Posts

Showing posts with the label एकसपलनट

इन ग्रहों में पत्थर भी पिघल जाते हैं, NASA ने खोजे 3 हजार डिग्री फारेनहाइट वाले एक्सोप्लैनेट

Image
NASA के वैज्ञानिकों ने ऐसे ग्रह खोजे हैं, जहां तापमान 3,000 डिग्री फारेनहाइट (लगभग 1650 डिग्री सेल्सियस) से अधिक हो जाता है, जो टाइटेनियम को भी पिघलाने के लिए काफी है। अल्ट्रा-हॉट एक्सोप्लैनेट के अपने अध्ययन के दौरान, नासा हबल टेलीस्कोप के साथ काम करने वाले खगोलविदों (एस्ट्रोनॉमर्स) की टीमों ने 1300 लाइट ईयर दूर एक एक्सोप्लैनेट WASP-178b की जानकारी दी है। NASA के हबल स्पेस टेलीस्कोप का इस्तेमाल करते हुए, एस्ट्रोनॉमर्स ने पाया कि WASP-178b का एक हिस्सा हमेशा इसके जलते हुए तारे के सामने रहता है। दिन के समय यह देखा गया है कि एक्सोप्लैनेट पर वातावरण सिलिकॉन मोनोऑक्साइड गैस से घिरा हुआ रहता है। वहीं, अंधेरे वाले हिस्से की  तरफ सिलिकॉन मोनोऑक्साइड आसमान से नीचे गिरने वाली चट्टानों में बदलने के लिए पर्याप्त ठंडा होता है। लेकिन सुबह होने के समय और शाम के समय, ये वही चट्टानें गर्म तापमान के कारण भाप हो जाती हैं। यह अध्ययन नेचर पत्रिका (Nature journal) में पब्लिश हुआ था। बाल्टीमोर, मैरीलैंड में जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय से दो अध्ययनों पर सह-लेखक डेविड सिंग (David Sing) ने कहा (अनुवादित) ...

सौर मंडल के बाहर मिला ‘चंद्रमा’, बृहस्‍पति जितने बड़े एक्सोप्लैनेट के लगाता है चक्‍कर

Image
वैज्ञानिकों ने 10,000 से ज्‍यादा एक्सोप्लैनेट (exoplanets) की खोज की है, जो हमारे सौर मंडल से बाहर हैं। हालांकि वैज्ञानिक उनमें से किसी की परिक्रमा करते हुए चंद्रमा का पता नहीं लगा पाए हैं। एक नई स्‍टडी में वैज्ञानिकों ने खोज की नई रूपरेखा तैयार की है। शोधकर्ताओं को लगता है कि अब उन्हें जो खगोलीय पिंड मिला है, वह सौर मंडल के बाहर किसी ग्रह की परिक्रमा करने वाला विशाल चंद्रमा हो सकता है। यह चंद्रमा, बृहस्पति के आकार के एक एक्सोप्लैनेट की परिक्रमा करता है। अगर जांच में यह कन्‍फर्म हो जाता है, तो यह पहला ‘एक्सोमून' बन सकता है। हालांकि चार पहले भी एक खगोलीय पिंड के एक्‍सोमून होने की बात कही गई थी। उस खोज की अभी पुष्टि नहीं हो पाई है। कई विशेषज्ञों को लगता है कि इस खगोलीय पिंड के साथ भी यही हो सकता है। वैसे इन दोनों खगोलीय पिंडों में कई खासियत भी हैं। ये एक ही ग्रह के चक्‍कर लगाते हैं। हाल में मिला खगोलीय पिंड पहले मिले पिंड से थोड़ा छोटा है। वैज्ञानिकों को लगता है कि ये दोनों चीजें गैस से बनी हैं। यह ग्रह भी हो सकती थीं, लेकिन दूसरे ग्रह ने इन्‍हें अपनी कक्षा में खींच लिया।  नेचर ...