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45 साल तक स्पेस डेटा भेजने वाले Voyager स्पेस क्राफ्ट की पावर हो रही खत्म, NASA ने जताया साथ छूटने का दुख!

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नासा ने 45 साल पहले जो स्पेस क्राफ्ट अंतरिक्ष में छोड़े थे, अब उनका सफर जल्द ही थम जाएगा क्योंकि स्पेस क्राफ्ट की पावर खत्म होने वाली है। इन्हें वोयेजर (Voyager) स्पेस क्राफ्ट के नाम से जाना जाता है जो आज से 44.5 साल पहले अंतरिक्ष में स्थापित किए गए थे। उस वक्त नासा ने जुड़वां स्पेस क्राफ्ट पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किए थे। अब दोनों ही स्पेस क्राफ्ट पावर शॉर्टेज के चलते बंद होने वाले हैं।  NASA ने एक रिपोर्ट में बताया है कि उसने 1977 में Voyager स्पेस व्हीकल 1 और व्हीकल 2 को अंतरिक्ष में छोड़ा था। इनमें से व्हीकल 1 अपनी मियाद से बहुत ज्यादा चल चुका है। नासा का कहना है कि जितने साल यह व्हीकल चल पाया है उतना मानव के द्वारा बनाया गया कोई और दूसरा स्पेस व्हीकल नहीं चला है। लेकिन जल्द ही यह व्हीकल इतिहास बन जाएगा। साइंटिफिक अमेरिकन (Scientific American) की रिपोर्ट कहती है कि अब व्हीकल का सफर खत्म होने का समय आ गया है और जल्द ही यह अलविदा कह देगा।  जॉन हॉकिंस यूनिवर्सिटी के राल्फ मैकनट रिपोर्ट में कहते हैं, "इस बात को बीते साढ़े 44 साल हो चुके हैं। व्हीकल की जितनी वारंटी हमने दी ...

रिसर्च में चला पता, शनि ग्रह के कई ऑरोरा को बनाती हैं इसकी हवाएं

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ऑरोरा (aurora) आकाश में बनने वाली खूबसूरत प्राकृतिक रोशनी है। यह रात के वक्‍त आमतौर पर नॉर्थ और साउथ पोल्‍स के पास देखने को मिलती है। लंबे समय से वैज्ञानिक यह मानते आए हैं कि ऑरोरा तब बनते हैं, जब सौर हवाएं पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से इंटरेक्‍ट करती हैं। ऐसा दूसरे ग्रहों पर भी होता है, लेकिन लीसेस्टर यूनिवर्सिटी (University of Leicester) के वैज्ञानिकों का दावा है कि सभी अरोरा इस घटना से नहीं बने हैं। वैज्ञानिकों को शनि ग्रह (Saturn) के नॉर्थ पोल पर ग्रहीय अरोरा बनाने वाला मैकेनिज्‍म मिला है। इसे पहले कभी देखा नहीं गया है।  तो क्‍या है वह मैकेनिज्‍म? वैज्ञानिकों का कहना है कि शनि ग्रह के कुछ ऑरोरा इस ग्रह के अपने वातावरण के अंदर घूमने वाली हवाओं से पैदा होते हैं। इस खोज ने ग्रहों के ऑरोरा को लेकर बनाए गई समझ को बदल दिया है। यह शनि के बारे में एक रहस्य को भी सुलझाता है कि हम ग्रह पर दिन की लंबाई क्‍यों नहीं माप सकते?  नासा (NASA) ने साल 1997 में कैसिनी (Cassini) को लॉन्‍च किया था, जो साल 2004 में शनि तक पहुंच गया। तब से इसने यह मापने की कोशिश की है कि यह ग्रह अपने दिन की लेंथ तय कर...