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स्वीडन और फिनलैंड ने NATO में शामिल होने के लिए आवेदन किया

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First Published: May 23, 2022 | Last Updated:May 23, 2022 फिनलैंड और स्वीडन ने उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) में शामिल होने के लिए अपना आवेदन प्रस्तुत किया। फिनलैंड और स्वीडन ने नाटो में शामिल होने का फैसला क्यों किया? हालाँकि फ़िनलैंड और स्वीडन की गुटनिरपेक्ष नीति है, लेकिन वे हमेशा नाटो के करीब थे। यूक्रेन पर 2022 के रूसी आक्रमण ने उन्हें नाटो में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) क्या है? नाटो एक अंतर-सरकारी सैन्य गठबंधन है जिसमें यूरोप और उत्तरी अमेरिका (28 यूरोपीय राज्य, अमेरिका और कनाडा) से संबंधित 30 सदस्य राज्य शामिल हैं। नाटो सभी निर्णय सर्वसम्मति से लेता है। नाटो में शामिल होने वाला अंतिम देश 2020 में उत्तर मैसेडोनिया था। नाटो का मुख्यालय ब्रुसेल्स, बेल्जियम में है। नाटो का उद्देश्य राजनीतिक और सैन्य साधनों के माध्यम से अपने सदस्यों की सुरक्षा की गारंटी देना है। उत्तरी अटलांटिक संधि (नाटो की संस्थापक संधि) के अनुच्छेद 5 के अनुसार, यूरोप या उत्तरी अमेरिका में किसी भी नाटो सदस्य के खिलाफ सशस्त्र हमले को...

NATO, G7, EU नेताओं ने बेल्जियम में बैठक में हिस्सा लिया

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First Published: March 26, 2022 | Last Updated:March 26, 2022 बेल्जियम के ब्रसेल्स में G7, NATO और यूरोपीय संघ के नेता नाटो शिखर सम्मेलन (NATO summit) के लिए एकत्र हुए हैं। यूक्रेन पर रूसी आक्रमण जारी रहने के कारण राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर दबाव बढ़ाने की योजना बनाने के उद्देश्य से 24 मार्च को एक के बाद  एक आपात बैठकें हुईं। मुख्य बिंदु  अमेरिका रूस पर नए प्रतिबंध लगाने के लिए अपने सहयोगियों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। प्रतिबंधों के कारण रूसी अर्थव्यवस्था पहले ही पंगु हो चुकी है। यूक्रेन पर आक्रमण शुरू करने के बाद पश्चिमी देश रूस का सामना करने के लिए एकजुट हो गए हैं। यह एकता बचेगी या नहीं, यह देखने की बात है क्योंकि युद्ध की कीमत वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही है। युद्ध के कारण ऊर्जा संकट तेज हो गया है। इस बैठक में यह एक गर्म विषय है क्योंकि पुर्तगाल, स्पेन, ग्रीस और इटली के नेताओं को अनुकूल प्रतिक्रिया मिलने की उम्मीद है। नाटो शिखर सम्मेलन पूर्वी मोर्चे की सुरक्षा बढ़ाने पर भी विचार करेगा। नाटो शिखर सम्मेलन में रूस द्वारा जैविक औ...

NATO ने ‘Cold Response 2022’ सैन्य अभ्यास शुरू किया

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First Published: March 22, 2022 | Last Updated:March 22, 2022 14 मार्च से 1 अप्रैल, 2022  तक नॉर्वे में उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (North Atlantic Treaty Organization – NATO) द्वारा सैन्य अभ्यास ‘Cold Response 2022’ का आयोजन किया जा रहा है। यह अभ्यास नॉर्वे में द्विवार्षिक रूप से आयोजित किया जाता है और इसमें नाटो सहयोगी और भागीदार राष्ट्र भाग लेते हैं। मुख्य बिंदु  इस अभ्यास ने 27 देशों के 220 विमान, 30000 सैनिक और 50 से अधिक जहाज भाग ले रहे हैं। 30000 सैनिकों में से 14000 जमीनी सैनिक हैं, 8000 नाविक और नौसैनिक सैनिक हैं, और बाकी वायु सेना के सैनिक और साथ ही कई नॉर्वेजियन सैन्य सुविधाओं के कर्मचारी अधिकारी हैं। यह अभ्यास एक रक्षात्मक अभ्यास है जहां नॉर्वे के सहयोगी और साथ ही उनकी अपनी सेना बाहरी खतरों के खिलाफ देश की रक्षा के लिए विभिन्न युद्ध स्थितियों पर प्रशिक्षण में भाग लेती है। अधिकांश अभ्यास मध्य, दक्षिणपूर्व और उत्तरी नॉर्वे में आयोजित किया जाएगा। अभ्यास का उद्देश्य यह अभ्यास नाटो के सहयोग और सैन्य क्षमता में सुधार के उद्देश्य से 2006 से द्व...

क़तर बना अमेरिका का गैर-नाटो प्रमुख सहयोगी (Major Non-NATO Ally)

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First Published: March 14, 2022 | Last Updated:March 14, 2022 प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी अमेरिकी सरकार द्वारा अपने कुछ करीबी सहयोगियों को दिया जाने वाला दर्जा है। मुख्य बिंदु  अमेरिकी सरकार उन देशों को प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी का दर्जा देती है जो उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के सदस्य नहीं हैं, लेकिन अमेरिका के सशस्त्र बलों के साथ रणनीतिक संबंध रखते हैं। प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी का दर्जा में स्वचालित रूप से अमेरिका के साथ कोई पारस्परिक रक्षा समझौता शामिल नहीं है। इतिहास प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी का दर्जा 1987 में बनाया गया था। ऑस्ट्रेलिया, मिस्र, इज़रायल, जापान और दक्षिण कोरिया पहले पांच देश थे जिन्हें प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी का दर्जा मिला। प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी होने के लाभ रक्षा विभाग (DoD) के साथ सहकारी अनुसंधान में प्रवेश कुछ आतंकवाद विरोधी अभ्यासों में भागीदारी प्राथमिकता के आधार पर सैन्य अधिशेष की सुपुर्दगी विकास परियोजनाओं के लिए उपकरण और सामग्री के ऋण कुछ रक्षा उपकरण खरीदने के लिए अमेरिकी वित्त पोषण का उपयोग करने की अनुमति अंतरिक्ष प्रौद्योगि...

यूक्रेन में फंसे 240 भारतीयों को लेकर बुडापेस्ट से दिल्ली पहुंचा तीसरा विमान

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नई दिल्ली: यूक्रेन में फंसे 240 भारतीय नागरिकों को लेकर बुडापेस्ट से तीसरी फ्लाइट भी रविवार तड़के दिल्ली हवाई अड्डे पर उतर चुकी है. यूक्रेन और रूस के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. युद्ध के चौथे दिन भी लगातार हमले होते रहे. ऐसे में भारत यूक्रेन में फंसे भारतीयों को वहां से निकालने की पूरी कोशिश कर रहा है. शनिवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारतीयों को निकालने के लिए भारत सरकार ने इस मिशन का नाम ऑपरेशन गंगा रखा है.  यह भी पढ़ें इससे पहले आज सुबह ही रोमानिया की राजधानी से यूक्रेन में फंसे 250 भारतीय नागरिकों को लेकर एयर इंडिया की दूसरी निकासी उड़ान रविवार को तड़के दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरी थी. जहां मौजूद नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने हवाई अड्डे पर यूक्रेन से आए लोगों का गुलाब देकर स्वागत किया. भारत ने शनिवार को यूक्रेन में रूसी सैन्य हमले के बीच फंसे अपने नागरिकों को निकालने की शुरुआत की. पहली उड़ान, एआई 1944 शाम को बुखारेस्ट से 219 लोगों को लेकर मुंबई आई. दूसरी उड़ान दिल्ली पहुंची. एयर इंडिया ने ने ट्विटर पर सिंधिया की हवाई अड्डे पर निकासी की तस्वीरें साझा कीं. एय...

रूस की सोची समझी रणनीति... यूक्रेन में वही किया जो 2008 में जार्जिया पर किया था : रक्षा विशेषज्ञ

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Russia-Ukraine War: 'सीधे नरक में जाते हैं....'- जब UN की बैठक में आमने-सामने आए रूस और यूक्रेन भास्कर ने कहा, मेरा मानना है कि रूस द्वारा यूक्रेन के दो अलगाववादी क्षेत्रों डोंटेस्क और लुहांस्क (डोनबास्क) को स्वायत्त क्षेत्र घोषित करना और फिर शांतिरक्षक बनकर उन पर हमला बोलना यूक्रेन की सुरक्षा और संप्रभुता पर हमला है. यह पूरे यूरोप की स्थिरता के लिए बड़ी चुनौती है और देखना होगा कि अमेरिका और यूरोपीय देश इसके मुकाबले के लिए किस हद तक जा सकते हैं. यूक्रेन ने नाटो (सैन्य गठबंधन) में शामिल न होने का रुख भी दिखाया था, क्योंकि उसकी घरेलू राजनीति और मौजूदा स्थिति इसके अनुकूल नहीं है, वो खुद को स्वतंत्र और स्वायत्त देश के तौर पर आगे बढ़ाना चाहता है, जो न ही रूस के प्रभाव में हो और न ही अमेरिका या अन्य पश्चिमी देशों के. लगता है कि रूस इन दोनों अलगाववादी क्षेत्रों को एक बफर स्टेट के तौर पर स्थापित करना चाहता है.  कोमोडोर के मुताबिक, यूक्रेन पर परमाणु हमले की ताकत हासिल करने का आरोप लगाते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन की आक्रामक कार्रवाई निराधार है. नाटो की कथित विस्तारवादी रणनी...

रूस ने यूक्रेन के पास सैन्य अभ्यास आयोजित किया

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First Published: January 27, 2022 | Last Updated:January 27, 2022 रूस ने हाल ही में क्रीमिया से जुड़े क्षेत्र में सैन्य अभ्यास किया। इस अभ्यास में 6,000 से अधिक सैनिकों ने भाग लिया। गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में रूस और यूक्रेन के बीच तनाव का माहौल बना है और रूस ने यूक्रेन की सीमा पर पहले ही एक लाख सैनिक तैनात कर दिए हैं। रूस ने यह अभ्यास क्यों किया? यह अभ्यास अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में किया गया था। रूस के मुताबिक अमेरिका अपने सैनिकों को अलर्ट पर रख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल ही में यूरोपीय नेताओं के साथ बैठक की। इस बैठक के बाद, बाईडेन ने घोषणा की कि रूस से निपटने पर “पूर्ण एकमत” है। साथ ही अमेरिका ने 8,500 सैनिकों को स्टैंडबाय पर रखा है। साथ ही अमेरिका पूर्वी यूरोपीय देशों की रक्षा को मजबूत करने के लिए जहाज भेज रहा है। रूस के इस अभ्यास को इन कार्रवाइयों की जवाबी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।  इस ड्रिल में बमवर्षक विमान, लड़ाकू जेट, विमान-रोधी प्रणालियाँ, कैस्पियन सागर के बेड़े और काला सागर बेड़े के जहाज़ शामिल थे। यूक्रेन 1991 में सोव...