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द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) कौन हैं?

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First Published: June 22, 2022 | Last Updated:June 22, 2022 हाल ही में भारतीय जनता पार्टी ने द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामित किया है। चुनाव जीतने के बाद वे भारत की पहली आदिवासी राष्ट्रपति होंगी। द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) द्रौपदी मुर्मू भारतीय जनता पार्टी की नेता हैं। उनका जन्म 20 जून, 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले में हुआ था। वे आदिवासी समाज से सम्बंधित हैं। उन्हें 1997 में रायरंगपुर नगरपंचायत का कौंसिलर चुना गया था। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के अनुसूचित जनजाति मोर्चा के उपाध्यक्ष के रूप में भी काम किया है। ओडिशा में भारतीय जनता पार्टी और बीजू जनता दल गठबंधन सरकार के दौरान, वह 6 मार्च, 2000 से 6 अगस्त, 2002 तक वाणिज्य और परिवहन (स्वतंत्र प्रभार) और 6 अगस्त, 2002 से 16 मई, 2004 तक मत्स्य पालन और पशु संसाधन विकास राज्य मंत्री थीं। उन्हें 2007 में ओडिशा विधानसभा द्वारा सर्वश्रेष्ठ विधायक के लिए नीलकंठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वह झारखंड की पहली महिला राज्यपाल थीं। वह भारतीय राज्य में राज्यपाल के रूप में नियुक्त होने व...

श्तेफ़ानिया मॉरेचिनानू (Ștefania Mărăcineanu) कौन हैं?

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First Published: June 18, 2022 | Last Updated:June 18, 2022 हाल ही में गूगल ने रोमानियाई भौतिक विज्ञानी श्तेफ़ानिया मॉरेचिनानू (Ștefania Mărăcineanu) का 140वां जन्मदिन डूडल के साथ मनाया। श्तेफ़ानिया मॉरेचिनानू रेडियोधर्मिता की खोज और अनुसंधान में अग्रणी महिलाओं में से एक थी।  श्तेफ़ानिया मॉरेचिनानू (Ștefania Mărăcineanu) श्तेफ़ानिया मॉरेचिनानू (Ștefania Mărăcineanu) का जन्म 18 जून, 1882 को रोमानिया में हुआ था। उन्होंने 1910 में एक भौतिक और रासायनिक विज्ञान की डिग्री के साथ स्नातक की उपाधि प्राप्त की, बाद में उन्होंने बुखारेस्ट में सेंट्रल स्कूल फॉर गर्ल्स में एक शिक्षक के रूप में अपना करियर शुरू किया। वहाँ रहते हुए, मॉरेचिनानू ने रोमानियाई विज्ञान मंत्रालय से छात्रवृत्ति अर्जित की। उसने पेरिस में रेडियम संस्थान में स्नातक शोध करने का फैसला किया। भौतिक विज्ञानी मैरी क्यूरी के निर्देशन में रेडियम संस्थान तेजी से रेडियोधर्मिता के अध्ययन के लिए एक विश्वव्यापी केंद्र बन रहा था। मोरेसिनेनु ने पोलोनियम पर अपनी पीएचडी थीसिस पर काम करना शुरू किया, एक ऐसा त...

एंजेलो मोरियोंदो (Angelo Moriondo) कौन हैं?

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First Published: June 6, 2022 | Last Updated:June 6, 2022 हाल ही में गूगल ने डूडल बनाकर दुनिया की पहली ज्ञात एस्प्रेसो मशीन के आविष्कारक एंजेलो मोरियोंदो (Angelo Moriondo) को उनकी 171वीं जयंती के अवसर पर श्रद्धांजलि दी। मुख्य बिंदु एंजेलो मोरियोंदो (Angelo Moriondo) का जन्म 6 जून, 1851 को ट्यूरिन, इटली में उद्यमियों के एक परिवार में हुआ था। इटली में कॉफी की लोकप्रियता के बावजूद, ग्राहकों को कॉफी बनाने के लिए काफी इंतज़ार करना पड़ता था। मोरियोंदो ने सोचा कि एक बार में कई कप कॉफी बनाने से वह तेज गति से अधिक ग्राहकों को सेवाएं दे सकेंगे, जिससे उसे अपने प्रतिस्पर्धियों पर बढ़त मिल जाएगी। एक मैकेनिक की सीधी निगरानी के बाद उन्होंने अपने आविष्कार का निर्माण करने के लिए सूचीबद्ध किया, मोरियोंदो ने 1884 में ट्यूरिन के जनरल एक्सपो में अपनी एस्प्रेसो मशीन प्रस्तुत की, जहां इसे कांस्य पदक से सम्मानित किया गया। एंजेलो मोरियोंदो (Angelo Moriondo) एंजेलो मोरियोंदो (Angelo Moriondo) का जन्म 6 जून, 1851 को इटली के ट्यूरिन में हुआ था। उन्होंने वर्ष 1984 में प्रथम ...

सत्येंद्र नाथ बोस (Satyendra Nath Bose) कौन थे?

गूगल के इस डूडल में बोस को एक प्रयोग करते हुए दिखाया गया है। बोस को अल्बर्ट आइंस्टीन के साथ विद्युत चुम्बकीय विकिरण के गैस जैसे गुणों (gaslike qualities of electromagnetic radiation) के बारे में एक सिद्धांत विकसित करने में सहयोग के लिए जाना जाता है। सत्येंद्र नाथ बोस (Satyendra Nath Bose) सत्येंद्र नाथ बोस का जन्म 1 जनवरी, 1894 को कोलकाता में हुआ था। उन्हें 1920 के दशक की शुरुआत में क्वांटम यांत्रिकी पर अपने काम के लिए जाना जाता है। वह रॉयल सोसाइटी के फेलो थे और 1954 में उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। वह वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद के सलाहकार भी थे, और बाद में रॉयल सोसाइटी के फेलो बन गए। वह कई क्षेत्रों में रुचि रखते थे, जिसमें भौतिकी, गणित, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, खनिज विज्ञान, दर्शन, कला, साहित्य और संगीत शामिल हैं। उन्होंने भारत में कई अनुसंधान और विकास समितियों में कार्य किया। 15 साल की उम्र में, बोस ने कलकत्ता के प्रेसीडेंसी कॉलेज में विज्ञान स्नातक की डिग्री हासिल करना शुरू किया और कलकत्ता विश्वविद्यालय से शीघ्र ही एप्लाइड गण...

कार्लोस अल्काराज़ (Carlos Alcaraz) कौन हैं?

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First Published: May 11, 2022 | Last Updated:May 11, 2022 2022 मैड्रिड ओपन एक पेशेवर टेनिस टूर्नामेंट था जो 28 अप्रैल से 8 मई 2022 तक आयोजित किया गया। यह पार्क मंज़ानारेस, मैड्रिड, स्पेन में आउटडोर क्ले कोर्ट पर खेला गया। यह इस टूर्नामेंट का 13वां संस्करण है। इस टूर्नामेंट में पुरुष एकल वर्ग का खिताब स्पेन के कार्लोस अल्काराज़ (Carlos Alcaraz) ने जीता। वे मात्र 19 वर्ष के हैं। और इस टूर्नामेंट में उन्होंने नोवाक जोकोविच, राफेल नडाल और अलेक्जेंडर ज्वेरेव को हराया। मैड्रिड ओपन 2022 के विजेता पुरुष एकल- कार्लोस अल्काराज़ (स्पेन) ने अलेक्जेंडर ज्वेरेव (जर्मनी) को हराया। महिला एकल- ओन्स जबूर (ट्यूनीशिया) ने जेसिका पेगुला (अमेरिका) को हराकर जीत हासिल की। पुरुष युगल- वेस्ले कूलहोफ (नीदरलैंड) और नील स्कूप्स्की (यूनाइटेड किंगडम) ने जुआन सेबेस्टियन काबाल (कोलंबिया) और रॉबर्ट फराह (कोलंबिया) को हराया। गैब्रिएला डाब्रोवस्की (कनाडा) और गिउलिआना ओल्मोस (मेक्सिको) ने देसीरा क्रावज़िक (अमेरिका) और डेमी शूर्स (नीदरलैंड) को हराकर महिला युगल जीता।   Categori...

कौन कहता है अंतरिक्ष में साउंड नहीं, ब्‍लैक होल से आने वाली इस आवाज को सुनिए

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ब्रह्मांड में होने वाली गतिविधियां हर बार हमें एक नई जानकारी देती हैं। क्‍या आपने कभी किसी ब्‍लैकहोल से निकलने वाले साउंड के बारे में पढ़ा है। ब्‍लैक होल, जिनके बारे में हम यह समझते आए हैं कि उनमें गुजरकर प्रकाश भी गायब हो जाता है, वह साउंड भी जनरेट कर सकते हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) ने हाल ही में पर्सियस आकाशगंगा क्‍लस्‍टर के केंद्र में एक ब्लैक होल से निकलने वाली साउंड क्लिप को रिलीज किया है। इसमें ब्‍लैक होल से निकलने वाले साउंड को सुना जा सकता है।  रिपोर्टों के अनुसार, साल 2003 से इस ब्‍लैक होल को पर्सियस आकाशगंगा क्‍लस्‍टर के केंद्र में देखा जा रहा है। खगोलविदों ने इसकी वजह का भी अनुमान लगया है। उनका कहना है कि ब्‍लैक होल जिन प्रेशर वेव्‍स को भेजता है, उनसे इस आकाशगंगा की गर्म गैसों में तरंगें पैदा होती हैं। यह साउंड में बदलने लगती हैं। हालांकि हम इसे सीधे कानों से नहीं सुन सकते। यह सब तकनीक के जरिए हमारे सामने आया है।   यह सब मुमकिन हुआ है सोनिफिकेशन के जरिए। यह नासा की चंद्रा एक्स-रे ऑब्‍जर्वेट्री के डेटा में उन साउंड वेव्‍स को रिविजिट करती है, जिन्‍हें खोजा ग...

विवेक अग्निहोत्री (Vivek Agnihotri) कौन हैं?

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First Published: March 18, 2022 | Last Updated:March 18, 2022 पिछले कुछ दिनों से विवेक अग्निहोत्री (Vivek Agnihotri) सुर्ख़ियों में रहे हैं। दरअसल, विवेक अग्निहोत्री और फिल्म निर्देशक हैं। और पिछले दिनों उनकी फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ रिलीज़ हुई। इस फिल्म ने शानदार प्रदर्शन किया और कई रिकॉर्ड बनाये। द कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files) यह फिल्म 11 मार्च, 2022 को रिलीज़ की गई थी। यह फिल्म 15 करोड़ रुपये के बजट में बनाई गई है और इस फिल्म ने मात्र एक हफ्ते रुपये में लगभग 100 करोड़ रुपये की कमाई कर ली है। इसमें फिल्म में अनुपम खेर और मिथुन चक्रवर्ती जैसे कलाकारों ने काम किया है। यह फिल्म 1990 के दशक में कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर आधारित है। कश्मीरी पंडितों का नरसंहार 1990 में बड़े पैमाने पर कश्मीरी पंडितों की हत्या के कारण कश्मीरी पंडितों ने कश्मीर घाटी से पलायन किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक कश्मीर घाटी से 1,40,000 कश्मीरी पंडितों में से लगभग एक लाख लोगों ने पलायन किया था। गृह मंत्रालय ने अनुसार 1988 से 1991 के बीच 218 कश्मीरी पंडितों की हत्या की गई...

रोजा बोनहेर (Rosa Bonheur) कौन थीं?

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First Published: March 16, 2022 | Last Updated:March 16, 2022 गूगल ने 16 मार्च को फ्रांसीसी चित्रकार रोजा बोनहेर का 200वां जन्मदिन मनाने के लिए एक डूडल बनाया। गौरतलब है कि उनके सफल करियर ने कला महिलाओं की भावी पीढ़ी को प्रेरित किया।  मुख्य बिंदु हालांकि कला में करियर के लिए बोनहेर की आकांक्षाएं उस समय की महिलाओं के लिए अपरंपरागत थीं, उन्होंने वर्षों के सावधानीपूर्वक अध्ययन किया और रेखाचित्रों को कैनवास पर अमर करने से पहले कलात्मक परंपराओं के विकास का बारीकी से अनुसरण किया। एक पशु चित्रकार और मूर्तिकार के रूप में बोनहेर की प्रतिष्ठा 1840 के दशक में बढ़ी। 1841 से 1853 तक प्रतिष्ठित पेरिस सैलून में उनके कई कार्यों को प्रदर्शित किया गया किया गया। 1853 में, बोनहेर ने अपनी पेंटिंग “द हॉर्स फेयर” के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त की, जिसमें पेरिस में आयोजित घोड़े के बाजार को दर्शाया गया था। उनके सबसे प्रसिद्ध चित्र के रूप में, यह पेंटिंग न्यूयॉर्क के मेट्रोपॉलिटन म्यूज़ियम ऑफ़ आर्ट में प्रदर्शित है। इस प्रसिद्ध पेंटिंग का सम्मान करने के लिए, फ्रांस...

श्रीमंत शंकरदेव (Srimanta Sankardeva) कौन थे?

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First Published: March 2, 2022 | Last Updated:March 2, 2022 27 फरवरी, 2022 को असम सरकार ने उन स्थानों पर ‘नामघर’ (वैष्णव मठ) स्थापित करने का निर्णय लिया, जहां 15वीं शताब्दी के संत और समाज सुधारक श्रीमंत शंकरदेव  ने बत्रादव (असम) से कूचबिहार (पश्चिम बंगाल)। की यात्रा के दौरान कम से कम एक रात बिताई थी। मुख्य बिंदु  असम सरकार तीर्थयात्रियों के लिए उन स्थानों को कवर करने के लिए ASTC के तहत विशेष बस सेवा शुरू करने की भी योजना बना रही है। यह घोषणा डिब्रूगढ़ जिले के नाहरकटिया में श्रीमंत शंकरदेव संघ के 91वें वार्षिक सत्र के दौरान की गई। सरकार कर्मचारियों के वेतन खर्च को पूरा करने के लिए महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव विश्वविद्यालय को प्रति वर्ष 6 करोड़ रुपये प्रदान करेगी। श्रीमंत शंकरदेव कौन थे? श्रीमंत शंकरदेव 15वीं-16वीं सदी के असमिया संत-विद्वान, नाटककार, संगीतकार, कवि, नर्तक, अभिनेता और सामाजिक-धार्मिक सुधारक थे। वह असम के सांस्कृतिक और धार्मिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति थे। उन्हें व्यापक रूप से पिछले सांस्कृतिक अवशेषों के निर्माण और नाट्य प्रदर्शन (अं...

नरसिंह मेहता (Narsinh Mehta) कौन थे?

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First Published: March 1, 2022 | Last Updated:March 1, 2022 जूनागढ़ में भक्त कवि नरसिंह मेहता विश्वविद्यालय (BKNMU) के शोधकर्ताओं ने हाल ही में मकड़ी की एक नई प्रजाति की खोज की है। नरसिंह मेहता को सम्मानित करने और उनका नाम वैश्विक मानचित्र पर रखने के लिए इसे “नरसिंहमेहताई” नाम दिया गया है। मुख्य बिंदु नरसिंह मेहता 15वीं सदी के कवि और भगवान कृष्ण के भक्त थे।  ब्राह्मण समुदाय के सदस्यों ने नामकरण पर आपत्ति जताते हुए कहा कि वह पहले से ही एक वैश्विक नाम था और उनके नाम को मकड़ी के साथ जोड़ने की कोई आवश्यकता नहीं थी। नरसिंह मेहता कौन थे? नरसिंह मेहता का जन्म 1410 में, वर्तमान भावनगर जिले के तलजा में हुआ था। 1480 के दशक में जूनागढ़ में उनकी मृत्यु हुई। उनके परिवार की उत्पत्ति उत्तरी गुजरात के वडनगर में हुई थी। मूल जाति का नाम पांड्या माना जाता है, लेकिन क्योंकि परिवार के सदस्य राज्यों में अधिकारी थे, उन्हें मेहता कहा जाता था।  नरसिंह मेहता की कविता नरसिंह मेहता ने 750 से अधिक कविताएँ लिखी थीं, जिन्हें गुजरात में पद कहा जाता है। यह कविताएँ मुख्य रूप से भगव...

डॉ. मिचियाकी ताकाहाशी (Dr Michiaki Takahashi) कौन थे?

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First Published: February 17, 2022 | Last Updated:February 17, 2022 गूगल ने आज डॉ. मिचियाकी ताकाहाशी के सम्मान में एक डूडल बनाया है। गौरतलब है कि डॉ. ताकाहाशी ने चिकनपॉक्स के खिलाफ पहला टीका विकसित किया था । मुख्य बिंदु डॉ. ताकाहाशी का यह जीवन रक्षक टीका, जिसका उपयोग 80 से अधिक देशों में वर्षों से किया जा रहा है, चिकनपॉक्स रोग को रोकने के लिए एक प्रभावी उपाय के रूप में दुनिया भर के लाखों बच्चों को दिया गया है। मिचियाकी ताकाहाशी (Michiaki Takahashi) Categories: व्यक्तिविशेष करेंट अफेयर्स Tags:Chickenpox Vaccine , Dr Michiaki Takahashi , Hindi Current Affairs , Hindi News , Michiaki Takahashi , डॉ. मिचियाकी ताकाहाशी , मिचियाकी ताकाहाशी , हिंदी करेंट अफेयर्स , हिंदी समाचार https://myrevolution.in/current-affair-hindi/%e0%a4%a1%e0%a5%89-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b6%e0%a5%80-dr-michiaki-takahashi-%e0%a4%95/?feed_id=12546&_unique_...

संगोली रायन्ना (Sangoli Rayanna) कौन थे?

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First Published: January 29, 2022 | Last Updated:January 29, 2022 संगोली रायन्ना कित्तूर रियासत के एक योद्धा थे। कित्तूर वर्तमान कर्नाटक है। कर्नाटक सरकार 180 करोड़ रुपये की लागत से संगोली रायन्ना के नाम पर एक सैन्य स्कूल का निर्माण कर रही है। इस स्कूल का संचालन रक्षा मंत्रालय द्वारा किया जाएगा। संगोली रायन्ना (Sangoli Rayanna) वे कित्तूर के एक महान योद्धा थे, उन्होंने अपनी मृत्यु तक रानी चेन्नम्मा के साथ डोक्ट्रिन ऑफ लैप्स (Doctrine of Lapse) के खिलाफ लड़ाई लड़ी। अंग्रेजों ने कित्तूर साम्राज्य के राजा और राजकुमार को मार डाला। चूंकि सिंहासन का कोई कानूनी उत्तराधिकारी नहीं था, वे डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स के तहत कित्तूर साम्राज्य पर नियंत्रण करना चाहते थे। रानी चनम्मा ने शिवलिंगप्पा को कित्तूर साम्राज्य के शासक के रूप में गोद लिया। संगोली रायन्ना शिवलिंगप्पा को अगला शासक बनाना चाहते थे। अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई रायन्ना ने 1824 के विद्रोह में प्रमुख भूमिका निभाई थी। कित्तूर साम्राज्य की अधिकांश भूमि जब्त कर ली गई थी। और बची हुई भूमि पर भारी कर लगाया जाता था। उन...

मोतीलाल तेजावत (Motilal Tejawat) कौन थे?

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First Published: January 29, 2022 | Last Updated:January 29, 2022 73 वें गणतंत्र दिवस परेड में गुजरात की झांकी में पाल और दाधवाव के गांवों में हुए नरसंहार को दिखाया गया। यह नरसंहार 1922 में हुआ था। इस नरसंहार के दौरान लगभग 1,200 आदिवासियों को अंग्रेजों ने बेरहमी से मार डाला था। मुख्य बिंदु  7 मार्च, 1922 को एक आदिवासी नेता मोतीलाल तेजावत 10,000 भील आदिवासियों को संबोधित कर रहे थे। ये आदिवासी एकी आंदोलन (Eki movement) का हिस्सा थे और दाधवाव गांव (अब गुजरात में साबरकांठा जिला) से थे। सभा ने जागीरदार से संबंधित कानूनों, भू-राजस्व व्यवस्था और ब्रिटिश सरकार द्वारा शुरू किए गए रजवाड़ा से संबंधित कानूनों का विरोध किया। मेजर एच.जी. सुटन ने फायरिंग का आदेश जारी किया। आदेश का पालन करते हुए पुलिस ने 1,200 से अधिक निर्दोष लोगों को मार डाला। इस घटना को पाल दाधवाव शहीद (Pal Dadhvav Martyrs) कहा जाता है। क्षेत्र के कुएं आदिवासियों के शवों से भरे हुए थे। = मोतीलाल तेजावत वे हत्याकांड में बच निकले, हालाँकि उनकी जांघ में दो बार गोली लगी। गांधीजी के अनुरोध पर तेजावत भू...

शिवांगी सिंह (Shivangi Singh) कौन हैं?

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First Published: January 27, 2022 | Last Updated:January 27, 2022 पायलट शिवांगी सिंह भारत की पहली महिला राफेल पायलट हैं। वह गणतंत्र दिवस समारोह में भारतीय वायु सेना की झांकी का हिस्सा थीं। वह 2017 में भारतीय वायु सेना में शामिल हुईं। वह भारतीय वायु सेना की झांकी में भाग लेने वाली एकमात्र दूसरी महिला पायलट हैं। फाइटर जेट पायलट भावना कंठ IAF की झांकी में भाग लेने वाली पहली महिला पायलट थीं। शिवांगी सिंह (Shivangi Singh) शिवांगी सिंह को महिला फाइटर पायलटों के दूसरे बैच में कमीशन किया गया था। राफेल से पहले वह मिग-21 उड़ा रही थीं। वह गोल्डन एरो स्क्वाड्रन का हिस्सा हैं। शिवांगी सिंह का जन्म बिहार में हुआ था। उन्होंने सिक्किम मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में प्रौद्योगिकी में स्नातक की पढ़ाई की। बाद में उन्होंने जयपुर में मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान में अपनी आगे की पढ़ाई की। भारतीय वायुसेना की झांकी 2022 IAF की झांकी का विषय “Indian Air Force Transforming for the future” था। इस झांकी में अश्लेशा रडार और स्वदेश में विकसित हल्के लड़ाकू हेलीकाप्टरों...