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सूर्य पर दिखा सनस्‍पॉट 24 घंटे में दोगुना बढ़ा, विस्‍फोट हुआ तो पृथ्‍वी तक हो सकता है असर

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सूर्य हमारी आकाशगंगा का सबसे अहम हिस्‍सा है। इसी की वजह से पृथ्‍वी पर जीवन है। ऐसे में सूर्य में होने वाली घटनाओं पर वैज्ञानिकों की हर पल नजर रहती है। एक्‍सपर्ट सूर्य पर दिखाई दे रहे एक ‘विशाल सनस्पॉट' पर कड़ी नज़र रख रहे हैं। इसका आकार पिछले 24 घंटों में दोगुना हो गया है। बताया जाता है कि सोलर सर्फेस पर मौजूद यह अस्थिर पैच सीधे पृथ्वी की ओर मौजूद है। अगर यह फट जाता है तो सूर्य से पृथ्‍वी के रास्‍ते में एक सोलर फ्लेयर भड़क सकता है।  आगे बढ़ें, उससे पहले सोलर फ्लेयर को समझ लेना चाहिए। जब सूर्य की चुंबकीय ऊर्जा रिलीज होती है, तो उससे निकलने वाली रोशनी और पार्टिकल्‍स से सौर फ्लेयर्स बनते हैं। हमारे सौर मंडल में ये फ्लेयर्स अबतक के सबसे शक्तिशाली विस्फोट हैं, जिनमें अरबों हाइड्रोजन बमों की तुलना में ऊर्जा रिलीज होती है। इनमें मौजूद एनर्जेटिक पार्टिकल्‍स प्रकाश की गति से अपना सफर तय कोरोनल मास इजेक्शन भी होता है। द सन की रिपोर्ट के अनुसार, इस सोलर फ्लेयर के अभी पृथ्‍वी से टकराने की उम्‍मीद नहीं है, लेकिन अगर सनस्‍पॉट बढ़ता रहा, तो यह अस्थिर तरीके से व्‍यवहार कर सकता है। AR3038 नाम क...

धूमकेतु (Comet) क्या होते हैं, कहां से आते हैं, क्या ये धरती से टकरा सकते हैं? NASA ने दिए चौंकाने वाले जवाब

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हम अपने सौरमंडल के बारे में जानते हैं कि इसके ग्रह सूरज के चारों तरफ चक्कर लगाते हैं। लेकिन क्या आप ये भी जानते हैं कि सौरमंडल में ग्रहों के अलावा भी लाखों ऐसे खगोलीय पिंड हैं जो बर्फ और धूल के बने हैं। इन्हें धूमकेतु (Comet) कहा जाता है। NASA कहती है कि धूमकेतु भी सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हैं और ये धूल और बर्फ से बने बड़े बड़े खगोलीय पिंड होते हैं। अंतरिक्ष एजेंसी कहती है कि धूमकेतु आज से लगभग 4.6 खरब साल पहले बने थे जब सौरमंडल का निर्माण हुआ था। इन्हें इनकी जलती हुई या चमकती हुई पूंछ के कारण अधिक जाना जाता है।  आपके मन में भी यह सवाल आता होगा कि आखिर ये धूमकेतु आते कहां से हैं? नासा का कहना है कि ये सौरमंडल के मध्य में मौजूद हैं। इनमें से कुछ तो नेप्च्यून ग्रह के ऑर्बिट के बाहर भी पाए जाते हैं। इनमें से कुछ तो छोटे ऑर्बिट लाइफ वाले कॉमेट होते हैं जो सूरज का एक चक्कर लगाने में 200 साल का समय लेते हैं। दूसरे कॉमेट सौर मंडल के बाहरी छोर पर घूमते हैं जिसे ऊर्ट क्लाउट (Oort Cloud) कहा जाता है। इनके बारे में एजेंसी का कहना है कि ये सूरज का एक चक्कर लगाने में 25 हजार साल तक का वक्...

खास है जून का महीना, 18 साल बाद आसमान में बिना दूरबीन के देख सकते हैं यह 5 ग्रह

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अंतरिक्ष में दिलचस्‍पी रखने वाले लोगों के लिए यह महीना बेहद खास है। इस महीने लोगों को 5 ग्रह दिखाई देंगे। खास बात यह है कि इन्‍हें बिना दूरबीन के सिर्फ आंखों से ही देखा जा सकेगा। ये पांच ग्रह हैं बुध, शुक्र, मंगल, बृहस्पति और शनि। यह बेहद शानदार नजारा ईस्‍टर्न होरिजन की ओर सूर्य के उगने से ठीक पहले दिखाई देगा। इस खास नजारे को देखने के लिए उत्तरी गोलार्ध में रहने वालों को पूर्व और दक्षिण की ओर देखना होगा, जबकि दक्षिणी गोलार्ध के लोगों को पूर्व और उत्तर की ओर देखना चाहिए। दो या तीन ग्रहों को एक साथ कंजक्‍शन में देखना एक सामान्य घटना है। लेकिन 5 ग्रहों का कंजक्‍शन अपने आप में बेहद खास नजारा होगा। आखिरी बार पांच ग्रहों को बिना दूरबीन की मदद के दिसंबर 2004 में देखा गया है। इस बार इस क्रम में बुध और शनि को एक-दूसरे के बहुत करीब देखा जा सकेगा।  स्काई एंड टेलिस्कोप के अनुसार, यह नजारा इस पूरे महीने दिखाई देना चाहिए, लेकिन कुछ तारीखें बेहद खास हैं।  3-4 जून : इन दो तारीखों की सुबह में बुध और शनि ग्रह के बीच का अंतर सबसे कम होगा। सिर्फ 91 डिग्री के फासले पर यह ग्रह दिखाई देंगे। अगर आप इस नज...

लाखों किलोमीटर दूर तारों का सफर बिना स्‍पेसशिप के करेगा इंसान, यह तरीका आएगा काम!

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अगले 5 अरब साल में क्या होगा, जब सूर्य एक लाल ‘दानव' में बदल जाएगा यानी बहुत बड़ा और गर्म हो जाएगा व पृथ्वी को खा जाएगा? वैज्ञानिक लंबे समय से इस सवाल से जूझ रहे हैं। क्या यह घटना ब्रह्मांड से मानव जाति के खत्‍म होने की वजह बनेगी? क्या इस विनाश से प्रजातियों को बचाने का कोई तरीका है? इसका जवाब है एक ऐसे ग्रह की इंटरस्टेलर यात्रा जो मनुष्यों के लिए अगला घर हो सकता है। यह मानव जाति को बचाने का काल्पनिक तरीका है, लेकिन क्‍या ऐसा हकीकत में मुमकिन है? अगर हमें ऐसा कोई ग्रह मिल भी जाए, तो अंतरिक्ष यान से वहां तक पहुंचने में सैकड़ों और हजारों साल लग सकते हैं।  इसका मतलब है कि इंसान को पृथ्‍वी से बाहर अपना नया घर खोजने में कई पीढ़ियां लग जाएंगी। हालांकि एक रिसर्च पेपर से पता चलता है कि अंतरिक्ष यान के बिना भी इंटरस्टेलर यात्रा हो सकती है। अंतरतारकीय अंतरिक्ष उड़ान (interstellar travel) दो तारों या प्‍लेनेटरी सिस्‍टम के बीच अंतरिक्ष उड़ान द्वारा की गई यात्रा को कहते हैं। फि‍लहाल यह पूरी तरह काल्पनिक है। ह्यूस्टन कम्युनिटी कॉलेज में फ‍िजिक्‍स और एस्‍ट्रोनॉमी की प्रोफेसर इरिना रोमानोव्सक...

कभी देखा है सूर्य को इतने करीब से? बुध ग्रह की कक्षा में जाकर 500 डिग्री तापमान में खींची गईं तस्‍वीरें

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यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) ने साल 2020 में अपना सोलर ऑर्बिटर अंतरिक्ष में भेजा था। हाल ही में इसने सूर्य के रिकॉर्ड करीब पहुंचकर हैरान करने वाली तस्‍वीरें खींची हैं। रिपोर्टों के अनुसार, 26 मार्च को ESA का सोलर ऑर्बिटर सूर्य के सबसे नजदीकी ग्रह बुध (Mercury) की कक्षा में पहुंचा। इस तरह की पहुंच को पेरिहेलियन (perihelion) के रूप में जाना जाता है, जिसमें कोई ग्रह सूर्य के सबसे करीब होता है। हालांकि अंतरिक्ष यान को पेरिहेलियन तक पहुंचने के लिए कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इनमें सबसे बड़ी चुनौती भीषण गर्मी की थी। सोलर ऑर्बिटर जब सूर्य के रिकॉर्ड करीब पहुंचा तो उसे 500 डिग्री सेल्सियस तक तापमान का सामना करना पड़ा। इस दौरान हीट शील्ड ने उसे बचाकर रखा।  उम्मीद है कि फ्यूचर में सोलर ऑर्बिटर सूर्य के और करीब जाएगा और उसे ज्‍यादा तापमान का सामना करना पड़ेगा। इस कोशिश का सबसे बड़ा फायदा यह है कि हमें सूर्य का वह रूप देखने को मिला है, जो आज से पहले कभी नहीं देखा गया। सूर्य के रिकॉर्ड करीब पहुंचकर ESA के ऑर्बिटर ने पावरफुल फ्लेयर्स, सौर ध्रुवों के शानदार दृश्य और एक रहस्यमयी सौर 'हे...

हमारे सूर्य से 32 गुना बड़ा और 2 लाख गुना ज्‍यादा चमकदार तारा देखा है आपने?

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रात के साफ आसमान में हमें लाखों तारे दिखाई देते हैं। पृथ्‍वी से लाखों-‍करोड़ों किलोमीटर दूर स्थित ये तारे जगमगाते छोटे बिंदुओं की तरह दिखाई देते हैं। लेकिन हमारे अस्तित्व का तारा है सूर्य। इसके चारों ओर पृथ्वी समेत कई ग्रह चक्‍कर लगाते हैं। क्‍या आप किसी ऐसे तारे के बारे में सोच सकते हैं, जो हमारे सूर्य से 200,000 गुना ज्‍यादा चमकीला और 32 गुना ज्‍यादा बड़ा हो। हाल ही में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) ने एक इमेज शेयर की है। इसमें दिखाया गया है कि तारे के आसपास की दुनिया कैसी दिखाई देगी। इमेज में ब्रह्मांड के परिदृश्य को दिखाया गया है, जो शांत नजर आता है, लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है।  हर्शल 36 (Herschel 36) नाम का यह स्‍टार ‘लैगून नेबुला' (Lagoon Nebula) के केंद्र में है। यह लगभग 4,000 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है। यह ताकतवर पराबैंगनी किरणों समेत अशांत गैसों, तेज रेडिएशन से भरा है। इन इंटरेक्‍शंस की वजह से ‘लैगून नेबुला' में गैस और धूल के पहाड़ों के एक काल्पनिक परिदृश्य दिखाई देता है।    नासा ने बताया है कि यह विशाल तारा अभी युवा है। लगभग 1 मिलियन वर्ष ही पुराना है और हाइ...

sun: Sun emits massive solar flare that may impact radio, satellite communications

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The Sun on Wednesday unleashed a massive solar flare that has the potential to impact satellite communications and global positioning systems, the Centre of Excellence in Space Sciences India (CESSI) said. This flare is classified as an X-Class, which denotes the most intense flare. The X2.2 class solar flare eruption took place at 3:57 UTC (9.27 IST) from the solar magnetic active region AR12992. “It erupted from a region beyond the southwest limb of the Sun,” according to US space weather forecasting site NOAA Space Weather. “Strong ionospheric perturbation is ongoing over India, South East Asia and the Asia-Pacific regions. Expected high frequency communication blackouts, satellite anomalies, GPS scintillations, and airline communication impacts,” the CESSI said on Twitter. Solar flares are powerful bursts of energy that can impact radio communications, electric power grids and navigation signals, and pose risks to spacecraft and astronauts. During a solar flare, the highly ener...

आज पृथ्‍वी से टकरा सकता है एक सौर तूफान, हो सकता है बड़ा नुकसान

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एक बड़ा सौर तूफान (solar storm) 14 अप्रैल को पृथ्वी से टकरा सकता है। वैज्ञानिक इसकी उम्‍मीद कर रहे हैं। उनका मानना है कि इस इस घटना से पृथ्वी को संभावित नुकसान हो सकता है। अंतरिक्ष एजेंसियों का कहना है कि यह भू-चुंबकीय सौर तूफान शक्तिशाली हो सकता है, क्योंकि हाल ही में सूर्य काफी एक्टिव रहा है। वह अधिक चमक भी रहा है। यह सब इसलिए भी है, क्‍योंकि 11 साल के सौर चक्र में सूर्य अपनी सोलर मैक्सिमा के करीब पहुंच रहा है। इस वजह से पिछले कुछ महीनों में वह कई बार कोरोनल मास इजेक्शन (CME) के साथ चमक रहा है। नासा (NASA) और नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) सूर्य के CME फ्लेयर्स की लगातार निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने भविष्यवाणी की है कि सबसे प्रभावशाली तूफान 14 अप्रैल को पृथ्वी को प्रभावित करेगा। इस बार सौर फ्लेयर्स में बेहद तेज हवा होगी। नासा ने संभावना जताई है कि पृथ्वी से टकराने के बाद यह तूफान तेज हो जाएगा। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन स्पेस साइंसेज इंडिया (CESSI) ने एक ट्वीट में लिखा है कि 14 अप्रैल 2022 को 429 से 575 किलोमीटर प्रति सेकंड के बीच की गति के साथ पृथ्वी पर इस तूफान का...

सूर्य में एक के बाद एक हलचल, Nasa ने ग्राफ‍िक्‍स से समझाया- क्‍या हुआ था

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वैज्ञानिकों के लिए ब्रह्मांड में सबसे उत्‍सुकता वाली चीज सूर्य (Sun) है। इस धधकते आग के गोले के बारे में जानने के लिए वह दिन-रात जुटे रहते हैं। कई अंतरिक्ष यान इस मकसद से अंतरिक्ष में हैं कि वह सूर्य के बारे में और जानकारी जुटा सकें। दुनियाभर की स्‍पेस एजेंसियां, सूर्य से जुड़ी नई घटनाओं को हमारे सामने लेकर आती हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) और यूरोपियन अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) इसमें सबसे आगे हैं। नासा के हालिया इंस्‍टाग्राम पोस्‍ट से पता चलता है कि बीते दिनों सूर्य एक के बाद एक कई घटनाओं का गवाह बना।       नासा ने अपने इंस्‍टाग्राम पेज पर बताया है कि पिछले हफ्ते हमारे सूर्य ने बैक टू बैक परफॉर्मेंस दी। एजेंसी के मुताबिक, 30 मार्च 2022 को सूर्य से बहुत तेज चमक निकली। यह दोपहर होते-होते अपने पीक पर थी। इसके बाद एक मध्‍यम दर्जे की हलचल और रिकॉर्ड की गई। सूर्य में हुई हलचल को हमारी सोलर डायनेमिक्स ऑब्जर्वेटरी ने कैप्‍चर किया। यह लगातार सूर्य को देखती है और इसमें होने वाली घटनाओं को कवर करती है।    नासा की ओर से शेयर किए गए पहले ग्राफिक में अहम सौर चमक दिखाई देती है। इसके तहत ट...

सूर्य की इतनी डिटेल इमेज देखी है पहले? ESA के सोलर ऑर्बिटर ने ऐसे किया क्लिक

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यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के सोलर ऑर्बिटर ने सूर्य की नजदीकी उड़ान के दौरान उसकी हाई-रेजॉलूशन इमेज खींची है। सोलर ऑर्बिटर ने सूर्य की फुल डिस्‍क इमेज के साथ उसके वातावरण और कोरोना को भी कैद किया है। 7 मार्च को यह ऑर्बिटर सूर्य से सिर्फ 75 मिलियन किलोमीटर की दूरी पर था। यह पृथ्वी से सूर्य की दूरी का आधा है। सोलर ऑर्बिटर ने अपने एक्‍ट्रीम अल्ट्रावाइलेट इमेजर (EUI) का इस्‍तेमाल करते हुए लगभग 10 मिनट के एक्सपोजर में 25 इमेज खीचीं। वैज्ञानिकों ने फुल इमेज बनाने के लिए सभी तस्‍वीरों को एक मोजेक में जोड़ दिया, जिसके बाद यह फोटोग्राफ सामने आई है।  फाइनल इमेज में 83 मिलियन पिक्सल से भी ज्‍यादा हैं। इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि इसका रेजॉलूशन 4K टीवी स्क्रीन से 10 गुना बेहतर है। EUI के अलावा सौर ऑर्बिटर पर कई इमेजिंग उपकरण हैं। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के मुताबिक, इनमें से एक है स्पेक्ट्रल इमेजिंग ऑफ द कोरोनल एनवायरनमेंट (SPICE)। इसने भी एक इमेज को कैप्चर किया, जिसने 50 साल में अपनी तरह की सूर्य की पहली तस्‍वीर दिखाई है। यह अब तक की सबसे बेस्‍ट है।  वहीं बात करें EUI की, तो सूर्य की फोटोग्रा...

सूर्य से निकल रहीं रहस्‍यमयी तरंगें, क्‍या चल रहा है इस विशाल तारे के अंदर?

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सूर्य में होने वाली हलचलों पर नजर रखने वाले रिसर्चर्स ने रहस्‍यमयी वेव्‍स (तरंगों) के ग्रुप का पता लगाया है। ये तरंगें सूर्य से निकलती हैं और पहले लगाए गए अनुमान से भी तीन गुना तेज यात्रा करती हैं। रिसर्चर्स को लगता है कि ये तरंगें उन्हें सूर्य के अंदरूनी हिस्सों को समझने में मदद कर सकती हैं। करीब 25 साल के डेटा को स्‍टडी करने के बाद इन तरंगों की खोज हुई है। ये हाई-फ्रीक्‍वेंसी रेट्रोगेट (HFR) तरंगें है, जो सौर सतह पर भंवरों के रूप में दिखाई देती हैं और सूर्य के रोटेशन की उल्‍टी दिशा में चलती हैं। इस रिसर्च को न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी और मुंबई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) ने मिलकर किया है। रिसर्च का सबसे आश्चर्यजनक पहलू यह है कि ये तरंगें मौजूदा थ्‍योरी से भी तीन गुना ज्‍यादा तेज रफ्तार से आगे बढ़ती हैं। सूर्य के आंतरिक क्षेत्रों में क्‍या हो रहा है, इसके लिए भी इन तरंगों की स्‍टडी जरूरी है। तारों को अबतक जितना समझा गया है, उसमें HFR तरंगें नई पहले साबित हो सकती हैं। फ‍िलहाल तो रिसर्चर्स यह समझना चाह रहे हैं कि आखिर क्‍यों ये तरंगें इतनी तेज गत‍ि से चलती हैं।  ने...

सूर्य को इतने करीब से देखा है? आज देख लीजिए

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दुनियाभर की एजेंसियां सूर्य से जुड़े रहस्‍यों का पता लगाने के लिए उसकी स्‍टडी कर रही हैं। इससे सोलर साइंस में नई रुचि जगी है। इस स्‍टडी में US नेशनल साइंस फाउंडेशन (NSF) का इनौये सोलर टेलीस्कोप (Inouye Solar Telescope) खगोलविदों की मदद कर रहा है। दुनिया के इस सबसे बड़े टेलीस्‍कोप ने हाल ही में अपने पहले आब्‍जर्वेशन को शुरू किया है, जिसे NSF ने ट्विटर पर शेयर किया है। इसमें सूर्य की नई सनस्‍पॉट इमेज की जानकारी दी गई है। हवाई में स्थित इनौये टेलीस्कोप को 25 साल से ज्‍यादा समय से तैयार किया जा रहा था। अब इसके जरिए सूर्य को समझने के तरीके में क्रांति लाई जा सकेगी।  सूर्य का सौर क्षेत्र जिसे कोरोना भी कहा जाता है, उसे समझने में वैज्ञानिकों की काफी दिलचस्‍पी है। वहां कई सौर गतिविधियां होती हैं। वैज्ञानिक यह भी समझना चाहते हैं कि सूर्य के इस क्षेत्र में चार्ज पार्टिकल्‍स का प्रवाह अचानक से क्‍यों तेज हो जाता है। इसमें वैज्ञानिकों की दिलचस्‍पी कोरोनल मास इजेक्शन (CME) की वजह से भी है, जिसका असर पृथ्‍वी तक हो सकता है। इस इजेक्‍शन की वजह से पृथ्‍वी पर बिजली ग्रिड, संचार नेटवर्क और कई उपग्रह...

पृथ्‍वी की कक्षा शेयर करने वाला एक और ट्रोजन एस्‍टरॉयड मिला, 3500 साल तक निभाएगा साथ

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पृथ्वी की कक्षा को शेयर करने वाले दूसरे ट्रोजन एस्‍टरॉयड (Trojan asteroid) के बारे में अटकलें खत्‍म हो गई हैं। रिसर्चर्स ने कन्‍फर्म किया है कि यह सच्‍चाई है। खगोलविदों ने साल 2020 में पृथ्वी की परिक्रमा करने वाले एक अन्‍य ट्रोजन एस्‍टरॉयड की खोज की थी। अब वैज्ञानिकों ने कन्‍फर्म किया है कि ट्रोजन एस्‍टरॉयड कोई असाधारण मामला नहीं है। यह छोटी अंतरिक्ष चट्टानें हैं, जो एक ग्रह के साथ ऑर्बिट शेयर करते हुए चक्कर लगाती हैं। ऐसे कई एस्‍टरॉयड को सौर मंडल के अन्य ग्रहों की परिक्रमा करते हुए खोजा गया है। पृथ्वी के साथ सूर्य की परिक्रमा करने के मामले में अब तक एस्‍टरॉयड 2010 TK7 को इकलौता ट्रोजन एस्‍टरॉयड माना जाता था। अब ‘2020 XL5' नाम का ट्रोजन एस्‍टरॉयड भी इस ग्रुप में शामिल हो गया है। 2020 XL5 एस्‍टरॉयड की लंबाई लगभग 1.2 किलोमीटर है। यह 2010 TK7 की तुलना में लगभग तीन गुना ज्‍यादा लंबा है। वैज्ञानिकों को यकीन है कि यह ट्रोजन एस्‍टरॉयड कम से कम 3500 साल तक इसी कक्षा में रहेगा और पृथ्‍वी के साथ-साथ सूर्य का चक्‍कर लगाता रहेगा।  2020 XL5 एस्‍टरॉयड को पहली बार दिसंबर 2020 में देखा गया था...

चीन ने ‘कृत्रिम सूर्य’ (artificial sun) पर प्रयोग किया

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First Published: January 10, 2022 | Last Updated:January 10, 2022 चीन ने हाल ही में चीन के पूर्वी प्रांत अनहुई में हेफ़ेई भौतिक विज्ञान संस्थान में ‘कृत्रिम सूर्य’ पर एक प्रयोग किया। मुख्य बिंदु 10,000 से अधिक चीनी और विदेशी वैज्ञानिक शोधकर्ताओं ने 948 मिलियन डॉलर की इस परियोजना में भाग लिया, जिसे Experiential Advanced Superconducting Tokamak (EAST) कहा जाता है। EAST एक फ्यूजन रिएक्टर है, जो हाल के परीक्षण में 70 मिलियन डिग्री सेल्सियस पर लगभग 20 मिनट तक सफलतापूर्वक चला।  यह सूर्य से पांच गुना अधिक गर्म था। पृष्ठभूमि EAST प्रणाली परमाणु संलयन (nuclear fusion) की प्रक्रिया को दोहराती है, जो 2006 में चालू हुई थी। इस प्रयोग ने जून 2021 में 160 मिलियन डिग्री सेल्सियस के तापमान पर पहुंचकर एक रिकॉर्ड तोड़ दिया, जो सूर्य से दस गुना अधिक गर्म था। Experimental Advanced Superconducting Tokamak (EAST) EAST हेफ़ेई, चीन में स्थित एक सुपरकंडक्टिंग टोकामक चुंबकीय संलयन ऊर्जा रिएक्टर (superconducting tokamak magnetic fusion energy reactor) है। चीनी विज्ञान अकादमी...

Gravitational action of sun and moon influences behaviour of animals and plants, study shows

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BRASILIA: The rhythms of activity in all biological organisms, both plants and animals, are closely linked to the gravitational tides created by the orbital mechanics of the Sun-Earth-Moon system. This truth has been somewhat neglected by scientific research but is foregrounded in a study by an international team of researchers. The findings by Cristiano de Mello Gallep at the University of Campinas (UNICAMP) in the state of Sao Paulo, Brazil, and Daniel Robert at the University of Bristol in the United Kingdom are published in the Journal of Experimental Botany. "All matter on Earth, both live and inert, experiences the effects of the gravitational forces of the Sun and Moon expressed in the form of tides. The periodic oscillations exhibit two daily cycles and are modulated monthly and annually by the motions of these two celestial bodies. All organisms on the planet have evolved in this context. What we sought to show in the article is that gravitational tides are a percepti...

NASA Dart Mission: NASA launches spacecraft to kick an asteroid off course | World News

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WASHINGTON: NASA is preparing a mission to deliberately smash a spacecraft into an asteroid -- a test run should humanity ever need to stop a giant space rock from wiping out life on Earth. It may sound like science fiction, but the DART (Double Asteroid Redirection Test) is a real proof-of-concept experiment, blasting off at 10:21 pm Pacific Time Tuesday (0621 GMT Wednesday) aboard a SpaceX rocket from Vandenberg Space Force Base in California. The goal is to slightly alter the trajectory of Dimorphos, a "moonlet" around 525 feet (160 meters, or two Statues of Liberty) wide that circles a much larger asteroid called Didymos (2,500 feet in diameter). The pair orbit the Sun together. Impact should take place in the fall of 2022, when the binary asteroid system is 6.8 million miles (11 million kilometers) from Earth, almost the nearest point they ever get. "What we're trying to learn is how to deflect a threat," NASA's top scientist Thomas Zuburchen said o...

Nasa spacecraft 'touches' sun for 1st time, dives into atmosphere

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CAPE CANAVERAL: A Nasa spacecraft has officially "touched" the sun, plunging through the unexplored solar atmosphere known as the corona. Scientists announced the news on Tuesday during a meeting of the American Geophysical Union. The Parker Solar Probe actually flew through the corona in April during the spacecraft's eighth close approach to the sun. Scientists said it took a few months to get the data back and then several more months to confirm. "Fascinatingly exciting," said project scientist Nour Raouafi of Johns Hopkins University. Launched in 2018, Parker was 8 million miles (13 million kilometers) from the center of the sun when it first crossed the jagged, uneven boundary between the solar atmosphere and outgoing solar wind. The spacecraft dipped in and out of the corona at least three times, each a smooth transition, according to scientists. "The first and most dramatic time we were below for about five hours ... Now you might think five ...