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मंगल ग्रह की उड़ान से पहले शुरू हुई ExoMars रोवर की प्रैक्टिस

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यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) और रूस के Roscosmos का जॉइंट प्रोजेक्‍ट एक्‍सोमार्स (ExoMars) मंगल ग्रह पर उतरने के करीब पहुंच गया है। मिशन को इस साल सितंबर में लॉन्‍च करने की तैयारी है। उससे पहले अपने पूर्वाभ्‍यास में इसने ‘कजाचोक लैंडिंग प्लेटफॉर्म' को चलाने की प्रैक्टिस की। इसमें रोसलिंड फ्रैंकलिन रोवर भी शामिल था। एक वीडियो के जरिए ESA ने बताया कि पूरे टास्‍क को बेहद सावधानीपूर्वक कोरियोग्राफ किया गया। इंजीनियर इस पूर्वाभ्यास को पृथ्वी पर कर रहे हैं। यह टेस्‍ट इटली के ट्यूरिन में स्थित एक मार्स टेरेन सिम्युलेटर में किए गए। ESA ने कहा कि इन अभ्यासों के दौरान लगभग 15 मिनट तक ड्राइविंग की जाती है। यह पूरी प्रक्रिया कुछ दिनों तक चलेगी। लैंडिंग के बाद रोवर एक सप्ताह हफ्ते तक अपने पहियों को खोलने और बाकी चीजें चेक करने में व्‍यस्‍त रहेगा। मंगल ग्रह कई मायनों में पृथ्वी के समान है। वहां एक दिन में 24 घंटे 37 मिनट और 22.663 सेकेंड होते हैं, जो पृथ्‍वी से थोड़ा ही अधिक है।  विभिन्न हालात को टेस्‍ट करने और मंगल ग्रह के चुनौतीपूर्ण वातावरण में रोवर को सेफ रखने के लिए इंजीनियर रोसलिंड फ...

मंगल ग्रह है या रेड वेलवेट केक, यूरोपियन स्‍पेस एजेंसी ने दिखाई Mars की शानदार तस्‍वीर

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मंगल (Mars) ग्रह लंबे समय से खगोलविदों के लिए पहेली रहा है। हाल ही में यूरोपियन स्‍पेस एजेंसी (ESA) ने एक इमेज रिलीज की है। यह मंगल ग्रह के आसपास के इलाके को दर्शाती है। इस तस्‍वीर को ‘ट्रेस गैस ऑर्बिटर' (TGO) ने खींचा है। इसमें मंगल ग्रह बेहद खूबसूरत नजर आता है, जैसे कोई केक सजाया गया हो। ESA ने कहा है कि यह इमेज मंगल ग्रह को ऐसा दिखाती है, जैसे एक ‘रिच रेड वैलवेट केक' पर शुगर पाउडर छिड़का गया है।  लेकिन शुगर पाउडर जैसा दिखने वाला यह वाइट कलर क्‍या है और कहां से आया? ESA ने बताया है कि यह कलर पानी और बर्फ की वजह से है। वहीं, रेड कलर जंग लगी हुई मार्टियन मिट्टी की वजह से नजर आता है। इस इमेज में 4 किलोमीटर चौड़ा गड्ढा भी दिखाई देता है। ESA के मुताबिक, यह गड्ढा वास्तिटास बोरेलिस रीजन में है, जोकि मंगल ग्रह के उत्तरी ध्रुव के पास एक मैदानी इलाका है। ESA और रूसी स्‍पेस एजेंसी रोस्कोस्मोस (Roscosmos) के जॉइंट मिशन TGO ने पिछले साल जुलाई में यह तस्‍वीर खींची थी।  ESA ने बताया कि तस्‍वीर में नजर आने वाला गड्ढा बर्फ से भरा है। इस इलाके में पूरे साल बहुत कम समय के लिए सूर्य दिखाई द...