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पीएम श्री स्कूल (PM Shri Schools) क्या हैं?

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First Published: June 4, 2022 | Last Updated:June 4, 2022 केंद्र सरकार छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करने के उद्देश्य से अत्याधुनिक ‘पीएम श्री स्कूल’ स्थापित करने की योजना बना रही है और ये स्कूल नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) की प्रयोगशाला के रूप में काम करेंगे। गुजरात के गांधीनगर में दो दिवसीय राष्ट्रीय शिक्षा मंत्री सम्मेलन को संबोधित कर रहे शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ‘पीएम श्री स्कूलों’ की घोषणा की।  इस कार्यक्रम में 32 केंद्र शासित प्रदेशों और राज्यों के शिक्षा मंत्रियों ने भाग लिया जबकि तमिलनाडु ने इस बैठक का बहिष्कार किया। मुख्य बिंदु  शिक्षा मंत्री द्वारा भारतीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से पीएम श्री स्कूलों के रूप में भविष्य के बेंचमार्क मानकों को बनाने के उद्देश्य से शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र के बारे में अपनी प्रतिक्रिया साझा करने का आग्रह किया गया।  पीएम श्री स्कूलों की संरचना क्या होगी? शिक्षा मंत्री ने प्रारंभिक बचपन देखभाल और शिक्षा कार्यक्रम (Early Childhood Care and Education Programme – ECCE), शिक्षक प्रशिक्षण, वयस...

स्कूलों में मिड डे मील बनाने वाली सहायिकाएं मानदेय न मिलने से मुसीबत में

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प्रतीकात्मक फोटो. नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 16 लाख बच्चों के लिए मिड डे मील बनाने वाली हेल्परों को 6-6 महीने से मानदेय नहीं मिला जिससे वे खुद भुखमरी के कगार पर हैं. मिड डे मील बनाने वाली इन महिलाओं को क्यों मानदेय नहीं मिला है, इस बारे में प्रशासन तकनीकी खामी को कारण बता रहा है.   यह भी पढ़ें हापुड़ के शिवगढ़ी प्राथमिक  विद्यालय में 60 साल की गीता शर्मा बच्चों के लिए मिड डे मील बनाती हैं. इसके ऐवज में उनको हर महीना 1500 रुपये मिलते हैं. लेकिन येह मानदेय भी सात महीने से नहीं आया है. गीता शर्मा कहती हैं कि ''कैसे अपने बच्चों सा पेट भरें? यहां आकर खाना बनाते हैं और 8-8 महीने हो जाते हैं, पैसे नहीं मिलते हैं. कैसे काम करें.'' गीता शर्मा अकेले नहीं हैं, मोहसिना के पति बीमार हैं. वे भी अपना घर चलाने के लिए सरकारी स्कूल में मिड डे मील बनाती हैं लेकिन उनका भी मानदेय नहीं मिला है. मोहसिना ने कहा कि ''मेरा पति बीमार रहता है, मैं यहां खाना भी बनाती हूं, फिर मजदूरी करने भी जाती हूं. लेकिन पैसे ही नहीं मिल रहे हैं.'' शिवगढ़ी के...

गुजरात में पांच फरवरी तक जारी रहेगी कक्षा एक से नौ तक के छात्रों की ऑनलाइन क्लास

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प्रतीकात्मक फोटो. अहमदाबाद: गुजरात सरकार ने सोमवार को कहा कि कक्षा एक से नौ तक के छात्रों के लिए ऑनलाइन कक्षाएं वर्तमान COVID-19 संक्रमण के हालात को देखते हुए पांच फरवरी तक जारी रहेंगी. एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर में आयोजित कोर कमेटी की बैठक में कक्षा एक से नौ तक के लिए स्कूलों में ऑनलाइन शिक्षा जारी रखने का निर्णय लिया. सरकार ने कहा कि कक्षा एक से नौ तक के छात्रों के लिए पांच फरवरी तक ऑनलाइन कक्षाएं जारी रखने का निर्णय छात्रों और उनके स्वास्थ्य के व्यापक हित में लिया गया है. यह भी पढ़ें राज्य में कोरोना के मामलों में अचानक वृद्धि के बाद सरकार ने सात जनवरी को 31 जनवरी तक कक्षा एक से नौ तक के स्कूलों में व्यक्तिगत कक्षाओं की अनुमति देने के खिलाफ फैसला किया था. ऑफ़लाइन शिक्षा के बारे में एक नया निर्णय पांच फरवरी को लिया जाएगा. विज्ञप्ति में कहा गया है कि गुजरात में सोमवार को कोरोना के 6,679 मामले दर्ज किए गए, जो 10 जनवरी के बाद से सबसे कम हैं. राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार राज्य में अब तक कुल संक्रमितों की संख्या 11,60...