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धूमकेतु (Comet) क्या होते हैं, कहां से आते हैं, क्या ये धरती से टकरा सकते हैं? NASA ने दिए चौंकाने वाले जवाब

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हम अपने सौरमंडल के बारे में जानते हैं कि इसके ग्रह सूरज के चारों तरफ चक्कर लगाते हैं। लेकिन क्या आप ये भी जानते हैं कि सौरमंडल में ग्रहों के अलावा भी लाखों ऐसे खगोलीय पिंड हैं जो बर्फ और धूल के बने हैं। इन्हें धूमकेतु (Comet) कहा जाता है। NASA कहती है कि धूमकेतु भी सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हैं और ये धूल और बर्फ से बने बड़े बड़े खगोलीय पिंड होते हैं। अंतरिक्ष एजेंसी कहती है कि धूमकेतु आज से लगभग 4.6 खरब साल पहले बने थे जब सौरमंडल का निर्माण हुआ था। इन्हें इनकी जलती हुई या चमकती हुई पूंछ के कारण अधिक जाना जाता है।  आपके मन में भी यह सवाल आता होगा कि आखिर ये धूमकेतु आते कहां से हैं? नासा का कहना है कि ये सौरमंडल के मध्य में मौजूद हैं। इनमें से कुछ तो नेप्च्यून ग्रह के ऑर्बिट के बाहर भी पाए जाते हैं। इनमें से कुछ तो छोटे ऑर्बिट लाइफ वाले कॉमेट होते हैं जो सूरज का एक चक्कर लगाने में 200 साल का समय लेते हैं। दूसरे कॉमेट सौर मंडल के बाहरी छोर पर घूमते हैं जिसे ऊर्ट क्लाउट (Oort Cloud) कहा जाता है। इनके बारे में एजेंसी का कहना है कि ये सूरज का एक चक्कर लगाने में 25 हजार साल तक का वक्...

अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने सौर मंडल के बाहर खोज निकाला पृथ्वी से 4 गुना बड़ा ग्रह, जहां 1 साल है बस 11 दिन का!

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हाल ही में अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने एक एग्जोप्लेनेट (ऐसा ग्रह जो सौरमंडल के बाहर किसी तारे का चक्कर लगाता हो) या सुपरअर्थ (super-Earth) की खोज की है जो हमारे प्लेनेट यानि पृथ्वी से 4 गुणा बड़ा है। खगोलविदों ने इसे Ross 508 b नाम दिया है। यह भी पृथ्वी की तरह एक सूर्य जैसे तारे के गिर्द चक्कर लगाता है जिसका नाम Ross 508 बताया गया है। यह 36.5 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है इसलिए नंगी आंखों से नहीं देखा जा सकता है। वैज्ञानिकों ने पाया कि यह Ross 508 के हैबिटेबल जोन (तारे के समीप बने रहने योग्य जगह) में है। इस स्टडी को नाम दिया गया है- "M4.5 डवार्फ रॉस 508 के अंतरूनी छोर के पास हैबिटेबल जोन में घूमती सुपर अर्थ।" स्टडी को पब्लिकेशंस ऑफ द एस्ट्रॉनोमिकल सोसाइटी ऑफ जापान नाम के जर्नल में प्रकाशित करने के लिए स्वीकार किया गया है। Ross 508 b प्लेनेट तारे के पास उस दूरी पर घूमता है जिससे कि ग्रह पर पानी के बनने योग्य तापमान बना रहे। इससे पता चलता है कि रॉस 508 बी अपने तारे के हैबिटेबल जोन में है।  हालांकि, केवल हैबिटेबल जोन में चक्कर लगाने का ये मतलब नहीं है कि ग्रह पर जीवन होगा। यूं तो, म...

वैज्ञानिकों ने नई स्टडी से पता लगाया चांद पर कहां से आया होगा पानी!

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पृथ्वी के बाहर जीवन तलाशने के लिए इन्सान हमेशा से ही उत्सुक रहा है। जब से नासा ने चांद पर पानी के होने की पुष्टि की है, कई शोध इसको लेकर हो चुके हैं कि चांद पर पानी का स्रोत क्या हो सकता है। अब एक नई शोध ने बहुत ही अजब नतीजा पेश किया है। इसने कहा है कि चांद पर पानी का स्रोत होने का कारण ज्वालामुखी हो सकते हैं। हम जानते हैं कि चांद पर पुराने समय में कई ज्वालामुखी फूट चुके हैं।  चांद पर ज्वालामुखीय गतिविधियां 4.2 खरब साल पहले शुरू हुई होंगी। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि ज्वालामुखी फटने की घटनाएं 1 अरब साल पहले तक चांद पर रही होंगीं। इसकी सतह पर दिखने वाले बड़े बड़े धब्बे ज्वालामुखीय चट्टानों के ही मैदान हैं जो बड़े ज्वालामुखी विस्फोटों के कारण बने हैं। वैज्ञानिक ये समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या इन विस्फोटों से गैसें निकली होंगी, जो इसके वातावरण में कैद हुई होंगीं? और क्या ये गैसें ठंडी होकर बर्फ के रूप में दोबारा से मंगल की सतह पर गिरी होंगी, जहां पर सूर्य की रोशनी नहीं पहुंच पाती है।  वैज्ञानिकों ने कहा है कि यह एक संभावना हो सकती है। "हमारा मॉडल यह अनुमान लगाता है कि कुल H...

वैज्ञानिकों का दावा अंतरिक्ष में मौजूद हैं न दिखने वाली अदृश्य (इनविजिबल) दीवारें!

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अंतरिक्ष की दुनिया रहस्यों से भरी हुई है और वैज्ञानिकों को आए दिन अंतरिक्ष के बारे में कुछ नया पता चलता है। टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से इसकी परतों से पर्दा उठाने की कोशिश की जा रही है। अब वैज्ञानिकों ने कहा है कि अंतरिक्ष में दीवारें भी मौजूद हो सकती हैं। हालांकि, ये वैसी दीवारें नहीं है जैसे किसी कमरे की होती हैं। बल्कि, ये स्पेस में एक रुकावट के रूप में मौजूद हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन्हें बनाने में एक चौथे बल का हाथ हो सकता है जो कि एक नए कण का परिणाम हो सकता है जिसे सिम्मीट्रॉन (symmetron) कहा जाता है। इस फोर्स का अंतरिक्ष में होना वैज्ञानिकों को उन घटनाओं का खुलासा करने में मदद करेगा जिनके बारे में अब तक वे परेशान थे।  फिलहाल, हम अपने अंतरिक्ष को समझने के लिए लैम्ब्डा कोल्ड मैटर मॉडल को इस्तेमाल करते हैं। ये मॉडल कहता है कि छोटी गैलेक्सी बड़ी गैलेक्सियों के अस्त-व्यस्त ऑर्बिट में घूमती हैं। लेकिन नई स्टडी की मानें तो वास्तव में, कई छोटी गैलेक्सी, जो बड़ी गैलेक्सियों के ऑर्बिट में घूमती हैं, वे पतले फ्लैट डिस्क जैसे आकार में रखी गई हैं जो कि शनि ग्रह की रिंग्स के जैसा है...

अंतरिक्ष में बनेगा दुनिया का पहला फ‍िल्‍म स्‍टूड‍ियो, टॉम क्रूज की मूवी होगी शूट

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अंतरिक्ष में बनने जा रहा दुनिया का पहला फ‍िल्‍म स्‍टूडियो, स्पेस एंटरटेनमेंट एंटरप्राइज (SEE) अगले कुछ साल में हकीकत बन सकता है। स्‍टूडियो दावा करता है कि यह जीरो ग्रैविटी में दुनिया का पहला एंटरटेनमेंट स्‍टूडियो और मल्‍टीपर्पज एरिना होगा। कंपनी अभिनेता टॉम क्रूज की आनेवाली ‘स्‍पेस मूवी' का सह-निर्माण भी कर रही है। SEE ने दिसंबर 2024 तक एक स्‍पेस स्टेशन मॉड्यूल बनाने की योजना पेश की है। इसके तहत अंतरिक्ष में एक कंटेंट स्टूडियो के साथ स्‍पोर्ट्स और एंटरटेनमेंट एरिया भी तैयार किए जाएंगे।   एक न्‍यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, SEE-1 नाम का यह मॉड्यूल ऐसे आर्टिस्‍ट, प्रोड्यूसर और क्रिएटिव लोगों को होस्ट करेगा, जो लो-ऑर्बिट, माइक्रो-ग्रैविटी एनवायरनमेंट में कंटेंट बनाना चाहते हैं। इस फ‍िल्‍म स्‍टूड‍ियो में प्रोडक्‍शन, रिकॉर्डिंग, ब्रॉडकास्टिंग और लाइवस्ट्रीमिंग की सर्विसेज ऑफर की जाएंगी। SEE का अपना कंटेंट और कार्यक्रम भी तैयार करना चाहता है, जिसे थर्ड पार्टीज को उपलब्‍ध कराया जाएगा। SEE-1 के निर्माण का काम Axiom Space करेगी। Axiom Space ने जनवरी 2020 में इंटरनैशनल स्‍पेस स्टेशन...

अंतरिक्ष में बनेगा दुनिया का पहला फ‍िल्‍म स्‍टूड‍ियो, टॉम क्रूज की मूवी होगी शूट

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अंतरिक्ष में बनने जा रहा दुनिया का पहला फ‍िल्‍म स्‍टूडियो, स्पेस एंटरटेनमेंट एंटरप्राइज (SEE) अगले कुछ साल में हकीकत बन सकता है। स्‍टूडियो दावा करता है कि यह जीरो ग्रैविटी में दुनिया का पहला एंटरटेनमेंट स्‍टूडियो और मल्‍टीपर्पज एरिना होगा। कंपनी अभिनेता टॉम क्रूज की आनेवाली ‘स्‍पेस मूवी' का सह-निर्माण भी कर रही है। SEE ने दिसंबर 2024 तक एक स्‍पेस स्टेशन मॉड्यूल बनाने की योजना पेश की है। इसके तहत अंतरिक्ष में एक कंटेंट स्टूडियो के साथ स्‍पोर्ट्स और एंटरटेनमेंट एरिया भी तैयार किए जाएंगे।   एक न्‍यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, SEE-1 नाम का यह मॉड्यूल ऐसे आर्टिस्‍ट, प्रोड्यूसर और क्रिएटिव लोगों को होस्ट करेगा, जो लो-ऑर्बिट, माइक्रो-ग्रैविटी एनवायरनमेंट में कंटेंट बनाना चाहते हैं। इस फ‍िल्‍म स्‍टूड‍ियो में प्रोडक्‍शन, रिकॉर्डिंग, ब्रॉडकास्टिंग और लाइवस्ट्रीमिंग की सर्विसेज ऑफर की जाएंगी। SEE का अपना कंटेंट और कार्यक्रम भी तैयार करना चाहता है, जिसे थर्ड पार्टीज को उपलब्‍ध कराया जाएगा। SEE-1 के निर्माण का काम Axiom Space करेगी। Axiom Space ने जनवरी 2020 में इंटरनैशनल स्‍पेस स्टेशन ...

NASA के नए सिस्‍टम की लॉन्‍चिंग 4 दिसंबर को, ‘लेजर’ की स्‍पीड से अंतरिक्ष से आएगा डेटा

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा स्‍पेस में एक लेजर तकनीक का परीक्षण करने के लिए तैयार है। इस मिशन का मकसद स्‍पेस कम्‍युनिकेशन को तेजी देना है। करीब दो साल की देरी के बाद 4 दिसंबर को  लेजर कम्युनिकेशंस रिले डिमॉन्स्ट्रेशन (एलसीआरडी) को लॉन्च किया जाएगा। रक्षा विभाग द्वारा, स्पेस टेस्ट प्रोग्राम सैटेलाइट-6 (STPSat-6) मिशन के दौरान यूनाइटेड लॉन्च अलायंस एटलस V रॉकेट पर इसे लॉन्‍च किया जाएगा। मिशन को फ्लोरिडा के केप कैनावेरल स्पेस फोर्स स्टेशन से लॉन्च किए जाने की उम्मीद है। इस मिशन में देरी के बावजूद इन्‍वेस्टिगेटर्स का मानना है कि एलसीआरडी को सही समय पर लॉन्च किया जाएगा, ताकि 2025 में लॉन्‍च होने वाले आर्टेमिस मून-लैंडिंग मिशन को इसका फायदा मिल सके। स्‍पेस कम्‍युन‍िकेशन में लेजर के इस्‍तेमाल पर नासा ने विस्तार से बताया है। कहा है कि इस तकनीक से रेडियो फ्रीक्वेंसी की तुलना में 10 से 100 गुना अधिक डेटा को पृथ्वी पर वापस भेजा जा सकता है। नासा के स्पेस कम्युनिकेशंस एंड नेविगेशन प्रोग्राम के डिप्टी एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर बद्री यूनुस ने कहा कि अगर मिशन ने लेजर का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया तो...