्य के पृथ्‍वी वाले हिस्‍से की तरफ होती हैं। इसी तरह कोरोनल मास इजेक्शन भी पृथ्‍वी पर तभी असर डालेंगे, जब सूर्य के पृथ्‍वी वाले हिस्‍से से बाहर आएंगे। सूर्य से निकाला गया चुंबकीय क्षेत्र और प्‍लाज्‍मा के विशाल बादल को कोरोनल मास इजेक्शन कहते हैं।  डॉ. तमिथा स्कोव को कोट करते हुए एक्‍सप्रेस ने लिखा है कि इन सब वजहों से पूरे ग्रह में कुछ हैरान करने वाली चीजें ...