MP : अस्थायी कोरोना योद्धाओं को हटाने के आदेश, सरकार ने बजट में कमी बताकर झाड़ा पल्ला
31 मार्च से पूरे मध्यप्रदेश के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में रखे गए अस्थायी डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टॉफ घर पर बैठ गए. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से आया आदेश साफ कहता है कि इनके मानेदय के लिए अब बजट नहीं है, ऐसे में इनकी सेवाएं समाप्त होती हैं. PM आवास योजना को लेकर शिकायत की तो पंचायत सचिव-पुलिसकर्मी ने आदिवासी युवा को बेरहमी से पीटा शरीर पर सफेद एप्रिन और गले में स्टेथेस्कोप साथ में ढेर सारी फिक्र. डॉ चंचल शर्मा कोरोना काल में अस्थायी चिकित्सक के तौर पर नियुक्त किए गए थे. 31 मार्च 2022 को उनके काम करने का आखिरी दिन था. भारी मन से अस्पताल से घर जा रहे डॉ. शर्मा कहते हैं "जब हाहाकार मचा था तो हमारे साथ लैब टेक्निशियन, आयुष डॉक्टर सब थे, लोग नहीं थे तब हम सेवाएं दे रहे थे, लेकिन अब दूध में पड़ी मक्खी की तरह सरकार ने हमें निकाल दिया हम इतना चाहते हैं कि सरकार संविदा में ही सही हमें कहीं रखे."
ऐसे समय में जब लाशों को हाथ लगाने वाला भी कोई नहीं था, डॉ. सर्वेश नागर ने आयुष चिकित्सक के तौर पर अपनी सेवाएं आगर जिला अस्पताल को दीं थीं, लेकिन अब काम नहीं है. उन्हों...