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ई-गवर्नेंस के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया गया

First Published: January 17, 2022 | Last Updated:January 17, 2022 ई-गवर्नेंस 2020-21 के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार (रजत) हाल ही में नागालैंड के मोन जिला प्रशासन (Mon District Administration) को प्रदान किया गया। मुख्य बिंदु  हैदराबाद में ई-गवर्नेंस पर 24वें राष्ट्रीय सम्मेलन में पुरस्कार प्रदान किया गया। केंद्रीय राज्य मंत्री (MoS) डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा मोन जिले के उपायुक्त थावसेलन के. (Thavasselan K) को यह  पुरस्कार सौंपा गया। पुरस्कार का उद्देश्य ई-गवर्नेंस के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मोन जिले को “कोविड -19 के प्रबंधन में ICT का उपयोग” की श्रेणी 6 के तहत प्रस्तुत किया गया था। इसका उद्देश्य जिला प्रशासन द्वारा की गई पहलों को सम्मानित करना था। पुरस्कार के लिए किस परियोजना का चयन किया गया? संक्रमण के प्रसार को प्रतिबंधित करने के लिए कोविड -19 उपयुक्त व्यवहार (Covid-19 Appropriate Behaviour – CAB) को लागू करते हुए जनता को होने वाली कठिनाइयों को कम करने के लिए मोन जिले में “प्रशासन की सहायता में प्रौद्योगिकी” (Technology in Aid to Administration) शीर्षक वाली परियोजना शु...

AFSPA के खिलाफ नगालैंड में 70 KM लंबा 2 दिवसीय पैदल मार्च, सैकड़ों की तादाद में लोग

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नगालैंड में विवादास्पद अफस्पा कानून को हटाने की मांग कोहिमा: सैकड़ों नगा लोगों ने नगालैंड से सशस्त्र बल विशेष अधिकार कानून (AFSPA) हटाने और मोन जिले में सुरक्षाबलों की गोलीबारी में मारे गये 14 आम नागरिकों के लिए इंसाफ की मांग करते हुए दीमापुर से 70 किलोमीटर दूर राज्य की राजधानी कोहिमा तक दो दिवसीय पैदल मार्च में हिस्सा लिया.  यह भी पढ़ें पैदल मार्च में हिस्सा लेने वाले लोगों के हाथों में तख्तियां और बैनर थे, जिन पर अफस्पा कानून को निरस्त करने की मांग की गई थी. साथ ही लोगों ने 14 आम नागरिकों की मौत के मामले में इंसाफ के लिए भी नारे लगाए.  पिछले कुछ हफ्तों से सोशल मीडिया पर व्यापक अभियान के बाद विभिन्न नागा सिविल सोसाइटी संगठनों द्वारा दो दिवसीय वॉकथॉन (Walkathon) का नेतृत्व किया गया.  आयोजकों ने कहा कि जैसे-जैसे यह मार्च कई गांवों और छोटे शहरों से होकर गुजरेगा, और अधिक पुरुषों और महिलाओं के शामिल होने की उम्मीद है. प्रतिभागियों ने मंगलवार को फिर से मार्च शुरू करने से पहले सोमवार रात को पिफेमा में विश्राम किया.   वॉकथॉन के नेता कोहिमा में राज्य के कार्यवाहक राज्यपाल जगदीश मुखी के जरि...

विरोध के बीच नगालैंड में 6 महीने के लिए बढ़ाया गया विवादास्पद कानून AFSPA

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नगालैंड में विवादास्पद अफस्पा कानून 6 महीने के लिए बढ़ा (प्रतीकात्मक तस्वीर) कोहिमा: भारी विरोध के बीच नगालैंड में विवादास्पद सशस्त्र बल विशेष अधिकार कानून (AFSPA) को छह महीनों के लिए और बढ़ा दिया गया है. यह कानून सुरक्षाबलों को व्यापक अधिकार देता है. AFSPA की मियाद को ऐसे समय बढ़ाया गया है जब 4 दिसंबर को उग्रवाद विरोध अभियान के दौरान 'गलती' से आम नागरिकों की मौत के मामले में आर्मी कोर्ट ऑफ इंक्वायरी कर रही है. यह भी पढ़ें सशस्त्र बल (विशेष) अधिकार अधिनियम या AFSPA सेना को उन क्षेत्रों में कहीं भी स्वतंत्र रूप से ऑपरेशन करने के लिए व्यापक अधिकार शक्ति देता है जिन्हें "अशांत क्षेत्र" घोषित किया गया है. जिस क्षेत्र में AFSPA लागू है, वहां किसी भी सैन्यकर्मी पर केंद्र की मंजूरी के बिना मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है. बता दें कि नगालैंड के मोन जिले में 4 दिसंबर को उग्रवाद विरोधी अभियान के दौरान ‘गड़बड़ी' हो गई और आर्मी के पैरा स्पेशल फोर्सेज के जवानों की गोलाबारी में खदान से काम करके लौट रहे 13 आम नागरिकों की मौत हो गई. जवाब में ग्रामीणों ने हमला किया, जिसे एक जवान ...

नागालैंड में AFSPA का विस्तार किया गया

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First Published: December 30, 2021 | Last Updated:December 30, 2021 30 दिसंबर, 2021 को केंद्र सरकार ने AFSPA अधिनियम के तहत पूरे नागालैंड को छह और महीनों के लिए “अशांत क्षेत्र” घोषित कर दिया। मुख्य बिंदु  यह घोषणा 30 दिसंबर, 2021 से प्रभावी होगी। सरकार ने राज्य की स्थिति को ‘अशांत और खतरनाक’ करार दिया है। यह निर्णय केंद्र सरकार द्वारा नागालैंड से विवादास्पद सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम को वापस लेने की संभावना की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति के गठन के कुछ दिनों बाद लिया गया था। AFSPA दशकों से नागालैंड में काम कर रहा है। केंद्र की राय केंद्र सरकार का विचार है कि संपूर्ण नागालैंड का क्षेत्र ऐसी अशांत और खतरनाक स्थिति में है कि नागरिक शक्ति की सहायता के लिए सशस्त्र बलों का उपयोग आवश्यक है। केंद्र सरकार ने पूरे नागालैंड को ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित करने के लिए सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम, 1958 की धारा 3 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग किया। पैनल की सिफारिश यह निर्णय एक पैनल की सिफारिश के बाद लिया गया था, जिसे AFSPA को वापस लेने की संभावना...