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SpaceX के जर्मन मिलिट्री सैटेलाइट का लॉन्च इवेंट आज ऐसे देखें लाइव

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SpaceX आज जर्मन रडार सैटेलाइट लॉन्च करने जा रही है जो कि इसके फॉल्कन 9 रॉकेट के माध्यम से लॉन्च किया जाएगा। कंपनी का ये इवेंट लाइवस्ट्रीम होने की बात कही गई है। लॉन्च शनिवार को सुबह 10 बजे ET पर निर्धारित है। इसे वेंडनबर्ग स्पेस फोर्स बेस के स्पेस लॉन्च कॉम्प्लेक्स 4 ईस्ट से लॉन्च किया जाएगा जो कि कैलिफॉर्निया में स्थित है।   इवेंट में Falcon 9 रॉकेट SARah-1 नामक सैटेलाइट को लेकर जाएगा और ऑर्बिट में छोड़ आएगा। सैटेलाइट को जर्मन कंपनी Airbus ने जर्मन मिलिट्री के लिए बनाया है। ये रडार सैटेलाइट स्पेस से धरती की निगरानी करेंगे और सैटेलाइट इमेजरी बनाएंगे। लॉन्च को लाइवस्ट्रीम किया जाएगा जैसा कि स्पेसएक्स पहले से करती आई है। लाइवस्ट्रीम में लिफ्ट ऑफ से पहले की तैयारियां भी दिखाई जाएंगी। इनमें फर्स्ट और सेकंड स्टेज की तैयारी भी शामिल होगी। फर्स्ट स्टेज बूस्टर की लैंडिंग भी लाइव दिखाई जाएगी।  आप इस लॉन्च को इंटरनेट के माध्यम से देख सकते हैं। कवरेज लॉन्च के 10 मिनट पहले से शुरू होगी। इसका समय सुबह 10 बजे (ET) रखा गया है। आप इस इवेंट को स्पेसएक्स के यू-ट्यूब चैनल पर देख सकते हैं। इसके लिए ह...

2 अरब साल पहले मंगल ग्रह पर थे महासागर! वैज्ञानिकों ने ऐसे लगाया अनुमान

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पृथ्‍वी से बाहर जीवन की संभावना की बात आती है, तो इसका सबसे बड़ा दावेदार नजर आता है मंगल (Mars) ग्रह। वर्षों से वैज्ञानिक यह जानने में जुटे हैं कि क्‍या कभी मंगल ग्रह पर जीवन था। क्‍या भविष्‍य में ऐसी कोई उम्‍मीद है? तमाम अध्‍ययन संकेत तो देते हैं, लेकिन अभी बहुत शोध बाकी है। अब पेरिस यूनिवर्सिटी की एक स्‍टडी में पता चला है कि 2 अरब साल पहले मंगल ग्रह पर तरल महासागर हो सकते थे। वैज्ञानिकों का कहना है कि तरल महासागर संभव हो सकता है अगर तापमान जमाव बिंदु यानी 4.5 डिग्री सेल्सियस से ज्‍यादा होता है। मंगल ग्रह पर ऐसी स्थितियां आज से करीब 3 अरब साल पहले मुमकिन थीं।  हालांकि साल 2016 के एक रिव्‍यू कहा गया था कि लो सोलर रेडिएशन के कारण मंगल ग्रह की प्राचीन जलवायु बेहद ठंडी थी और एक महासागर को बरकरार नहीं रख सकती थी। वहीं, साल 2021 के एक अन्य अध्ययन में कहा गया है कि ग्रह का अपना वॉर्मिंग मैकेनिज्‍म है, जो झीलों और नदियों को पनपने दे सकता है।  मौजूदा अध्ययन में रिसर्चर्स ने पृथ्वी के जलवायु मॉडल पर बेस्‍ड त्रि-आयामी मॉडल का इस्‍तेमाल करके मंगल की प्राचीन जलवायु को दोबारा से तैयार किया। इस...

रविवार 15 मई को होने जा रहा पूर्ण चंद्र ग्रहण, 'ब्लड मून' अनोखी खगोलीय घटना को ऐसे देखें लाइव

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वीकेंड पर चांद पूरी तरह से अंधरे में डूबने वाला है। इस दौरान एक बड़ी खगोलीय घटना का नजारा मिलने वाला है, जो काफी समय बाद देखने को मिलेगा। रविवार की रात से सोमवार की सुबह तक 2022 का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण होने जा रहा है। यह ग्रहण साउथ और नॉर्थ अमेरिका, अंटार्कटिका, यूरोप, अफ्रीका और ईस्ट पेसिफिक में दिखाई देगा। पूर्ण चंद्र ग्रहण को कई बार ब्लड मून भी कहा जाता है क्योंकि ग्रहण के चरम पर यह गहरे लाल रंग का दिखता है। हालांकि, भारत में इसे नहीं देखा जा सकेगा।  चंद्र ग्रहण तब होता है, जब सूरज, धरती और चांद एक सीध में आ जाते हैं। इस स्थिति में चांद को धरती की छाया से गुजरना होता है। पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान चांद धरती की छाया के सबसे अंधेरे हिस्से में चला जाता है जिसे अम्ब्रा कहा जाता है।  यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इच्छुक लोग नासा पर इसका लाइवस्ट्रीम देख सकते हैं। इसका समय 15 मई रात 11 बजे ET से 16 मई रात 12 बजे ET तक रहेगा। भारतीय समयानुसार यह सोमवार के सुबह 8.33 बजे का समय होगा। स्पेस एजेंसी इसका लाइव स्ट्रीम दिखाएगी और एक्सपर्ट्स इसके बढ़ने की प्रक्रिया पर कमेंट्री भी करेंगे।...

मंगल ग्रह से ऐसे दिखते हैं पृथ्वी और चंद्रमा, NASA की इस अदभुत तस्वीर में देखें

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अंतरिक्ष से पृथ्वी और चंद्रमा कैसे दिखते हैं, यह तो आपने कई बार देखा होगा, लेकिन क्या आपने मंगल ग्रह से पृथ्वी और चंद्रमा का नाज़ारा देखा है? अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA ने अकसर खूबसूरत और हैरान करने वाली तस्वीरों को शेयर करता है और कुछ ऐसा ही एजेंसी ने एक बार फिर किया है। NASA ने अपने मार्स रिकोनिसेंस ऑर्बिटर पर हाई रेजोल्यूशन इमेजिंग साइंस एक्सपेरिमेंट (HiRISE) कैमरे से ली गई पृथ्वी और चंद्रमा की एक तस्वीर शेयर की है। इसमें आप यह अनुभव कर सकते हैं कि मंगल ग्रह से हमारी पृथ्वी और चंद्रमा कैसे दिखते हैं।  NASA ने इस तस्वीर को अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर शेयर किया गया है। पोस्ट में नासा ने लिखा (अनुवादित), "मार्स रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर ने पृथ्वी और चंद्रमा की इस झलक को कैद किया है। हमारे सात में से प्रत्येक रोबोट अब मंगल ग्रह पर काम कर रहे हैं, वास्तव में एक #NASAEarthling है, जो हमारी आंखों के रूप में कार्य करते हैं क्योंकि वे लाल ग्रह का पता लगाते हैं - हमारे नीले ग्रह के लिए हमारी समझ और प्रशंसा को गहरा करते हैं।"   Mars Reconnaissance Orbiter caught this glimpse of Earth a...

सूर्य की इतनी डिटेल इमेज देखी है पहले? ESA के सोलर ऑर्बिटर ने ऐसे किया क्लिक

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यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के सोलर ऑर्बिटर ने सूर्य की नजदीकी उड़ान के दौरान उसकी हाई-रेजॉलूशन इमेज खींची है। सोलर ऑर्बिटर ने सूर्य की फुल डिस्‍क इमेज के साथ उसके वातावरण और कोरोना को भी कैद किया है। 7 मार्च को यह ऑर्बिटर सूर्य से सिर्फ 75 मिलियन किलोमीटर की दूरी पर था। यह पृथ्वी से सूर्य की दूरी का आधा है। सोलर ऑर्बिटर ने अपने एक्‍ट्रीम अल्ट्रावाइलेट इमेजर (EUI) का इस्‍तेमाल करते हुए लगभग 10 मिनट के एक्सपोजर में 25 इमेज खीचीं। वैज्ञानिकों ने फुल इमेज बनाने के लिए सभी तस्‍वीरों को एक मोजेक में जोड़ दिया, जिसके बाद यह फोटोग्राफ सामने आई है।  फाइनल इमेज में 83 मिलियन पिक्सल से भी ज्‍यादा हैं। इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि इसका रेजॉलूशन 4K टीवी स्क्रीन से 10 गुना बेहतर है। EUI के अलावा सौर ऑर्बिटर पर कई इमेजिंग उपकरण हैं। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के मुताबिक, इनमें से एक है स्पेक्ट्रल इमेजिंग ऑफ द कोरोनल एनवायरनमेंट (SPICE)। इसने भी एक इमेज को कैप्चर किया, जिसने 50 साल में अपनी तरह की सूर्य की पहली तस्‍वीर दिखाई है। यह अब तक की सबसे बेस्‍ट है।  वहीं बात करें EUI की, तो सूर्य की फोटोग्रा...

NASA अंतरिक्ष यात्री Vande Hei रिकॉर्ड तोड़ मिशन के बाद धरती पर करेंगे लैंड, ऐसे देखें लाइव कवरेज

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अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री मार्क वेंदे हेई (Mark Vande Hei) 30 मार्च को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से 355 दिन का रिकॉर्ड तोड़ मिशन पूरा करके धरती पर वापस लौट रहे हैं। नासा उनके लौटने के इस इवेंट को लाइव ब्रॉडकास्ट करेगा। मार्क के साथ दो रूसी अंतरिक्ष यात्री Anton Shkaplerov और Pyotr Dubrov भी होंगे। ये तीनों Soyuz MS-19 कैप्सूल में सवार होकर लौटते हुए कजाकिस्तान में लैंड करेंगे। सोयूज को रासवेट मॉड्यूल से अलग किया जाएगा जिसके बाद यह पैराशूट के माध्यम से लैंड करना शुरू होगा। 15 मार्च को मार्क ने अंतरिक्ष में लगातार 340 दिनों के Scott Kelly के पहले के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है।  नासा ने कहा है कि वह मार्क की वापसी का लाइव कवरेज दिखाएगा। यह अनडॉकिंग से लैंडिंग तक की पूरी कवरेज होगी। इसका शेड्यूल इस प्रकार है: फेयरवेल और हैच क्लोजर: 30 मार्च सुबह 9 बजे IST अनडॉकिंग: 30 मार्च दोपहर 12:15 बजे IST डी-ऑर्बिट: 30 मार्च शाम 3:45 बजे IST लैंडिंग: 30 मार्च शाम 4:58 बजे IST धरती के लिए लौटने से पहले Shkaplerov स्पेस स्टेशन की कमान नासा के अंतरिक्ष यात्री Tom Marshburn को सौंपेंगे। यह इवेंट भी 29 मार्च क...

NASA ने ‘मून रॉकेट’ को किया रोलआउट, ऐसा है दुनिया का सबसे शक्तिशाली रॉकेट

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने पहली बार अपने विशालकाय ‘मून रॉकेट' को उतारा है। ‘स्पेस लॉन्च सिस्टम' (SLS) रॉकेट को डमी काउंटडाउन के लिए फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर में लॉन्‍चपैड पर ले जाया गया। इस इवेंट को देखने के लिए करीब 10 हजार लोग जमा हुए थे। सबकुछ ठीक रहा, तो फ‍िर कई और टेस्‍ट किए जाएंगे और सबसे आखिर में ‘वेट ड्रेस रिहर्सल' होगी। ओरियन क्रू कैप्सूल को रॉकेट के टॉप में फ‍िक्‍स करने के बाद SLS ब्लॉक 1 की ऊंचाई 322 फीट (98 मीटर) हो जाती है। यह स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से लंबा है, लेकिन 363 फीट के Saturn V रॉकेट से थोड़ा छोटा है। Saturn V रॉकेट की मदद से चंद्रमा के अपोलो मिशन को संचालित किया था।   हालांकि SLS रॉकेट 8.8 मिलियन पाउंड की मैक्सिमम थ्रस्ट (39.1 मेगान्यूटन) प्रोड्यूस करेगा, जो Saturn V रॉकेट से 15 फीसदी अधिक है। इसका मतलब है कि जब यह काम करना शुरू करेगा, तब यह दुनिया का सबसे शक्तिशाली रॉकेट होगा। इवेंट देखने पहुंचने लोगों को संबोधित करते हुए नासा के एडमिनिस्‍ट्रेटर बिल नेल्सन ने कहा दुनिया का अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट आपके सामने है। एक न्‍यूज एजें...

पृथ्वी से 200 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर करीब आईं दो आकाशगंगाएं, ऐसा है नजारा

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नासा (NASA) के हबल स्पेस टेलीस्कोप ने पृथ्वी से लगभग 200 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर एक-दूसरे से इंटरेक्‍ट करने वालीं दो आकाशगंगाओं को कैमरे में कैद किया है। यह ‘पेगासस तारामंडल' में स्थित हैं। अपने इंस्टाग्राम पेज पर शेयर की गई इमेज में नासा ने एक बड़ी चक्राकार आकाशगंगा (NGC 7469) और इसके छोटे साथी (IC 5283) को दिखाया है। ‘NGC 7469' आकाशगंगा काफी बड़ी है। यह एक विशाल ब्‍लैक होल और तारों के समूह की चमकदार रिंग को भी रिप्रजेंट करती है।  वैसे एकसाथ इन आकाशगंगाओं को ‘Arp 298' कहा जाता है। यह नाम इन्‍हें खगोलविद् ‘हाल्टन Arp' के नाम से मिला है। उन्‍होंने अजीबोगरीब आकाशगंगाओं की एक लिस्‍ट बनाई है, जिसमें ‘Arp 298' भी शामिल है। इसे एटलस कहा जाता है। एटलस में अजीबोगरीब और अद्भुत आकाशगंगाओं की एक गैलरी है। इन सभी की संरचनाएं काफी अलग हैं। नासा ने बताया है कि Arp 298 में जो दो आकाशगंगाएं आपस में इंटरेक्‍ट कर रही हैं, उनमें से NGC 7469 आकाशगंगा बड़ी है। इसके पास विशाल ब्‍लैक होल और चमकदार रिंग वाले तारों का एक समूह भी है।  इस तरह की आकाशगंगाओं का अध्ययन वैज्ञानिक यह समझने के ...

पहली बार वैज्ञानिकों ने विशाल लाल तारे को विस्‍फोट करते हुए देखा, ऐसा था नजारा

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अंतरिक्ष में विशाल तारों के मरने की खबरें हमने अक्‍सर पढ़ी हैं। कभी आपने सोचा है कि यह नजारा कैसा होगा? एक तारा पृथ्‍वी से कैसा दिखाई देगा, जब वह अपने अंत के निकट होगा? रिसर्चर्स ने टेलिस्‍कोप का इस्‍तेमाल करके एक विशाल लाल तारे में विस्फोट को देखा। यह तारा पृथ्वी से 120 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर स्थित NGC 5731 आकाशगंगा में स्थित था। वैज्ञानिकों ने बताया कि विस्फोट से पहले यह तारा सूर्य से 10 गुना अधिक बड़ा था। इसमें मौजूद हाइड्रोजन, हीलियम और अन्य तत्वों के जरिए जलने के बाद यह फट गया। इस घटना को देखने से पहले खगोलविदों का मानना ​​था कि विस्फोट से पहले विशालकाय तारा शांत था।  यह रिसर्च एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में 6 जनवरी को प्रकाशित हुई है। इसमें कहा गया है कि विशाल तारों में जब विस्‍फोट होता है, उसे देखना मील का पत्‍थर है। इस स्‍टडी के प्रमुख लेखक व्यान जैकबसन-गैलन (Wynn Jacobson-Galan) ने एक बयान में कहा कि विशालकाय लाल तारे को विस्फोट करते देखना एक बड़ी सफलता है।' CNN की रिपोर्ट के अनुसार, इस‍ विशाल तारे में असामान्य गतिविधि का पता खगोलविदों ने 130 दिन पहले लगाया था। यूनिवर्सिटी ऑ...

ऐसी होंगी Future cars, बिना हेडफोन सुन सकेंगे सॉन्‍ग, सामने वाले को नहीं आएगी आवाज

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रोड ट्र‍िप्‍स तब मुश्किलों से भर जाती हैं, जब उनमें किसी और की पसंद का म्‍यूजिक सुनना पड़ता है। जैसे- आपको पसंद हैं नाइंटीज के मेलॉडी सॉन्‍ग और सामने वाला दमदार बैस वाले पंजाबी गाने बजा दे। हेडफोन इसका एक सॉल्‍यूशन जरूर हैं, लेकिन लंबी रोड ट्रिप्‍स में उनके साथ बैठे रहना कानों के लिए दुखदायी हो जाता है। कैसा हो अगर आप गाड़ी में बिना हेडफोन के अपनी पसंद का गाना सुन पाएं और वह किसी और को भी ना सुनाई दे। साउंड की दुनिया की यह कल्‍पना फ्यूचर में हकीकत बन सकती है। फ्रांस में रिसर्चर्स ऐसा ही एक पर्सनल साउंड जोन देने पर काम कर रहे हैं, जो आपकी कार में कंडीशन के हिसाब से ढल जाता है।  रिसर्चर्स का मानना है कि कार में इस तरह के पर्सनल साउंड जोन से आपको बाहर की आवाज आए बिना अच्‍छी तरह से सुनने की तकनीक मिल सकती है। हर कोई कार में अपनी पसंद का म्‍यूजिक सुन सकेगा, वह भी बिना हेडफोन लगाए। जीपीएस का अलर्ट सिर्फ ड्राइवर को मिलेगा और आप इसी तरह फोन कॉल भी कर सकेंगे।    मल्‍टीपल लाउडस्पीकर की मदद से साइंटिस्‍ट पर्सनल साउंड जोन बनाने पर काम कर रहे हैं। इन मल्‍टीपल स्‍पीकर की खूबी यह है कि ये सभी एक...