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इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन में आती है भयंकर बदबू, वजह जानकर नहीं रुकेगी आपकी ‘हंसी’

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इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन (ISS) को अंतरिक्ष में यात्रियों का घर कहा जाता है। यात्री जब स्‍पेस स्‍टेशन के लिए उड़ान भरते हैं, तो पृथ्‍वी पर लाखों लोगों के लिए यह कौतुहल होता है कि वह वहां किस तरह से रहते होंगे। अंतरिक्ष में यात्रियों के पास तमाम सुविधाएं होती हैं, इसके बावजूद एक समस्‍या उन्‍हें सताती है। स्‍पेस स्‍टेशन में लंबा वक्‍त गुजारने वाले एक यात्री ने इसका खुलासा किया है, जिसके बारे में जानकर आपके चेहरे पर भी मुस्‍कुराहट बिखर जाएगी। अंतरिक्ष यात्री ने बताया है कि इंटरनेशनल स्‍पेस स्टेशन से एक ‘बारबेक्यू' की तरह बदबू आती है, क्योंकि ऑर्बिट में अंतरिक्ष यात्री ज्‍यादा गैस पास करते हैं।  डेली स्‍टार की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2016 में स्‍पेस स्टेशन पर 186 दिन बिताने वाले 50 वर्षीय टिम पीक ने एक पॉडकास्ट के दौरान 8 साल के बच्चे द्वारा पूछे गए एक सवाल में जवाब में यह हैरान करने वाली बात बताई।   टिम पीक से पूछा गया था कि स्‍पेस स्‍टेशन में हेलमेट पहनने के बाद अंतरिक्ष में डकार आना उन्‍हें कैसा लगता है? टिम ने कहा कि यह एक अच्‍छा सवाल है। उन्‍होंने खुलासा किया कि वास्‍तव में यात्...

Boeing की बड़ी कामयाबी, ISS से पृथ्‍वी पर लौटा स्‍टारलाइनर… अब होगी SpaceX से टक्‍कर!

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तीन साल की देरी के बाद लॉन्‍च हुआ बोइंग (Boeing) का पहला स्‍पेस मिशन पूरा हो गया है। इसका ‘स्‍टारलाइनर कैप्‍सूल', इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन (ISS) से सुरक्षित पृथ्‍वी पर लौट आया। स्‍थानीय समय के अनुसार, 25 मई की शाम 6:49 बजे स्टारलाइनर कैप्सूल ने न्यू मैक्सिको में अमेरिकी सेना की वाइट सैंड्स मिसाइल रेंज (WSRM) के वाइट सैंड्स स्पेस हार्बर में लैंडिंग की। इसके साथ ही बोइंग की मानवरहित ऑर्बिटल टेस्ट फ्लाइट 2 (OFT-2) का सफल समापन हो गया। इस मिशन का मकसद भविष्‍य में बोइंग के स्‍पेसक्राफ्ट में अं‍तरिक्ष यात्रियों को ले जाना है। अमेरिकी एयरोस्‍पेस की दौड़ में कई प्राइवेट कंपनियां मुकाबला कर रही हैं। बोइंग भी इनमें शामिल है। उसका यह मिशन एलन मस्‍क के स्‍पेस वेंचर ‘स्‍पेसएक्‍स' को चुनौती देगा।   स्टारलाइनर कैप्‍सूल ने 19 मई की शाम ‘यूनाइटेड लॉन्च अलायंस' के एटलस वी रॉकेट पर उड़ान भरी थी। करीब 24 घंटे के बाद उसने आईएसएस पर डॉक किया था, जो बोइंग के लिए एक बड़ी कामयाबी थी। इससे पहले दो बार बोइंग को इस मिशन को टालना पड़ा था। पहली बार, साल 2019 में सॉफ्टवेयर फेल होने से लॉन्‍च नहीं हो...

कल वापसी करेगा Boeing का स्टारलाइनर स्‍पेसक्राफ्ट, देख सकेंगे लैंडिंग का लाइव टेलिकास्‍ट

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नासा (Nasa) और बोइंग (Boeing) ने हाल ही में बोइंग के पहले अंतरिक्ष मिशन, ‘स्टारलाइनर कैप्सूल' को लॉन्‍च किया था। यह मानवरहित स्‍पेसक्राफ्ट 25 मई को इंटरनेशनल स्‍पेस स्टेशन (ISS) से अनडॉक करने के लिए तैयार है और न्यू मैक्सिको में वाइट सैंड्स मिसाइल रेंज में लैंड करते ही पृथ्‍वी पर लौट आएगा।  अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने इस स्‍पेसक्राफ्ट की वापसी के लाइव टेलिकास्‍ट की व्‍यवस्‍था की है। बताया जाता है कि यह स्‍पेसक्राफ्ट भारतीय समय के अनुसार बुधवार रात 12:06 बजे स्‍पेस स्‍टेशन से उतरेगा। स्टारलाइनर को 19 मई को फ्लोरिडा के केप कैनावेरल स्पेस फोर्स स्टेशन से लॉन्च किया गया था। इसने अगले दिन ISS पर डॉक कर लिया था।  स्‍पेस स्टेशन पर इस स्‍पेसक्राफ्ट ने अपने कॉम्पिटीटर और एलन मस्‍क की कंपनी स्पेसएक्स के ड्रैगन शिप के बगल में डॉक किया गया था। ऐसा पहली बार हुआ जब नासा के दो कमर्शल क्रू कॉन्‍ट्रैक्‍टर के पास स्‍पेस स्टेशन से जुड़े कैप्सूल थे। स्टारलाइनर में कोई अंतरिक्ष यात्री नहीं था और इसे भविष्‍य में ISS से लोगों को लाने और ले जाने के लिए बनाया गया है। हालांकि इस स्‍पेसक्राफ्ट ने हाल ही ...

अंतरिक्ष में Boeing की पहली उड़ान, गड़बड़ी के बावजूद स्‍टारलाइनर स्‍पेसक्राफ्ट लॉन्‍च

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तीन साल की देरी के बाद आखिरकार बोइंग (Boeing) का स्‍टारलाइनर (Starliner) स्‍पेसक्राफ्ट लॉन्‍च हो गया है। यूनाइटेड लॉन्च अलायंस (ULA) के एटलस V रॉकेट पर इस स्‍पेसक्राफ्ट को भारतीय समय के मुताबिक तड़के करीब साढ़े 4 बजे फ्लोरिडा के केप कैनावेरल स्पेस फोर्स स्टेशन से लॉन्च किया गया। यह इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन (ISS) के रास्‍ते पर है। सब कुछ योजना के मुताबिक होता है तो Starliner शुक्रवार शाम को ISS के साथ डॉक करेगा। यह करीब चार से पांच दिन वहां रहेगा। इस मिशन के जरिए बोइंग यह बताना चाहती है कि उसका स्‍पेसक्राफ्ट अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाने के लिए तैयार है।  अमेरिकी एयरोस्‍पेस की दौड़ में कई प्राइवेट कंपनियां मुकाबला कर रही हैं। इनमें बोइंग भी शामिल है, जो एक मानव रहित अंतरिक्ष यात्री कैप्सूल की टेस्टिंग करके स्‍पेस सेक्‍टर में अपनी प्रतिष्‍ठा को बेहतर बनाना चाहती है। यह लॉन्‍च काफी वक्‍त से पेंडिंग था, जिसका फायदा एलन मस्‍क के स्‍पेस वेंचर स्‍पेसएक्‍स को हुआ है।  रिपोर्ट के अनुसार, बोइंग और नासा के लिए यह लॉन्‍च बड़ी कामयाबी है। एटलस वी रॉकेट से अलग होने के बाद स्टारलाइनर ने खुद को ऑ...

3 साल की देरी के बाद Boeing की अंतरिक्ष की दौड़ कल सुबह, लॉन्‍च होगा स्टारलाइनर, ऐसे देखें लाइव इवेंट

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अमेरिकी एयरोस्‍पेस की दौड़ में कई प्राइवेट कंपनियां मुकाबला कर रही हैं। इनमें बोइंग (Boeing) भी शामिल है, जो एक मानव रहित अंतरिक्ष यात्री कैप्सूल की टेस्टिंग करने और स्‍पेस सेक्‍टर में अपनी प्रतिष्‍ठा को बेहतर बनाने में लगी है। बीते दिनों हमने आपको बताया था कि 19 मई को CST-100 स्टारलाइनर स्‍पेसक्राफ्ट को इंटरनेशनल स्‍पेस स्टेशन के लिए लॉन्‍च किया जाना है। नासा के अंतरिक्ष यात्रियों और अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि बोइंग का स्टारलाइनर स्‍पेस कैप्सूल, इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन (ISS) के लिए अपने मानव रहित लॉन्‍च के लिए तैयार है। यह लॉन्‍च काफी वक्‍त से पेंडिंग है, जिसका फायदा एलन मस्‍क के स्‍पेस वेंचर स्‍पेसएक्‍स को हुआ है। लॉन्‍च का वक्‍त भारतीय समय के मुताबिक, 20 मई सुबह 4:24 बजे है।  गमड्रॉप के आकार वाले बोइंग सीएसटी-100 स्टारलाइनर कैप्सूल को साल 2019 में लॉन्‍च किया जाना था, लेकिन इसका सॉफ्टवेयर फेल होने से ऐसा नहीं हो सका। पिछले साल बोइंग और उसकी सहयोगी एयरोजेट के बीच स्‍टारलाइनर के प्रोपल्‍शन सिस्‍टम को लेकर टकराव हुआ था। इस वजह से जुलाई 2021 की टेस्‍ट फ्लाइट को भी कैंसल करना ...

स्‍पेस में रहने से बड़ा हो जाता है अंतरिक्ष यात्रियों का दिमाग, जानें क्‍यों होता है ऐसा

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अंतरिक्ष की यात्रा पर जाना जितना रोमाचंक लगता है, यह उतना ही मुश्किलों से भरा है। अंतरिक्ष में रहने के दौरान यात्रियों को कई बदलावों से गुजरना पड़ता है, जिसका असर उनके मस्तिष्‍क पर दिखाई देता है। रिसर्चर्स ने इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन (ISS) पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के दिमाग में बदलाव का पता लगाया है। रिसर्चर्स ने 15 अंतरिक्ष यात्रियों के दिमाग पर शोध किया। उन्‍हें पता चला कि मस्तिष्क में रक्त वाहिकाओं के आसपास की जगह, जो द्रव यानी फ्लूइड से भरी होती है, उसमें बदलाव आ गया।  यह रिसर्च ‘साइंटिफिक रिपोर्ट्स जर्नल' में प्रकाशित हुई है। इसमें बताया गया है कि रिसर्चर्स ने मैग्‍नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (MRI) का इस्‍तेमाल करके अंतरिक्ष में जाने वाले से पहले यात्रियों के दिमाग को देखा। जब अंतरिक्ष यात्री इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन पर पहुंच गए, उसके बाद भी रिसर्चर्स ने एक-एक महीने के अंतराल पर उनके दिमाग को देखा। 6 महीने बाद जब अंतरिक्ष यात्री पृथ्‍वी पर लौटे, तो उनकी बारीकी से जांच की गई।  रिसर्चर्स ने पाया कि अंतरिक्ष यात्रियों के दिमाग में द्रव से भरी वह जगह जिसे पेरिवास्कुलर स्पेस ...

यूक्रेन युद्ध का असर! इंटरनेशनल स्‍पेस स्टेशन प्रोग्राम से अलग होगा रूस

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रूस ने इंटरनेशनल स्‍पेस स्टेशन (ISS) से बाहर निकलने का फैसला किया है। देश की अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस (Roscosmos) के लीडर ने एक मीडिया इंटरव्‍यू में यह खुलासा किया है। ISS से रूस कब तक अलग हो जाएगा, फ‍िलहाल इसकी कोई सही टाइमलाइन सामने नहीं आई है। हालांकि कहा जा रहा है कि रूसी ऑर्बिटल सेगमेंट (ROS) को मेंटेन रखने के लिए रूस कुछ समय तक इंटरनेशनल स्‍पेस स्टेशन पर काम करता रहेगा। रोस्कोस्मोस के प्रमुख दिमित्री रोगोजिन ने रूस की सरकारी समाचार एजेंसी Tass के साथ एक इंटरव्‍यू में कहा कि इंटरनेशनल स्‍पेस स्टेशन (ISS) से बाहर निकलने का फैसला पहले ही लिया जा चुका है।   उन्होंने इंटरव्‍यू में कथित तौर पर कहा कि हम इसके बारे में सार्वजनिक रूप से बात करने के लिए बाध्य नहीं हैं। मैं केवल यह कह सकता हूं कि हम अपने पार्टनर्स को ISS पर हमारा काम खत्म होने के बारे में एक साल पहले ही चेतावनी दे देंगे। उन्होंने इशारा दिया कि ISS के प्रोग्राम को छोड़ने का फैसला इसलिए भी है, क्‍योंकि रूस अब अपना ऑर्बिटल सर्विस स्‍टेशन तैनात करना चाहता है। याद रहे कि रूस साल 1998 में इस मिशन से जुड़ा था।   वैसे रूस न...

अंतरिक्ष यात्री बिना बोले कैसे करते हैं आपस में बात, Nasa ने वीडियो से समझाया

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अंतरिक्ष की दुनिया पृथ्‍वी से जितनी अनोखी और दिलचस्‍प नजर आती है, अंतरिक्ष का सफर करने वाले यात्रियों के लिए यह उतनी ही चुनौतीपूर्ण होती है। स्‍पेस मिशन के दौरान यात्री आपस में कम्‍युनिकेट कर सकें, इसके लिए रेडियो सिस्‍टम और कम्‍युनिकेशन चैनलों का एक पूरा नेटवर्क काम करता है। लेकिन स्थितियां आपात भी तो हो सकती हैं। रेडियो सिस्‍टम के बंद होने या मिशन के दौरान किसी तरह की गड़बड़ी या फ‍िर स्‍पेस वॉक के दौरान एस्‍ट्रोनॉट आपस में कैसे बात करते हैं, यही नासा (Nasa) ने अपने नए वीडियो में समझाया है।    अंतरिक्ष यात्री बनना इतना आसान नहीं होता। इन यात्रियों को दिल और दिमाग से मजबूत होना पड़ता है। मिशन पर रवाना होने से पहले यात्रियों को साइलेंस सिग्‍नल्‍स की प्रैक्टिस करनी होती है। यह काफी हद तक भाव भंग‍िमाओं पर निर्भर करता है। वैसे, आम जिंदगी में भी तो लोग बिना कुछ कहे अपनी बात कह जाते हैं। जैसे-गुस्‍सा आने पर आंखों को तरार देना और माथे पर सिलवटें ले आना। कुछ इसी तरह से अंतरिक्ष यात्री भी नंबरों और भावनाओं के जरिए आपात स्थिति के दौरान आपस में बात करते हैं। हालांकि ये इशारे बहुत अनोखे नहीं ...

इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन के लिए उड़े Nasa के 4 एस्‍ट्रोनॉट, बिना मिट्टी के उग रहे पौधों पर करेंगे रिसर्च

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स्‍पेसएक्‍स (SpaceX) के जिस लॉन्‍च की बात हमने आज बताई थी, वह हो गया है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) के लिए चार एस्‍ट्रोनॉट्स को लेकर स्‍पेसएक्‍स का फॉल्‍कन 9 रॉकेट दोहपर करीब डेढ़ बजे उड़ा। कैनेडी स्‍पेस सेंटर से लॉन्‍च हुए इस मिशन में अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री केजेल लिंडग्रेन, बॉब हाइन्स और जेसिका वॉटकिंस के साथ यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के इतालवी मेंबर सामंथा क्रिस्टोफोरेटी भी शामिल थे। ये सभी अगले 6 महीने के लिए मिशन पर निकले हैं और 17 घंटे का सफर करके इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन (ISS) पर पहुंचेंगे। लॉन्‍च को नासा की वेबसाइट और सोशल मीडिया पर लाइव स्‍ट्रीम किया गया।  एक न्‍यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अरबपति एलन मस्‍क की कंपनी स्‍पेसएक्‍स ने 40 घंटे के अंतराल में एक मिशन को ISS से पृथ्‍वी पर लैंड कराकर दूसरे मिशन के लिए उड़ान भरी है। यह नासा के लिए अंतरिक्ष के सफर पर जाने वाली प्रमुख ‘टैक्‍सी' बन गई है, जिसकी सेवाएं 2020 से ली जा रही हैं।   इससे पहले अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी रूस के रॉकेट सोयुज पर निर्भर थी, जिसकी जगह अब स्‍पेसएक्‍स के फॉल्‍कन 9 रॉकेट ने ले ली है। क्रू-...

Nasa के लिए एक और लॉन्‍च करने जा रही SpaceX, 4 एस्‍ट्रोनॉट को भेजेगी ISS पर

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अंतरिक्ष की दुनिया में एलन मस्‍क की कंपनी स्‍पेसएक्‍स (SpaceX) नई कामयाबियां गढ़ रही है। हाल ही में इसने दुनिया के पहले प्राइवेट स्‍पेस मिशन को इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन (ISS) तक पहुंचाया। अब एक बार फ‍िर यह रॉकेट कंपनी ISS के लिए एक लंबे वक्‍त के अंतरिक्ष यात्री क्रू को लॉन्‍च करने वाली है। यह लॉन्‍च अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) के लिए किया जाना है। इस मिशन में डॉक्‍टर से स्‍पेसवॉकर बने शख्‍स और एक जियोलॉजिस्‍ट शामिल हैं।  सब कुछ योजना के अनुसार हुआ, तो अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित कैनेडी स्पेस सेंटर से आज दोपहर करीब डेढ़ बजे तीन अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री उड़ान भरेंगे। उनके साथ यूरोपी अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) का उनका एक साथी भी होगा। ये सभी अगले 6 महीने के लिए मिशन पर जाएंगे और 17 घंटे का सफर करके इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन पर पहुंचेंगे। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इन्‍हें स्‍पेसएक्‍स के फाल्‍कन 9 रॉकेट से ले जाया जाएगा।  क्रू 4 नाम का यह मिशन नासा का ऐसा चौथा मिशन है, जिसमें वह स्‍पेसएक्‍स के रॉकेट का इस्‍तेमाल करके अंतरिक्ष यात्रियों को ISS पर भेज रही है। स्‍पेसएक्‍स ने साल 2020 म...

420 करोड़ रुपये का टिकट लेकर अंतरिक्ष की सैर पर गए तीन बिजनेसमैन लौटे पृथ्‍वी पर

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दुनिया के पहले प्राइवेट मिशन के तहत इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन (ISS) पर गए तीन अमीर बिजनेसमैन और नासा के एक पूर्व अंतरिक्ष यात्री करीब दो सप्‍ताह बाद सोमवार को पृथ्‍वी पर वापस लौट आए। उन्‍होंने अमेरिका के फ्लोरिडा तट पर लैंडिंग की। अमेरिकी कंपनी Axiom Space के इस मिशन में एलन मस्‍क की कंपनी स्‍पेसएक्‍स (SpaceX) और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) ने भी भूमिका निभाई थी। इस मिशन को पहले ही पृथ्‍वी पर लैंड करना था, लेकिन मौसमी बाधाओं के चलते देरी हुई। आखिरकार चार विशाल पैराशूट पर सभी अंतरिक्ष यात्रियों ने धरती पर सफल लैंडिंग कर ली।  अंतरिक्ष यात्रियों के स्‍पेसशिप ने 17,500 मील प्रति घंटे (28,000 किलोमीटर प्रति घंटे) की रफ्तार से वातावरण में दोबारा प्रवेश किया। इस वजह से स्‍पेसशिप पर आए निशानों के चलते इस ‘टोस्टेड मार्शमैलो' कहकर पुकारा गया। एक न्‍यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, एक्सिओम स्पेस के ऑपरेशंस डायरेक्‍टर, डेरेक हासमैन ने कहा कि हमने साबित किया कि हम चालक दल को इस तरह से तैयार कर सकते हैं, जो उन्हें ऑर्बिट में इफेक्टिव और प्रोडक्टिव बनाता है। हम ऐसा फिर से करने के लिए त...

Nasa ने टेस्‍ट की ‘होलोपोर्टेशन’ तकनीक, अंतरिक्ष यात्रियों के सामने आए डॉक्‍टर, जानें इसके बारे में

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने बताया है कि उसने ‘होलोपोर्टेशन' (holoportation) नाम की एक कम्‍युनिकेशन टेक्‍नॉलजी को टेस्‍ट किया है। यह एक ऐसा शब्‍द लगता है, जो मानो किसी साइंस फ‍िक्‍शन मूवी से आया हो और रोजाना जिंदगी में इसकी बहुत कम प्रासंगिकता हो। हालांकि यह शब्द ‘होलोग्राम' और ‘टेलीपोर्टेशन' का कॉम्‍बि‍नेशन है। पिछले साल अक्टूबर में नासा ने इस इनोवेट‍िव 3D तकनीक का इस्‍तेमाल अपने फ्लाइट सर्जन डॉ. जोसेफ श्मिड को इंटरनेशनल स्‍पेस स्टेशन पर ‘होलोपोर्ट' करने के लिए किया था, जबकि डॉक्‍टर फ‍िजिकली पृथ्वी पर मौजूद थे। इस तकनीक के तहत डॉ श्मिड और उनकी टीम के मेंबर्स के 3D होलोग्राम बनाए गए और उन्हें स्‍पेस  स्टेशन पर ट्रांसमिट किया गया, जो अंतरिक्ष यात्रियों के साथ लाइव बातचीत के रूप में दिखाई दिया। नासा के मुताबिक, होलोपोर्टेशन कम्‍युनिकेशन, लोगों के हाई-क्‍वॉलिटी वाले 3D मॉडल्‍स को रियल टाइम में कहीं भी ट्रांसमिट करने की इजाजत देता है। अगर इसे माइक्रोसॉफ्ट के होलोलेन्स जैसे मिक्‍स्‍ड रियलिटी डिस्प्ले के साथ जोड़ा जाता है, तो यह तकनीक यूजर्स को 3D में लोगों को ...

420 करोड़ रुपये का ‘टिकट’ लेकर अंतरिक्ष में गए 4 यात्रियों की वापसी में होगी देरी, यह है वजह

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अंतरिक्ष की दुनिया में पिछले दिनों इतिहास बना, जब पहली बार एक प्राइवेट मिशन के तहत चार यात्रियों ने इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन (ISS) के लिए उड़ान भरी। अब खबर आ रही है कि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) ने खराब मौसम की वजह से ISS से इस प्राइवेट मिशन की अनडॉकिंग में देरी की है। इस वजह से एक्सिकॉम मिशन 1 (Ax-1) को इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन में कुछ और घंटे बिताने होंगे। दरअसल, स्प्लैशडाउन लोकेशन पर मौसम ठीक नहीं होने की वजह से इस मिशन में देरी की जा रही है। NASA, SpaceX और Axiom Space ने मिलकर इस स्‍पेसक्राफ्ट के तय डिपार्चर को स्‍थगित कर दिया है।  नासा में स्पेस ऑपरेशंस मिशन डायरेक्टरेट की असोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर कैथी लाइडर्स ने ट्वीट किया है कि मौसम सही नहीं होने के कारण हम इंटरनेशनल स्‍पेस स्टेशन से आज रात होने वाली एक्सिकॉम मिशन 1 की अनडॉकिंग को रोक रहे हैं। NASA, Axiom Space और SpaceX की टीमें दुनिया के पहले प्राइवेट अंतरिक्ष यात्री मिशन की वापसी के लिए बेस्‍ट मौके की तलाश कर रही हैं।  We're waving off tonight's undocking of Axiom Mission 1 from @Space_Station due to unf...

अंतरिक्ष से खींची माउंट एवरेस्‍ट की तस्‍वीर, ISS पर सवार यात्रियों का कमाल!

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इंटरनेशनल स्‍पेस स्टेशन (ISS) पर सवार अंतरिक्ष यात्रियों ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (Mount Everest) की एक आश्चर्यजनक तस्वीर खींची है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने इसे इंस्टाग्राम पर शेयर किया है। तस्वीर में बर्फ से ढकी कई चोटियों के साथ पहाड़ों का एरियल व्‍यू दिखाई दे रहा है। जमीन से ऐसी तस्‍वीर नजर नहीं आ सकती, क्‍योंकि तब पहाड़ बहुत बड़े दिखाई देते हैं। अंतरिक्ष से देखने पर यह आपस में मिलते-जुलते नजर आते हैं। एरियल इमेज देखने पर पहाड़ों को पहचानना भी मुश्किल होता है। यह भी समझ नहीं आता कि कौन सा पॉइंट सबसे ऊंचा है।     नासा ने इस पोस्‍ट को कैप्‍शन दिया है, ऐसा माउंट एवरेस्ट आपने पहले कभी नहीं देखा होगा। पृथ्वी का सबसे ऊंचा पहाड़ अंतरिक्ष से एकदम अलग दिखाई देता है। इंटरनेशनल स्‍पेस स्टेशन पर सवार एक अंतरिक्ष यात्री ने माउंट एवरेस्ट की यह सीधी तस्‍वीर ली है। माउंट एवरेस्‍ट की समुद्र तल से ऊंचाई लगभग 29,029 फीट (8,848 मीटर) है।   नासा ने अपने कैप्‍शन में यह भी लिखा कि भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटो में टकराव की वजह से यह पहाड़ हर साल लगभग 1 सेंटीमीटर ऊ...

यूक्रेन युद्ध के बीच 3 रूसी अंतरिक्ष यात्री पहुंचे ISS, अमेरिकी साथियों ने किया ‘स्‍वागत’

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यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद यूरोप और पश्चिमी देश रूस पर प्रतिबंध बढ़ा रहे हैं। इन देशों और रूस के बीच संबंध उस स्‍तर पर आ गए हैं, जो सोवियत काल के दौरान थे। इस बीच, तीन रूसी अंतरिक्ष यात्रियों ने शुक्रवार को इंटरनेशनल स्‍पेस स्टेशन (ISS) के लिए उड़ान भरी। रूसी अंतरिक्ष यात्री- ओलेग आर्टेमयेव, रूकीस डेनिस माटेयेव और सर्गेई कोर्साकोव ने भारतीय समय के मुताबिक, शुक्रवार रात 9:25 बजे अपनी यात्रा शुरू की। नासा (NASA) के लाइव फीड में उनके इस तीन घंटे के सफर की शुरुआत दिखाई गई। इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन में इन अंतरिक्ष यात्रियों का स्‍वागत दो रूसी, चार अमेरिकी और एक जर्मन अंतरिक्ष यात्री ने किया।  एक न्‍यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी स्‍पेस एजेंसी रोस्कोस्मोस (Roscosmos) ने कन्‍फर्म किया कि तीनों अंतरिक्ष यात्रियों ने सफलतापूर्वक ऑर्बिट में प्रवेश कर लिया। साल 2014 में यूक्रेन के एक द्वीप पर रूस द्वारा कब्‍जा करने के बाद से उस पर प्रतिबंध लगने शुरू हुए थे, जो यूक्रेन पर हमला करने के बाद तेजी से बढ़े हैं, लेकिन इसने अंतरिक्ष की दुनिया में सहयोग को कम होने नहीं दिया है। हालांकि साल ...

राजा चारी ने ISS में की अपनी पहली स्‍पेसवॉक, जानें इस भारतीय-अमेरिकी के बारे में

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एक भारतीय-अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री और उनके सहयोगी ने इंटरनैशनल स्‍पेस स्टेशन (ISS) में काम करने के लिए स्पेसवॉक की है। स्‍पेसएक्‍स (SpaceX) के क्रू कमांडर राजा चारी अभी ISS में हैं। वह अपने फ्लाइट इंजीनियर कायला बैरन के साथ अंतरिक्ष स्टेशन के एयरलॉक की सिक्‍योरिटी से बाहर निकल आए और लगभग 6.5 घंटे तक अंतरिक्ष में रहे। राजा चारी की यह पहली स्पेसवॉक थी। उन्होंने अमेरिकी एयरफोर्स के लिए एक कर्नल के रूप में भी काम किया है। अपने करियर के दौरान उन्‍होंने 2,500 घंटे से अधिक समय उड़ान में बिताया है।  साल 2017 में चारी को एक अंतरिक्ष यात्री के रूप में चुना गया था। उनका जन्म अमेरिका के मिल्वौकी, विस्कॉन्सिन  में हुआ और परवरिश सीडर फॉल्स में हुई। उन्होंने सीडर फॉल्स की ही रहने वालीं ‘होली शैफ्टर चारी' से शादी की है, जिनसे उनके तीन बच्चे हैं। नासा की वेबसाइट पर दी गई राजा चारी की बायोग्राफी के अनुसार, उन्होंने आयोवा के वाटरलू में कोलंबस हाई स्कूल से ग्रैजुएशन किया। कोलोराडो में अमेरिकी एयरफोर्स अकैडमी से उन्होंने एस्ट्रोनॉटिकल इंजीनियरिंग में ग्रैजुएशन की डिग्री ली। उन्हें मैसाचुसेट्स इंस्ट...

हर 90 मिनट में सूर्योदय-सूर्यास्‍त देखते हैं अंतरिक्ष यात्री

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स्‍पेस में होने वाली घटनाएं लोगों के मन में उत्‍सुकता जगाती हैं। स्‍पेस को लेकर हम सभी के मन में ना जाने कितने ही सवाल आए दिन तैरते रहते हैं। कैसा हो, अगर लोगों के सवालों का जवाब स्‍पेस से हाल में लौटे एस्ट्रोनॉट दें। एक ऐसा ही बेहतरीन आयोजन हाल ही में हुआ। सोशल मीडिया पर एक ताजा बातचीत में इंटरनैशनल स्‍पेस स्टेशन ने ट्विटर यूजर्स के सवालों का जवाब दिया। इस स्‍पेस स्‍टेशन के दो एस्ट्रोनॉट (जापान के अकिहिको होशाइड और फ्रांस के थॉमस पेसक्वेस्ट) हाल ही में लगभग सात घंटे तक स्पेसवॉक बाद स्‍पेस स्टेशन पर लौट आए। बातचीत के दौरान एक ट्विटर यूजर ने पूछा कि क्या दोनों एस्ट्रोनॉट को उनके सूट के टेंपरेचर में कोई फर्क महसूस हुआ। इसके जवाब में इंटरनैशनल स्‍पेस स्‍टेशन के ट्विटर हैंडल से ऐसा जवाब दिया गया, जिसने सभी को हैरान कर दिया। जवाब में लिखा गया, स्पेसवॉकर हर 90 मिनट में सूर्योदय और सूर्यास्त का अनुभव करते हैं और यूजर पूछ रहे हैं कि क्या दोनों एस्ट्रोनॉट अपने सूट में तापमान में अंतर महसूस करते हैं।    इस अविश्वसनीय घटना के बारे में बात करते हुए नासा के एक विशेषज्ञ ने बताया कि इंटरनैशनल स...