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इंसान अपने शरीर के इस अंग से भी ले सकते हैं सांस, जानकर रह जाएंगे दंग

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वैज्ञानिकों द्वारा तरह-तरह की स्टडी की जाती है, जिसमें कई ऐसे तथ्य सामने आते हैं, जो आपको चौंका सकते हैं। एक लेटेस्ट स्टडी में भी ऐसी जानकारी निकलकर सामने आई है, जिसे जानकर आप दंग रह जाएंगे, या यूं कहो की आप उसे मानने के लिए शायद राजी भी न हो। वैज्ञानिकों की एक टीम ने पता लगाया है कि गुदा से सांस लेना संभव है। जी हां, आपने सही पढ़ा, इस स्टडी में दावा किया गया है कि यह खोज भविष्य में इंसानों की भी जान बचाने के काम आएगी। Science Direct ने MED में पब्लिश एक रिसर्च का हवाला देते हुए बताया कि गुदा से सांस लेना भी संभव है। वैज्ञानिकों के एक समूह ने कछुओं के धीमे मेटाबॉलिज्म के आधार पर सूअरों और चूहों पर कई प्रयोग किए। इसमें म्यूकोसल लाइनिंग को पतला करने के लिए जानवरों की आंतों को साफ किया गया, जिससे खून के प्रवाह में बाधा को कम किया जा सके। इसके बाद उन जानवरों को एक ऐसे कमरे में रखा गया जहां ऑक्सीजन नहीं थी। ऐसा माना जाता है कि क्योंकि कछुओं के पास इस तरह की परत होती है, वे अपने गुदा के जरिए सांस लेने में सक्षम होते हैं, जिसकी वजह से वो सर्दियों में जीवित रहने में सक्षम होते हैं। रिपोर्ट...

इंसान की आंख जैसी यह क्‍या चीज है मंगल ग्रह पर? स्‍पेस एजेंसी ने समझाया

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मंगल ग्रह पर दुनियाभर की अंतरिक्ष एजेंस‍ियों ने अपने मिशन भेजे हैं। इन्‍हीं में से एक मिशन के तहत यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के मार्स एक्सप्रेस मिशन ने लाल ग्रह के दक्षिणी गोलार्ध में गड्ढे की आकृति वाले क्षेत्र, एओनिया टेरा (Aonia Terra) में एक इमेज को कैप्‍चर किया है। पहली नजर में देखने पर ऐसा लगता है कि ग्रह पर एक विशालकाय आंख मौजूद है, जो हमेशा खुली रहती है। हालांकि हकीकत में ऐसा कुछ नहीं है। तस्‍वीर भले ही आंखनुमा कोई स्‍ट्रक्‍चर हो, पर यह इस ग्रह की जियोलॉजी को बेहतर तरीके से दिखा सकती है। माना जाता है कि लगभग 4 अरब साल पहले इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर ऐसे गड्ढे उभर आए थे और यह सब हमारे सोलर सिस्‍टम के शुरुआती समय में हुई उथल-पुथल का नतीजा था।  कुछ दिन पहले ESA ने एक बयान जारी किया था। उससे ऐसा लग रहा था कि एजेंसी कोई साइंस फिक्शन हॉरर फिल्म लिखने की योजना बना रही है। उसके स्‍टेटमेंट का टाइटल था- ‘मार्स स्लीप्स विद वन आई ओपन'। अपने स्‍टेटमेंट में ईएसए ने बताया है कि यह इमेज और ऐसे गड्ढे आज से 3.5 से 4 अरब साल पहले लिक्विड वॉटर के लिए किसी तरह की सप्‍लाई में मदद करते...

लाखों किलोमीटर दूर तारों का सफर बिना स्‍पेसशिप के करेगा इंसान, यह तरीका आएगा काम!

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अगले 5 अरब साल में क्या होगा, जब सूर्य एक लाल ‘दानव' में बदल जाएगा यानी बहुत बड़ा और गर्म हो जाएगा व पृथ्वी को खा जाएगा? वैज्ञानिक लंबे समय से इस सवाल से जूझ रहे हैं। क्या यह घटना ब्रह्मांड से मानव जाति के खत्‍म होने की वजह बनेगी? क्या इस विनाश से प्रजातियों को बचाने का कोई तरीका है? इसका जवाब है एक ऐसे ग्रह की इंटरस्टेलर यात्रा जो मनुष्यों के लिए अगला घर हो सकता है। यह मानव जाति को बचाने का काल्पनिक तरीका है, लेकिन क्‍या ऐसा हकीकत में मुमकिन है? अगर हमें ऐसा कोई ग्रह मिल भी जाए, तो अंतरिक्ष यान से वहां तक पहुंचने में सैकड़ों और हजारों साल लग सकते हैं।  इसका मतलब है कि इंसान को पृथ्‍वी से बाहर अपना नया घर खोजने में कई पीढ़ियां लग जाएंगी। हालांकि एक रिसर्च पेपर से पता चलता है कि अंतरिक्ष यान के बिना भी इंटरस्टेलर यात्रा हो सकती है। अंतरतारकीय अंतरिक्ष उड़ान (interstellar travel) दो तारों या प्‍लेनेटरी सिस्‍टम के बीच अंतरिक्ष उड़ान द्वारा की गई यात्रा को कहते हैं। फि‍लहाल यह पूरी तरह काल्पनिक है। ह्यूस्टन कम्युनिटी कॉलेज में फ‍िजिक्‍स और एस्‍ट्रोनॉमी की प्रोफेसर इरिना रोमानोव्सक...

Nasa के पूर्व साइंटिस्‍ट का दावा- अगले कुछ साल में इंसान को मिल जाएंगे एलियंस

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क्‍या पृथ्‍वी के बाहर भी जीवन मौजूद है? यह सवाल वर्षों से हमारे सामने बना हुआ है। इसी के साथ एक और प्रश्‍न सामने आता है कि क्‍या एलियंस हैं? अगर हैं तो उनका अस्तित्‍व कहां है और कब से है? वैज्ञानिक इन सवालों के जवाब खोजने में जुटे हैं। हालांकि उनके सामने अबतक कोई पुख्‍ता तथ्‍य नहीं आ पाया है। दुनिया में यह मानने वालों की कमी नहीं है कि पृथ्‍वी के बाहर भी जीवन है और एलियंस का वजूद है। ऐसा मानने वालों में नासा के एक पूर्व प्रमुख वैज्ञानिक भी शामिल हैं। एक टीवी इंटरव्‍यू में बीते दिनों उन्‍होंने कहा कि अगले कुछ साल में इंसान की मुलाकात एलियंस से होगी।     बीबीसी से बातचीत में जिम ग्रीन ने समझाया कि पृथ्वी के बाहर भी जीवन मौजूद है, इस विश्वास को व्यक्त करने के बाद इंसान वास्तव में आश्चर्यजनक खोज के करीब है। करीब 40 साल तक अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी में काम कर चुके जिम ने कहा, उन्‍हें उम्‍मीद है कि उनके जीवनकाल में एलियंस की खोज हो जाएगी। जिम ने कहा कि हम बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। अब हम यह जानते हैं कि हमारी आकाशगंगा में जितने ग्रह हैं, उससे भी कहीं अधिक तारे हैं। उन्होंने कहा कि उनमे...

एलियंस से संपर्क करने के लिए NASA अंतरिक्ष में भेजेगा नग्न इंसानों की तस्वीर

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NASA लंबे अर्से से एलियंस से संपर्क करने की कोशिश करता आया है और अब स्पेस एजेंसी इस ओर एक नया कदम उठाने का फैसला कर चुकी है। नासा के वैज्ञानिक अंतरिक्ष में इंसानों की नग्न तस्वीरें भेजने की योजना बना रहे हैं। एक लेटेस्ट मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि बाहरी दुनिया में अन्य जीवन के साथ संपर्क किया जा सकता है, जिसके लिए अब उन्होंने एक महिला और एक पुरुष की डिज़िटल पिक्सेलेटेड चित्र भेजने का फैसला किया है। इस चित्रण में इंसानी DNA और साथ ही ग्रैविटी (गुरुत्वाकर्षण) की जानकारी को भी शामिल किया गया है।  The Sun की रिपोर्ट कहती है कि NASA के वैज्ञानिकों ने इस तस्वीर को एक स्टडी में पेश किया था, जो ‘Beacon in the Galaxy' (BITG) नाम के एक प्रोजेक्ट का हिस्सा थी। यह तस्वीर असल में वास्तविक इंसानों की नग्न तस्वीर नहीं है, बल्कि यह नग्न पुरुष और महिला का एक रेखा-चित्र है। इसमें महिला के साइड में एक DNA का चित्रण भी है और पुरुष के साइड में निचे गिरती चीज़ों के जरिए गुरुत्वाकर्षण को भी दर्शाया गया है। रिपोर्ट कहती है कि BITG प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य बाहरी दुनिया में मौजूद किसी भी प्रक...

इंसान को चांद पर पहुंचाने वाले रॉकेट में मिल रहीं खामियां, आर्टेमिस 1 मिशन की वेट ड्रेस रिहर्सल में फ‍िर देरी

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नासा (NASA) के आर्टेमिस 1 (Artemis 1) स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) मून मिशन टेस्ट में कई बार देरी हो चुकी है। अब अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने ऐलान किया है कि फाइनल टेस्‍ट को मॉडिफाई किया जाएगा। इस प्रकार से इस लॉन्च में और देर होगी। इस नेक्‍स्‍ट-जेनरेशन स्‍पेस लॉन्‍च सिस्‍टम की वेट ड्रेस रिहर्सल का आयोजन नासा पिछले सप्‍ताह से कर रही है। SLS का मोबाइल लॉन्‍चर प्‍लेटफॉर्म इस रिहर्सल में परेशानी की वजह बना है। गौरतलब है कि आर्टेमिस 1 मिशन के जरिए नासा एक बार फ‍िर से इंसान को चंद्रमा पर उतारने के अपने मिशन की शुरुआत कर रही है।   नासा की योजना 9 अप्रैल को टेस्‍ट फिर से शुरू करने की थी। एजेंसी ने शनिवार को बताया कि अब यह टेस्‍ट यानी वेट ड्रेस रिहर्सल टेस्टिंग 12 अप्रैल और टैंकिंग के साथ 14 अप्रैल से शुरू होगी।  अपने बयान में नासा ने कहा है कि इन बदलावों से इंजीनियर्स को सफलता पाने में मदद मिलेगी। एजेंसी ने बताया है कि इंजीनियरों ने एक हीलियम चेक वॉल्व की पहचान की है, जो बेहतर तरीके से काम नहीं कर रहा है। फ्लाइट हार्डवेयर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह बदलाव करना पड़ा है। ध्‍यान रहे कि वे...

इंसान को चांद पर ले जाने वाले SLS रॉकेट की टेस्टिंग में आई प्रॉब्‍लम, Nasa ने लिया यह फैसला

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने अपने स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) के अंतिम बड़े परीक्षण में एक बार फिर देरी कर दी है। नासा ने बताया है कि मोबाइल लॉन्चर में प्रेशर बनाए रखने में आ रहे इशू के बाद ‘वेट ड्रेस रिहर्सल' को सस्‍पेंड कर दिया गया है। गौरतलब है कि मोबाइल लॉन्‍चर ही मिशन के लॉन्‍च होने तक रॉकेट को सपोर्ट देता है। यह टेक्निशियंस को रॉकेट में सेफ्टी के साथ प्रणोदक (propellants) लोड करने से रोकता है। बताया जा रहा है कि नासा के इंजीनियर इस इशू को सॉल्‍व करने के लिए काम कर रहे हैं। एजेंसी ने अपडेट किया है कि वह सोमवार को आर्टेमिस I (Artemis I) अनक्रूड मिशन का फाइनल टेस्‍ट फिर शुरू करने का लक्ष्य बना रही है। स्‍पेस लॉन्‍च सिस्‍टम (SLS) का इस्‍तेमाल इंसान को एक बार फ‍िर से चंद्रमा पर और आगे चलकर मंगल ग्रह पर ले जाने के लिए किया जाएगा।  अमेरिका के कैनेडी स्पेस सेंटर में 322-फुट के स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट को परखने के लिए वेट ड्रेस रिहर्सल शुक्रवार को शुरू हुई थी। इसे रविवार तक पूरा कर लिया जाना था, लेकिन मोबाइल लॉन्‍चर के कुछ पंखे इसके अंदर पॉजिटिव प्रेशर नहीं बना सके। ...

इंसान को दोबारा चंद्रमा पर उतारने के लिए Nasa तैयार करेगी एक और मून लैंडर

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) अपने आर्टिमिस प्रोजेक्‍ट (Artemis project) के तहत एक बार फ‍िर से इंसान को चंद्रमा पर भेजने की तैयारी कर रही है। अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर उतारने के लिए नासा ने कई प्राइवेट स्‍पेसक्राफ्ट इस्‍तेमाल करने की योजना बनाई है। शुरुआत में उसने सिर्फ एलन मस्क के मालिकाना हक वाली स्पेसएक्स (SpaceX) को चुना था। अब ऐसा लगता है कि नासा अपनी रणनीति पर फ‍िर विचार कर रही है। नासा ने इस हफ्ते ऐलान किया कि वह अंतरिक्ष यात्रियों के लिए एक अन्‍य प्राइवेट मून लैंडर के डेवलपमेंट को सपोर्ट करना चाहती है। आर्टेमिस प्रोग्राम का मकसद लगभग तीन दशक बाद इंसान को चंद्रमा पर उतारना है और इस दशक के आखिर तक वहां एक स्थायी उपस्थिति तैयार करना है। नासा ने फ्यूचर के अंतरिक्ष मिशन के लिए चंद्रमा को एक लॉन्‍चपैड की तरह इस्‍तेमाल करने की योजना भी बनाई है। वह चंद्रमा से मंगल ग्रह पर पहुंचना चाहती है।  अगले कुछ हफ्तों में नासा एक ड्राफ्ट जारी करेगी, ताकि स्पेसएक्स के साथ-साथ लूनार लैंडर को डेवलप करने के लिए मार्केट में दूसरा दावेदार लाया जा सके। इससे आगे चलकर चंद्रमा पर लैंडिंग स...

इंसान को दोबारा चांद पर उतारने का आज अहम दिन, रोलआउट के लिए सेट हुआ Nasa का ‘मून रॉकेट’

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) आज एक अहम टास्‍क शुरू करने जा रही है। एजेंसी अपने मून मिशन के लिए स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट को रोलआउट करने जा रही है। इसके जरिए इंसान को चंद्रमा, मंगल ग्रह और उससे भी आगे तक ले जाने की तैयारी है। पिछले एक दशक से तैयार हो रहा यह सिस्‍टम आज रोलआउट के लिए जाएगा। यह सफल रहा, तो फ‍िर कई और टेस्‍ट किए जाएंगे और सबसे आखिर में ‘वेट ड्रेस रिहर्सल' होगी। रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका के केप कैनावेरल स्थित नासा के केनेडी स्पेस सेंटर में यह प्रक्रिया भारतीय समय के मुताबिक, आज देर रात 2:30 बजे से शुरू होगी। इस दौरान 5.75 मिलियन टन वजनी और 32 मंजिला SLS-ओरियन स्‍पेसक्राफ्ट को स्थानांतरित किया जाएगा। इस दौरान मौसम के बेहतर रहने का अनुमान लगाया गया है। यह सिस्‍टम पिछले एक दशक से तैयार हो रहा है, जिसमें देरी की वजह से इसकी लागत बढ़ी है। हालांकि नासा को उम्मीद है कि एक बार इसे सफलतापूर्वक लॉन्च करने के बाद यह अपने डेवलपमेंट में हुई देरी को कवर कर लेगा।  नासा में आर्टिमिस के लॉन्‍च डायरेक्‍टर चार्ली ब्लैकवेल-थॉम्पसन इस सप्‍ताह की शुरुआत में कहा था कि तैयारी...

चंद्रमा के लिए व्‍हीकल बना रही Toyota, साल 2040 तक इंसान को बसाने का ‘सपना’

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ऑटो मेकर टोयोटा (Toyota) जापान की अंतरिक्ष एजेंसी के साथ एक व्‍हीकल पर काम कर रही है। इसे चंद्रमा पर उतारने की तैयारी है। कंपनी साल 2040 तक लोगों को चंद्रमा पर रहने में मदद करना चाहती है और उसके बाद मंगल ग्रह पर जाने की तैयारी है। कंपनी के अधिकारियों ने यह जानकारी देते हुए बताया है कि जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी के साथ डेवलप किए जा रहे इस व्‍हीकल को लूनार क्रूजर नाम दिया गया है। यह नाम टोयोटा की लैंड क्रूजर स्पोर्ट यूटिलिटी व्‍हीकल को समर्पित है।  टोयोटा मोटर के लूनार क्रूजर प्रोजेक्‍ट के हेड ताकाओ सातो ने कहा कि इस व्‍हीकल के पीछे यह आइ‍डिया है कि लोग कारों में सुरक्षित रूप से खाते हैं, काम करते हैं, सोते हैं और दूसरों से कम्‍युनिकेट करते हैं। अंतरिक्ष के बाहर भी यही किया जाता है। यानी व्‍हीकल को इसी तर्ज पर तैयार किया जा रहा है।  एक न्‍यूज एजेंसी से बातचीत में उन्‍होंने कहा कि हम अंतरिक्ष को एक ऐसे क्षेत्र के रूप में देखते हैं, जहां दूरसंचार और अन्य तकनीकों को डेवलप किया जा सकता है। ये इंसान की जिंदगी के लिए मूल्यवान साबित होंगी। टोयोटा के साथ कॉन्‍ट्रैक्‍ट करने वाली कंपन...

Nasa के Artemis-3, 4 और 5वें मून मिशन पर भी चल रहा काम, इंसान को दोबारा चांद पर उतारने की है तैयारी

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नासा (NASA) के मून मिशन आर्टिमिस-1 (Artemis I) की लॉन्चिंग होना अभी बाकी है। इस बीच नासा और अमेरिका में उसके तमाम सहयोगी दूसरे आर्टेमिस लॉन्च के लिए स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट पर काम कर रहे हैं। यह पहला क्रू आर्टेमिस मिशन होगा। यानी इसके जरिए एक बार फ‍िर इंसान को चांद पर उतारा जाएगा। नासा ने कहा है कि SLS रॉकेट पर काम कर रहे वैज्ञानिकों की टीमों ने दूसरे आर्टेमिस मिशन में ‘बेहतरीन प्रगति' की है। अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा है कि उसकी टीमें आर्टेमिस मिशन के प्रमुख हिस्सों को भी टेस्‍ट कर रही हैं, जिन्‍हें पहले दो मिशन के बाद लॉन्‍च किया जाना है। ये आर्टिमिस-3, 4 और 5 मिशन होंगे।  आर्टेमिस मिशन नासा के सबसे महत्वाकांक्षी प्रोग्राम्‍स में से एक है। इसका मकसद 1970 के दशक के बाद पहली बार इंसान को चंद्रमा पर उतारना है। नासा का लक्ष्य लंबे समय के लिए चंद्रमा पर इंसान की मौजूदगी स्‍थापित करना है। इसके साथ ही मंगल पर जाने के लिए चंद्रमा को लॉन्चपैड में बदलना है। आर्टिमिस-1 इस जटिल सीरीज का पहला हिस्‍सा है। वहीं, SLS रॉकेट दुनिया का सबसे ताकतवर रॉकेट होने जा रहा है, जो मिशन को तेजी से आग...