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इंसान की आंख जैसी यह क्‍या चीज है मंगल ग्रह पर? स्‍पेस एजेंसी ने समझाया

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मंगल ग्रह पर दुनियाभर की अंतरिक्ष एजेंस‍ियों ने अपने मिशन भेजे हैं। इन्‍हीं में से एक मिशन के तहत यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के मार्स एक्सप्रेस मिशन ने लाल ग्रह के दक्षिणी गोलार्ध में गड्ढे की आकृति वाले क्षेत्र, एओनिया टेरा (Aonia Terra) में एक इमेज को कैप्‍चर किया है। पहली नजर में देखने पर ऐसा लगता है कि ग्रह पर एक विशालकाय आंख मौजूद है, जो हमेशा खुली रहती है। हालांकि हकीकत में ऐसा कुछ नहीं है। तस्‍वीर भले ही आंखनुमा कोई स्‍ट्रक्‍चर हो, पर यह इस ग्रह की जियोलॉजी को बेहतर तरीके से दिखा सकती है। माना जाता है कि लगभग 4 अरब साल पहले इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर ऐसे गड्ढे उभर आए थे और यह सब हमारे सोलर सिस्‍टम के शुरुआती समय में हुई उथल-पुथल का नतीजा था।  कुछ दिन पहले ESA ने एक बयान जारी किया था। उससे ऐसा लग रहा था कि एजेंसी कोई साइंस फिक्शन हॉरर फिल्म लिखने की योजना बना रही है। उसके स्‍टेटमेंट का टाइटल था- ‘मार्स स्लीप्स विद वन आई ओपन'। अपने स्‍टेटमेंट में ईएसए ने बताया है कि यह इमेज और ऐसे गड्ढे आज से 3.5 से 4 अरब साल पहले लिक्विड वॉटर के लिए किसी तरह की सप्‍लाई में मदद करते...

कभी देखा है सूर्य को इतने करीब से? बुध ग्रह की कक्षा में जाकर 500 डिग्री तापमान में खींची गईं तस्‍वीरें

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यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) ने साल 2020 में अपना सोलर ऑर्बिटर अंतरिक्ष में भेजा था। हाल ही में इसने सूर्य के रिकॉर्ड करीब पहुंचकर हैरान करने वाली तस्‍वीरें खींची हैं। रिपोर्टों के अनुसार, 26 मार्च को ESA का सोलर ऑर्बिटर सूर्य के सबसे नजदीकी ग्रह बुध (Mercury) की कक्षा में पहुंचा। इस तरह की पहुंच को पेरिहेलियन (perihelion) के रूप में जाना जाता है, जिसमें कोई ग्रह सूर्य के सबसे करीब होता है। हालांकि अंतरिक्ष यान को पेरिहेलियन तक पहुंचने के लिए कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इनमें सबसे बड़ी चुनौती भीषण गर्मी की थी। सोलर ऑर्बिटर जब सूर्य के रिकॉर्ड करीब पहुंचा तो उसे 500 डिग्री सेल्सियस तक तापमान का सामना करना पड़ा। इस दौरान हीट शील्ड ने उसे बचाकर रखा।  उम्मीद है कि फ्यूचर में सोलर ऑर्बिटर सूर्य के और करीब जाएगा और उसे ज्‍यादा तापमान का सामना करना पड़ेगा। इस कोशिश का सबसे बड़ा फायदा यह है कि हमें सूर्य का वह रूप देखने को मिला है, जो आज से पहले कभी नहीं देखा गया। सूर्य के रिकॉर्ड करीब पहुंचकर ESA के ऑर्बिटर ने पावरफुल फ्लेयर्स, सौर ध्रुवों के शानदार दृश्य और एक रहस्यमयी सौर 'हे...

अमेरिका को चीन की चुनौती, लॉन्‍च करेगा 2.5 अरब पिक्‍सल कैमरे वाला स्‍पेस टेलीस्‍कोप, यह है तैयारी

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अमेरिका और यूरोपीय स्‍पेस एजेंस‍ियों को अंतरिक्ष में चीन से चुनौती मिल रही है। हाल में चीनी वैज्ञानिकों ने बड़ा दावा करते हुए कहा था कि चंद्रमा की मिट्टी में ऑक्सीजन और ईंधन को पैदा करने की क्षमता है। चीन के Chang'e 5 स्‍पेसक्राफ्ट द्वारा लाई गई चंद्रमा की मिट्टी का विश्लेषण करने के बाद वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुंचे। चीन मंगल मिशन पर भी काम कर रहा है। यही नहीं, अब उसकी तैयारी साल 2023 तक अपना पहला बड़ा स्‍पेस टेलीस्‍कोप लॉन्‍च करने की है। इस टेलीस्‍कोप के जरिए चीन, अंतरिक्ष का सर्वेक्षण करना चाहता है। आकाशगंगाओं को एक्‍स्‍प्‍लोर करना चाहता है और तो और डार्क मैटर व डार्क एनर्जी के रहस्‍यों को उजागर करना चाहता है। चीन का यह टेलीस्‍कोप सीधे तौर पर अमेरिका और यूरोप के हबल टेलीस्‍कोप और हाल में लॉन्‍च किए गए जेम्‍स वेब टेलीस्‍कोप को टक्‍कर देगा।  space.com के मुताबिक, चीन की नेशनल एस्‍ट्रोनॉमिकल ऑब्‍जर्वेट्री के डेप्‍युटी डायरेक्‍टर लियू जिफेंग ने न्‍यूज एजेंसी सिन्हुआ को बताया है कि चीनी स्‍पेस स्‍टेशन टेलीस्कोप (CSST) एक ऑप्टिकल और अल्‍ट्रावॉयलेट स्‍पेस ऑब्‍जर्वेट्री है। इसमें ...

यूरोपीय स्पेस एजेंसी ने मंगल ग्रह की सतह पर देखी दिलचस्प आकृतियां, तस्वीर में देखें...

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यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) के मार्स एक्सप्रेस ऑर्बिटर से लेटेस्ट रिलीज में मंगल ग्रह के भूविज्ञान को लेकर बेहद दिलचस्प जानकारियों का खुलासा किया है। ऐसा प्रतीत होता है कि लाल ग्रह की सतह पर भारी खरोंचें हैं। हालांकि, ये निशान टैंटलस फॉसे का हिस्सा हैं, जो मंगल पर एक विशाल फॉल्ट सिस्टम है। तस्वीर की डिटेल्स के अलावा, यहां जो ध्यान देने वाली एक और जरूरी विशेषता है, वो है इसका साइज। ये कुंड 350 मीटर (1,148 फीट) तक गहरे, 10 किलोमीटर चौड़े है और यह चौड़ाई 1,000 किलोमीटर तक लंबी हो सकती हैं। तस्वीर 'ट्रू कलर' है, जिसका मतलब है कि यदि मनुष्य इस जगह को अपनी आंखों से देखेंगे, तो उन्हें यह क्षेत्र समान रंग का दिखाई देगा। मंगल ग्रह पर कई रहस्य हैं और लाल ग्रह की सतह पर काम करते रहने वाले रोबोट हर दिन नई जानकारी का खुलासा कर रहे हैं। एक ESA प्रेस रिलीज में कहा गया है, "पहली नज़र में ये फीचर्स ऐसे दिखते हैं जैसे किसी ने लाल ग्रह की सतह पर अपने नाखूनों को उकेरा है, जैसे उन्होंने ऐसा किया है।" प्रेस रिलीज में कहा गया है कि टैंटलस फॉसे मंगल पर एक प्रमुख विशेषता है। यह निशान मंगल ...

हबल टेलीस्‍कोप का 32वां जन्‍मदिन, Nasa ने शेयर की आकाशगंगाओं के ग्रुप की तस्‍वीर

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हबल स्पेस टेलीस्‍कोप को अंतरिक्ष में 32 साल पूरे हो गए हैं और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) इसे सेल‍िब्रेट कर रही है। एक सिंगल इमेज के जरिए नासा ने गहरे अंतरिक्ष की पांच आकाशगंगाओं को दिखाया है। यह व्‍यू काफी बेहतरीन है। याद रहे कि हबल स्पेस टेलीस्कोप को 24 अप्रैल 1990 को लॉन्च किया गया था। इसे अगले ही दिन डिप्‍लॉय कर दिया गया था। यह सप्‍ताह इस टेलीस्‍कोप का 32वां जन्‍मदिन है। हबल ने 20 मई 1990 को अपनी सर्विस शुरू की थी।  नासा ने जो इमेज शेयर की है, वह हिक्सन कॉम्पैक्ट ग्रुप 40 (Hickson Compact Group 40) नाम की आकाशगंगाओं का एक समूह है। इस ग्रुप में एक विशाल और अण्डाकार आकाशगंगा भी शामिल है, जो अरबों सितारों, तीन स्‍पाइरल आकाशगंगाओं और एक लेंटिकुलर (लेंस के जैसी) आकाशगंगा के साथ चमकती है। यह इमेज एक वीडियो का हिस्सा है, जिसमें हबल की सीनियर प्रोजेक्‍ट साइंटिस्‍ट डॉ. जेनिफर वाइसमैन इस इमेज के बारे में और टेलीस्‍कोप के महत्‍व के बारे में बता रहे हैं।    वीडियो में वाइसमैन ने समझाया कि हिक्सन कॉम्पैक्ट ग्रुप 40 में आकाशगंगाओं को एक गुरुत्वाकर्षण डांस में साथ रखा जाता है। यह एक ...

Nasa ने टेस्‍ट की ‘होलोपोर्टेशन’ तकनीक, अंतरिक्ष यात्रियों के सामने आए डॉक्‍टर, जानें इसके बारे में

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने बताया है कि उसने ‘होलोपोर्टेशन' (holoportation) नाम की एक कम्‍युनिकेशन टेक्‍नॉलजी को टेस्‍ट किया है। यह एक ऐसा शब्‍द लगता है, जो मानो किसी साइंस फ‍िक्‍शन मूवी से आया हो और रोजाना जिंदगी में इसकी बहुत कम प्रासंगिकता हो। हालांकि यह शब्द ‘होलोग्राम' और ‘टेलीपोर्टेशन' का कॉम्‍बि‍नेशन है। पिछले साल अक्टूबर में नासा ने इस इनोवेट‍िव 3D तकनीक का इस्‍तेमाल अपने फ्लाइट सर्जन डॉ. जोसेफ श्मिड को इंटरनेशनल स्‍पेस स्टेशन पर ‘होलोपोर्ट' करने के लिए किया था, जबकि डॉक्‍टर फ‍िजिकली पृथ्वी पर मौजूद थे। इस तकनीक के तहत डॉ श्मिड और उनकी टीम के मेंबर्स के 3D होलोग्राम बनाए गए और उन्हें स्‍पेस  स्टेशन पर ट्रांसमिट किया गया, जो अंतरिक्ष यात्रियों के साथ लाइव बातचीत के रूप में दिखाई दिया। नासा के मुताबिक, होलोपोर्टेशन कम्‍युनिकेशन, लोगों के हाई-क्‍वॉलिटी वाले 3D मॉडल्‍स को रियल टाइम में कहीं भी ट्रांसमिट करने की इजाजत देता है। अगर इसे माइक्रोसॉफ्ट के होलोलेन्स जैसे मिक्‍स्‍ड रियलिटी डिस्प्ले के साथ जोड़ा जाता है, तो यह तकनीक यूजर्स को 3D में लोगों को ...

अंतरिक्ष में बटरफ्लाई! Nasa ने दिखाई ‘बेबी स्टार्स’ की शानदार इमेज

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अमेर‍िकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) के स्पिट्जर स्पेस टेलीस्कोप (Spitzer Space Telescope) ने आसमान में दिखाई देने वाले पैचों को एक्‍स्‍प्‍लोर करते हुए शानदार तस्‍वीर खींची है। इस इमेज को नासा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है। इसमें एक इन्फ्रारेड इमेज में हम कॉस्मिक क्‍लाउड देख सकते हैं। हालांकि यहां एक बात गौर करने वाली है। दरअसल, यह इमेज ‘बेबी स्टार्स' के एक ग्रुप की है, जो नए तारों की एक नेब्‍युला है। यह तस्‍वीर गैस और धूल के विशाल लाल बादलों को दिखाती है, जहां नए तारों का निर्माण हो सकता है। नासा की तस्‍वीर में दिखाई देने वाला बादल बटरफ्लाई जैसा लगता है।   यह तस्‍वीर नेब्‍युला में होने वाली प्रोसेस को भी दिखाती है। नासा के मुताबिक यह नेब्‍युला बताती है कि कैसे तारों के बनने से वही बादल खत्‍म हो जाते हैं, जो उन्‍हें बनाने में मदद करते हैं। अंतरिक्ष में मौजूद गैस और धूल के इन विशाल बादलों के अंदर गुरुत्वाकर्षण बल, मटीरियल्‍स को खींचता है। इसकी वजह से तारों को बनने में मदद मिलती है। नासा की ओर से शेयर की गई इस तस्‍वीर में एक नहीं, बल्कि दो स्‍टार क्‍लस्‍टर हैं।    अमेरिकी अंतर...

सूर्य में एक के बाद एक हलचल, Nasa ने ग्राफ‍िक्‍स से समझाया- क्‍या हुआ था

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वैज्ञानिकों के लिए ब्रह्मांड में सबसे उत्‍सुकता वाली चीज सूर्य (Sun) है। इस धधकते आग के गोले के बारे में जानने के लिए वह दिन-रात जुटे रहते हैं। कई अंतरिक्ष यान इस मकसद से अंतरिक्ष में हैं कि वह सूर्य के बारे में और जानकारी जुटा सकें। दुनियाभर की स्‍पेस एजेंसियां, सूर्य से जुड़ी नई घटनाओं को हमारे सामने लेकर आती हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) और यूरोपियन अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) इसमें सबसे आगे हैं। नासा के हालिया इंस्‍टाग्राम पोस्‍ट से पता चलता है कि बीते दिनों सूर्य एक के बाद एक कई घटनाओं का गवाह बना।       नासा ने अपने इंस्‍टाग्राम पेज पर बताया है कि पिछले हफ्ते हमारे सूर्य ने बैक टू बैक परफॉर्मेंस दी। एजेंसी के मुताबिक, 30 मार्च 2022 को सूर्य से बहुत तेज चमक निकली। यह दोपहर होते-होते अपने पीक पर थी। इसके बाद एक मध्‍यम दर्जे की हलचल और रिकॉर्ड की गई। सूर्य में हुई हलचल को हमारी सोलर डायनेमिक्स ऑब्जर्वेटरी ने कैप्‍चर किया। यह लगातार सूर्य को देखती है और इसमें होने वाली घटनाओं को कवर करती है।    नासा की ओर से शेयर किए गए पहले ग्राफिक में अहम सौर चमक दिखाई देती है। इसके तहत ट...

Nasa के हबल टेलीस्‍कोप ने धूल के पीछे छुपे विशाल ब्‍लैक होल को ढूंढ निकाला, देखें तस्‍वीर

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) के हबल स्‍पेस टे‍लीस्‍कोप (Hubble telescope) ने वैज्ञानिकों को कई तस्‍वीरें खींचकर हैरान किया है। इसने अद्भुत खोजों में मदद की है। अब इस टेलीस्‍कोप ने अंतरिक्ष में गहरी धूल के पीछे एक एक्टिव ब्लैक होल (black hole) की हैरान करने वाली इमेज को कैप्‍चर किया है। यह ब्लैक होल, स्‍पाइरल (सर्पिल) गैलेक्‍सी- NGC 7172 में स्थित है। यह बहुत पुराने तारामंडल पिसिस ऑस्ट्रिनस (Piscis Austrinus) में स्थित है, जो पृथ्वी से लगभग 110 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर है। डार्क धूल आकाशगंगा के बीच से होकर गुजरती है और इसके चमकदार केंद्र को धुंधला बना देती है। नासा ने कहा है कि गहली धूल की वजह से ही NGC 7172 एक सामान्य स्‍पाइरल आकाशगंगा से ज्यादा नजर नहीं आती।  जब धूल और गैस आकाशगंगा के केंद्र में मौजूद विशालकाय ब्लैक होल में गिरती है, तो यह तेज रोशनी पैदा करती है। नासा के वैज्ञानिकों को यह भी पता चला है कि NGC 7172 एक सेफर्ट (Seyfert) गैलेक्‍सी है। सेफर्ट गैलेक्‍सी सर्पिल आकार वाली आकाशगंगा को कहते हैं, जिसमें एक छोटा, चमकीला, बिंदु जैसा न्‍यूक्लियस होता है। वह उसकी चमक में ब...

पृथ्‍वी से 17000 प्रकाश वर्ष दूर वैज्ञानिकों ने खोजा बृहस्पति के जैसा ग्रह

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वैज्ञानिकों ने एक दिलचस्‍प खोज की है। उन्‍होंने पृथ्‍वी से 17,000 प्रकाश वर्ष दूर एक तारे का चक्कर लगाते हुए एक्सोप्लैनेट का पता लगाया है। ऐसे ग्रह जो सूर्य के अलावा अन्य तारों की परिक्रमा करते हैं, एक्सोप्लैनेट कहलाते हैं। इस ग्रह को केपलर स्पेस टेलीस्कोप की मदद से खोजा गया है। खास बात यह है कि केपलर स्पेस टेलीस्कोप अब रिटायर हो चुका है। उसने साल 2016 में इस खोज में भूमिका निभाई थी। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अबतक पहचाना गया सबसे दूर का ग्रह है। K2-2016-BLG-0005Lb नाम के इस एक्‍सोप्‍लैनेट को माइक्रोलेंसिंग तकनीक के इस्‍तेमाल से खोजा गया। इसका द्रव्यमान हमारे बृहस्पति के लगभग बराबर है। यह उतनी ही दूरी से अपने सूर्य की परिक्रमा करता है, जितनी दूरी से हमारा बृहस्पति अपने सूर्य का चक्‍कर लगाता है।  जिस डेटा की मदद से इस ग्रह को खोजा गया, उसे केपलर टेलीस्कोप ने अपने रिटायरमेंट से दो साल पहले जुटाया था। यह अब तक खोजा गया सबसे दूर स्थित ग्रह है, जो पिछले रिकॉर्ड से भी दोगुना दूर है।   रिसर्चर्स ने रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी के मंथली नोटिस में अपने निष्कर्ष प्रकाशित किए हैं। साइंस एंड ट...

सूर्य की इतनी डिटेल इमेज देखी है पहले? ESA के सोलर ऑर्बिटर ने ऐसे किया क्लिक

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यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के सोलर ऑर्बिटर ने सूर्य की नजदीकी उड़ान के दौरान उसकी हाई-रेजॉलूशन इमेज खींची है। सोलर ऑर्बिटर ने सूर्य की फुल डिस्‍क इमेज के साथ उसके वातावरण और कोरोना को भी कैद किया है। 7 मार्च को यह ऑर्बिटर सूर्य से सिर्फ 75 मिलियन किलोमीटर की दूरी पर था। यह पृथ्वी से सूर्य की दूरी का आधा है। सोलर ऑर्बिटर ने अपने एक्‍ट्रीम अल्ट्रावाइलेट इमेजर (EUI) का इस्‍तेमाल करते हुए लगभग 10 मिनट के एक्सपोजर में 25 इमेज खीचीं। वैज्ञानिकों ने फुल इमेज बनाने के लिए सभी तस्‍वीरों को एक मोजेक में जोड़ दिया, जिसके बाद यह फोटोग्राफ सामने आई है।  फाइनल इमेज में 83 मिलियन पिक्सल से भी ज्‍यादा हैं। इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि इसका रेजॉलूशन 4K टीवी स्क्रीन से 10 गुना बेहतर है। EUI के अलावा सौर ऑर्बिटर पर कई इमेजिंग उपकरण हैं। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के मुताबिक, इनमें से एक है स्पेक्ट्रल इमेजिंग ऑफ द कोरोनल एनवायरनमेंट (SPICE)। इसने भी एक इमेज को कैप्चर किया, जिसने 50 साल में अपनी तरह की सूर्य की पहली तस्‍वीर दिखाई है। यह अब तक की सबसे बेस्‍ट है।  वहीं बात करें EUI की, तो सूर्य की फोटोग्रा...

NASA की अहम खोज : हमारे सोलर सिस्‍टम के बाहर मौजूद हैं 5 हजार से ज्‍यादा ग्रह

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने हमारे सौर मंडल के बाहर 5000 से ज्‍यादा ग्रहों के होने की पुष्टि की है। आज से कई साल पहले तक वैज्ञानिकों को चुनिंदा ग्रहों के बारे में जानकारी थी, लेकिन दुनिया को जानने की उत्‍सुकता ने उन्‍हें इस मुकाम तक पहुंचा दिया है। अपने एक्सोप्लैनेट आर्काइव में नासा ने 65 ग्रहों का नया बैच शामिल किया है, जो हमारी मौजूदा सोलर फैमिली के बाहर हैं। इस तरह सौर मंडल के बाहर 5000 से ज्‍यादा ग्रह बीते 30 साल में खोजे जा चुके हैं। एक्सोप्लैनेट आर्काइव उन खोजों को रिकॉर्ड करता है, जिन्‍हें पहचानने के लिए कई तरीके इस्‍तेमाल किए जाते हैं और फ‍िर उनके होने की पुष्टि की जाती है।   नासा ने कहा है कि इन एक्सोप्लैनेट में पृथ्वी जैसी छोटी और चट्टानी दुनिया से लेकर ‘सुपर अर्थ' शामिल हैं, जो हमारे सौर मंडल के ग्रहों से भी बड़े हैं। इनमें बृहस्पति और ‘मिनी-नेप्च्यून्स' से बड़े ग्रह भी हैं। कुछ ग्रह तो एकसाथ दो तारों की परिक्रमा करते हैं, जबकि कई ग्रह मरे हुए तारों अवशेषों के चारों ओर घूमते हैं। नासा एक्सोप्लैनेट साइंस इंस्टीट्यूट के एक रिसर्च साइंटिस्‍ट जेसी क्रिस्टिय...

नासा ने यूरोपा क्लिपर अंतरिक्ष यान (Europa Clipper Spacecraft) को असेम्बल करना शुरू किया

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First Published: March 6, 2022 | Last Updated:March 6, 2022 यूरोपा क्लिपर (Europa Clipper) जिसे पहले यूरोपा मल्टीपल फ्लाईबाई मिशन (Europa Multiple Flyby Mission) के रूप में जाना जाता था, नासा द्वारा विकसित किया जा रहा एक इंटरप्लेनेटरी मिशन है और इसमें एक ऑर्बिटर भी शामिल है। अक्टूबर 2024 में लॉन्च होने वाले इस अंतरिक्ष यान को बृहस्पति की कक्षा में रहते हुए फ्लाईबाई की एक श्रृंखला के माध्यम से चंद्रमा यूरोपा का अध्ययन करने के लिए डिज़ाइन किया जा रहा है। मुख्य बिंदु  गैलीलियो अंतरिक्ष यान (Galileo spacecraft) द्वारा बृहस्पति के चारों ओर आठ साल के दौरान किए गए अनुवर्ती अध्ययन यूरोपा क्लिपर द्वारा किए जाएंगे। गैलीलियो ने यूरोपा की बर्फ की परत के नीचे एक उपसतह महासागर के अस्तित्व का खुलासा किया था। यह परियोजना एप्लाइड फिजिक्स लेबोरेटरी (APL) और जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (JPL) के बीच एक संयुक्त मिशन के रूप में शुरू हुई और इसे APL, JPL, ऑस्टिन में टेक्सास विश्वविद्यालय, साउथवेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट, कोलोराडो बोल्डर विश्वविद्यालय, और एरिज़ोना स्टेट यूनिवर्सिटी द...

जेम्‍स वेब टेलीस्‍कोप के 18 मिरर्स ने खींची एक ही तारे की फोटो, जानिए क्‍या दिखा

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पिछले साल दिसंबर में अंतरिक्ष में भेजा गया दुनिया का सबसे बड़ा टेलीस्‍कोप ‘जेम्‍स बेव स्‍पेस टेलीस्‍कोप' (James Webb Space Telescope) वहां खुद को सेटअप कर रहा है। इस टेलीस्कोप की ऑब्‍जर्वेट्री के 18-सेगमेंट वाले प्राइमरी मिरर्स (दर्पणों) को एक सीध (aligning) में करने की प्रक्रिया का पहला चरण पूरा होने वाला है। यह प्रक्रिया कई महीनों से चल रही है, जिसे ‘सेगमेंट इमेज आइडेंटिफिकेशन' के रूप में जाना जाता है। बहरहाल, जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप ने अपने 18 प्राइमरी मिरर्स सेगमेंट्स के साथ हेक्सागोनल फॉर्मेशन में एक ही तारे की 18 अनफोकस्‍ड इमेज रिकॉर्ड की हैं। यह विजुअल्‍स पर ज्‍यादा फोकस करने में मदद करेगा। सभी 18 प्राइमरी मिरर्स सेगमेंट्स ने डॉट्स के रूप में तारे की तस्‍वीर खींची। आखिर में इसे एक सिंगल, शार्प और फोकस्‍ड इमेज में तैयार किया जाएगा।  फ‍िलहाल इसके हेक्सागोनल पैटर्न को सामने लाया गया है। NASA Webb Telescope के ऑफ‍िशियल ट्विटर हैंडल से इस बारे में जानकारी दी गई है। पिछले हफ्ते यह कन्‍फर्म हुआ था कि टेलीस्‍कोप के सभी 18 मिरर सेगमेंट स्‍टारलाइट को देख सकते हैं। अब एक अपड...

धरती से 681 मिलियन लाइट ईयर्स दूर हो रहे अद्भुत नजारे की हबल टेलीस्कोप ने खींची तस्वीर

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हबल (Hubble) स्पेस टेलीस्कोप पिछले तीन दशकों से अधिक समय से ब्रह्मांड की रहस्‍यमयी घटनाओं को देख रहा है। यह नासा (NASA) और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) का जॉइंट प्रोजेक्‍ट है। हाल ही में इसने पृथ्वी से लगभग 681 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर कैन्‍सर तारामंडल (Cancer constellation) में तीन आकाशगंगाओं के विलय की आश्चर्यजनक तस्‍वीर को कैप्‍चर किया है। धूल के घने बादलों की वजह से यह तस्‍वीर उतनी साफ दिखाई नहीं देती, लेकिन आकाशगंगा की रोशनी इसके बाहरी छोरों को चीरती हुई नजर आती है।  अपने इंस्‍टाग्राम पोस्‍ट में ESA ने बताया कि इस इमेज में आकाशगंगा ‘IC 2431' का विलय दिखाई दे रहा है। IC 2431 तीन आकाशगंगाएं हैं। इन्‍हें LEDA 25476, Mrk 1224 या UGC 4756 के रूप में भी जाना जाता है। IC 2431 की खोज 24 फरवरी 1896 को फ्रांसीसी खगोलशास्त्री स्टीफन जेवेल ने की थी।ESA के मुताबिक, यह इमेज ‘गैलेक्‍सी जू सिटिजन साइंस इनिशिएटिव' का हिस्‍सा है।    गैलेक्‍सी जू प्रोजेक्‍ट के तहत 10 लाख आकाशगंगाओं को क्‍लासिफाई करने में खगोलशास्त्रियों की मदद चाहिए। जो लोग इसमें भाग लेते हैं, वो सीधे साइंटिफ‍िक रिसर्च म...

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने दिखाई मंगल ग्रह की हैरान करने वाली तस्‍वीर

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यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) ने मंगल (Mars) ग्रह की सतह की एक हैरान करने वाली इमेज रिलीज की है। इसमें दिखाया गया है कि हवाएं कैसे किसी परिदृश्‍य को आकार देती हैं। तस्‍वीर में मंगल ग्रह के साउथ हाइलैंड्स में हुक क्रेटर एरिया (Hooke Crater area) को दिखाया गया है। यह तस्‍वीर ESA और रूस की स्‍पेस एजेंसी रोस्कोस्मोस के प्रोजेक्‍ट- एक्सोमार्स ट्रेस गैस ऑर्बिटर (TGO) ने ली है। TGO के CaSSIS कैमरे (कलर एंड स्‍टीरियो सर्फेस इमेजिंग सिस्टम) द्वारा इस्‍तेमाल किए जाने वाले फिल्टर की वजह से तस्‍वीर में आर्टिफ‍िशियल रंग दिखाई दे रहे हैं।   ESA ने इंस्टाग्राम पर यह इमेज शेयर की है, जो मंगल ग्रह के साउथ हाइलैंड्स में हुक क्रेटर के पास एक आकर्षक परिदृश्य को दिखाती है। ESA के मुताबिक, मंगल ग्रह पर इस तरह की तस्‍वीर किसी अस्‍तव्‍यस्‍त इलाके के जैसी है। यह उस स्‍थानीय हवा के पैटर्न का संकेत है, जो यहां बहती है। इसी वजह से यह इलाका काफी अलग दिखाई देता है।    ESA ने इस तस्‍वीर को तैयार करने में कुछ फ‍िल्‍टर्स इस्‍तेमाल किए। धूल से भरे ट्रैक्‍स को नीला रंग भी फ‍िल्‍टर के जरिए ही दिया गया है। कुल मिलाकर...

मंगल ग्रह पर पेड़ काटने जैसे निशान, ESA ने बताई हकीकत

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मंगल (Mars) ग्रह से आने वाली तस्‍वीरें हर बार कुछ नया दिखाती हैं और वैज्ञानिकों को अचंभे में डालती हैं। हाल में आई एक तस्‍वीर को देखकर ऐसा लगता है, जैसे कोई विशाल पेड़ काटा गया हो। इस तस्‍वीर में मंगल ग्रह पर एक बड़ी कन्सेन्ट्रिक रिंग (संकेंद्रित वलय) दिखती है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) ने यह तस्वीर जारी की है और अपनी वेबसाइट पर इसके बारे में बताया है। हकीकत में यह मंगल की सतह पर आइस-रिच क्रेटर का शानदार नजारा है। तस्‍वीर 13 जून 2021 को ली गई थी। इस तस्‍वीर को कलर एंड स्‍टीरियो सर्फेस इमेजिंग सिस्टम (CaSSIS) कैमरे द्वारा ExoMars Trace Gas Orbiter (TGO) पर लिया गया था। TGO, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और रूसी अंतरिक्ष एजेंसी Roscosmos का जॉइंट वेंचर है। TGO मंगल की परिक्रमा करता है और इसके वातावरण के बारे में डेटा इकट्ठा करता है। हालिया इमेज में एसिडालिया प्लैनिटिया के उत्तरी मैदानों से जुड़ी है।   ESA की ओर से जारी बयान में इस इमेज के बारे में अहम जानकारी दी गई है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह इमेज एक गड्ढे के अंदरूनी हिस्से में जमा पानी-बर्फ हो सकती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, म...

चलते हुए जहाज जैसी गैलेक्सी! हबल टेलीस्कोप ने खींची शानदार तस्‍वीर

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हबल स्पेस टेलीस्कोप (Hubble Space Telescope) ने हमारे ब्रह्मांड की अनेकों बेहतरीन इमेजेस खींची हैं। हाल ही में इस टेलीस्‍कोप ने एक और आश्चर्यजनक और खूबसूरत इमेज शेयर की है। इस बार टेलीस्‍कोप ने NGC 3318 गैलेक्‍सी (आकाशंगगा) को कैप्‍चर किया है। इस तस्‍वीर को यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) ने अपने ऑफ‍िशियल इंस्टाग्राम हैंडल पर शेयर किया। NGC 3318 के बाहरी किनारे ऐसे लगते हैं, जैसे आकाश में कोई जहाज चल रहा हो। अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा है कि NGC 3318 एक बेहतरीन ‘खगोलीय घटना' की जगह रहा है। इस विशाल सुपरनोवा की खोज एक शौकिया खगोलशास्त्री ने साल 2000 में की थी।  NGC 3318 और पृथ्वी के बीच की दूरी 115 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर है। फोटो शेयर किए जाने के कुछ ही घंटों के अंदर इस इंस्टाग्राम पोस्ट को 7,000 से अधिक लोगों ने लाइक किया। कुछ दिनों पहले नासा ने भी यही तस्वीर इंस्टाग्राम पर शेयर की थी। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने कुछ सप्‍ताह पहले टकराती हुई आकाशगंगाओं की की एक इमेज भी शेयर की थी। इसे हबल टेलीस्कोप ने खींचा था। ये आकाशगंगाएं पृथ्वी से 215 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर एक तारामंडल में स्थित थी...

मंगल ग्रह की उड़ान से पहले शुरू हुई ExoMars रोवर की प्रैक्टिस

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यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) और रूस के Roscosmos का जॉइंट प्रोजेक्‍ट एक्‍सोमार्स (ExoMars) मंगल ग्रह पर उतरने के करीब पहुंच गया है। मिशन को इस साल सितंबर में लॉन्‍च करने की तैयारी है। उससे पहले अपने पूर्वाभ्‍यास में इसने ‘कजाचोक लैंडिंग प्लेटफॉर्म' को चलाने की प्रैक्टिस की। इसमें रोसलिंड फ्रैंकलिन रोवर भी शामिल था। एक वीडियो के जरिए ESA ने बताया कि पूरे टास्‍क को बेहद सावधानीपूर्वक कोरियोग्राफ किया गया। इंजीनियर इस पूर्वाभ्यास को पृथ्वी पर कर रहे हैं। यह टेस्‍ट इटली के ट्यूरिन में स्थित एक मार्स टेरेन सिम्युलेटर में किए गए। ESA ने कहा कि इन अभ्यासों के दौरान लगभग 15 मिनट तक ड्राइविंग की जाती है। यह पूरी प्रक्रिया कुछ दिनों तक चलेगी। लैंडिंग के बाद रोवर एक सप्ताह हफ्ते तक अपने पहियों को खोलने और बाकी चीजें चेक करने में व्‍यस्‍त रहेगा। मंगल ग्रह कई मायनों में पृथ्वी के समान है। वहां एक दिन में 24 घंटे 37 मिनट और 22.663 सेकेंड होते हैं, जो पृथ्‍वी से थोड़ा ही अधिक है।  विभिन्न हालात को टेस्‍ट करने और मंगल ग्रह के चुनौतीपूर्ण वातावरण में रोवर को सेफ रखने के लिए इंजीनियर रोसलिंड फ...

दुनिया के सबसे बड़े टेलीस्‍कोप का कल अंतरिक्ष में सबसे बड़ा दिन, फ‍िर शुरू होगा मिशन

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नासा का जेम्‍स वेब टेलीस्‍कोप (James Webb Telescope) अंतरिक्ष में कुछ अहम चरणों से गुजर रहा है। नासा के इंजीनियर इस टेलीस्‍कोप पर प्रमुख उपकरणों और टूल्‍स को तैनात करने के लिए मेहनत कर रहे हैं। इन उपकरणों में टेलीस्‍कोप के सनशील्ड और सेकेंडरी मिरर शामिल हैं। ताजा जानकारी यह है कि कल यानी शनिवार को इस टेलीस्‍कोप के प्राइमरी कैमरा को डिप्‍लॉय किया जाएगा। इस तैनाती के साथ अंतरिक्ष में भेजे गए अब तक के सबसे ताकतवर टेलीस्कोप से जुड़ा अहम टास्‍क पूरा हो जाएगा। अंतरिक्ष में इस प्रक्रिया को पूरा करने के बाद यह टेलीस्‍कोप अपना अभियान शुरू कर देगा। 10 अरब डॉलर (लगभग 75,330 करोड़ रुपये) का जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप अब तक का बनाया गया सबसे बड़ा टेलीस्‍कोप है। इसका मकसद खगोलविदों को सफल खोजों में मदद करना है।  जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप का यह प्रोजेक्‍ट NASA, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी ने मिलकर शुरू किया है। इस टेलीस्‍कोप को 25 दिसंबर को एरियन-5 रॉकेट से लॉन्च किया गया था। अंतरिक्ष में छोड़े जाने के बाद इस टेलीस्‍कोप ने धीरे-धीरे खुद को खोलना शुरू किया। अब यह अपने अंतिम च...