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53 साल पहले चंद्रमा से लाई गई जिस मिट्टी को कॉकरोचों ने खाया था वह नीलाम होगी, जानें इस अनोखे ऑक्‍शन के बारे में

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एक ऑक्शन हाउस चांद की धूल की नीलामी कर रहा है। चांद की इस मिट्टी को पृथ्वी पर 1969 में Apollo 11 मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा लाया गया था। Apollo 11 नासा का पहला स्पेस मिशन था, जिसमें इंसानों को पृथ्वी से बाहर ले जाया गया था। खास बात यह है कि चंद्रमा से लाई गई इस धूल को कॉकरोच के पेट से निकाला गया था। ऑक्शन हाउस ने जानकारी दी है कि नीलामी में चंद्रमा की धूल (Moon dust) के साथ-साथ तीन कॉकरोच भी मिलेंगे, जिनके पेट से इस धूल को निकाला गया है। आप सोच रहे होंगे कि चांद से आई मिट्टी कॉकरोच तक कैसे पहुंची। दरअसल, कॉकरोच को यह मिट्टी खिलाई गई थी।  RR Auction नाम के एक ऑक्शन हाउस ने जानकारी दी है कि मून डस्ट की नीलामी की बिडिंग शुरू हो गई है। कॉकरोच के द्वारा खाई गई इस धूल का ऑक्शन इस हाउस की सबसे दुर्लभ नीलामियों में से एक है। ऑक्शन हाउस का कहना है कि इस ऑक्शन की बिडिंग 23 जून तक चलेगी। RR Auction के कार्यकारी वाइस प्रेसिडेंट बॉबी लिविंगस्टन ने Collect Space पब्लिकेशन को बताया "जब भी हम अपोलो 11 से किसी चीज का प्रतिनिधित्व करते हैं, तो यह स्पष्ट रूप से रोमांचकारी होता है, क्योंकि...

रविवार 15 मई को होने जा रहा पूर्ण चंद्र ग्रहण, 'ब्लड मून' अनोखी खगोलीय घटना को ऐसे देखें लाइव

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वीकेंड पर चांद पूरी तरह से अंधरे में डूबने वाला है। इस दौरान एक बड़ी खगोलीय घटना का नजारा मिलने वाला है, जो काफी समय बाद देखने को मिलेगा। रविवार की रात से सोमवार की सुबह तक 2022 का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण होने जा रहा है। यह ग्रहण साउथ और नॉर्थ अमेरिका, अंटार्कटिका, यूरोप, अफ्रीका और ईस्ट पेसिफिक में दिखाई देगा। पूर्ण चंद्र ग्रहण को कई बार ब्लड मून भी कहा जाता है क्योंकि ग्रहण के चरम पर यह गहरे लाल रंग का दिखता है। हालांकि, भारत में इसे नहीं देखा जा सकेगा।  चंद्र ग्रहण तब होता है, जब सूरज, धरती और चांद एक सीध में आ जाते हैं। इस स्थिति में चांद को धरती की छाया से गुजरना होता है। पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान चांद धरती की छाया के सबसे अंधेरे हिस्से में चला जाता है जिसे अम्ब्रा कहा जाता है।  यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इच्छुक लोग नासा पर इसका लाइवस्ट्रीम देख सकते हैं। इसका समय 15 मई रात 11 बजे ET से 16 मई रात 12 बजे ET तक रहेगा। भारतीय समयानुसार यह सोमवार के सुबह 8.33 बजे का समय होगा। स्पेस एजेंसी इसका लाइव स्ट्रीम दिखाएगी और एक्सपर्ट्स इसके बढ़ने की प्रक्रिया पर कमेंट्री भी करेंगे।...

अनोखा ब्‍लैक होल, तारों की तरह बदल देता है अपना चुंबकीय क्षेत्र, क्‍या है वजह?

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ब्लैक होल के आसपास कुछ ऐसा है, जो अंतरिक्ष में दिलचस्‍पी रखने वालों को उत्‍साहित करता है। ब्‍लैक के रहस्‍य और इसके पीछे छिपी फ‍िजिक्‍स ने वैज्ञानिकों को वर्षों से सोचने पर मजबूर किया है। ब्‍लैक होल को ब्रह्मांड का इंजन भी कहा जाता है, क्‍योंकि अक्‍सर ये एक्टिव गैलेक्टिक न्‍यूक्लिआई को ऊर्जा प्रदान करते हैं। अक्‍सर ब्‍लैक होल के मैग्‍नेटिक फील्‍ड के बारे में चर्चा की जाती है, लेकिन इनका अपना कोई मैग्‍नेटिक फील्‍ड नहीं होता। एक डिस्क के रूप में ब्लैक होल को घेरने वाला प्लाज्मा ही इनके चारों ओर एक चुंबकीय क्षेत्र बनाता है। वैज्ञानिकों ने 239 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर स्थित आकाशगंगा 1ES 1927+654 पर अपनी जांच करते हुए इसके विशाल ब्लैक होल के चारों ओर की चमक में अचानक बदलाव देखा है।  इस चमक को ब्लैक होल के चुंबकीय क्षेत्र में अचानक हुए बदलाव की वजह माना जा रहा है। तारों के बारे में हमेशा बना जाता है कि वह मैग्‍नेटिक रिवर्सल पैदा करते हैं, वहीं ब्लैक होल के मामले में ऐसा नहीं माना जाता है। हमारा सूर्य हर 11 साल में अपने चुंबकीय क्षेत्र को रिवर्स कर देता है, लेकिन इसके मुकाबले किसी ब्‍लैक हो...

वैज्ञानिकों ने खोजे अनोखे जुड़वां एस्‍टरॉयड, उम्र में हो सकते हैं सबसे छोटे

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एक अजीबोगरीब खोज के तहत वैज्ञानिकों को जुड़वां एस्‍टरॉयड (asteroid) मिले हैं। ये पृथ्वी के सबसे नए पड़ोसी हो सकते हैं। अनुमान है कि लगभग 6 लाख मील की दूरी पर ये एस्‍टरॉयड कुछ सदियों पहले अपने पैरंट एस्‍टरॉयड से अलग हुए। अगस्‍त 2019 में इन एस्‍टरॉयड को अलग-अलग संस्थाओं (entities) के रूप में खोजा गया था। हालांकि उसके बाद शोधकर्ताओं ने इनके परिक्रमा पैटर्न में समानता को देखा। एस्‍टरॉयड 2019 PR2 और 2019 QR6 ने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया जब वैज्ञानिकों ने इनके इतिहास को टटोला। साल 2005 से स्‍टोर ‘कैटालिना स्काई सर्वे डेटा' को देखते हुए वैज्ञानिकों को इन एस्‍टरॉयड के बारे में एक दिलचस्प संभावना दिखाई दी। एडिशनल ऑब्‍जर्वेशन ने वैज्ञानिकों को इन एस्‍टरॉयड की पुरानी लोकेशन में जाने में मदद की। इसके बाद ऑर्बिटल कैलकुलेशन से यह निर्धारित किया गया कि अतीत में दो एस्‍टरॉयड सिर्फ एक इकाई थे। वैज्ञानिकों ने दो मॉडल का इस्तेमाल किया जिसके अनुसार, पैरंट एस्‍टरॉयड 230 और 420 साल पहले या 265 और 280 साल पहले टूट गया होगा। इसी वजह से ये दो एस्‍टरॉयड बन गए।  यह रिसर्च पेपर 2 फरवरी को रॉयल एस्ट्रो...