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चीनी वैज्ञानिकों से एलियंस ने किया कॉन्‍टैक्‍ट! क्‍या वाकई हम दूसरी दुनिया से मिलने के करीब?

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21वीं सदी, विज्ञान का विकास, हर रोज बदलती तकनीक से रू-ब-रू होती यह दुनिया और यहां के लोग आज भी एलियंस का पता लगाने में जुटे हैं। दुनियाभर के वैज्ञानिक पृथ्‍वी या इसके बाहर एलियंस सभ्‍यता होने का अनुमान लगाते हैं और दिन-रात उनकी खोज में जुटे हैं। इस बीच, दुनियाभर में यह खबर जोरों पर है कि चीन ने एक विदेशी सभ्‍यता के संकेत प्राप्‍त किए हो सकते हैं। इस खबर के केंद्र में है चीन का ‘स्‍काई आई'। यह 500 मीटर एपर्चर का गोलाकार रेडियो टेलीस्कोप ((FAST) है, जो दक्षिण-पश्चिम चीन के गुइझोऊ प्रांत में स्थित है। चीन की सरकार के समर्थन वाले ‘साइंस एंड टेक्नोलॉजी डेली' की एक रिपोर्ट में कई बातें कही गई हैं। रिपोर्ट में एक्स्ट्रटरेस्ट्रीअल सिव‍िलाइजेशन सर्च टीम के चीफ साइंटिस्‍ट झांग टोनजी का हवाला दिया गया है। इस टीम को बीजिंग नॉर्मल यूनिवर्सिटी, चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज की नेशनल एस्ट्रोनॉमिकल ऑब्जर्वेटरी और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया द्वारा मिलकर बनाया गया है।  झांग टोनजी ने कहा है कि उनकी टीम ने साल 2020 में पहेलीनुमा संकेतों वाले सिग्‍नलों के 2 सेट देखे थे। इन सिग्‍नलों को साल 2019 में...

चंद्रमा पर कहां से आया पानी? चीनी वैज्ञानिकों ने खोज निकाला सुराग!

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चंद्रमा पर पानी की मौजूदगी को लेकर दुनियाभर में रिसर्च चल रही है। बीते दिनों हमने आपको जानकारी दी थी कि चीनी साइंटिस्‍ट चंद्रमा से लाए गए सैंपल्‍स का परीक्षण कर रहे हैं। इन सैंपलों का विश्‍लेषण करने के बाद वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि चंद्रमा के एक हिस्‍से में मिट्टी में पानी की मात्रा पहले के मुकाबले कम लगती है। इंटरनेशनल जरनल- नेचर कम्‍युनिकेशंस में पब्लिश एक पेपर में उनकी ओर से कहा गया है कि चांद से लाए गए सैंपल्‍स में मिले पानी का अहम हिस्‍सा चंद्रमा के इंटीरियर से आया होगा।   साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्‍ट की खबर के अनुसार, वैज्ञानिकों की टीम ने Chang'e 5 मिशन के जरिए चंद्रमा से लाए गए सैंपल्‍स को टेस्‍ट किया। ये सैंपल साल 2020 में पृथ्‍वी पर लाए गए थे। इस चीनी लैंडर ने चंद्रमा की सतह को स्‍कैन किया और सैंपल्‍स को इकट्ठा किया था।   वैज्ञानिकों ने पहले जो विश्‍लेषण किया था, उसकी तुलना में यह रिजल्‍ट कम था। बीजिंग में नेशनल एस्ट्रोनॉमिकल ऑब्जर्वेट्री में कार्यरत लियू जियानजुन ने कहा कि Chang'e 5 के इक्विपमेंट ने वहां हाइड्रॉक्सिल की उपस्थिति को मापा, जो पानी का एक कर...

एलियंस की खोज में चीन! पृथ्‍वी से बाहर जीवन की तलाश के लिए बनाया मिशन

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साइंस बरसों से इस कोशिश में है कि पृथ्‍वी के नजदीक किसी ऐसे ग्रह का पता लगा सके, जहां जीवन मुमकिन हो। दुनियाभर के वैज्ञानिक कई साल से इन ग्रहों की खोज में जुटे हैं, लेकिन उन्‍हें कोई बड़ी कामयाबी अबतक नहीं मिल पाई है। बहरहाल अब चीन ने इस मिशन को अपने हाथ में लिया है। उसने एक ऐसे मिशन का प्रस्‍ताव रखा है, जो ऐसे ग्रहों की खोज में एक अलग रास्‍ता अपना सकता है। चीनी वैज्ञानिकों को उम्‍मीद है कि यह मिशन पृथ्‍वी से बाहर इन ग्रहों को लेकर पुख्‍ता नजर‍िया पेश कर सकता है। इस मिशन का नाम है क्लोजबाय हैबिटेबल एक्सोप्लैनेट सर्वे (CHES)। इस मिशन के तहत चीन हमारी पृथ्‍वी के आसपास स्थित तारों पर मौजूद ग्रहों की परिक्रमा के असर को जानेगा। इन ग्रहों को एक्‍सोप्‍लैनेट कहा जाता है। ऐसे ग्रह जो सूर्य के अलावा अन्य तारों की परिक्रमा करते हैं, वो एक्सोप्लैनेट कहलाते हैं। मिशन के जरिए यह समझने की कोशिश की जाएगी कि क्‍या फलां ग्रह में जीवन को बनाए रखने की क्षमता है। अगर ऐसा होता है, तो यह विज्ञान के लिए एक बड़ी उपलब्धि हो सकती है। बताया जाता है कि इस मिशन को एक स्‍पेसक्राफ्ट के जरिए पूरा किया जाएगा।  रिपो...

चीन में 630 फीट गहरे सिंकहोल के नीचे मिला विशाल जंगल

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ये दुनिया अनग‍िनत रहस्‍यों से भरी है, जहां हर रोज कुछ ना कुछ खोज के रूप में हमें हैरान करता है। अब चीन में वैज्ञानिकों की टीम ने विशाल सिंकहोल की खोज की है, जिसके नीचे जंगल है। रिपोर्टों के अनुसार, यह सिंकहोल 630 फीट (192 मीटर) गहरा है। वैज्ञानिकों की एक टीम इस सिंकहोल के अंदर दाखिल हुई और वहां का नजारा देखकर हैरान रह गई। उन्‍हें खाई में तीन एंट्री पॉइंट मिले। इसके साथ ही करीब 40 मीटर ऊंचे पेड़ दिखे। सूर्य की रोशनी हासिल करने के लिए ये पेड़ अपनी लंबी शाखाओं की मदद लेते हैं। चीन के गुआंग्शी ज़ुआंग ऑटोनॉमस रीजन की लेये काउंटी में इन पेड़ों और जंगल की खोज की गई है। माना जा रहा है कि इनमें ऐसी प्रजातियां भी हो सकती हैं, जिन्हें अभी तक खोजा नहीं गया है। सिंकहोल का निर्माण एसिडिक वर्षा जल की वजह से होता है। इसकी वजह से मिट्टी अपनी जगह से हटने लगती है और वहां छेद होने लग जाता है। ये छेद काफी बड़े हो जाते हैं, तो आसपास की मिट्टी और पत्‍थरों को ढहा देते हैं, जिससे एक सिंकहोल बन जाता है। livescience की रिपोर्ट के अनुसार, सिंकहोल के अंदर तीन प्रवेश द्वारा मिले। ये 1,004 फीट लंबे और 492 फीट चौ...

अमेरिका को चीन की चुनौती, लॉन्‍च करेगा 2.5 अरब पिक्‍सल कैमरे वाला स्‍पेस टेलीस्‍कोप, यह है तैयारी

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अमेरिका और यूरोपीय स्‍पेस एजेंस‍ियों को अंतरिक्ष में चीन से चुनौती मिल रही है। हाल में चीनी वैज्ञानिकों ने बड़ा दावा करते हुए कहा था कि चंद्रमा की मिट्टी में ऑक्सीजन और ईंधन को पैदा करने की क्षमता है। चीन के Chang'e 5 स्‍पेसक्राफ्ट द्वारा लाई गई चंद्रमा की मिट्टी का विश्लेषण करने के बाद वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुंचे। चीन मंगल मिशन पर भी काम कर रहा है। यही नहीं, अब उसकी तैयारी साल 2023 तक अपना पहला बड़ा स्‍पेस टेलीस्‍कोप लॉन्‍च करने की है। इस टेलीस्‍कोप के जरिए चीन, अंतरिक्ष का सर्वेक्षण करना चाहता है। आकाशगंगाओं को एक्‍स्‍प्‍लोर करना चाहता है और तो और डार्क मैटर व डार्क एनर्जी के रहस्‍यों को उजागर करना चाहता है। चीन का यह टेलीस्‍कोप सीधे तौर पर अमेरिका और यूरोप के हबल टेलीस्‍कोप और हाल में लॉन्‍च किए गए जेम्‍स वेब टेलीस्‍कोप को टक्‍कर देगा।  space.com के मुताबिक, चीन की नेशनल एस्‍ट्रोनॉमिकल ऑब्‍जर्वेट्री के डेप्‍युटी डायरेक्‍टर लियू जिफेंग ने न्‍यूज एजेंसी सिन्हुआ को बताया है कि चीनी स्‍पेस स्‍टेशन टेलीस्कोप (CSST) एक ऑप्टिकल और अल्‍ट्रावॉयलेट स्‍पेस ऑब्‍जर्वेट्री है। इसमें ...

चीन ने माउंट एवरेस्ट के ऊपर उड़ाया एयरशिप और बना दिया वर्ल्ड रिकॉर्ड, जानें क्या था मकसद?

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चीन ने वायुमंडलीय संरचना से संबंधित डेटा और सतह से वाटर वैपर ट्रांस्पोर्टिंग प्रोसेस के बारे में अधिक जानकारी जुटाने और उसका अध्ययन करने के लिए रिकॉर्ड ऊंचाई के साथ माउंट एवरेस्ट पर एक एयरशिप उड़ाया है। मीडिया रिपोर्ट्स से जानकारी मिली है कि यह एयरशिप माउंट एवरेस्ट (Mount Everest) से 9,032 मीटर ऊपर उड़ान भरी। बता दें कि माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई 8,849 मीटर है। चीन के इंटरनेशनल TV चैनल CGTN के अनुसार, चीन के एयरशिप ने माउंट एवरेस्ट के ऊपर 30 मीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से उड़ान भरी। यह उड़ान दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर 4,300 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक बेस कैंप से उड़ान भरी गई। इस एयरशिप का नाम Jimu No. 1 बताया जा रहा है, जो 2.625 टन वजनी है और इसका वॉल्यूम 9,060 क्यूबिक मीटर है। इसके नीचे जुड़े वाहन का वजन 90 टन है। मीडिया चैनल की रिपोर्ट के अनुसार, एयरशिप का इस्तेमाल मुख्य रूप से वातावरण संरचना डेटा रिकॉर्ड करने के लिए किया जाता है, जिसमें पर्यावरण में मौजूद ब्लैक कार्बन, धूल, कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन की जानकारी मिल सके। वैज्ञानिक सतह से 9,000 मीटर की ऊंचाई तक वाटर वैपर के ट्रांस्पोर...

चीन ने तेज किया अपने अंतरिक्ष स्‍टेशन का निर्माण, अगले मिशन के लिए पहुंचाए स्पेयर पार्ट्स

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चीन अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। उसका मून मिशन तो जारी है ही, मंगल मिशन की भी तैयारियां चल रही हैं। इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन की तर्ज पर वह अपना अंतरिक्ष स्‍टेशन तैयार कर रहा है, जिसके लिए एक कार्गो जहाज को मंगलवार को निर्माणाधीन स्‍पेस स्टेशन के साथ डॉक किया गया। तियानझोउ-4 अंतरिक्ष यान को हैनान के दक्षिणी द्वीप प्रांत में वेनचांग लॉन्च बेस से लॉन्ग मार्च-7 Y5 रॉकेट के ऊपर अंतरिक्ष में उतारा गया। देश की स्‍टेट मीडिया ने बताया कि इसे लगभग सात घंटे बाद स्टेशन के साथ डॉक किया गया। यह कार्गो जहाज अगले चालक दल के लिए रिसर्च इक्विपमेंट और स्टेशन को मेंटेन करने के लिए स्पेयर पार्ट्स को सप्‍लाई कर रहा है। एक न्‍यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, चालक दल 6 महीने अंतरिक्ष में बिताएगा। पिछले महीने ही एक अन्‍य चालक दल 6 महीने बिताकर अंतरिक्ष से लौटा था। अब अगले मिशन के तहत अंतरिक्ष में जाने वाला 3 सदस्‍यीय चालक दल वहां शेनझोउ 14 कैप्सूल में दो मॉड्यूल जोड़ने के लिए जाएगा। तियांगोंग जिसे हेवनली पैलेस भी कहते हैं, उसका मुख्‍य मॉड्यूल अप्रैल 2021 में लॉन्च किया गया था। इसका ...

वैज्ञानिकों का दावा- चंद्रमा की मिट्टी से पैदा हो सकती है ऑक्‍सीजन

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दुनिया भर के वैज्ञानिक चंद्रमा पर इंसान की स्‍थायी मौजूदगी बनाए रखने के तरीके खोज रहे हैं। इसके लिए चंद्रमा को एक्‍सप्‍लोर किया जा रहा है। इस बीच, चीन के रिसर्चर्स ने दावा किया है कि चंद्रमा की मिट्टी में ऑक्सीजन और ईंधन पैदा करने की क्षमता है। उनका कहना है कि चंद्रमा पर मिट्टी में एक्टिव कंपाउंड्स होते हैं। ये कार्बन डाइऑक्साइड को ऑक्सीजन और ईंधन में बदल सकते हैं। इन निष्कर्षों से पता चलता है कि चंद्रमा का सतह पर मौजूद मिट्टी का इस्‍तेमाल हाइड्रोजन और मीथेन को हासिल करने के लिए किया जा सकता है। इनकी मदद से इंसान की अहम जरूरतें पूरी हो सकती हैं और वह चंद्रमा पर रह सकता है। रिसर्चर्स का कहना है कि वो चंद्रमा में सांस लेने लायक वातावरण भी पैदा कर सकते हैं।  आने वाले वर्षों में चंद्रमा पर कई देशों के मिशनों के लैंड होने की उम्‍मीद है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) भी अपने आर्टेमिस मिशन के तहत दोबारा से अंतरिक्ष यात्रियों को चांद पर भेजने की कोशिश कर रही है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी का मकसद चंद्रमा को मंगल समेत अंतरिक्ष में इंसान को आगे भेजने के लिए एक गेटवे के रूप में उपयोग करना...

6 महीने अंतरिक्ष में बिताएंगे 3 चीनी एस्‍ट्रोनॉट, जून में होगा मिशन लॉन्‍च

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अमेरिका और बाकी पश्चिमी देशों को मजबूत कॉम्‍पिटिशन देते हुए चीन अपने अंतरिक्ष कार्यक्रमों को लगातार आगे बढ़ा रहा है। जून महीने में तीन और अंतरिक्ष यात्रियों को नए स्‍पेस स्‍टेशन में भेजे जाने की तैयारी है। हाल ही में इस स्‍पेस स्‍टेशन में 6 महीने का समय बिताकर यात्रियों का एक ग्रुप देश वापस लौटा है। साल 2003 में चीन ने अपना महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रम शुरू किया था, जिसके तहत पहले अंतरिक्ष यात्री को लॉन्‍च किया गया था। इसके बाद अहम उपलब्‍ध‍ि साल 2013 में चीन के नाम हुई, जब उसने चंद्रमा पर अपना रोवर उतारा। पिछले साल मंगल ग्रह पर भी चीन अपना रोवर उतार चुका है। बताया जा रहा है कि चंद्रमा पर एक क्रू मिशन को भेजने के बारे में भी चीन चर्चा कर रहा है।   एक न्‍यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, चीन के स्‍पेस इंजीनियरिंग ऑफ‍िस के डायरेक्‍टर- हाओ चुन ने एक न्‍यूज कॉन्‍फ्रेंस में बताया कि शेनझोउ 14 कैप्सूल का चालक दल स्टेशन में दो मॉड्यूल जोड़ने के लिए तियांगोंग पर छह महीने बिताएंगे। तियांगोंग जिसे हेवनली पैलेस भी कहते हैं, उसका मुख्‍य मॉड्यूल अप्रैल 2021 में लॉन्च किया गया था। इसका काम इस...

सोलोमन द्वीप के साथ सुरक्षा समझौता करने जा रहा है चीन

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First Published: March 26, 2022 | Last Updated:March 26, 2022 लीक हुए कागजातों से सोलोमन द्वीप समूह के साथ चीन के सुरक्षा समझौते का मसौदा तैयार होने का खुलासा हुआ है।  इस कदम ने अपने अन्य पश्चिमी सहयोगियों के साथ पड़ोसी देश ऑस्ट्रेलिया में चौकन्ना कर दिया है। मुख्य बिंदु  इस सौदे के बारे में लीक हुए कागजात में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि चीन द्वारा ऑस्ट्रेलिया के उत्तर में स्थित द्वीप पर एक सैन्य अड्डा स्थापित किया जा सकता है। ऑस्ट्रेलिया इस छोटे से द्वीप का सबसे बड़ा सहायता दाता और मुख्य रक्षा साझेदार है और उसने इस बारे में चिंता जताई है। न्यूजीलैंड ने भी पर चिंता जताई है। सोलोमन द्वीप समूह ने अभी तक उन विवरणों की पुष्टि नहीं की है जो लीक हुए मसौदे समझौते में हाइलाइट किए गए थे। सोलोमन द्वीप समूह ने हालांकि एक बयान जारी कर कहा है कि वह चीन सहित अन्य देशों के साथ सुरक्षा व्यवस्था का विस्तार कर रहा है। चीनी सेना की तैनाती लीक हुए कागजात ने एक फ्रेमवर्क का खुलासा किया है जो चीन को सोलोमन द्वीप पर चीन द्वारा विकसित की जाने वाली परियोजनाओं की सुरक्...

विंटर ओलिंपिक : गलवान झड़प में घायल चीनी सैनिक को मशाल वाहक बनाने के विरोध में भारत ने लिया 'बड़ा' फैसला

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प्रतीकात्‍मक फोटो नई दिल्‍ली : गलवान झड़प में घायल हुए सैनिक को विंटर ओलिंपिक (Beijing Winter Olympics)  का मशालवाहक (Torchbearer) बनाने के चीन के फैसले के विरोध में भारत ने 'बड़ा' फैसला किया है. भारत ने कहा है कि इस फैसले के विरोधस्‍वरूप बीजिंग में उसके शीर्ष अधिकारी विंटर ओलिंपिक में शामिल नहीं होंगे. विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता ने इस बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में कहा, 'हमने इस बारे में (गलवान झड़प में घायल सैनिक को मशाल वाहक बनाने संबंधी)रिपोर्ट्स देखी हैं. यह खेदपूर्ण है कि चीनी पक्ष, खेलों का राजनीतिकरण कर रहा है. इसके विरोधस्‍वरूप, बीजिंग में हमारे चार्ज द अफेयर्स विंटर ओलिंपिक में भाग नहीं लेंगे. ' मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि बीजिंग दूतावास में भारत के प्रभारी उप राजदूत, शीतकालीन ओलंपिक 2022  के उद्घाटन या समापन समारोह में शामिल नहीं होंगे. यह भी पढ़ें गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख में गलवान घाटी ( Galwan Valley) में हुए संघर्ष में शामिल एक चीनी सैनिक ने बुधवार को बीजिंग विंटर ओलंपिक के पारंपरिक मशाल रिले में हिस्सा लिया था. बीजिंग विंटर ओलिंपिक के पारंप...

MY2022: चीनी ओलंपिक एप्प में सुरक्षा संबंधी चिंताएं सामने आईं

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First Published: January 22, 2022 | Last Updated:January 22, 2022 ‘MY2022’ नामक चीनी ओलंपिक एप्प में साइबर सुरक्षा चिंताओं के बीच, राष्ट्रीय ओलंपिक समितियां (NOCs) कुछ पश्चिमी देशों के एथलीटों को बीजिंग में शीतकालीन खेलों में व्यक्तिगत उपकरणों को घर पर छोड़ने या अस्थायी फोन का उपयोग करने की सलाह दे रही हैं। मुख्य बिंदु  NOC उनके एथलीटों और कर्मचारियों को सुरक्षा जोखिमों को दूर करने और खेलों के दौरान किसी भी निगरानी का मुकाबला करने के लिए अस्थायी उपकरण प्रदान करेगा। शीतकालीन ओलिंपिक खेल 4 फरवरी से 20 फरवरी तक बीजिंग, चीन में आयोजित किये जायेंगे। अमेरिकी ओलंपिक और पैरालंपिक समिति सलाहकार अमेरिकी ओलंपिक और पैरालंपिक समिति की सलाह में कहा गया है कि, यह मान लिया जाना चाहिए कि प्रत्येक टेक्स्ट, ऑनलाइन विज़िट, ईमेल और एप्लिकेशन एक्सेस की निगरानी की जा सकती है। एडवाइजरी में बीजिंग में किराये या डिस्पोजेबल लैपटॉप और फोन का उपयोग करने या यात्रा से पहले और बाद में व्यक्तिगत उपकरणों से सभी डेटा को हटाने का सुझाव दिया गया है। यह सदस्यों को अमेरिका छोड़ने से पहल...

चीन की जन्म दर रिकॉर्ड निम्न स्तर पर पहुंची

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First Published: January 17, 2022 | Last Updated:January 17, 2022 आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, चीन में जन्म दर 2021 में रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गई, क्योंकि विश्लेषक देश में अपेक्षा से अधिक उम्र बढ़ने (faster-than-expected ageing) की चेतावनी दे रहे हैं। मुख्य बिंदु विश्लेषकों के अनुसार, अपेक्षा से अधिक तेजी से बढ़ती उम्र आर्थिक विकास की चिंताओं को गहरा करेगी। चीन पहले से ही तेजी से उम्र बढ़ने वाले कार्यबल, दशकों में सबसे कमजोर जनसंख्या वृद्धि और धीमी अर्थव्यवस्था के साथ एक खतरनाक जनसांख्यिकीय संकट से जूझ रहा है। चीन में जन्म दर चीन में 2021 में जन्म दर घटकर प्रति 1,000 लोगों पर 7.52 जन्म हो गई। 2020 में यह 8.52 थी। यह 1978 के बाद से चीन के वार्षिक सांख्यिकीय वार्षिक डेटा में सबसे कम आंकड़ा है। बाल नीति में बदलाव 2016 में, चीन ने देश की “एक बच्चे की नीति” में ढील दी। इसने जोड़ों को दो बच्चों की अनुमति दी। दुनिया भर में सबसे सख्त परिवार नियोजन नियमों में से एक को आसान बनाने के बाद भी, यह जन्म दर को बढ़ाने में विफल रहा है। 2021 में, चीन ने दंपतियों को ती...

पहली बार चंद्रमा पर जाकर खोजा पानी, चीन के Chang'e 5 लुनर लैंडर की कामयाबी

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चंद्रमा पर गए चीन के Chang'e 5 लुनर लैंडर ने वहां पानी से जुड़े अहम सबूत की खोज की है। इस लैंडर ने चंद्रमा की सतह पर पानी से जुड़ा पहला ऑन-साइट सबूत पाया है। यह बताता है कि आखिर पानी की मौजूदगी के बाद भी चंद्रमा सूखा क्‍यों है। पीयर-रिव्यू जर्नल साइंस एडवांस में शनिवार को पब्‍लिश हुई स्‍टडी से पता चला है कि चंद्रमा की लैंडिंग साइट पर मौजूद मिट्टी में 120 भाग-प्रति-मिलियन (ppm) पानी है। यानी एक टन मिट्टी में 120 ग्राम पानी है। हल्की और वेसिकुलर चट्टान में यहां पानी की मात्रा 180ppm है। यह पृथ्‍वी की तुलना में बहुत कम है। इस वजह से चंद्रमा अधिक शुष्क है। इससे पहले रिमोट ऑब्जर्वेशन के जरिए चंद्रमा में पानी की मौजूदगी की पुष्टि हो गई थी, लेकिन अब जाकर लैंडर ने वहां की चट्टानों और मिट्टी में पानी के लक्षण पाए हैं। लुनर लैंडर पर सवार एक डिवाइस ने रेजोलिथ (regolith) और चट्टान के स्पेक्ट्रल परावर्तन को मापा और पहली बार मौके पर पानी की मौजूदगी का पता लगाया।  चाइनीज अकैडमी ऑफ साइंसेज (CAS) के रिसर्चर्स के हवाले से समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने बताया है कि पानी की मात्रा का अनुमान लगाया जा सक...