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हमारी आकाशगंगा के अंदर एक और गैलेक्‍सी? इस तस्‍वीर ने वैज्ञानिकों को भी हैरान किया

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रहस्‍यों से भरा हमारा ब्रह्मांड हर रोज कुछ नए आयाम पेश करता है। अब खगोलविदों ने हमारी आकाशगंगा के केंद्र में एक ऑब्‍जेक्‍ट को देखा है। यह एक छोटी सर्पिल आकार की आकाशगंगा लगती है। लेकिन ज्‍यादा संभावना इस बात की है कि यह एक तारा है। बताया जाता है कि यह तारा धूल से भरे गैलेक्टिक सेंटर में पृथ्‍वी से लगभग 26,000 प्रकाशवर्ष की दूरी पर स्थित है। यह तारा सूर्य से लगभग 32 गुना बड़ा है और वहां एक घूमती हुई गैस की विशाल डिस्‍क के अंदर बैठता है।  लाइव साइंस की रिपोर्ट के अनुसार, इस डिस्‍क को ‘प्रोटोस्टेलर डिस्क' के रूप में जाना जाता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि ब्रह्मांड में इस तरह की डिस्‍क व्‍यापक रूप से फैली हुई हैं। ये तारों के लिए फ्यूल का काम करती हैं और युवा तारों को लाखों साल में एक बड़ा और चमकीला सूरज बनने में मदद करती हैं। लेकिन खगोलविदों ने ऐसा पहले कभी नहीं देखा कि एक आकार में एक छोटी आकाशगंगा दिखने वाली यह चीज हमारी आकाशगंगा के केंद्र में खतरनाक तरीके से परिक्रमा कर रही हो।  सवाल उठता है कि यह छोटी सर्पाकार आकृति कैसे आई और क्‍या ऐसी और भी हैं। नेचर एस्‍ट्रोनॉमी में प्रक...

सूर्य पर दिखा सनस्‍पॉट 24 घंटे में दोगुना बढ़ा, विस्‍फोट हुआ तो पृथ्‍वी तक हो सकता है असर

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सूर्य हमारी आकाशगंगा का सबसे अहम हिस्‍सा है। इसी की वजह से पृथ्‍वी पर जीवन है। ऐसे में सूर्य में होने वाली घटनाओं पर वैज्ञानिकों की हर पल नजर रहती है। एक्‍सपर्ट सूर्य पर दिखाई दे रहे एक ‘विशाल सनस्पॉट' पर कड़ी नज़र रख रहे हैं। इसका आकार पिछले 24 घंटों में दोगुना हो गया है। बताया जाता है कि सोलर सर्फेस पर मौजूद यह अस्थिर पैच सीधे पृथ्वी की ओर मौजूद है। अगर यह फट जाता है तो सूर्य से पृथ्‍वी के रास्‍ते में एक सोलर फ्लेयर भड़क सकता है।  आगे बढ़ें, उससे पहले सोलर फ्लेयर को समझ लेना चाहिए। जब सूर्य की चुंबकीय ऊर्जा रिलीज होती है, तो उससे निकलने वाली रोशनी और पार्टिकल्‍स से सौर फ्लेयर्स बनते हैं। हमारे सौर मंडल में ये फ्लेयर्स अबतक के सबसे शक्तिशाली विस्फोट हैं, जिनमें अरबों हाइड्रोजन बमों की तुलना में ऊर्जा रिलीज होती है। इनमें मौजूद एनर्जेटिक पार्टिकल्‍स प्रकाश की गति से अपना सफर तय कोरोनल मास इजेक्शन भी होता है। द सन की रिपोर्ट के अनुसार, इस सोलर फ्लेयर के अभी पृथ्‍वी से टकराने की उम्‍मीद नहीं है, लेकिन अगर सनस्‍पॉट बढ़ता रहा, तो यह अस्थिर तरीके से व्‍यवहार कर सकता है। AR3038 नाम क...

वैज्ञानिकों ने खोज निकाले पृथ्‍वी जैसे दो ग्रह, क्‍या मुमकिन होगी एक और दुनिया?

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पृथ्‍वी से बाहर जीवन की खोज और पृथ्‍वी जैसे ग्रहों की तलाश में वैज्ञानिक जुटे हुए हैं। इसी कड़ी में नई कामयाबी हाथ लगी है। पृथ्‍वी जैसे दो ग्रहों वाला एक सौर मंडल हमसे काफी करीब लगभग 33 प्रकाश वर्ष दूर खोज लिया गया है। वैसे यह खोज पिछले साल अक्‍टूबर में ही हो गई थी, लेकिन साइंटिस्‍ट इसे पुख्‍ता कर रहे थे। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) के ट्रांजिटिंग एक्सोप्लेनेट सर्वे सैटेलाइट (TESS) ने इसे देखा था। आखिरकार 16 जून को कैलिफोर्निया में अमेरिकन एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी की एक बैठक में इसकी घोषणा की गई। इस खोज के बाद अहम सवाल यह उठता है कि क्‍या इन ग्रहों में जीवन संभव है? क्‍या पृथ्‍वी की तरह एक और दुनिया आने वाले वक्‍त में मुमकिन हो सकती है?  रिपोर्ट के अनुसार, इस सवाल का जवाब फ‍िलहाल तो ‘नहीं' में उत्‍तर देता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि हमारे पड़ोसी सौर मंडल में पृथ्वी के आकार वाले कम से कम दो चट्टानी ग्रह भले मौजूद हों, लेकिन इनमें से किसी के भी जीवन की मेजबानी करने की संभावना नहीं है।  इन दो ग्रहों में से एक का नाम HD 260655b बताया गया है। यह पृथ्वी से लगभग 1.2 गुना बड़ा ...

चीनी वैज्ञानिकों से एलियंस ने किया कॉन्‍टैक्‍ट! क्‍या वाकई हम दूसरी दुनिया से मिलने के करीब?

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21वीं सदी, विज्ञान का विकास, हर रोज बदलती तकनीक से रू-ब-रू होती यह दुनिया और यहां के लोग आज भी एलियंस का पता लगाने में जुटे हैं। दुनियाभर के वैज्ञानिक पृथ्‍वी या इसके बाहर एलियंस सभ्‍यता होने का अनुमान लगाते हैं और दिन-रात उनकी खोज में जुटे हैं। इस बीच, दुनियाभर में यह खबर जोरों पर है कि चीन ने एक विदेशी सभ्‍यता के संकेत प्राप्‍त किए हो सकते हैं। इस खबर के केंद्र में है चीन का ‘स्‍काई आई'। यह 500 मीटर एपर्चर का गोलाकार रेडियो टेलीस्कोप ((FAST) है, जो दक्षिण-पश्चिम चीन के गुइझोऊ प्रांत में स्थित है। चीन की सरकार के समर्थन वाले ‘साइंस एंड टेक्नोलॉजी डेली' की एक रिपोर्ट में कई बातें कही गई हैं। रिपोर्ट में एक्स्ट्रटरेस्ट्रीअल सिव‍िलाइजेशन सर्च टीम के चीफ साइंटिस्‍ट झांग टोनजी का हवाला दिया गया है। इस टीम को बीजिंग नॉर्मल यूनिवर्सिटी, चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज की नेशनल एस्ट्रोनॉमिकल ऑब्जर्वेटरी और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया द्वारा मिलकर बनाया गया है।  झांग टोनजी ने कहा है कि उनकी टीम ने साल 2020 में पहेलीनुमा संकेतों वाले सिग्‍नलों के 2 सेट देखे थे। इन सिग्‍नलों को साल 2019 में...

पूर्णिमा पर नजर आया ‘स्‍ट्रॉबेरी मून’, देखें ये शानदार तस्‍वीरें, आपको भी पसंद आएंगी!

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भारत समेत दुनियाभर के देशों में मंगलवार को सुपरमून ने आसमान को रोशन किया। हमारे लिए यह पूर्णिमा का चंद्रमा था, जबकि कई देशों में इसे सुपरमून, स्‍ट्रॉबेरी मून और यहां तक कि हनीमून भी कहा जाता है। यह इस साल का पहला सुपरमून था, जब‍ चंद्रमा, पृथ्‍वी के चारों ओर अपनी कक्षा के सबसे नजदीकी पॉइंट पर आया। इस वजह से पूर्णिमा का चांद काफी बड़ा और हल्‍का लाल रंग लिए हुए दिखाई दे रहा था। 14 जून को शाम 5.22 बजे से इसे देखा गया और लोगों ने सोशल मीडिया पर तस्‍वीरें शेयर कीं।  नासा के अनुसार, मंगलवार को चंद्रमा, पृथ्वी के चारों ओर अपनी कक्षा में निकटतम बिंदु पर था। इसे पेरिगी (perigee) कहा जाता है। इसी वजह से चंद्रमा ‘सुपरमून' जैसा दिखाई दिया। इस दौरान चंद्रमा का आकार बड़ा और चमकीला नजर आया। देश के कई राज्‍यों में आसमान साफ होने पर लोगों ने इसका दीदार किया।  सुपरमून की इस प्रक्रिया में पृथ्‍वी और चंद्रमा के बीच की दूरी करीब 26 हजार किलोमीटर कम हो गई थी। इसी वजह से चांद का यह आकार दिखाई दिया। मंगलवार की पूर्णिमा का चंद्रमा बाकी महीनों की पूर्णिमा के मुकाबले 10 फीसदी ज्‍यादा रोशन दिखाई दिया।   जू...

पृथ्वी से 240 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर मौजूद गैलेक्सी में ढूंढा गया एक रहस्यमई स्ट्रक्चर

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इस यूनिवर्स में बहुत सी चीजें हैं, जो हम अभी तक नहीं जानते हैं। लेकिन दुनिया भर के एस्ट्रोनोमर्स लगातार उन रहस्यों को सुलझाने में लगे हैं। उन्होंने हाल ही में एक पहले से अज्ञात स्ट्रक्चर की खोज की है, जिसमें एक विशाल गैलेक्सी को कवर करने वाला एक रेडियो एमिशन था, जो छाया में छिपा हुआ था। इस गैलेक्सी 3C 273 में रेडियो एमिशन हजारों लाइट-ईयर दूर तक फैला हुआ है। रिसर्चर्स का कहना है कि गैलेक्सी के सेंटर में एक ऊर्जावान ब्लैक होल है। उन्होंने वर्तमान में सबसे बड़ी खगोलीय प्रोजेक्ट, अटाकामा लार्ज मिलिमीटर/सबमिलिमीटर एरे (ALMA) का इस्तेमाल कर यह खोज की है। पृथ्वी से 2.4 अरब लाइट ईयर की दूरी पर 3C 273 गैलेक्सी स्थित है। यह गैलेक्सी एक क्वासर है, जिसका मतलब है कि यह एक आकाशगंगा का केंद्रक है जिसके सेंटर में एक बड़ा ब्लैक होल है। यह ब्लैक होल अपने आसपास के मैटीरियल को निगल लेता है, और उससे भारी मात्रा में रेडिएशन निकलती है। रिसर्चर्स के अनुसार, इस गैलेक्सी को अक्सर दूरबीनों से देखा जाता है, क्योंकि इसे आकाश में एक रेफरेंस पॉइन्ट के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। 3C273 दूसरे शब्दों में एक र...

धूमकेतु (Comet) क्या होते हैं, कहां से आते हैं, क्या ये धरती से टकरा सकते हैं? NASA ने दिए चौंकाने वाले जवाब

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हम अपने सौरमंडल के बारे में जानते हैं कि इसके ग्रह सूरज के चारों तरफ चक्कर लगाते हैं। लेकिन क्या आप ये भी जानते हैं कि सौरमंडल में ग्रहों के अलावा भी लाखों ऐसे खगोलीय पिंड हैं जो बर्फ और धूल के बने हैं। इन्हें धूमकेतु (Comet) कहा जाता है। NASA कहती है कि धूमकेतु भी सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हैं और ये धूल और बर्फ से बने बड़े बड़े खगोलीय पिंड होते हैं। अंतरिक्ष एजेंसी कहती है कि धूमकेतु आज से लगभग 4.6 खरब साल पहले बने थे जब सौरमंडल का निर्माण हुआ था। इन्हें इनकी जलती हुई या चमकती हुई पूंछ के कारण अधिक जाना जाता है।  आपके मन में भी यह सवाल आता होगा कि आखिर ये धूमकेतु आते कहां से हैं? नासा का कहना है कि ये सौरमंडल के मध्य में मौजूद हैं। इनमें से कुछ तो नेप्च्यून ग्रह के ऑर्बिट के बाहर भी पाए जाते हैं। इनमें से कुछ तो छोटे ऑर्बिट लाइफ वाले कॉमेट होते हैं जो सूरज का एक चक्कर लगाने में 200 साल का समय लेते हैं। दूसरे कॉमेट सौर मंडल के बाहरी छोर पर घूमते हैं जिसे ऊर्ट क्लाउट (Oort Cloud) कहा जाता है। इनके बारे में एजेंसी का कहना है कि ये सूरज का एक चक्कर लगाने में 25 हजार साल तक का वक्...

एलियंस की खोज में चीन! पृथ्‍वी से बाहर जीवन की तलाश के लिए बनाया मिशन

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साइंस बरसों से इस कोशिश में है कि पृथ्‍वी के नजदीक किसी ऐसे ग्रह का पता लगा सके, जहां जीवन मुमकिन हो। दुनियाभर के वैज्ञानिक कई साल से इन ग्रहों की खोज में जुटे हैं, लेकिन उन्‍हें कोई बड़ी कामयाबी अबतक नहीं मिल पाई है। बहरहाल अब चीन ने इस मिशन को अपने हाथ में लिया है। उसने एक ऐसे मिशन का प्रस्‍ताव रखा है, जो ऐसे ग्रहों की खोज में एक अलग रास्‍ता अपना सकता है। चीनी वैज्ञानिकों को उम्‍मीद है कि यह मिशन पृथ्‍वी से बाहर इन ग्रहों को लेकर पुख्‍ता नजर‍िया पेश कर सकता है। इस मिशन का नाम है क्लोजबाय हैबिटेबल एक्सोप्लैनेट सर्वे (CHES)। इस मिशन के तहत चीन हमारी पृथ्‍वी के आसपास स्थित तारों पर मौजूद ग्रहों की परिक्रमा के असर को जानेगा। इन ग्रहों को एक्‍सोप्‍लैनेट कहा जाता है। ऐसे ग्रह जो सूर्य के अलावा अन्य तारों की परिक्रमा करते हैं, वो एक्सोप्लैनेट कहलाते हैं। मिशन के जरिए यह समझने की कोशिश की जाएगी कि क्‍या फलां ग्रह में जीवन को बनाए रखने की क्षमता है। अगर ऐसा होता है, तो यह विज्ञान के लिए एक बड़ी उपलब्धि हो सकती है। बताया जाता है कि इस मिशन को एक स्‍पेसक्राफ्ट के जरिए पूरा किया जाएगा।  रिपो...

ब्‍लू व्‍हेल से भी 3 गुना बड़ा एस्‍टरॉयड आ रहा हमारे करीब, 6 जून को होगा ‘सामना’

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एस्‍टरॉयड जिज्ञासा जगाते हैं, जब ये पृथ्‍वी के पास से गुजरते हैं। कुछ ऐसा ही फ‍िर होने जा रहा है। नासा के अनुसार, ब्लू व्हेल से भी तीन गुना बड़ा एक एस्‍टरॉयड सोमवार को 26,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्‍वी के ऊपर से गुजरेगा। रिपोर्टों के अनुसार, 2021 GT2 नाम का यह एस्‍टरॉयड हमारी पृथ्‍वी से 35 लाख किलोमीटर की दूरी से पास होगा। यह पृथ्‍वी और चंद्रमा के बीच की औसत दूरी का 10 गुना है। इस हिसाब से यह माना जा सकता है कि यह एक सुरक्षित सफर होगा, जिसका पृथ्‍वी पर कोई असर दिखने की उम्‍मीद नहीं है।   हाल ही में एक और एस्‍टरॉयड- 7335 (1989 JA) भी पृथ्‍वी के करीब से गुजरा था। इसे संभावित रूप से खतरनाक की कैटिगरी में रखा गया था। यह इस साल का अबतक का सबसे बड़ा एस्‍टरॉयड था, जिसने हमारी पृथ्‍वी के पास से सफर किया।   बात करें एस्‍टरॉयड 2021 GT2 की, तो इस अंतरिक्ष चट्टान का पता पिछले साल लगा था। अनुमान है कि इसका आकार 121 से 272 फीट के बीच है। आसानी से समझने के लिए इसकी लंबाई एक ब्लू व्हेल की लंबाई से तीन गुना तक ज्‍यादा हो सकती है। क्‍योंकि यह साइज में बहुत बड़ा नहीं है, इसीलिए इसे पृथ...

Nasa ने खोज निकाला ‘नर्क’! जल्‍द नजर आएगी जलती दुनिया की पहली झलक

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अगले कुछ हफ्तों में दुनिया दो ऐसे ग्रहों को देख सकती है, जो कहने के लिए तो ‘सुपर अर्थ' हैं, पर किसी ‘नर्क' से कम नहीं हैं। अंतरिक्ष में तैनात दुनिया का सबसे बड़ा टेलीस्‍कोप- जेम्‍स वेब टेलीस्‍कोप इन ग्रहों को सामने ला सकता है। ये दोनों ‘सुपर अर्थ' हमसे 50 प्रकाश वर्ष दूर हैं। इनमें से एक ग्रह का नाम है ‘55 कैनरी ई' (55 Cancri e)। यह ग्रह अपने सूर्य के इतने करीब से चक्‍कर लगाता है कि इसकी सतह बेहद गर्म है। इतनी गर्म की आप इसे आग का गोला भी समझ सकते हैं।   रिपोर्टों के अनुसार, ‘55 कैनरी ई' अपने तारे से 15 लाख मील से भी कम दूरी पर स्थित है। नासा के मुताबिक, यह दूरी हमारे सूर्य और बुध ग्रह के बीच की दूरी का भी 1/25वां भाग है। इससे ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह ग्रह कितना गर्म होगा। माना जाता है कि यह ग्रह गर्म लावा के सागरों से ढका हुआ है। इसकी सतह का तापमान बेहिसाब हो सकता है, जो बुध ग्रह के तापमान से भी कई गुना ज्‍यादा हो सकता है।  सोचिए अगर पृथ्‍वी अपने सूर्य के इतने करीब होती, जिसमें एक साल का समय कुछ घंटों में ही पूरा हो जाता। इतनी गर्म होती कि महासागर उबल र...

लाखों किलोमीटर दूर तारों का सफर बिना स्‍पेसशिप के करेगा इंसान, यह तरीका आएगा काम!

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अगले 5 अरब साल में क्या होगा, जब सूर्य एक लाल ‘दानव' में बदल जाएगा यानी बहुत बड़ा और गर्म हो जाएगा व पृथ्वी को खा जाएगा? वैज्ञानिक लंबे समय से इस सवाल से जूझ रहे हैं। क्या यह घटना ब्रह्मांड से मानव जाति के खत्‍म होने की वजह बनेगी? क्या इस विनाश से प्रजातियों को बचाने का कोई तरीका है? इसका जवाब है एक ऐसे ग्रह की इंटरस्टेलर यात्रा जो मनुष्यों के लिए अगला घर हो सकता है। यह मानव जाति को बचाने का काल्पनिक तरीका है, लेकिन क्‍या ऐसा हकीकत में मुमकिन है? अगर हमें ऐसा कोई ग्रह मिल भी जाए, तो अंतरिक्ष यान से वहां तक पहुंचने में सैकड़ों और हजारों साल लग सकते हैं।  इसका मतलब है कि इंसान को पृथ्‍वी से बाहर अपना नया घर खोजने में कई पीढ़ियां लग जाएंगी। हालांकि एक रिसर्च पेपर से पता चलता है कि अंतरिक्ष यान के बिना भी इंटरस्टेलर यात्रा हो सकती है। अंतरतारकीय अंतरिक्ष उड़ान (interstellar travel) दो तारों या प्‍लेनेटरी सिस्‍टम के बीच अंतरिक्ष उड़ान द्वारा की गई यात्रा को कहते हैं। फि‍लहाल यह पूरी तरह काल्पनिक है। ह्यूस्टन कम्युनिटी कॉलेज में फ‍िजिक्‍स और एस्‍ट्रोनॉमी की प्रोफेसर इरिना रोमानोव्सक...

रिसर्च में दावा- हमारी आकाशगंगा में मौजूद हैं एलियंस की 4 सभ्‍यताएं, पृथ्‍वी पर कर सकती हैं हमला

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एलियंस हमारी दुनिया के लिए हमेशा से ही बहस का विषय रहे हैं। वैज्ञानिक इनके वजूद को ना तो नकारते हैं, ना ही पुख्‍ता तौर पर इनके होने की पुष्टि करते हैं। हमारी आकाशगंगा जिसे मिल्‍की वे भी कहते हैं, उसमें ऐसे लाखों ग्रहों के होने का अनुमान है, जो रहने लायक हो सकते हैं। अब एक नई रिसर्च से पता चलता है कि ऐसे लगभग चार ग्रह दुष्‍ट एलियन सभ्‍यताओं को शरण दे सकते हैं। ये एलियंस पृथ्‍वी पर हमला कर सकते हैं। प्रीप्रिंट डेटाबेस arXiv में इस रिसर्च को पोस्‍ट किया गया है। हालांकि इस रिसर्च पेपर को अभी तक रिव्‍यू नहीं किया गया है, पर इससे सवाल पैदा होता है कि आखिर ऐसी कौन सी संभावनाएं हैं कि इंसान एक दिन दुश्‍मन एलियंस से संपर्क कर सकता है, जो हमारे ग्रह पर हमला करने की ताकत रखते हैं।  livescience ने अपनी रिपोर्ट में रिसर्च के हवाले से लिखा है कि ऐसा मुमकिन है। स्‍टडी के इकलौते लेखक अल्बर्टो कैबलेरो स्पेन में विगो यूनिवर्सिटी में iपीएचडी के छात्र हैं। कैबलेरो कोई खगोल भौतिकीविद् नहीं हैं, लेकिन उन्होंने वाव! (Wow!) सिग्नल पर एक अध्ययन प्रकाशित किया है। वाव सिग्‍नल के बारे में भी कहा जाता है कि इ...

अंतरिक्ष में तैनात सबसे बड़ी दूरबीन खोलेगी पृथ्‍वी जैसे दो ग्रहों का राज!

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अमेरिकी स्‍पेस एजेंसी नासा (Nasa) ने पिछले साल दिसंबर में अंतरिक्ष में अबतक के सबसे बड़े टेलीस्‍कोप जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (James Webb Space Telescope) को लॉन्‍च किया था। यह टेलीस्‍कोप वहां खुद को सेटअप करने की प्रक्रिया पूरी करने वाला है और जल्‍द अपना काम शुरू कर सकता है। खबरों की मानें, तो इस टेलीस्‍कोप ने एक नई चट्टानी दुनिया का पता लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। बताया जाता है कि यह टेलीस्‍कोप 50 प्रकाश वर्ष दूर दो छोटे ग्रहों पर स्‍टडी करेगा।  space.com ने लिखा है कि मौजूदा टेलीस्‍कोप टेक्‍नॉलजी में गैसीय आवरण वाले ग्रहों के मुकाबले चट्टानी ग्रहों को देखना ज्‍यादा कठिन है। लेकिन जेम्‍स वेब टेलीस्‍कोप में लगे पावरफुल मिरर और डीप स्‍पेस लोकेशन की वजह से पृथ्‍वी से थोड़े बड़े दो ग्रहों को टटोलने का काम जल्‍द शुरू हो सकता है। खास बात यह है कि इन ग्रहों को ‘सुपर अर्थ' के रूप में जाना जाता है।    इन ग्रहों को भले ही सुपर अर्थ के तौर पर पहचाना  जाता है, लेकिन यहां जीवन मुमकिन नहीं है। इनमें से एक ग्रह तो बेहद गर्म लावा से ढका हुआ है, जिसका नाम 55 कैनरी ई है। वहीं दूसरे ग्रह का...

आप और हम पृथ्‍वी को ‘बर्बादी’ की ओर ले जा रहे! यह एकदिन अराजक हो जाएगी

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एक नई स्‍टडी में बताया गया है कि इंसान ना सिर्फ पृथ्‍वी को गर्म कर रहे हैं, बल्कि उसे अस्‍त-व्‍यस्‍त भी बना रहे हैं। जलवायु परिवर्तन अब कोई नई बात नहीं है। तमाम शोध इस मुहर लगा चुके हैं और यह भी साबित हो गया है कि जलवायु परिवर्तन के लिए इंसान ही काफी हद तक जिम्‍मेदार है। अब यह नई रिसर्च सामने आई है। 21 अप्रैल को इसे प्रीप्रिंट डेटाबेस arXiv पर पोस्‍ट किया गया था। इसमें इंसानी गतिविधि के क्‍लाइमेट पर असर की बात की गई है। जो निष्‍कर्ष सामने आए हैं, वो बिलकुल भी बेहतर नहीं हैं।  पुर्तगाल में पोर्टो यूनिवर्सिटी के फ‍िजिक्‍स और एस्‍ट्रोनॉमी डिपार्टमेंट के साइंटिस्‍ट इस स्‍टडी को लेखक हैं। उन्‍होंने समझाने की कोशिश की है कि अगर इंसान जलवायु परिवर्तन पर कदम नहीं उठाता है, तो वह कहां पहुंच जाएगा। स्‍टडी के अनुसार, अगर पृथ्‍वी का व्‍यवहार अराजक (chaotic) क्षेत्र में आ जाता है, तो हम जलवायु परिवर्तन से पार नहीं पा पाएंगे और सूखा, भयानक गर्मी, बारिश-बाढ़ जैसी घटनाओं को एक्‍स्‍ट्रीम लेवल पर झेलेंगे।    स्‍टडी के अनुसार, पृथ्वी समय-समय पर जलवायु पैटर्न में बड़े पैमाने पर बदलाव का अनुभव करती है...

पृथ्‍वी के पास से गुजर रहा बुर्ज खलीफा जितना बड़ा एस्‍टरॉयड, देखें वीडियो

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विज्ञान में दिलचस्‍पी रखने वालों के लिए एस्‍टरॉयड या क्षुद्रग्रह कौतूहल का विषय होते हैं। यह हर साल हमारी पृथ्‍वी के करीब से गुजरते हैं, जिनमें से कुछ को ‘खतरनाक' की श्रेणी में रखा जाता है। अंतरिक्ष में सफर कर रही ऐसी ही एक चट्टान जिसे एस्‍टरॉयड 7335 (1989 JA) के रूप में जाना जाता है, हमारी पृथ्‍वी के करीब से गुजर रही है। रिपोर्टों के अनुसार, यह इस साल का अबतक का सबसे बड़ा एस्‍टरॉयड है, जो पृथ्‍वी के पास से गुजर रहा है।  अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) की जेट प्रोपल्‍शन लेबोरेटरी ने भी इस एस्‍टरॉयड के पृथ्‍वी की ओर आने की जानकारी दी थी। बताया था कि 3,400 फीट चौड़ा एक विशाल एस्‍टरॉयड पृथ्‍वी की ओर बढ़ रहा है। कुछ दिनों पहले तक इसकी रफ्तार 47,196 किलोमीटर प्रति घंटा थी।  अगर आपकी दिलचस्‍पी इस फ्लाईबाई को देखने में है, तो इस यूट्यूब लिंक पर जाकर एक्‍सपीरियंस कर सकते हैं। भले ही इस एस्‍टरॉयड को पृथ्‍वी के लिए ‘संभाव‍ित रूप से खतरनाक' की कैटिगरी में रखा गया है, लेकिन यह पृथ्‍वी से काफी दूर होगा। यह दूरी, पृथ्‍वी और चंद्रमा की दूरी से भी 10 गुना ज्‍यादा है।     द वर्चुअल टेली...

50 हजार किमी/घंटे की रफ्तार से पृथ्‍वी की ओर आ रहा 3400 फीट का ‘खतरनाक’ एस्‍टरॉयड

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) की जेट प्रोपल्‍शन लेबोरेटरी ने एक एस्‍टरॉयड के पृथ्‍वी की ओर आने की जानकारी दी है। बताया है कि 3,400 फीट चौड़ा एक विशाल एस्‍टरॉयड पृथ्‍वी की ओर बढ़ रहा है। अभी इसकी रफ्तार 47,196 किलोमीटर प्रति घंटा है। अनुमान लगाया जा रहा है कि यह 27 मई को पृथ्वी के सबसे करीब होगा। इससे पहले 15 मई को रिसर्चर्स ने 1,600 फीट चौड़े एस्‍टरॉयड के बारे में जानकारी दी थी। हालांकि वह पृथ्वी के करीब नहीं आया। लेकिन इस रिपोर्ट ने अलर्ट कर दिया है, क्‍योंकि इसका साइज पिछले एस्‍टरॉयड का दोगुना है। इसे संभावित खतरनाक की कै‍टिगरी में रखा गया है।  जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी ने बताया है कि इस विशालकाय एस्‍टरॉयड का नाम 1989 JA है। इसका आकार 3,400 फीट है यानी यह 1.8 किलोमीटर चौड़ा है। इसे अपोलो कैटिगरी के एस्‍टरॉयड के रूप में क्‍लासिफाइड किया गया है। इसे और आसानी से समझना हो तो पृथ्‍वी की ओर बढ़ रहा एस्‍टरॉयड दुबई स्थित बुर्ज खलीफा से दोगुना बड़ा है।  हालांकि बहुत ज्‍यादा चिंत‍ित होने की बात नहीं है। रिपोर्टों में बताया गया है कि जब यह एस्‍टरॉयड पृथ्‍वी के सबसे करीब होगा, तब भी इसक...

ऑस्‍ट्रेलियाई रिसर्चर्स का कमाल : रात में चार्ज कर दिए सोलर पैनल… नहीं होगी बिजली की किल्‍लत!

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जलवायु परिवर्तन की वजह से भविष्‍य में विनाशकारी असर देखने को मिल सकता है। इससे निपटने के लिए दुनियाभर में सौर ऊर्जा के इस्‍तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है। हालांकि इसमें एक चुनौती सामने आती है। यह चुनौती है सूर्य की रोशनी। दुनिया के कई इलाकों में सूर्य की रोशनी बहुत अच्‍छे से नहीं पहुंचती। साथ ही रात में सौर पैनल चार्ज नहीं होते। इन चुनौतियों को ऑस्‍ट्रेलियाई रिसर्चर्स के एक ग्रुप ने सॉल्‍व करने का दावा किया है। रिसर्चर्स ने रात में ऊर्जा पैदा करने के तरीके को सामने रखा है।   सौर ऊर्जा के बारे में यह तो सभी जानते हैं कि सौर पैनल सीधे सूर्य की रोशनी से ऊर्जा को अवशोषित करते हैं और इसे बिजली में बदल देते हैं। लेकिन रात में सौर ऊर्जा पैदा करना असंभव है। लेकिन ऑस्‍ट्रेलियाई रिसर्चर्स जो दावा कर रहे हैं, उसे इस क्षेत्र में एक बड़े कदम के तौर पर देखा जाना चाहिए।  न्यू साउथ वेल्स यूनिवर्सिटी (UNSW सिडनी) की टीम ने रात में पृथ्वी द्वारा पैदा होने वाली गर्मी का इस्‍तेमाल किया है। दरअसल, सूर्य से आने वाली ऊर्जा पूरे दिन पृथ्वी को गर्म करती है और रात में हमारा ग्रह उतनी ही ऊर्जा अंतरिक्ष में ...

मिस्र के रेगिस्‍तान में मिला ‘परग्रही’ पत्‍थर हाइपेटिया सुलझाएगा सुपरनोवा का रहस्‍य!

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जब किसी तारे में विस्‍फोट होता है, तो वह बहुत अधिक चमकदार हो जाता है। इसे सुपरनोवा (supernova) कहते हैं। यह अंतरिक्ष में किसी तारे में होने वाले रहस्यमयी और चमकदार विस्फोटों में से एक है। हकीकत में सुपरनोवा इतने बड़े विस्‍फोट हैं, जिन्‍हें इंसानों ने देखा है। यह इतने बड़े एरिया को कवर करते हैं कि विस्‍फोट देखने के लिए दूरबीन की जरूरत होती है। सुपरनोवा आमतौर पर तब होता है, जब कोई विशालकाय तारा अपने विकास के आखिरी चरणों में पहुंचता है यानी वह बूढ़ा हो जाता है। इन घटनाओं को समझने के लिए कई स्‍टडी की जा रही हैं। रिसर्चर्स को उम्मीद है कि मिस्र के रेगिस्तान में मिला एक ‘परग्रही' पत्थर इन शानदार घटनाओं पर कुछ रोशनी डालने में मदद कर सकता है। इस पत्थर का नाम हाइपेटिया (Hypatia) है। दक्षिण अफ्रीका की जोहान्सबर्ग यूनिवर्सिटी समेत अन्‍य रिसर्चर्स का मानना ​​है कि यह पत्थर टाइप IA सुपरनोवा का पहला ठोस सबूत है। साल 2013 के बाद से कुछ वैज्ञानिकों ने हाइपेटिया के छोटे से टुकड़े में बेहद असामान्य कैमिस्‍ट्री के सुराग खोजे हैं। एक्‍सपर्ट की कल्‍पना है कि हाइपेटिया पत्थर की उत्पत्ति एक तारे से ...

moon: Scientists successfully grow plants in soil from the Moon

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WASHINGTON: That's one small pot of soil, one giant leap for man's knowledge of space agriculture: scientists have for the first time grown plants in lunar soil brought back by astronauts in the Apollo program. The ground-breaking experiment, detailed in the journal Communications Biology on Thursday, has given researchers hope that it may be possible to one day grow plants directly on the Moon. That would save future space missions much hassle and expense, facilitating longer and farther trips. However, according to the study's University of Florida authors, much remains to be studied on the topic, and they intend to leave no stone unturned. For their experiment, the researchers used just 12 grams (a few teaspoons) of lunar soil collected from various spots on the Moon during the Apollo 11, 12, and 17 missions. In tiny thimble-sized pots, they placed about a gram of soil (called "regolith") and added water, then the seeds. They also fed the plants a nutrient ...

Nasa के पूर्व साइंटिस्‍ट का दावा- अगले कुछ साल में इंसान को मिल जाएंगे एलियंस

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क्‍या पृथ्‍वी के बाहर भी जीवन मौजूद है? यह सवाल वर्षों से हमारे सामने बना हुआ है। इसी के साथ एक और प्रश्‍न सामने आता है कि क्‍या एलियंस हैं? अगर हैं तो उनका अस्तित्‍व कहां है और कब से है? वैज्ञानिक इन सवालों के जवाब खोजने में जुटे हैं। हालांकि उनके सामने अबतक कोई पुख्‍ता तथ्‍य नहीं आ पाया है। दुनिया में यह मानने वालों की कमी नहीं है कि पृथ्‍वी के बाहर भी जीवन है और एलियंस का वजूद है। ऐसा मानने वालों में नासा के एक पूर्व प्रमुख वैज्ञानिक भी शामिल हैं। एक टीवी इंटरव्‍यू में बीते दिनों उन्‍होंने कहा कि अगले कुछ साल में इंसान की मुलाकात एलियंस से होगी।     बीबीसी से बातचीत में जिम ग्रीन ने समझाया कि पृथ्वी के बाहर भी जीवन मौजूद है, इस विश्वास को व्यक्त करने के बाद इंसान वास्तव में आश्चर्यजनक खोज के करीब है। करीब 40 साल तक अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी में काम कर चुके जिम ने कहा, उन्‍हें उम्‍मीद है कि उनके जीवनकाल में एलियंस की खोज हो जाएगी। जिम ने कहा कि हम बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। अब हम यह जानते हैं कि हमारी आकाशगंगा में जितने ग्रह हैं, उससे भी कहीं अधिक तारे हैं। उन्होंने कहा कि उनमे...