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ये बायोसीमेंट कम कर देगा घर बनाने का खर्च, वीडियो में दिखाया गया बनाने का तरीका

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सिंगापुर में नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (NTU Singapore) के वैज्ञानिकों ने कचरे से बायोसीमेंट बनाने का एक तरीका खोजा है, जिससे यह साधारण सीमेंट के लिए एक ग्रीनर और अधिक टिकाऊ विकल्प बन गया है। बायोसीमेंट एक प्रकार का रिन्यूएबल सीमेंट है, जो हार्डनिंग रिएक्शन के लिए बैक्टीरिया का इस्तेमाल करके मिट्टी को एक ठोस ब्लॉक में बांधता है। बायोसीमेंट अब एनटीयू के वैज्ञानिकों द्वारा दो सामान्य वेस्ट मटेरियल - औद्योगिक कार्बाइड स्लज (कीचड़) और यूरिया (स्तनधारी मूत्र से निकला) का उपयोग करके बनाया गया है। उन्होंने यूरिया को कैल्शियम आयनों के साथ मिलाकर औद्योगिक कार्बाइड कीचड़ में एक कठोर सॉलिड बनाने के लिए एक विधि का आविष्कार किया है। अवक्षेप मिट्टी के कणों को एक साथ बांधता है और जब यह प्रतिक्रिया मिट्टी में होती है, तो उनके बीच गैप को भर देता है, जिसके कारण मिट्टी का एक कॉम्पैक्ट मास होता है। इससे एक बायोसीमेंट ब्लॉक बनता है, जो मजबूत होने के साथ-साथ लंबे समय तक चलने वाला और पानी के लिए अभेद्य होता है। यह रिसर्च Journal of Environmental Chemical Engineering में पब्लिश हुई था। रिसर्चर्स का ...

लाखों किलोमीटर दूर तारों का सफर बिना स्‍पेसशिप के करेगा इंसान, यह तरीका आएगा काम!

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अगले 5 अरब साल में क्या होगा, जब सूर्य एक लाल ‘दानव' में बदल जाएगा यानी बहुत बड़ा और गर्म हो जाएगा व पृथ्वी को खा जाएगा? वैज्ञानिक लंबे समय से इस सवाल से जूझ रहे हैं। क्या यह घटना ब्रह्मांड से मानव जाति के खत्‍म होने की वजह बनेगी? क्या इस विनाश से प्रजातियों को बचाने का कोई तरीका है? इसका जवाब है एक ऐसे ग्रह की इंटरस्टेलर यात्रा जो मनुष्यों के लिए अगला घर हो सकता है। यह मानव जाति को बचाने का काल्पनिक तरीका है, लेकिन क्‍या ऐसा हकीकत में मुमकिन है? अगर हमें ऐसा कोई ग्रह मिल भी जाए, तो अंतरिक्ष यान से वहां तक पहुंचने में सैकड़ों और हजारों साल लग सकते हैं।  इसका मतलब है कि इंसान को पृथ्‍वी से बाहर अपना नया घर खोजने में कई पीढ़ियां लग जाएंगी। हालांकि एक रिसर्च पेपर से पता चलता है कि अंतरिक्ष यान के बिना भी इंटरस्टेलर यात्रा हो सकती है। अंतरतारकीय अंतरिक्ष उड़ान (interstellar travel) दो तारों या प्‍लेनेटरी सिस्‍टम के बीच अंतरिक्ष उड़ान द्वारा की गई यात्रा को कहते हैं। फि‍लहाल यह पूरी तरह काल्पनिक है। ह्यूस्टन कम्युनिटी कॉलेज में फ‍िजिक्‍स और एस्‍ट्रोनॉमी की प्रोफेसर इरिना रोमानोव्सक...

नई तकनीक पर काम कर रहे साइंटिस्‍ट, 100 प्रकाश वर्ष दूर स्थित ‘ग्रह’ भी साफ दिखाई देगा

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ऐसे ग्रह जो सूर्य के अलावा अन्य तारों की परिक्रमा करते हैं, एक्सोप्लैनेट कहलाते हैं। पहले एक्सोप्लैनेट की खोज साल 1992 में हुई थी। तब से खगोलविदों ने ऐसे लगभग 5,000 ग्रहों की खोज की है, जो दूसरे तारों की परिक्रमा कर रहे हैं। जब भी कोई नया एक्सोप्लैनेट खोजा जाता है, तब उसके बारे में बहुत कम जानकारी मिलती है। सिर्फ इतना ही कि एक एक्सोप्लैनेट मौजूद है और उसकी कुछ खूबियां हैं। बाकी सब एक रहस्‍य बना रहता है। इस इशू को सॉल्‍व करने के लिए स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के एस्‍ट्रोफ‍िजिसिस्‍ट एक नई कॉन्‍सेप्‍चुअल इमेजिंग तकनीक पर काम कर रहे हैं। यह अबतक इस्‍तेमाल में आ रही सबसे मजबूत इमेजिंग तकनीक की तुलना में 1,000 गुना ज्‍यादा सटीक होगी।  ऐसा लगता है कि रिसर्चर्स ने यह पता लगा लिया है कि हमारे सौर मंडल के बाहर के ग्रहों को देखने के लिए सौर गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग का इस्‍तेमाल कैसे किया जाए। वैज्ञानिक जिस तकनीक को डेवलप कर रहे हैं, वह मौजूदा तकनीक के मुकाबले ज्‍यादा एडवांस्‍ड हो सकती है।  एक्सोप्लैनेट से रोशनी को बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक सूर्य के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र का उपयोग कर सकते हैं। इसके लिए ...

परमाणु ऊर्जा और नवाचार में यूके-भारत मिलकर काम करेंगे

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First Published: April 26, 2022 | Last Updated:April 26, 2022 यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन (Boris Johnson) की भारत यात्रा के दौरान, दोनों देशों ने ग्लोबल इनोवेशन पार्टनरशिप और न्यूक्लियर एनर्जी पार्टनरशिप पर सरकार से सरकार के बीच दो समझौता ज्ञापन (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं। मुख्य बिंदु  Cooperation on Global Centre for Nuclear Energy Partnership (GCNEP) पर सहयोग पर भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग और यूके के व्यापार, ऊर्जा और औद्योगिक रणनीति विभाग के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। दोनों देशों ने असैन्य परमाणु सहयोग पर साझेदारी को मजबूत करने की अपनी इच्छा की फिर से पुष्टि की है। भारत के विदेश मंत्रालय और यूनाइटेड किंगडम के विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय के बीच ग्लोबल इनोवेशन पार्टनरशिप के कार्यान्वयन पर एक अन्य समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए गए। GCNEP का उद्देश्य रेडियोधर्मी अनुप्रयोगों, परमाणु ऊर्जा अध्ययन और परमाणु सुरक्षा पर संयुक्त रूप से प्रशिक्षण और अनुसंधान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस सहयोग पर हस्ताक्षर किए गए ह...

विश्व बैंक ने भारत के GDP पूर्वानुमान को कम किया

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First Published: April 15, 2022 | Last Updated:April 15, 2022 वित्त वर्ष 2022-23 के लिए विश्व बैंक ने भारत के सकल घरेलू उत्पाद का अनुमान 8.7% से घटाकर 8% कर दिया है। पूर्वानुमान में बदलाव का कारण बढ़ती मुद्रास्फीति और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक आपूर्ति का प्रभावित होना बताया जा रहा है। मुख्य बिंदु  अफगानिस्तान को छोड़कर दक्षिण एशिया का विकास दृष्टिकोण भी 6.6% तक गिर गया है। विश्व बैंक के अनुसार, मुद्रास्फीति और COVID-19-संबंधित दबावों से श्रम बाजार की अधूरी रिकवरी के कारण भारत की घरेलू खपत बाधित होगी। यूक्रेन में युद्ध के कारण उच्च खाद्य और तेल की कीमतों का भी लोगों की वास्तविक आय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। एशियाई विकास बैंक आउटलुक 2022 एशियाई विकास बैंक आउटलुक 2022 ने पहले कहा था कि भारत सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखेगा। मजबूत निवेश संभावनाओं के आधार पर 2022-23 में देश की विकास दर 7.5% होगी। जनवरी से दिसंबर 2022 में चीन के विकास की संभावना 5% बताई गई है। एडीबी के अनुसार 2023-24 में भारत का विकास 202...

अचानक कम हो गया नेप्च्यून ग्रह का तापमान, साइंटिस्‍ट हैरान

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नेप्च्यून के तापमान की स्‍टडी कर रहे वैज्ञानिकों को हाल ही में बड़ी हैरानी हुई। उन्‍हें इस ग्रह पर असामान्‍य टेंपरेचर का पता चला है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, उन्‍होंने ग्रह में तापमान के उतार-चढ़ाव का अनुमान नहीं लगाया था। यह ग्रह गर्मी के मौसम में ठंडा हो जाता है और फिर दक्षिणी ध्रुव पर गर्म हो जाता है। स्‍टडी के प्रमुख लेखक माइकल रोमन ने एक बयान में कहा कि यह बदलाव अप्रत्याशित है। उन्‍होंने कहा कि हम नेपच्यून को काफी समय से देख रहे हैं। इन फाइंडिंग्‍स ने रिसर्चर्स को आश्चर्यचकित कर दिया है।  तापमान में यह गिरावट कई कारणों से हो सकती है। इनमें ग्रह की कैमिस्‍ट्री, मौसम के पैटर्न और सूर्य में होने वाला परिवर्तन शामिल है। पिछले 17 साल से नेप्च्यून का ऑब्‍जर्वेशन करने के लिए कई टेलीस्‍कोप का इस्‍तेमाल किया जा रहा है। इन टेलीस्‍कोप का इस्‍तेमाल करने वाले खगोलविदों ने ग्रह के तापमान में चौंकाने वाली गिरावट देखी है। इस स्‍टडी को सब-सीजनल वेरिएशन इन नैप्‍च्‍यून्‍स मिड इफ्रारेड इमिशन नाम से द प्लैनेटरी साइंस जर्नल में प्रकाशित किया गया है। स्‍टडी बताती है कि पृथ्वी की तरह नेपच्यून के भी म...

अंतरिक्ष में भारत का मलबा सबसे कम है : नासा

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First Published: April 13, 2022 | Last Updated:April 13, 2022 नासा के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2019 में भारत द्वारा एंटी-सैटेलाइट परीक्षण (anti-satellite tests) करने के बाद जो अंतरिक्ष मलबा पैदा हुआ था, वह विघटित या क्षय हुआ प्रतीत होता है। इसके कारण अंतरिक्ष मलबे में देश का योगदान पिछले चार वर्षों की समयावधि में सबसे निचले स्तर पर आ गया है। अंतरिक्ष मलबा ( space debris) क्या हैं? अंतरिक्ष में, विभिन्न आकारों की बहुत सारी अवांछित वस्तुएँ तैरती रहती हैं। वे रॉकेट के अवशेषों, निष्क्रिय उपग्रहों और अन्य प्रकार के कबाड़ से उत्पन्न होती हैं। इन टुकड़ों को सामूहिक रूप से अंतरिक्ष मलबे के रूप में जाना जाता है। अंतरिक्ष मलबे से खतरा अंतरिक्ष में बहुत तेज गति से घूमने वाले ये टुकड़े अन्य अंतरिक्ष संपत्तियों और कार्यात्मक उपग्रहों के लिए खतरा माने जाते हैं। मिलीमीटर आकार के मलबे से भी टक्कर उपग्रहों को नष्ट कर सकती है। अंतरिक्ष मलबे की कुल मात्रा ऑर्बिटल डेब्रिस क्वार्टरली न्यूज के नवीनतम अंक, जिसे नासा के ऑर्बिटल डेब्रिस प्रोग्राम ऑफिस द्वारा प्रकाशित ...

कौमी वक्फ बोर्ड तरक्कियाती योजना (Quami Waqf Boards Taraqqiati Scheme) क्या है?

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First Published: March 4, 2022 | Last Updated:March 4, 2022 केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने मार्च 2022 से नवंबर 2023 तक पूरे भारत में सभी वक्फ संपत्तियों को जियोटैग करने के लिए लंबे समय से विलंबित परियोजना की समय सीमा को संशोधित किया है। मुख्य बिंदु इस परियोजना की शुरुआत 2017 में ‘कौमी वक्फ बोर्ड तरक्कियाती योजना’ के तहत की गई थी। केंद्रीय वक्फ परिषद, नई दिल्ली इस योजना के कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसी है। पूर्व में संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशों के आधार पर इस योजना की परिकल्पना की गई थी। इस योजना के तहत, सरकार वक्फ बोर्डों के तहत अचल संपत्तियों का उचित उपयोग और मुद्रीकरण सुनिश्चित करने के लिए उनका नक्शा बनाना चाहती थी। इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना भी है कि ये संपत्तियां अतिक्रमणों और अन्य प्रतिस्वामित्व दावों से सुरक्षित रहे। वक्फ संपत्तियां अनुमान के मुताबिक, छह लाख से ज्यादा वक्फ संपत्तियां हैं। इसमें से 2 लाख संपत्तियों को पिछले पांच साल में जियोटैग किया गया है। प्रक्रिया को तेज करने के लिए, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के...

मनरेगा (MGNREGA) में काम करने के दिनों की संख्या को 150 तक बढ़ाया जा सकता है

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First Published: February 11, 2022 | Last Updated:February 11, 2022 संसदीय समिति ने हाल ही में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत काम के गारंटीकृत दिनों को 100 से बढ़ाकर 150 करने की सिफारिश की है। मुख्य बिंदु समिति ने ऐसे समय में सिफारिशें दीं, जब कोविड -19 महामारी के बीच अपने गांवों में लौटने वाले प्रवासी श्रमिकों के लिए यह योजना सुरक्षा जाल बन गई है। इसके अलावा, इस योजना के तहत काम की मांग वित्तीय वर्ष 2021-2022 में अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। समिति की सिफारिशें इसने बजटीय आवंटन को अधिक व्यावहारिक तरीके से करने की सिफारिश की, ताकि मजदूरी और भौतिक हिस्से के भुगतान के लिए धन का प्रवाह निर्बाध रूप से बनाए रखा जा सके और किसी भी समय धन की कमी न हो। इस समिति ने मौजूदा प्रावधानों पर भी ध्यान दिया और कहा कि मनरेगा ग्रामीण लोगों के लिए आखिरी ‘फॉल बैक’ विकल्प है।  इसने ग्रामीण विकास विभाग को 100 से 150 दिनों के काम के गारंटीकृत दिनों की वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए योजना की समीक्षा करने की सिफारिश की। इस समिति न...

भारत सरकार लांच करेगी ई-पासपोर्ट (e–Passport), जानिए यह क्या है और कैसे काम करता है?

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First Published: February 3, 2022 | Last Updated:February 3, 2022 भारत सरकार2022-23 तक ई-पासपोर्ट लॉन्च करेगी। यह नागरिकों की सुविधा को बढ़ाने में मदद करेगा। इसकी घोषणा वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने बजट प्रस्तुति के दौरान की। ई-पासपोर्ट कैसे काम करता है? ई-पासपोर्ट में एक छोटी सिलिकॉन चिप होती है। यह पासपोर्ट के जैकेट के भीतर एम्बेडेड होती है। इस चिप की मेमोरी 64 KB होती है। यह चिप धारक की व्यक्तिगत जानकारी रखती है। इसमें उनके हस्ताक्षर भी शामिल हैं। यह चिप 30 विज़िट स्टोर कर सकती है। बाद के चरणों में, पासपोर्ट में धारक की फोटो और उसका बायोमेट्रिक डेटा होगा। इन पासपोर्ट में आगे और पीछे का कवर मोटा होता है। ई-पासपोर्ट में पारंपरिक पासपोर्ट की तरह ही जानकारी होनी चाहिए। अन्य देशों में ई- पासपोर्ट वर्तमान में 120 देशों में ई-पासपोर्ट का उपयोग किया जाता है। इसमें जर्मनी, अमेरिका, यूके शामिल हैं। इन तीनों देशों में बायोमेट्रिक ई-पासपोर्ट सिस्टम हैं। यानी सिर्फ फिंगर प्रिंट या रेटिनल आइडेंटिफिकेशन के जरिए व्यक्ति के पासपोर्ट की पुष्टि की जाती है। ...

EV बैटरी के लिए लिथियम की कमी क्यों पड़ रही है?

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First Published: January 24, 2022 | Last Updated:January 24, 2022 हाल ही में, सर्बियाई सरकार ने एक प्रमुख लिथियम परियोजना के लिए लाइसेंस रद्द कर दिया, जिसका स्वामित्व एंग्लो-ऑस्ट्रेलियाई खनन कंपनी रियो टिंटो पीएलसी (Rio Tinto Plc) के पास है। मुख्य बिंदु  लिथियम आयन बैटरी का उपयोग करने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों के तेजी से बढ़ते उत्पादन के कारण लिथियम मांग इन दिनों बहुत ज्यादा है। हालाँकि, लिथियम की वैश्विक आपूर्ति में कमी है, पश्चिमी देश चीन के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए नई खदानों को लाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। लिथियम का उत्पादन कैसे होता है? वर्तमान में, लिथियम का उत्पादन कठोर चट्टान (hard rock) या नमकीन खदानों (brine mines) से किया जाता है। ऑस्ट्रेलिया दुनिया का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है, जो हार्ड रॉक खदानों से उत्पादन करता है। दूसरी ओर अर्जेंटीना, चिली और चीन जैसे देश मुख्य रूप से खारी झीलों से लिथियम का उत्पादन करते हैं। दिसंबर 2021 में, कुल वैश्विक उत्पादन का अनुमान 4,85,000 टन था, जो 2022 में बढ़कर 6,15,000 टन और 2023 में 8,21,000 टन हो जायेग...

Nasa के Artemis-3, 4 और 5वें मून मिशन पर भी चल रहा काम, इंसान को दोबारा चांद पर उतारने की है तैयारी

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नासा (NASA) के मून मिशन आर्टिमिस-1 (Artemis I) की लॉन्चिंग होना अभी बाकी है। इस बीच नासा और अमेरिका में उसके तमाम सहयोगी दूसरे आर्टेमिस लॉन्च के लिए स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट पर काम कर रहे हैं। यह पहला क्रू आर्टेमिस मिशन होगा। यानी इसके जरिए एक बार फ‍िर इंसान को चांद पर उतारा जाएगा। नासा ने कहा है कि SLS रॉकेट पर काम कर रहे वैज्ञानिकों की टीमों ने दूसरे आर्टेमिस मिशन में ‘बेहतरीन प्रगति' की है। अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा है कि उसकी टीमें आर्टेमिस मिशन के प्रमुख हिस्सों को भी टेस्‍ट कर रही हैं, जिन्‍हें पहले दो मिशन के बाद लॉन्‍च किया जाना है। ये आर्टिमिस-3, 4 और 5 मिशन होंगे।  आर्टेमिस मिशन नासा के सबसे महत्वाकांक्षी प्रोग्राम्‍स में से एक है। इसका मकसद 1970 के दशक के बाद पहली बार इंसान को चंद्रमा पर उतारना है। नासा का लक्ष्य लंबे समय के लिए चंद्रमा पर इंसान की मौजूदगी स्‍थापित करना है। इसके साथ ही मंगल पर जाने के लिए चंद्रमा को लॉन्चपैड में बदलना है। आर्टिमिस-1 इस जटिल सीरीज का पहला हिस्‍सा है। वहीं, SLS रॉकेट दुनिया का सबसे ताकतवर रॉकेट होने जा रहा है, जो मिशन को तेजी से आग...

Nasa के मार्स रोवर Perseverance के काम में चुनौती बना मंगल ग्रह का कंकड़

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मंगल ग्रह पर अपने मिशन में गया नासा का मार्स रोवर पर्सवेरेंस (Perseverance) वहां चट्टानों के सैंपल इकट्ठा कर रहा है। इन सैंपल्‍स को भविष्‍य में मंगल पर लॉन्‍च होने वाले मानवमिशन के जरिए पृथ्‍वी पर भेजा जाएगा। सैंपल लेने की इस प्रक्रिया में कंकड़ जैसे कुछ मलबे की वजह से समस्‍या आ रही है। शुरुआत में सबकुछ सफलतापूर्वक हुआ था। पर्सवेरेंस ने इस्सोल नाम की Martian रॉक से एक सैंपल निकाला था। लेकिन उस सैंपल को स्‍टोर करते वक्‍त रोवर के सेंसर ने परेशानी जताई। इसके बाद रोवर ने अपना काम बंद कर दिया और पृथ्‍वी पर मौजूद अपने मॉनिटरिंग सिस्‍टम से संपर्क किया। यह घटना 29 दिसंबर की है। रोवर के सेंसर में परेशानी क्‍यों आई, यह समझने के लिए पर्सवेरेंस की टीम ने डेटा को खंगाला। करीब एक हफ्ते बाद टीम को कंकड़ के आकार का कुछ मलबा मिला। यह पर्सवेरेंस के रोबोटिक आर्म के काम में बाधा पैदा कर रहा था।  नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (JPL) में सैंपलिंग और कैशिंग की चीफ इंजीनियर, लुईस जांडुरा ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा, टीम को विश्वास है कि यह मलबा चट्टान का सैंपल लेते समय कलेक्‍शन से बाहर गिर गया। नासा के इं...

हरियाणा में स्थानीय लोगों के लिए निजी क्षेत्र में 50,000 रुपये से कम वेतन वाली 75% नौकरियां आरक्षित की जायेंगी

हरियाणा में स्थानीय लोगों के लिए निजी क्षेत्र में 50,000 रुपये से कम वेतन वाली 75% नौकरियां आरक्षित की जायेंगी

मैरी कॉम बनीं AIBA की चैंपियंस और वेटरन्स कमेटी की नई अध्यक्ष

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