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इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन में आती है भयंकर बदबू, वजह जानकर नहीं रुकेगी आपकी ‘हंसी’

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इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन (ISS) को अंतरिक्ष में यात्रियों का घर कहा जाता है। यात्री जब स्‍पेस स्‍टेशन के लिए उड़ान भरते हैं, तो पृथ्‍वी पर लाखों लोगों के लिए यह कौतुहल होता है कि वह वहां किस तरह से रहते होंगे। अंतरिक्ष में यात्रियों के पास तमाम सुविधाएं होती हैं, इसके बावजूद एक समस्‍या उन्‍हें सताती है। स्‍पेस स्‍टेशन में लंबा वक्‍त गुजारने वाले एक यात्री ने इसका खुलासा किया है, जिसके बारे में जानकर आपके चेहरे पर भी मुस्‍कुराहट बिखर जाएगी। अंतरिक्ष यात्री ने बताया है कि इंटरनेशनल स्‍पेस स्टेशन से एक ‘बारबेक्यू' की तरह बदबू आती है, क्योंकि ऑर्बिट में अंतरिक्ष यात्री ज्‍यादा गैस पास करते हैं।  डेली स्‍टार की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2016 में स्‍पेस स्टेशन पर 186 दिन बिताने वाले 50 वर्षीय टिम पीक ने एक पॉडकास्ट के दौरान 8 साल के बच्चे द्वारा पूछे गए एक सवाल में जवाब में यह हैरान करने वाली बात बताई।   टिम पीक से पूछा गया था कि स्‍पेस स्‍टेशन में हेलमेट पहनने के बाद अंतरिक्ष में डकार आना उन्‍हें कैसा लगता है? टिम ने कहा कि यह एक अच्‍छा सवाल है। उन्‍होंने खुलासा किया कि वास्‍तव में यात्...

वाराणसी में बनाया जाएगा स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (Skill India International Centre)

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First Published: May 14, 2022 | Last Updated:May 14, 2022 नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NSDC) और यूएई के डीपी वर्ल्ड के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं ताकि वाराणसी, उत्तर प्रदेश में एक स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर विकसित किया जा सके। डीपी वर्ल्ड की भारतीय इकाई, हिंदुस्तान पोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस MoU पर हस्ताक्षर क्यों किए गए? बंदरगाह संचालन, लॉजिस्टिक्स और संबद्ध क्षेत्रों के क्षेत्रों में विदेशी रोजगार के अवसरों को आगे बढ़ाने के लिए भारत के युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर्स का उद्देश्य क्या है? स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर्स का उद्देश्य भारतीय युवाओं को उच्च गुणवत्ता वाला प्रशिक्षण प्रदान करना है। ये केंद्र प्रशिक्षण सुविधाओं की मेजबानी करेंगे, जो कनाडा, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) क्षेत्र जैसे देशों में स्थित विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय नियोक्ताओं की मांग के अनुसार देश के युवाओं को कौ...

यूक्रेन युद्ध का असर! इंटरनेशनल स्‍पेस स्टेशन प्रोग्राम से अलग होगा रूस

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रूस ने इंटरनेशनल स्‍पेस स्टेशन (ISS) से बाहर निकलने का फैसला किया है। देश की अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस (Roscosmos) के लीडर ने एक मीडिया इंटरव्‍यू में यह खुलासा किया है। ISS से रूस कब तक अलग हो जाएगा, फ‍िलहाल इसकी कोई सही टाइमलाइन सामने नहीं आई है। हालांकि कहा जा रहा है कि रूसी ऑर्बिटल सेगमेंट (ROS) को मेंटेन रखने के लिए रूस कुछ समय तक इंटरनेशनल स्‍पेस स्टेशन पर काम करता रहेगा। रोस्कोस्मोस के प्रमुख दिमित्री रोगोजिन ने रूस की सरकारी समाचार एजेंसी Tass के साथ एक इंटरव्‍यू में कहा कि इंटरनेशनल स्‍पेस स्टेशन (ISS) से बाहर निकलने का फैसला पहले ही लिया जा चुका है।   उन्होंने इंटरव्‍यू में कथित तौर पर कहा कि हम इसके बारे में सार्वजनिक रूप से बात करने के लिए बाध्य नहीं हैं। मैं केवल यह कह सकता हूं कि हम अपने पार्टनर्स को ISS पर हमारा काम खत्म होने के बारे में एक साल पहले ही चेतावनी दे देंगे। उन्होंने इशारा दिया कि ISS के प्रोग्राम को छोड़ने का फैसला इसलिए भी है, क्‍योंकि रूस अब अपना ऑर्बिटल सर्विस स्‍टेशन तैनात करना चाहता है। याद रहे कि रूस साल 1998 में इस मिशन से जुड़ा था।   वैसे रूस न...

इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन के लिए उड़े Nasa के 4 एस्‍ट्रोनॉट, बिना मिट्टी के उग रहे पौधों पर करेंगे रिसर्च

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स्‍पेसएक्‍स (SpaceX) के जिस लॉन्‍च की बात हमने आज बताई थी, वह हो गया है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) के लिए चार एस्‍ट्रोनॉट्स को लेकर स्‍पेसएक्‍स का फॉल्‍कन 9 रॉकेट दोहपर करीब डेढ़ बजे उड़ा। कैनेडी स्‍पेस सेंटर से लॉन्‍च हुए इस मिशन में अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री केजेल लिंडग्रेन, बॉब हाइन्स और जेसिका वॉटकिंस के साथ यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के इतालवी मेंबर सामंथा क्रिस्टोफोरेटी भी शामिल थे। ये सभी अगले 6 महीने के लिए मिशन पर निकले हैं और 17 घंटे का सफर करके इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन (ISS) पर पहुंचेंगे। लॉन्‍च को नासा की वेबसाइट और सोशल मीडिया पर लाइव स्‍ट्रीम किया गया।  एक न्‍यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अरबपति एलन मस्‍क की कंपनी स्‍पेसएक्‍स ने 40 घंटे के अंतराल में एक मिशन को ISS से पृथ्‍वी पर लैंड कराकर दूसरे मिशन के लिए उड़ान भरी है। यह नासा के लिए अंतरिक्ष के सफर पर जाने वाली प्रमुख ‘टैक्‍सी' बन गई है, जिसकी सेवाएं 2020 से ली जा रही हैं।   इससे पहले अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी रूस के रॉकेट सोयुज पर निर्भर थी, जिसकी जगह अब स्‍पेसएक्‍स के फॉल्‍कन 9 रॉकेट ने ले ली है। क्रू-...

जनवरी 2031 में इंटरनेशनल स्‍पेस स्टेशन को प्रशांत महासागर में क्रैश कराएगी NASA, जानें क्‍यों

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अंतरिक्ष की उड़ान भरने वाले यात्रियों के लिए इंटरनेशनल स्‍पेस स्टेशन (ISS) काफी अहमियत रखता है। इसे अंतरिक्ष यात्रियों का घर भी कहा जाता है। यही इंटरनेशनल स्‍पेस स्टेशन अपनी ऑपरेशनल लाइफ के आखिरी दशक में प्रवेश कर रहा है और नासा (NASA) इसे कमर्शल एक्टिविटीज के लिए खोलने की योजना बना रही है। नासा की एक नई रिपोर्ट में ट्रांजिशन प्लान के बारे में डिटेल में बताया गया है। एलन मस्क (Elon Musk) के मालिकाना हक वाली स्पेसएक्स (SpaceX) समेत कई प्राइवेट एक्‍सप्‍लोरेशन कंपनियां मल्‍टी-बिलियन डॉलर की स्‍पेस इकॉनमी की होड़ में हैं। ब्रॉडबैंड इंटरनेट देने के लिए पृथ्वी की निचली कक्षा में स्पेसएक्स ने हजारों छोटे सैटेलाइट्स को पहले ही लॉन्च कर दिया है। जेफ बेजोस और रिचर्ड ब्रैनसन जैसे अरबपति भी स्‍पेस टूरिज्‍म फ्लाइट्स की योजना बना रहे हैं। नासा ने जनवरी 2031 में ISS को ‘डीऑर्बिट' करने और प्रशांत महासागर में क्रैश करने की योजना बनाई है। इससे पहले वह अंतरिक्ष स्टेशन पर रिसर्च और टेक्‍नॉलजी डेवलपमेंट के एक दशक के रिजल्‍ट का इतंजार कर रही है। एक रिपोर्ट में नासा ने कहा है कि वह कर्मशल एक्टिविटीज...