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Boeing की बड़ी कामयाबी, ISS से पृथ्‍वी पर लौटा स्‍टारलाइनर… अब होगी SpaceX से टक्‍कर!

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तीन साल की देरी के बाद लॉन्‍च हुआ बोइंग (Boeing) का पहला स्‍पेस मिशन पूरा हो गया है। इसका ‘स्‍टारलाइनर कैप्‍सूल', इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन (ISS) से सुरक्षित पृथ्‍वी पर लौट आया। स्‍थानीय समय के अनुसार, 25 मई की शाम 6:49 बजे स्टारलाइनर कैप्सूल ने न्यू मैक्सिको में अमेरिकी सेना की वाइट सैंड्स मिसाइल रेंज (WSRM) के वाइट सैंड्स स्पेस हार्बर में लैंडिंग की। इसके साथ ही बोइंग की मानवरहित ऑर्बिटल टेस्ट फ्लाइट 2 (OFT-2) का सफल समापन हो गया। इस मिशन का मकसद भविष्‍य में बोइंग के स्‍पेसक्राफ्ट में अं‍तरिक्ष यात्रियों को ले जाना है। अमेरिकी एयरोस्‍पेस की दौड़ में कई प्राइवेट कंपनियां मुकाबला कर रही हैं। बोइंग भी इनमें शामिल है। उसका यह मिशन एलन मस्‍क के स्‍पेस वेंचर ‘स्‍पेसएक्‍स' को चुनौती देगा।   स्टारलाइनर कैप्‍सूल ने 19 मई की शाम ‘यूनाइटेड लॉन्च अलायंस' के एटलस वी रॉकेट पर उड़ान भरी थी। करीब 24 घंटे के बाद उसने आईएसएस पर डॉक किया था, जो बोइंग के लिए एक बड़ी कामयाबी थी। इससे पहले दो बार बोइंग को इस मिशन को टालना पड़ा था। पहली बार, साल 2019 में सॉफ्टवेयर फेल होने से लॉन्‍च नहीं हो...

अंतरिक्ष से दिखा चंद्र ग्रहण का शानदार नजारा, लाजवाब हैं ये तस्‍वीरें

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इस साल का पहला चंद्र ग्रहण खत्‍म हो गया है। भारत में यह दिखाई नहीं दिया, लेकिन कई देशों के लोग इस खगोलीय घटना के गवाह बने। लंदन, पेरिस, रोम, ब्रुसेल्स, जोहान्सबर्ग, मैड्रिड, सैंटियागो, वॉशिंगटन, न्यू यॉर्क, रियो डी जनेरियो और शिकागो में लोगों ने पूर्ण चंद्र ग्रहण को देखा। इस बीच, दिल को छू लेने वाली तस्‍वीरें आई हैं अंतरिक्ष से। इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन (ISS) पर मौजूद अंत‍रिक्ष यात्रियों ने 15 मई की रात पूर्ण चंद्र ग्रहण की हैरान करने वाली तस्‍वीरें खींचीं।  यूरोपीय अंतरिक्ष यात्री सामंथा क्रिस्टोफोरेटी ने ट्विटर पर कई स्नैपशॉट शेयर किए हैं। इनमें स्‍पेस स्टेशन के इक्विपमेंट से तैयार किए गए ‘सुपर फ्लावर ब्लड मून' चंद्र ग्रहण के विभिन्न चरणों को दिखाया गया है। तस्‍वीरों में नीचे बादलों से ढकी पृथ्वी दिख रही है। अपने ट्वीट में क्रिस्टोफोरेटी लिखती हैं, ‘क्या आप भाग्यशाली कल रात के चंद्र ग्रहण को देखने के लिए? हम थे!'  क्रिस्टोफोरेटी ने जो इमेजेस शेयर की हैं, उनमें से कुछ में अंतरिक्ष स्टेशन के सौर पैनलों के पास चंद्रमा एकदम अंधेरे में नजर आता है। बताया जाता है कि अगला पूर्ण च...

स्‍पेस में रहने से बड़ा हो जाता है अंतरिक्ष यात्रियों का दिमाग, जानें क्‍यों होता है ऐसा

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अंतरिक्ष की यात्रा पर जाना जितना रोमाचंक लगता है, यह उतना ही मुश्किलों से भरा है। अंतरिक्ष में रहने के दौरान यात्रियों को कई बदलावों से गुजरना पड़ता है, जिसका असर उनके मस्तिष्‍क पर दिखाई देता है। रिसर्चर्स ने इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन (ISS) पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के दिमाग में बदलाव का पता लगाया है। रिसर्चर्स ने 15 अंतरिक्ष यात्रियों के दिमाग पर शोध किया। उन्‍हें पता चला कि मस्तिष्क में रक्त वाहिकाओं के आसपास की जगह, जो द्रव यानी फ्लूइड से भरी होती है, उसमें बदलाव आ गया।  यह रिसर्च ‘साइंटिफिक रिपोर्ट्स जर्नल' में प्रकाशित हुई है। इसमें बताया गया है कि रिसर्चर्स ने मैग्‍नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (MRI) का इस्‍तेमाल करके अंतरिक्ष में जाने वाले से पहले यात्रियों के दिमाग को देखा। जब अंतरिक्ष यात्री इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन पर पहुंच गए, उसके बाद भी रिसर्चर्स ने एक-एक महीने के अंतराल पर उनके दिमाग को देखा। 6 महीने बाद जब अंतरिक्ष यात्री पृथ्‍वी पर लौटे, तो उनकी बारीकी से जांच की गई।  रिसर्चर्स ने पाया कि अंतरिक्ष यात्रियों के दिमाग में द्रव से भरी वह जगह जिसे पेरिवास्कुलर स्पेस ...

इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन के लिए उड़े Nasa के 4 एस्‍ट्रोनॉट, बिना मिट्टी के उग रहे पौधों पर करेंगे रिसर्च

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स्‍पेसएक्‍स (SpaceX) के जिस लॉन्‍च की बात हमने आज बताई थी, वह हो गया है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) के लिए चार एस्‍ट्रोनॉट्स को लेकर स्‍पेसएक्‍स का फॉल्‍कन 9 रॉकेट दोहपर करीब डेढ़ बजे उड़ा। कैनेडी स्‍पेस सेंटर से लॉन्‍च हुए इस मिशन में अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री केजेल लिंडग्रेन, बॉब हाइन्स और जेसिका वॉटकिंस के साथ यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के इतालवी मेंबर सामंथा क्रिस्टोफोरेटी भी शामिल थे। ये सभी अगले 6 महीने के लिए मिशन पर निकले हैं और 17 घंटे का सफर करके इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन (ISS) पर पहुंचेंगे। लॉन्‍च को नासा की वेबसाइट और सोशल मीडिया पर लाइव स्‍ट्रीम किया गया।  एक न्‍यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अरबपति एलन मस्‍क की कंपनी स्‍पेसएक्‍स ने 40 घंटे के अंतराल में एक मिशन को ISS से पृथ्‍वी पर लैंड कराकर दूसरे मिशन के लिए उड़ान भरी है। यह नासा के लिए अंतरिक्ष के सफर पर जाने वाली प्रमुख ‘टैक्‍सी' बन गई है, जिसकी सेवाएं 2020 से ली जा रही हैं।   इससे पहले अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी रूस के रॉकेट सोयुज पर निर्भर थी, जिसकी जगह अब स्‍पेसएक्‍स के फॉल्‍कन 9 रॉकेट ने ले ली है। क्रू-...

Nasa के लिए एक और लॉन्‍च करने जा रही SpaceX, 4 एस्‍ट्रोनॉट को भेजेगी ISS पर

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अंतरिक्ष की दुनिया में एलन मस्‍क की कंपनी स्‍पेसएक्‍स (SpaceX) नई कामयाबियां गढ़ रही है। हाल ही में इसने दुनिया के पहले प्राइवेट स्‍पेस मिशन को इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन (ISS) तक पहुंचाया। अब एक बार फ‍िर यह रॉकेट कंपनी ISS के लिए एक लंबे वक्‍त के अंतरिक्ष यात्री क्रू को लॉन्‍च करने वाली है। यह लॉन्‍च अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) के लिए किया जाना है। इस मिशन में डॉक्‍टर से स्‍पेसवॉकर बने शख्‍स और एक जियोलॉजिस्‍ट शामिल हैं।  सब कुछ योजना के अनुसार हुआ, तो अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित कैनेडी स्पेस सेंटर से आज दोपहर करीब डेढ़ बजे तीन अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री उड़ान भरेंगे। उनके साथ यूरोपी अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) का उनका एक साथी भी होगा। ये सभी अगले 6 महीने के लिए मिशन पर जाएंगे और 17 घंटे का सफर करके इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन पर पहुंचेंगे। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इन्‍हें स्‍पेसएक्‍स के फाल्‍कन 9 रॉकेट से ले जाया जाएगा।  क्रू 4 नाम का यह मिशन नासा का ऐसा चौथा मिशन है, जिसमें वह स्‍पेसएक्‍स के रॉकेट का इस्‍तेमाल करके अंतरिक्ष यात्रियों को ISS पर भेज रही है। स्‍पेसएक्‍स ने साल 2020 म...

420 करोड़ रुपये का टिकट लेकर अंतरिक्ष की सैर पर गए तीन बिजनेसमैन लौटे पृथ्‍वी पर

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दुनिया के पहले प्राइवेट मिशन के तहत इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन (ISS) पर गए तीन अमीर बिजनेसमैन और नासा के एक पूर्व अंतरिक्ष यात्री करीब दो सप्‍ताह बाद सोमवार को पृथ्‍वी पर वापस लौट आए। उन्‍होंने अमेरिका के फ्लोरिडा तट पर लैंडिंग की। अमेरिकी कंपनी Axiom Space के इस मिशन में एलन मस्‍क की कंपनी स्‍पेसएक्‍स (SpaceX) और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) ने भी भूमिका निभाई थी। इस मिशन को पहले ही पृथ्‍वी पर लैंड करना था, लेकिन मौसमी बाधाओं के चलते देरी हुई। आखिरकार चार विशाल पैराशूट पर सभी अंतरिक्ष यात्रियों ने धरती पर सफल लैंडिंग कर ली।  अंतरिक्ष यात्रियों के स्‍पेसशिप ने 17,500 मील प्रति घंटे (28,000 किलोमीटर प्रति घंटे) की रफ्तार से वातावरण में दोबारा प्रवेश किया। इस वजह से स्‍पेसशिप पर आए निशानों के चलते इस ‘टोस्टेड मार्शमैलो' कहकर पुकारा गया। एक न्‍यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, एक्सिओम स्पेस के ऑपरेशंस डायरेक्‍टर, डेरेक हासमैन ने कहा कि हमने साबित किया कि हम चालक दल को इस तरह से तैयार कर सकते हैं, जो उन्हें ऑर्बिट में इफेक्टिव और प्रोडक्टिव बनाता है। हम ऐसा फिर से करने के लिए त...

Nasa ने टेस्‍ट की ‘होलोपोर्टेशन’ तकनीक, अंतरिक्ष यात्रियों के सामने आए डॉक्‍टर, जानें इसके बारे में

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने बताया है कि उसने ‘होलोपोर्टेशन' (holoportation) नाम की एक कम्‍युनिकेशन टेक्‍नॉलजी को टेस्‍ट किया है। यह एक ऐसा शब्‍द लगता है, जो मानो किसी साइंस फ‍िक्‍शन मूवी से आया हो और रोजाना जिंदगी में इसकी बहुत कम प्रासंगिकता हो। हालांकि यह शब्द ‘होलोग्राम' और ‘टेलीपोर्टेशन' का कॉम्‍बि‍नेशन है। पिछले साल अक्टूबर में नासा ने इस इनोवेट‍िव 3D तकनीक का इस्‍तेमाल अपने फ्लाइट सर्जन डॉ. जोसेफ श्मिड को इंटरनेशनल स्‍पेस स्टेशन पर ‘होलोपोर्ट' करने के लिए किया था, जबकि डॉक्‍टर फ‍िजिकली पृथ्वी पर मौजूद थे। इस तकनीक के तहत डॉ श्मिड और उनकी टीम के मेंबर्स के 3D होलोग्राम बनाए गए और उन्हें स्‍पेस  स्टेशन पर ट्रांसमिट किया गया, जो अंतरिक्ष यात्रियों के साथ लाइव बातचीत के रूप में दिखाई दिया। नासा के मुताबिक, होलोपोर्टेशन कम्‍युनिकेशन, लोगों के हाई-क्‍वॉलिटी वाले 3D मॉडल्‍स को रियल टाइम में कहीं भी ट्रांसमिट करने की इजाजत देता है। अगर इसे माइक्रोसॉफ्ट के होलोलेन्स जैसे मिक्‍स्‍ड रियलिटी डिस्प्ले के साथ जोड़ा जाता है, तो यह तकनीक यूजर्स को 3D में लोगों को ...

420 करोड़ रुपये का ‘टिकट’ लेकर अंतरिक्ष में गए 4 यात्रियों की वापसी में होगी देरी, यह है वजह

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अंतरिक्ष की दुनिया में पिछले दिनों इतिहास बना, जब पहली बार एक प्राइवेट मिशन के तहत चार यात्रियों ने इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन (ISS) के लिए उड़ान भरी। अब खबर आ रही है कि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) ने खराब मौसम की वजह से ISS से इस प्राइवेट मिशन की अनडॉकिंग में देरी की है। इस वजह से एक्सिकॉम मिशन 1 (Ax-1) को इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन में कुछ और घंटे बिताने होंगे। दरअसल, स्प्लैशडाउन लोकेशन पर मौसम ठीक नहीं होने की वजह से इस मिशन में देरी की जा रही है। NASA, SpaceX और Axiom Space ने मिलकर इस स्‍पेसक्राफ्ट के तय डिपार्चर को स्‍थगित कर दिया है।  नासा में स्पेस ऑपरेशंस मिशन डायरेक्टरेट की असोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर कैथी लाइडर्स ने ट्वीट किया है कि मौसम सही नहीं होने के कारण हम इंटरनेशनल स्‍पेस स्टेशन से आज रात होने वाली एक्सिकॉम मिशन 1 की अनडॉकिंग को रोक रहे हैं। NASA, Axiom Space और SpaceX की टीमें दुनिया के पहले प्राइवेट अंतरिक्ष यात्री मिशन की वापसी के लिए बेस्‍ट मौके की तलाश कर रही हैं।  We're waving off tonight's undocking of Axiom Mission 1 from @Space_Station due to unf...

अंतरिक्ष से खींची माउंट एवरेस्‍ट की तस्‍वीर, ISS पर सवार यात्रियों का कमाल!

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इंटरनेशनल स्‍पेस स्टेशन (ISS) पर सवार अंतरिक्ष यात्रियों ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (Mount Everest) की एक आश्चर्यजनक तस्वीर खींची है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने इसे इंस्टाग्राम पर शेयर किया है। तस्वीर में बर्फ से ढकी कई चोटियों के साथ पहाड़ों का एरियल व्‍यू दिखाई दे रहा है। जमीन से ऐसी तस्‍वीर नजर नहीं आ सकती, क्‍योंकि तब पहाड़ बहुत बड़े दिखाई देते हैं। अंतरिक्ष से देखने पर यह आपस में मिलते-जुलते नजर आते हैं। एरियल इमेज देखने पर पहाड़ों को पहचानना भी मुश्किल होता है। यह भी समझ नहीं आता कि कौन सा पॉइंट सबसे ऊंचा है।     नासा ने इस पोस्‍ट को कैप्‍शन दिया है, ऐसा माउंट एवरेस्ट आपने पहले कभी नहीं देखा होगा। पृथ्वी का सबसे ऊंचा पहाड़ अंतरिक्ष से एकदम अलग दिखाई देता है। इंटरनेशनल स्‍पेस स्टेशन पर सवार एक अंतरिक्ष यात्री ने माउंट एवरेस्ट की यह सीधी तस्‍वीर ली है। माउंट एवरेस्‍ट की समुद्र तल से ऊंचाई लगभग 29,029 फीट (8,848 मीटर) है।   नासा ने अपने कैप्‍शन में यह भी लिखा कि भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटो में टकराव की वजह से यह पहाड़ हर साल लगभग 1 सेंटीमीटर ऊ...