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तारों को भी लगते हैं झटके! सुनामी जैसा कंपन‍ बिगाड़ सकता है उनका आकार

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हमारी आकाशगंगा यानी मिल्‍की-वे में मौजूद तारे भी ‘कंपन' का अनुभव करते हैं। यह सुनने में अजीब लगता है, लेकिन फैक्‍ट है। वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि आकाशगंगा में स्थित तारे (या ग्रह) ‘स्टारक्वेक' को एक्‍सपीरियंस करते हैं। जैसे पृथ्‍वी पर सुनामी आती है, वैसा ही कुछ अभास तारों में भी होता है। दावा तो यह भी है कि ये स्टारक्वेक इतने पावरफुल हैं कि किसी तारे का आकार भी बदल सकते हैं। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के मिल्की वे-मैपिंग गैया मिशन द्वारा यह खोज की गई है।  इस खोज तक पहुंचने में गैया स्‍पेस ऑब्‍जर्वेट्री द्वारा जुटाए गए डेटा की अहम भूमिका रही। इस ऑब्‍जर्वेट्री ने लगभग दो अरब सितारों के आंकड़े जुटाए थे, जिनके आधार पर यह खोज की गई है। यूरोपीय स्‍पेस एजेंसी की ओर से बताया गया है कि पहले भी ऑब्‍जर्वेट्री को तारों में कंपन का पता चलता था। तारों में यह कंपन उनके आकार को बनाए रखने के लिए होता था। अब जिन कंपनों के बारे में पता चला है, वह सुनामी की तरह हैं।  इस ऑब्‍जर्वेशन से खगोलविदों को हमारी आकाशगंगा की संरचना का पुनर्निर्माण करने में मदद मिलेगी। वह पता लगा पाएंगे कि अरबों ...

ISS की उड़ान भरने वाले तीन अंतरिक्ष यात्री पहनेंगे खास हेलमेट, पता चलेगा क्‍या चल रहा उनके दिमाग में!

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एक इजरायली स्‍टार्टअप है। नाम है- ‘Brain.Space'। चार साल पहले शुरू हुआ था और मस्तिष्क की गतिविधियों पर डेटा की स्‍टडी करता है। ‘Brain.Space' एक महत्‍वपूर्ण प्रोजेक्‍ट से जुड़ने जा रहा है। दरअसल, एलन मस्‍क की कंपनी स्‍पेसएक्‍स (SpaceX) की शटल फ्लाइट अगले हफ्ते इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन (ISS) के लिए उड़ान भरेगी। इस दौरान Brain.Space अंतरिक्ष यात्रियों पर अपना परीक्षण करेगा। 10 दिन का यह मिशन इसलिए भी खास है, क्‍योंकि यह इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन की पहली प्राइवेट यात्रा है। बताया जा रहा है कि 3 अप्रैल को चार अंतरिक्ष यात्रियों के साथ इस सफर की शुरुआत होगी।   रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि प्राइवेट स्‍पेस-फ्लाइट फर्म Axiom Space के मिशन पर जाने अंतरिक्ष यात्रियों में से तीन यात्री ‘Brain.Space' द्वारा बनाए गए एक खास इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राम (EEG)-इनेबल्‍ड हेलमेट को पहनेंगे।  ‘Brain.Space' के चीफ एग्‍जीक्‍यूटिव यायर लेवी ने न्‍यूज एजेंसी को बताया, हम जानते हैं कि माइक्रोग्रैविटी एनवायरनमेंट की वजह से शरीर के संकेतकों पर असर पड़ता है। यह शायद मस्तिष्क को प्रभावित कर...

जिन ग्रहों पर जीवन की उम्‍मीद, उनके बारे में और जानकारी जुटाएगा ‘जेम्‍स वेब टेलीस्‍कोप’

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जब भी बात अंतरिक्ष में चल रही खोजों की आती है, तब यह सवाल जरूर उठता है कि क्‍या पृथ्‍वी के बाहर कहीं जीवन संभव है। वैज्ञानिक कई वर्षों से ऐसे ग्रहों की तलाश में हैं, जो जीवन को सपोर्ट कर सकें। पृथ्वी से कई प्रकाश-वर्ष दूर वैज्ञानिकों को एक ऐसी जगह का पता है, जहां ये सभी अटकलें सच हो सकती हैं। TRAPPIST-1 सिस्‍टम पर एक बार फ‍िर वैज्ञानिकों की नजर है। इस सिस्‍टम में पृथ्‍वी के आकार वाले 7 ग्रह हैं और यह सभी एक लाल बौने तारे की परिक्रमा करते हैं। नासा (NASA) के अनुसार, पांच साल पहले खोजा गया यह सिस्‍टम आज भी वैज्ञानिकों के लिए एक रहस्य बना हुआ है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा अब इन ग्रहों के बारे में और अधिक जानने के लिए ‘जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप' का इस्तेमाल कर रही है। नासा की ओर से शेयर की गई एक पोस्ट के अनुसार, जेम्‍स वेब स्‍पेस टेलीस्कोप इन ग्रहों के चारों ओर वायुमंडल के संकेतों की तलाश करेगा। इसका मकसद यह जानना है कि वो जीवन के लिए कितने काम के हो सकते हैं।   TRAPPIST-1 सिस्‍टम अपने तारे के चारों ओर सात ग्रहों को दर्शाता है। ए‍क इलेस्‍ट्रेशन के जरिए नासा ने इस सिस्‍टम के सभी ...