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NASA के यान ने मंगल ग्रह पर देखी चमकदार वस्तु, वैज्ञानिकों ने बताई सच्चाई

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NASA के पर्सीवरेंस रोवर (Perseverance Rover) ने मंगल ग्रह (Mars Planet) पर चमकते धातु जैसी दिखने वाली एक वस्तु की फोटो कैप्चर की है, जिसने साइंटिस्ट व रिसर्चर्स को हैरान कर दिया है। कैप्चर की गई तस्वीर को NASA ने सार्वजनिक रूप से शेयर भी किया, जिसमें चट्टानों के बीच में एक पत्थर जैसा ऑब्जेक्ट है, जो चमक रहा है। हालांकि, जब वैज्ञानिकों ने तस्वीर को बारीकी से जांचा, तो पाया कि ये पर्सीवरेंस रोवर द्वारा फैलाया हुआ कचरा था।  बीते बुधवार को, NASA के Perseverance Mars Rover ट्विटर हैंडल से ट्वीट की एक सीरीज पोस्ट की गई, जिसमें पर्सीवरेंस रोवर द्वारा मंगल ग्रह पर एक चमकने वाली वस्तु की फोटो को शेयर किया गया। इस तस्वीर में मंगल ग्रह पर चट्टानों के बीच एक वस्तु दिखाई दे रही है, जो सिल्वर रंग की चमक फेंक रही है। फोटो के साथ ही पोस्ट में कुछ जानकारियां भी दी गई है।   My team has spotted something unexpected: It's a piece of a thermal blanket that they think may have come from my descent stage, the rocket-powered jet pack that set me down on landing day back in 2021. pic.twitter.com/O4rIaE...

इंसान की आंख जैसी यह क्‍या चीज है मंगल ग्रह पर? स्‍पेस एजेंसी ने समझाया

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मंगल ग्रह पर दुनियाभर की अंतरिक्ष एजेंस‍ियों ने अपने मिशन भेजे हैं। इन्‍हीं में से एक मिशन के तहत यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के मार्स एक्सप्रेस मिशन ने लाल ग्रह के दक्षिणी गोलार्ध में गड्ढे की आकृति वाले क्षेत्र, एओनिया टेरा (Aonia Terra) में एक इमेज को कैप्‍चर किया है। पहली नजर में देखने पर ऐसा लगता है कि ग्रह पर एक विशालकाय आंख मौजूद है, जो हमेशा खुली रहती है। हालांकि हकीकत में ऐसा कुछ नहीं है। तस्‍वीर भले ही आंखनुमा कोई स्‍ट्रक्‍चर हो, पर यह इस ग्रह की जियोलॉजी को बेहतर तरीके से दिखा सकती है। माना जाता है कि लगभग 4 अरब साल पहले इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर ऐसे गड्ढे उभर आए थे और यह सब हमारे सोलर सिस्‍टम के शुरुआती समय में हुई उथल-पुथल का नतीजा था।  कुछ दिन पहले ESA ने एक बयान जारी किया था। उससे ऐसा लग रहा था कि एजेंसी कोई साइंस फिक्शन हॉरर फिल्म लिखने की योजना बना रही है। उसके स्‍टेटमेंट का टाइटल था- ‘मार्स स्लीप्स विद वन आई ओपन'। अपने स्‍टेटमेंट में ईएसए ने बताया है कि यह इमेज और ऐसे गड्ढे आज से 3.5 से 4 अरब साल पहले लिक्विड वॉटर के लिए किसी तरह की सप्‍लाई में मदद करते...

मंगल ग्रह पर दिखे पत्‍थरों के गेट, क्‍या एलियंस का घर है? जानें सच्‍चाई

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) ने साल 2011 में क्यूरियोसिटी रोवर (Curiosity rover) को मंगल ग्रह पर भेजा था। यह वहां गेल क्रेटर रीजन में रहकर खोजें कर रहा है। इन्‍हीं खोजों से हमें कई बार हैरान करने वाली तस्‍वीरें मिलती हैं। पिछले दिनों यह रोवर मंगल ग्रह पर एक ‘दरवाजे' तक पहुंचा था, जिसे देखकर ऐसा लगा कि यह एलियंस का दरवाजा है। हाल में इसने एक और इमेज भेजी। इसमें पत्‍थरों के गेट टावरनुमा आकृति में दिखाई दे रहे थे। तस्‍वीर ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। सवाल उठा कि क्‍या इसका दूसरी दुनिया से कोई कनेक्‍शन है? हालांकि एक्‍सपर्ट का कहना है कि ये टावर संभवत: सीमेंट जैसे मटीरियल से बने थे, जो कभी मंगल ग्रह की चट्टान की दरारों को भरते थे।  रिपोर्टों के अनुसार, इस तरह के रॉक फॉर्मेशन गेल क्रेटर रीजन के इतिहास के बारे में ज्‍यादा जानकारी दे सकते हैं। क्यूरियोसिटी रोवर इसमें अहम भूमिका निभा सकता है। यह पिछले 10 साल से मंगल ग्रह पर अपने मिशन पर है और गेल क्रेटर रीजन में पहाड़ों पर चढ़ सकता है। यह वहां की जियोलॉजी, इतिहास और वातावरण के बारे में जानकारी प्रदान करता है। यह नासा की मार...

Venus और Pluto की जमीन कैसी होगी! रिसर्च से आया सामने

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क्या आपने कभी सोचा है, चांद या मंगल की जमीन पर खड़े होकर कैसा लगता होगा? 65 साल पहले जब Sputnik 1 को लॉन्च किया गया तो,  उसके बाद स्पेस को एक्सप्लोर करने की रुचि तेजी से बढ़ी और इसने कई खोजों को जन्म दिया।  लेकिन हम केवल ये जानने की कोशिश कर रहे हैं कि सौर मंडल के दूसरे ग्रहों की जमीन कैसी है, अगर वहां जाया जा सके तो कैसा महसूस हो सकता है। Nature Astronomy में हमारी एक नई स्टडी प्रकाशित हुई है। यह बताती है कि दूसरे ग्रहों की जमीन पर मौजूद रेत के टीलों से पता लगाया जा सकता है कि अगर कोई व्यक्ति दूसरे ग्रह की सतह पर खड़ा हो तो कैसा महूसस कर सकता है, या वहां मौसम के कैसे हालात हो सकते हैं। रेत का कण क्या होता है? अंग्रेजी के कवि विलियम ब्लेक ने हैरानी जताई कि दुनिया का रेत के कण में समा जाना क्या बताता है। अपनी रिसर्च में हमने इसी सिद्धांत को गहराई से लिया है। मकसद था ये समझना कि रेत के टीले होने पर किसी दूसरे ग्रह की जमीन पर कैसी परिस्थिति पैदा हो सकती है।  दूसरे ग्रहों पर रेत के टीले होने के लिए कुछ चीजों का होना बहुत जरूरी है। सबसे पहले तो वहां कणों की मौजूदगी जरूरी है जो समय के सा...

मंगल ग्रह पर सबसे बड़ा भूकंप खोजने वाला Nasa का इनसाइट लैंडर जल्‍द हो सकता है खत्‍म

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) के मंगल मिशन को झटका लगा है। उसका एक स्‍पेसक्राफ्ट बर्बाद होने की ओर है। नासा के इनसाइट (Insight) लैंडर पर जमा हुई धूल की वजह से लैंडर अपनी बिजली खो रहा है। अंतरिक्ष एजेंसी ने मंगलवार को कहा कि वह इस स्‍पेसक्राफ्ट के भूकंपमापी का इस्तेमाल तब तक करती रहेगा, जब तक कि जुलाई में इसकी बिजली खत्म नहीं हो जाती। नासा ने बताया है कि फ्लाइट कंट्रोलर सब कुछ बंद करने से पहले इस साल के आखिर तक इनसाइट को मॉनिटर करेंगे।  साल 2018 में मंगल ग्रह पर उतरने के बाद से इनसाइट ने 1,300 से ज्‍यादा भूकंपों का वहां पता लगाया है। हाल ही में इसने मंगल ग्रह पर आए अब तक के सबसे बड़े भूकंप को रिकॉर्ड किया था, जिसकी तीव्रता 5 मापी गई थी। यह नासा का दूसरा मंगल ग्रह लैंडर होगा, जो धूल में खो गया है और जल्‍द बर्बाद हो सकता है।  हालांकि मंगल ग्रह की सतह पर नासा के दो और स्‍पेसक्राफ्ट अभी काम कर रहे हैं। इनमें शामिल हैं- रोवर्स क्यूरियोसिटी और पर्सिवरेंस। इनसाइट को लेकर इस मिशन की डेप्‍युटी प्रोजेक्‍ट मैनेजर कात्या जमोरा गार्सिया ने कहा है कि शुरू में लैंडर में एक घंटे 40 मिनट के लि...

2 अरब साल पहले मंगल ग्रह पर थे महासागर! वैज्ञानिकों ने ऐसे लगाया अनुमान

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पृथ्‍वी से बाहर जीवन की संभावना की बात आती है, तो इसका सबसे बड़ा दावेदार नजर आता है मंगल (Mars) ग्रह। वर्षों से वैज्ञानिक यह जानने में जुटे हैं कि क्‍या कभी मंगल ग्रह पर जीवन था। क्‍या भविष्‍य में ऐसी कोई उम्‍मीद है? तमाम अध्‍ययन संकेत तो देते हैं, लेकिन अभी बहुत शोध बाकी है। अब पेरिस यूनिवर्सिटी की एक स्‍टडी में पता चला है कि 2 अरब साल पहले मंगल ग्रह पर तरल महासागर हो सकते थे। वैज्ञानिकों का कहना है कि तरल महासागर संभव हो सकता है अगर तापमान जमाव बिंदु यानी 4.5 डिग्री सेल्सियस से ज्‍यादा होता है। मंगल ग्रह पर ऐसी स्थितियां आज से करीब 3 अरब साल पहले मुमकिन थीं।  हालांकि साल 2016 के एक रिव्‍यू कहा गया था कि लो सोलर रेडिएशन के कारण मंगल ग्रह की प्राचीन जलवायु बेहद ठंडी थी और एक महासागर को बरकरार नहीं रख सकती थी। वहीं, साल 2021 के एक अन्य अध्ययन में कहा गया है कि ग्रह का अपना वॉर्मिंग मैकेनिज्‍म है, जो झीलों और नदियों को पनपने दे सकता है।  मौजूदा अध्ययन में रिसर्चर्स ने पृथ्वी के जलवायु मॉडल पर बेस्‍ड त्रि-आयामी मॉडल का इस्‍तेमाल करके मंगल की प्राचीन जलवायु को दोबारा से तैयार किया। इस...

मंगल पर कभी था जीवन? वैज्ञानिकों ने स्टडी किया 1.3 अरब साल पुराना उल्का पिंड

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मंगल ग्रह के बारे में एक सवाल हर किसी के मन में उठता है। चूंकि यह पृथ्वी के करीबी ग्रहों में से है, तो क्या यहां पर कभी जीवन रहा होगा? वैज्ञानिकों को भी इस सवाल ने सालों से उलझाया हुआ है। इसके बारे में लगातार शोध जारी है। बहुत उम्मीद है कि इसके संबंध में एक निष्कर्षपूर्ण उत्तर वैज्ञानिक जल्द खोज लेंगे। नासा ने लक्ष्य रखा है कि मंगल ग्रह से सैम्पलों को 2030 तक धरती पर ले आएगी। ये ऐसे सैम्पल होंगे जिनसे मंगल ग्रह पर जीवन के सबूतों को पता लगाया जा सकेगा। हालांकि, वैज्ञानिक उल्का पिंडों के रूप में मंगल के पदार्थों की स्टडी कर रहे हैं। स्वीडन में Lund University में शोधकर्ताओं ने मंगल के 1.3 अरब साल पुराने उल्का पिंक को स्टडी किया है और पाया कि इसे पानी का सीमित एक्सपोजर मिला है। दूसरे शब्दों में, उस खास समय और जगह पर जीवन के होने की संभावना नहीं थी। वैज्ञानिकों ने न्यूट्रॉन और एक्स-रे टोमोग्राफी का इस्तेमाल किया। यह वही तकनीक है जो परसेवरेंस रोवर द्वारा लाए गए सैम्पलों को स्टडी करने के लिए इस्तेमाल की जाएगी। इस तकनीक का इस्तेमाल इसलिए किया गया क्योंकि वैज्ञानिक पता लगाना चाहते थे कि क...

moon: Scientists successfully grow plants in soil from the Moon

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WASHINGTON: That's one small pot of soil, one giant leap for man's knowledge of space agriculture: scientists have for the first time grown plants in lunar soil brought back by astronauts in the Apollo program. The ground-breaking experiment, detailed in the journal Communications Biology on Thursday, has given researchers hope that it may be possible to one day grow plants directly on the Moon. That would save future space missions much hassle and expense, facilitating longer and farther trips. However, according to the study's University of Florida authors, much remains to be studied on the topic, and they intend to leave no stone unturned. For their experiment, the researchers used just 12 grams (a few teaspoons) of lunar soil collected from various spots on the Moon during the Apollo 11, 12, and 17 missions. In tiny thimble-sized pots, they placed about a gram of soil (called "regolith") and added water, then the seeds. They also fed the plants a nutrient ...

मंगल ग्रह पर आया अबतक का सबसे शक्तिशाली भूकंप, Nasa के लैंडर ने किया रिकॉर्ड

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पृथ्‍वी पर हम अक्‍सर भूकंप महसूस करते हैं, लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि मंगल ग्रह पर भी भूकंप आते हैं। नासा के इनसाइट लैंडर ने मंगल ग्रह पर एक जोरदार भूकंप का पता लगाया है, जिसने इस ग्रह को हिलाकर रख दिया। 4 मई को मंगल ग्रह पर 5 तीव्रता का भूकंप आया। पृथ्‍वी के इस तरह के भूकंप मिड कैटिगरी में आते हैं, लेकिन मंगल ग्रह के लिए यह बेहद तीव्र था। पृथ्‍वी के अलावा किसी भी ग्रह पर यह अबतक पता लगाया गया सबसे तेज भूकंप बताया जा रहा है।  space.com की रिपोर्ट के अनुसार, इस भूकंप ने मंगल ग्रह पर आए पिछले भूकंप के रिकॉर्ड को तोड़ दिया। अगस्‍त 2021 में यहां 4.2 तीव्रता का भूकंप आया था। नासा इनसाइट की टीम और उसके पार्टनर्स को मंगल ग्रह से शुरुआती डेटा मिला है, जिसके आधार पर यह कहा जा रहा है कि पृथ्‍वी को छोड़कर यह किसी ग्रह पर अबतक की सबसे बड़ी भूकंपीय गतिविधि है! नासा के एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर फॉर साइंस थॉमस जुर्बुचेन ने ट्विटर पर कहा कि शुरुआती अनुमान में यह तीव्रता 5 थी। हालांकि उन्‍होंने धैर्य रखने की बात कही, क्‍योंकि टीमें अभी आंकड़ों का विश्‍लेषण कर रही हैं।  वैज्ञानिकों का कहना है कि 5 ती...

यूरोपीय स्पेस एजेंसी ने मंगल ग्रह की सतह पर देखी दिलचस्प आकृतियां, तस्वीर में देखें...

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यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) के मार्स एक्सप्रेस ऑर्बिटर से लेटेस्ट रिलीज में मंगल ग्रह के भूविज्ञान को लेकर बेहद दिलचस्प जानकारियों का खुलासा किया है। ऐसा प्रतीत होता है कि लाल ग्रह की सतह पर भारी खरोंचें हैं। हालांकि, ये निशान टैंटलस फॉसे का हिस्सा हैं, जो मंगल पर एक विशाल फॉल्ट सिस्टम है। तस्वीर की डिटेल्स के अलावा, यहां जो ध्यान देने वाली एक और जरूरी विशेषता है, वो है इसका साइज। ये कुंड 350 मीटर (1,148 फीट) तक गहरे, 10 किलोमीटर चौड़े है और यह चौड़ाई 1,000 किलोमीटर तक लंबी हो सकती हैं। तस्वीर 'ट्रू कलर' है, जिसका मतलब है कि यदि मनुष्य इस जगह को अपनी आंखों से देखेंगे, तो उन्हें यह क्षेत्र समान रंग का दिखाई देगा। मंगल ग्रह पर कई रहस्य हैं और लाल ग्रह की सतह पर काम करते रहने वाले रोबोट हर दिन नई जानकारी का खुलासा कर रहे हैं। एक ESA प्रेस रिलीज में कहा गया है, "पहली नज़र में ये फीचर्स ऐसे दिखते हैं जैसे किसी ने लाल ग्रह की सतह पर अपने नाखूनों को उकेरा है, जैसे उन्होंने ऐसा किया है।" प्रेस रिलीज में कहा गया है कि टैंटलस फॉसे मंगल पर एक प्रमुख विशेषता है। यह निशान मंगल ...

नासा की डराने वाली खबर! खो जाएगा धरती का इकलौता चांद, न होगी चांदनी, न दिखेगा सूर्य ग्रहण ...

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NASA ने एक डराने वाली खबर दी है। मंगल ग्रह का चंद्रमा एक दिन इसके करीब आते-आते इसकी सतह से टकरा जाएगा और धरती का चंद्रमा हमेशा के लिए धरती से दूर हो जाएगा। नासा ने कहा है कि मंगल ग्रह का चंद्रमा धीरे-धीरे इसकी सतह के करीब आ रहा है। इसी तरह से धरती का चंद्रमा इसकी सतह से धीरे-धीरे दूर होता जा रहा है। इस गति का अंत ये होगा कि मंगल का चंद्रमा इसकी सतह से टकरा कर टुकडों में बिखर जाएगा और धरती की रातें एक समय बाद हमेशा के लिए अंधेरी हो जाएंगी।  हाल ही में नासा के पर्सवेरेंस रोवर ने मंगल के चंद्रमा फोबोस की शानदार तस्वीरे ली हैं। नासा ने इन्हें शेयर करने के साथ-साथ एक और तथ्य से पर्दा उठाया है। मंगल के दो चंद्रमा हैं- फोबोस और डीमोस। इसका फोबोस मून धीरे-धीरे लाल ग्रह की सतह के करीब आ रहा है। नासा ने अपनी वेबसाइट पर एक पोस्ट में इसकी मंगल के करीब आने की चाल के बारे में भी बताया है। जिसके मुताबिक, फोबोस हर 100 साल में 6 फीट यानि 1.8 मीटर से मंगल के करीब सरकता जा रहा है। इस हिसाब से 5 करोड़ साल बाद यह मंगल की सतह से टकरा कर चूर चूर हो जाएगा। इसके उलट इसका दूसरा चांद डीमोस इससे दूर चला जाएग...

मंगल ग्रह से ऐसे दिखते हैं पृथ्वी और चंद्रमा, NASA की इस अदभुत तस्वीर में देखें

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अंतरिक्ष से पृथ्वी और चंद्रमा कैसे दिखते हैं, यह तो आपने कई बार देखा होगा, लेकिन क्या आपने मंगल ग्रह से पृथ्वी और चंद्रमा का नाज़ारा देखा है? अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA ने अकसर खूबसूरत और हैरान करने वाली तस्वीरों को शेयर करता है और कुछ ऐसा ही एजेंसी ने एक बार फिर किया है। NASA ने अपने मार्स रिकोनिसेंस ऑर्बिटर पर हाई रेजोल्यूशन इमेजिंग साइंस एक्सपेरिमेंट (HiRISE) कैमरे से ली गई पृथ्वी और चंद्रमा की एक तस्वीर शेयर की है। इसमें आप यह अनुभव कर सकते हैं कि मंगल ग्रह से हमारी पृथ्वी और चंद्रमा कैसे दिखते हैं।  NASA ने इस तस्वीर को अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर शेयर किया गया है। पोस्ट में नासा ने लिखा (अनुवादित), "मार्स रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर ने पृथ्वी और चंद्रमा की इस झलक को कैद किया है। हमारे सात में से प्रत्येक रोबोट अब मंगल ग्रह पर काम कर रहे हैं, वास्तव में एक #NASAEarthling है, जो हमारी आंखों के रूप में कार्य करते हैं क्योंकि वे लाल ग्रह का पता लगाते हैं - हमारे नीले ग्रह के लिए हमारी समझ और प्रशंसा को गहरा करते हैं।"   Mars Reconnaissance Orbiter caught this glimpse of Earth a...

NASA ने शेयर किया मंगल से दिखने वाले सूर्य ग्रहण का अद्भुत नजारा

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आपने धरती से सूर्यग्रहण तो कई बार देखा होगा, लेकिन क्या आपने कभी मंगल ग्रह से सूर्य ग्रहण देखने के बारे में सोचा है? नासा की बदौलत यह मुमकिन हो सका है। नासा ने एक वीडियो शेयर किया है जिसमें मंगल ग्रह के दो चंद्रमाओं में से एक, सूर्य पर अपनी छाया डाल रहा है। यह मंगल ग्रह की सतह से देखा गया है। इस रोचक वीडियो को अंतरिक्ष एजेंसी के पर्सेवरेंस रोवर ने कैमरे में कैद किया है। इस दौरान लाल ग्रह का एक छोटा, आलू के आकार का चंद्रमा फोबोस (Phobos) मंगल और सूर्य के बीच आ गया था। "तुम सच्चे हो इसीलिए बहुत अच्छे हो। तुमसे नजरें नहीं हटाई जा रहीं।” नासा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा है।  ये ऑब्जर्वेशन वैज्ञानिकों को चंद्रमा के ऑर्बिट में होने वाली हल्की शिफ्ट को बेहतर ढंग से समझने में मदद कर रही हैं, जिससे पता चलता है कि कैसे इसकी ग्रेविटी मंगल ग्रह की दो ऊपर परतों क्रस्ट और मेंटल को आकार देती है। NASA के पर्सेवरेंस रोवर ने वीडियो कैप्चर करने के लिए 2 अप्रैल को अपने नेक्स्ट-जेनरेशन मास्टकैम-जेड कैमरे का इस्तेमाल किया। वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे एक छोटी वस्तु म...

रिसर्चर्स का दावा, भूकंप के लिहाज से पहले से ज्‍यादा एक्टिव है मंगल ग्रह

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जितना सोचा गया है, मंगल ग्रह (Mars) उससे भी ज्‍यादा पृथ्‍वी के समान है। रिसर्चर्स को पता चला है कि यह ग्रह अपनी धूल भरी बंजर सतह के नीचे ज्वालामुखी गतिविधियों के कारण 'मार्सक्‍वेक' का अनुभव कर रहा है। यह वैसा ही है, जैसा पृथ्‍वी पर भूकंप होता है। रिसर्चर्स ने एक विशिष्ट क्षेत्र में मार्टिन क्रस्ट के नीचे 47 मार्सक्वेक की खोज की है, जिसे सेर्बरस फॉसे कहा जाता है। यह 20 मिलियन वर्ष से कम पुराना है। ये 47 मार्सक्वेक एक नई खोज के रूप में सामने आए हैं। अब से पहले वैज्ञानिकों को लगता था कि कमजोर चुंबकीय क्षेत्र वाले मंगल ग्रह के अंदर बहुत कुछ नहीं घटित हो रहा है। नई खोज यह तथ्‍य कमजोर साबित हुआ है।   आमतौर पर ग्रहों के चुंबकीय क्षेत्र उनके अंदर पैदा होते हैं। उदाहरण के लिए- पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र उसके बाहरी कोर में उत्पन्न होता है यह अंतरिक्ष में कई किलोमीटर तक फैला होता है। दरअसल यह ब्रह्मांड से आने वाले रेडिएशन के खिलाफ एक ढाल की तरह काम करता है।  दूसरी ओर मंगल ग्रह पर चुंबकीय क्षेत्र सिर्फ पैच में मौजूद है। यह सौर हवा के मंगल ग्रह के वातावरण के साथ इंटरेक्‍शन से बनता है। पू...

मंगल ग्रह पर साउंड करती है अजब बर्ताव, नासा ने जारी किए नमूने

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NASA ने मंगल ग्रह पर साउंड को लेकर एक स्टडी जारी की है। नासा के Perseverance रोवर ने मंगल पर ध्वनि के कुछ नमूने इकट्ठे किए हैं। इनसे निष्कर्ष निकलता है कि मंगल ग्रह पर साउंड अलग तरह से बर्ताव करती है। स्टडी में पाया गया है कि लाल ग्रह मंगल पर साउंड पृथ्वी की तुलना में धीमी गति से चलती है। यह कुछ अटपटे ढंग से भी बर्ताव करती है। इसके कारण भविष्य में कभी जब मानव यहां बसने की व्यवस्था करेगा तो कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म सेटअप करने में समस्या आ सकती है। साउंड की स्पीड वातावरण के घनत्व पर भी निर्भर करती है। मंगल का वातावरण काफी पतला है इसलिए वहां पर साउंड वेव धीमी गति से चलती है।  धरती पर ध्वनि 343 मीटर प्रति सेकंड की गति से चलती है। कुछ अध्य्यनों में पता चला है कि अधिक घने माध्यम जैसे पानी में ये 1480 मीटर प्रति सेकंड की दर से गति कर सकती हैं। इसलिए ये अधिक घने मीडियम में गति पकड़ती हैं और कम घने मीडियम में धीमी हो जाती हैं। मंगल का वातावरण धरती की तुलना 100 गुना तक पतला है। यह ज्यादातर कार्बन डाइऑक्साइड से बना हुआ है।  नासा ने मंगल पर इकट्ठा की गई साउंड का नमूना रिलीज किया है। आप इसे यहां...

First audio recorded on Mars reveals two speeds of sound

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PARIS: The first audio recordings on Mars reveal a quiet planet with occasional gusts of wind where two different speeds of sound would have a strange delayed effect on hearing, scientists said Friday. After NASA's Perseverance rover landed on Mars in February last year, its two microphones started recording, allowing scientists to hear what it is like on the Red Planet for the first time. In a study published in the Nature journal on Friday, the scientists gave their first analysis of the five hours of sound picked up by Perseverance's microphones. The audio revealed previously unknown turbulence on Mars, said Sylvestre Maurice, the study's main author and scientific co-director of the shoebox-sized SuperCam mounted on the rover's mast which has the main microphone. The international team listened to flights by the tiny Ingenuity helicopter, a sister craft to Perseverance, and heard the rover's laser zap rocks to study their chemical composition -- which made a...

मंगल ग्रह की यात्रा में 500 नहीं सिर्फ 45 दिन लगेंगे, जानें क्‍या है रिसर्चर्स का आइडिया

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अंतरिक्ष के छुपे हुए रहस्‍यों को खोजने के लिए दुनियाभर की स्‍पेस एजेंसियां काम कर रही हैं। प्राइवेट कंपनियों ने भी अपने कमर्शल वेंचर्स के साथ इस क्षेत्र में कदम रखा है। अमेरिका और चीन जैसे देशों की नजर मंगल (Mars) ग्रह पर है। दोनों ही देश अगले दशक तक मंगल ग्रह पर इंसानों को उतारने का लक्ष्‍य लेकर चल रहे हैं। इस मकसद की तारीफ तो की जानी चाहिए, लेकिन साथ ही कई तकनीकी चुनौतियां भी हैं। उदाहरण के लिए, मंगल ग्रह के लिए एक मिशन हर 26 महीने में सिर्फ एक बार लॉन्‍च किया जा सकता है। ऐसा इसलिए, क्‍योंकि मंगल और पृथ्‍वी अपने नजदीकी बिंदु पर होते हैं। इसके बाद भी जो तकनीक मौजूद है, उसकी मदद से पृथ्‍वी से मंगल तक पहुंचने में 9 महीनों का वक्‍त लगेगा। यही वजह है कि अंतर‍िक्ष यात्रा को बदलने के लिए नए विचारों की जरूरत महसूस होती है।    इसका सॉल्‍यूशन लेकर आया है कनाडा की मैकगिल यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स का एक ग्रुप। उनका कहना है कि अगर अंतरिक्ष यान उनके द्वारा बताई गई संचालक शक्ति प्रणाली (propulsion system) का इस्‍तेमाल करता है, तो पृथ्वी-मंगल की यात्रा का समय घटाकर सिर्फ 45 दिन किया जा सकता है। ...

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने दिखाई मंगल ग्रह की हैरान करने वाली तस्‍वीर

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यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) ने मंगल (Mars) ग्रह की सतह की एक हैरान करने वाली इमेज रिलीज की है। इसमें दिखाया गया है कि हवाएं कैसे किसी परिदृश्‍य को आकार देती हैं। तस्‍वीर में मंगल ग्रह के साउथ हाइलैंड्स में हुक क्रेटर एरिया (Hooke Crater area) को दिखाया गया है। यह तस्‍वीर ESA और रूस की स्‍पेस एजेंसी रोस्कोस्मोस के प्रोजेक्‍ट- एक्सोमार्स ट्रेस गैस ऑर्बिटर (TGO) ने ली है। TGO के CaSSIS कैमरे (कलर एंड स्‍टीरियो सर्फेस इमेजिंग सिस्टम) द्वारा इस्‍तेमाल किए जाने वाले फिल्टर की वजह से तस्‍वीर में आर्टिफ‍िशियल रंग दिखाई दे रहे हैं।   ESA ने इंस्टाग्राम पर यह इमेज शेयर की है, जो मंगल ग्रह के साउथ हाइलैंड्स में हुक क्रेटर के पास एक आकर्षक परिदृश्य को दिखाती है। ESA के मुताबिक, मंगल ग्रह पर इस तरह की तस्‍वीर किसी अस्‍तव्‍यस्‍त इलाके के जैसी है। यह उस स्‍थानीय हवा के पैटर्न का संकेत है, जो यहां बहती है। इसी वजह से यह इलाका काफी अलग दिखाई देता है।    ESA ने इस तस्‍वीर को तैयार करने में कुछ फ‍िल्‍टर्स इस्‍तेमाल किए। धूल से भरे ट्रैक्‍स को नीला रंग भी फ‍िल्‍टर के जरिए ही दिया गया है। कुल मिलाकर...

क्‍या मंगल ग्रह पर मौजूद है एलियन? जानें इस तस्‍वीर का सच

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पृथ्‍वी से बाहर जीवन की बात आती है, तो सबसे पहले जेहन में आते हैं एलियंस  (alien)। ऐसे दावों की भरमार है, जो कहते हैं कि एलियंस की भी अपनी एक दुनिया है। पृथ्‍वी पर भी एलियंस के आने के दावे हमने कई रिपोर्ट्स में पढ़े हैं। ताजा दावा मंगल (Mars) ग्रह को लेकर किया गया है। सोशल मीडिया पर चल रही अटकलों के अनुसार, नासा के मार्स रोवर पर्सवेरेंस (Perseverance) ने मंगल ग्रह पर एक एलियन को देखा है। यह अफवाहें तब शुरू हुईं जब एक ब्लॉग राइटर ने सुझाया कि उसने मंगल ग्रह पर एक लटके हुए व्यक्ति को देखा। दावा किया कि नासा के रोवर ने पिछले साल जो इमेज भेजी थीं, उनमें से एक में चट्टानों के बीच सतह पर एलियन लेटा हुआ था। इस पर कई लोगों ने कहा कि यह मंगल ग्रह पर जीवन के संकेत को साबित करता है। हालांकि सच्‍चाई यह है कि वह कोई ‘एलियन' नहीं है।   UFO Sightings Daily blog में लिखते हुए स्कॉट सी वारिंग ने कहा कि उन्हें नासा की तस्वीरें खंगालना पसंद है। दावा किया कि उन्‍हें कुछ अनोखा मिला, जो जीवन का 100 फीसदी प्रूफ है। नासा के मार्स रोवर को देखने के लिए एक व्यक्ति लेटा हुआ है।  अपने ब्‍लॉग में वारिंग ने...

मंगल ग्रह पर पेड़ काटने जैसे निशान, ESA ने बताई हकीकत

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मंगल (Mars) ग्रह से आने वाली तस्‍वीरें हर बार कुछ नया दिखाती हैं और वैज्ञानिकों को अचंभे में डालती हैं। हाल में आई एक तस्‍वीर को देखकर ऐसा लगता है, जैसे कोई विशाल पेड़ काटा गया हो। इस तस्‍वीर में मंगल ग्रह पर एक बड़ी कन्सेन्ट्रिक रिंग (संकेंद्रित वलय) दिखती है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) ने यह तस्वीर जारी की है और अपनी वेबसाइट पर इसके बारे में बताया है। हकीकत में यह मंगल की सतह पर आइस-रिच क्रेटर का शानदार नजारा है। तस्‍वीर 13 जून 2021 को ली गई थी। इस तस्‍वीर को कलर एंड स्‍टीरियो सर्फेस इमेजिंग सिस्टम (CaSSIS) कैमरे द्वारा ExoMars Trace Gas Orbiter (TGO) पर लिया गया था। TGO, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और रूसी अंतरिक्ष एजेंसी Roscosmos का जॉइंट वेंचर है। TGO मंगल की परिक्रमा करता है और इसके वातावरण के बारे में डेटा इकट्ठा करता है। हालिया इमेज में एसिडालिया प्लैनिटिया के उत्तरी मैदानों से जुड़ी है।   ESA की ओर से जारी बयान में इस इमेज के बारे में अहम जानकारी दी गई है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह इमेज एक गड्ढे के अंदरूनी हिस्से में जमा पानी-बर्फ हो सकती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, म...