महाराष्ट्र : स्पीकर के चुनाव में CM राज्यपाल को सलाह दें तो गलत क्या है? हाईकोर्ट का BJP विधायक से सवाल
मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्त और न्यायमूर्ति एम एस कार्णिक की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ताओं, महाजन और जनक व्यास जिन्होंने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया को चुनौती देते हुए अलग-अलग जनहित याचिकाएं (पीआईएल) दायर की हैं, उन्हें यह बताना चाहिए कि इस तरह की प्रक्रिया से संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन कैसे हुआ. पीठ ने याचिकाकर्ताओं से यह भी पूछा कि अदालत को विधायी प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप क्यों करना चाहिए. अदालत ने कहा, ‘‘क्या संविधान मुख्यमंत्री को मंत्रिपरिषद की सहायता के बिना राज्यपाल को सलाह देने से रोकता है? मुख्यमंत्री द्वारा ऐसी सलाह देने में क्या गलत है? आखिरकार, मुख्यमंत्री की सिफारिशों पर ही मंत्रिपरिषद भी गठित की जाती है.'' अदालत ने कहा, ‘‘जब व्यक्तिगत स्वतंत्रता की बात आती है तो हम निश्चित रूप से नागरिकों के अधिकारों के संरक्षक होंगे, लेकिन हमें विधायी मामलों में हस्तक्षेप क्यों करना चाहिए जब तक कि कोई गंभीर उल्लंघन न हो? इससे यह एक अच्छा संदेश नहीं जाता. क्या अध्यक्ष के चयन के तरीके का फैसला करना अदालत का काम है?'' महाजन और व्यास द्वारा क्रमशः अधिवक...