स्कूलों में मिड डे मील बनाने वाली सहायिकाएं मानदेय न मिलने से मुसीबत में
प्रतीकात्मक फोटो. नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 16 लाख बच्चों के लिए मिड डे मील बनाने वाली हेल्परों को 6-6 महीने से मानदेय नहीं मिला जिससे वे खुद भुखमरी के कगार पर हैं. मिड डे मील बनाने वाली इन महिलाओं को क्यों मानदेय नहीं मिला है, इस बारे में प्रशासन तकनीकी खामी को कारण बता रहा है. यह भी पढ़ें हापुड़ के शिवगढ़ी प्राथमिक विद्यालय में 60 साल की गीता शर्मा बच्चों के लिए मिड डे मील बनाती हैं. इसके ऐवज में उनको हर महीना 1500 रुपये मिलते हैं. लेकिन येह मानदेय भी सात महीने से नहीं आया है. गीता शर्मा कहती हैं कि ''कैसे अपने बच्चों सा पेट भरें? यहां आकर खाना बनाते हैं और 8-8 महीने हो जाते हैं, पैसे नहीं मिलते हैं. कैसे काम करें.'' गीता शर्मा अकेले नहीं हैं, मोहसिना के पति बीमार हैं. वे भी अपना घर चलाने के लिए सरकारी स्कूल में मिड डे मील बनाती हैं लेकिन उनका भी मानदेय नहीं मिला है. मोहसिना ने कहा कि ''मेरा पति बीमार रहता है, मैं यहां खाना भी बनाती हूं, फिर मजदूरी करने भी जाती हूं. लेकिन पैसे ही नहीं मिल रहे हैं.'' शिवगढ़ी के...