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खास है जून का महीना, 18 साल बाद आसमान में बिना दूरबीन के देख सकते हैं यह 5 ग्रह

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अंतरिक्ष में दिलचस्‍पी रखने वाले लोगों के लिए यह महीना बेहद खास है। इस महीने लोगों को 5 ग्रह दिखाई देंगे। खास बात यह है कि इन्‍हें बिना दूरबीन के सिर्फ आंखों से ही देखा जा सकेगा। ये पांच ग्रह हैं बुध, शुक्र, मंगल, बृहस्पति और शनि। यह बेहद शानदार नजारा ईस्‍टर्न होरिजन की ओर सूर्य के उगने से ठीक पहले दिखाई देगा। इस खास नजारे को देखने के लिए उत्तरी गोलार्ध में रहने वालों को पूर्व और दक्षिण की ओर देखना होगा, जबकि दक्षिणी गोलार्ध के लोगों को पूर्व और उत्तर की ओर देखना चाहिए। दो या तीन ग्रहों को एक साथ कंजक्‍शन में देखना एक सामान्य घटना है। लेकिन 5 ग्रहों का कंजक्‍शन अपने आप में बेहद खास नजारा होगा। आखिरी बार पांच ग्रहों को बिना दूरबीन की मदद के दिसंबर 2004 में देखा गया है। इस बार इस क्रम में बुध और शनि को एक-दूसरे के बहुत करीब देखा जा सकेगा।  स्काई एंड टेलिस्कोप के अनुसार, यह नजारा इस पूरे महीने दिखाई देना चाहिए, लेकिन कुछ तारीखें बेहद खास हैं।  3-4 जून : इन दो तारीखों की सुबह में बुध और शनि ग्रह के बीच का अंतर सबसे कम होगा। सिर्फ 91 डिग्री के फासले पर यह ग्रह दिखाई देंगे। अगर आप इस नज...

भारत में लगा दुनिया का पहला लिक्विड मिरर टेलीस्‍कोप, जानें इसके बारे में

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देश और दुनिया का पहला लिक्विड मिरर टेलीस्‍कोप (liquid mirror telescope) उत्तराखंड में लगाया गया है। नैनीताल में स्थित देवस्‍थल ऑर्ब्‍जेवट्री में एक पहाड़ी के ऊपर इस टेलीस्‍कोप को सेटअप किया गया है। बताया जाता है कि इस टेलीस्‍कोप के जरिए अंतरिक्ष में सुपरनोवा, गुरुत्वीय लेंस और एस्‍टरॉयड आदि की जानकारी लेने में मदद मिलेगी। इंडियन लिक्विड मिरर टेलीस्कोप (ILMT) आसमान का सर्वे करने में मदद करेगा। इससे कई आकाशगंगाओं और अन्य खगोलीय सोर्सेज को ऑब्‍जर्व करना भी आसान हो जाएगा।     क्‍या है लिक्विड मिरर टेलीस्‍कोप (ILMT) इसे भारत ने बेल्जियम और कनाडा के खगोलविदों की मदद से बनाया है। यह तरल पारे की एक पतली फिल्म से बना 4 मीटर व्यास का रोटेटिंग मिरर जैसा है, जो प्रकाश को इकट्ठा करने और उस पर फोकस करने का काम करता है। इसे समुद्र तल से 2450 मीटर की ऊंचाई पर देवस्‍थल ऑब्‍जर्वेट्री में लगाया गया है। यह ऑब्‍जर्वेट्री आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट ऑफ ऑब्‍जर्वेशनल साइंस (एरीज) में स्थित है, जो भारत सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ साइंस का ऑटोनॉमस इंस्टिट्यूट है।  Unique Liquid-Mirror Telescope- built by astro...

जानिए ‘काल्डवेल 5’ आकाशगंगा के बारे में, चमकदार होकर भी क्‍यों दिखती है धुंधली?

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हबल स्पेस टेलीस्कोप (Hubble Space Telescope) को साल 1990 में अंतरिक्ष में भेजा गया था। अपनी तैनाती के बाद से ही इसने खगोल व‍िज्ञान को समृद्ध बनाया है। ब्रह्मांड में तैनात होकर और बादल, प्रदूषण की मुश्किलों से दूर इसने सितारों की कुछ हैरान करने वाली तस्‍वीरें कैद की हैं। हमारे सौर मंडल के ग्रहों को भी अलग नजर से दिखाया है। इस टेलीस्‍कोप की हालिया इमेज से काल्डवेल 5 (Caldwell 5) नाम की एक और आकर्षक स्‍पाइरल गैलेक्‍सी (आकाशगंगा) का पता चलता है। यह गैलेक्‍सी हमारी पृथ्वी से लगभग 11 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर है। इमेज में गैलेक्‍सी की स्‍टार आर्म्‍स अच्‍छे से नजर आती हैं, जो इसके पीले रंग में दिखाई देने वाले केंद्र में फैली हुई हैं।   इस गैलेक्‍सी के सेंटर में एक स्‍टार नर्सरी मौजूद है। यह लाखों साल से हजारों तारों को जन्‍म दे चुकी है।  गैलेक्‍सी का केंद्र एक प्रकार का क्षेत्र है, जिसे H II नाभिक के रूप में जाना जाता है। यह परमाणु हाइड्रोजन का आयनित क्षेत्र है। इस क्षेत्र में हजारों तारो का जन्‍म अबतक हो चुका है। एक ब्‍लॉग पोस्‍ट में नासा ने बताया है कि हर गर्म और नीला तारा, अल्‍ट्रावॉयलेट ...

मंगल ग्रह पर आया अबतक का सबसे शक्तिशाली भूकंप, Nasa के लैंडर ने किया रिकॉर्ड

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पृथ्‍वी पर हम अक्‍सर भूकंप महसूस करते हैं, लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि मंगल ग्रह पर भी भूकंप आते हैं। नासा के इनसाइट लैंडर ने मंगल ग्रह पर एक जोरदार भूकंप का पता लगाया है, जिसने इस ग्रह को हिलाकर रख दिया। 4 मई को मंगल ग्रह पर 5 तीव्रता का भूकंप आया। पृथ्‍वी के इस तरह के भूकंप मिड कैटिगरी में आते हैं, लेकिन मंगल ग्रह के लिए यह बेहद तीव्र था। पृथ्‍वी के अलावा किसी भी ग्रह पर यह अबतक पता लगाया गया सबसे तेज भूकंप बताया जा रहा है।  space.com की रिपोर्ट के अनुसार, इस भूकंप ने मंगल ग्रह पर आए पिछले भूकंप के रिकॉर्ड को तोड़ दिया। अगस्‍त 2021 में यहां 4.2 तीव्रता का भूकंप आया था। नासा इनसाइट की टीम और उसके पार्टनर्स को मंगल ग्रह से शुरुआती डेटा मिला है, जिसके आधार पर यह कहा जा रहा है कि पृथ्‍वी को छोड़कर यह किसी ग्रह पर अबतक की सबसे बड़ी भूकंपीय गतिविधि है! नासा के एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर फॉर साइंस थॉमस जुर्बुचेन ने ट्विटर पर कहा कि शुरुआती अनुमान में यह तीव्रता 5 थी। हालांकि उन्‍होंने धैर्य रखने की बात कही, क्‍योंकि टीमें अभी आंकड़ों का विश्‍लेषण कर रही हैं।  वैज्ञानिकों का कहना है कि 5 ती...

यूरोपीय स्पेस एजेंसी ने मंगल ग्रह की सतह पर देखी दिलचस्प आकृतियां, तस्वीर में देखें...

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यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) के मार्स एक्सप्रेस ऑर्बिटर से लेटेस्ट रिलीज में मंगल ग्रह के भूविज्ञान को लेकर बेहद दिलचस्प जानकारियों का खुलासा किया है। ऐसा प्रतीत होता है कि लाल ग्रह की सतह पर भारी खरोंचें हैं। हालांकि, ये निशान टैंटलस फॉसे का हिस्सा हैं, जो मंगल पर एक विशाल फॉल्ट सिस्टम है। तस्वीर की डिटेल्स के अलावा, यहां जो ध्यान देने वाली एक और जरूरी विशेषता है, वो है इसका साइज। ये कुंड 350 मीटर (1,148 फीट) तक गहरे, 10 किलोमीटर चौड़े है और यह चौड़ाई 1,000 किलोमीटर तक लंबी हो सकती हैं। तस्वीर 'ट्रू कलर' है, जिसका मतलब है कि यदि मनुष्य इस जगह को अपनी आंखों से देखेंगे, तो उन्हें यह क्षेत्र समान रंग का दिखाई देगा। मंगल ग्रह पर कई रहस्य हैं और लाल ग्रह की सतह पर काम करते रहने वाले रोबोट हर दिन नई जानकारी का खुलासा कर रहे हैं। एक ESA प्रेस रिलीज में कहा गया है, "पहली नज़र में ये फीचर्स ऐसे दिखते हैं जैसे किसी ने लाल ग्रह की सतह पर अपने नाखूनों को उकेरा है, जैसे उन्होंने ऐसा किया है।" प्रेस रिलीज में कहा गया है कि टैंटलस फॉसे मंगल पर एक प्रमुख विशेषता है। यह निशान मंगल ...

NASA से एक कदम आगे निकलेगा ISRO, शुक्र ग्रह पर भेजेगा शुक्रयान

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ISRO जल्द एक नया मील का पत्थर स्थापित करने की तैयारी कर चुका है। चांद और मंगल ग्रह पर अपने मिशन की सफलता के बाद, अब अब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन शुक्र ग्रह (Venus) पर अपना शुक्रयान भेजने की तैयारी कर रहा है। यह यान शुक्र ग्रह के बारे में सभी जरूरी जानकारियां इकट्ठा करेगा, जैसे उसकी सतह के नीचे क्या है? या सबसे गर्म ग्रह पर जीवन की संभावना कितनी है?  India Today की रिपोर्ट में बताया गया है कि ISRO चेयरमैन एस. सोमनाथ ने शुक्र ग्रह पर हुई एक मीटिंग के बाद बताया कि इसरो के वैज्ञानिकों ने शुक्र ग्रह के मिशन की प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कर ली है। इस मिशन की लागत का अनुमान भी लगा लिया गया है। इसके अलावा, यह भी पुष्टि कर दी गई है कि भारत सरकार भी इस प्रोजेक्ट को लेकर सहमत हैं। सोमनाथ का कहना है कि सही उपकरणों के साथ सैटेलाइट को बनाने का काम अभी बाकी है, जिसके बाद मिशन को लॉन्च कर दिया जाएगा। उन्होंने आगे यह भी कहा कि भारत के लिए शुक्र ग्रह पर मिशन भेजना आसान काम है। इसरो का कहना है कि यदि इस मिशन को 2024 में लॉन्च नहीं कर पाए, तो अगला मौका 2031 में मिलेगा। ऐसा इसलिए,  क्योंकि दोनों ग्र...

दिल्ली सरकार ‘दिल्ली साइंस इनोवेशन हब’ (Delhi Science Innovation Hub) लांच करेगी

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First Published: March 2, 2022 | Last Updated:March 2, 2022 दिल्ली सरकार कौटिल्य एन्क्लेव में इसके द्वारा संचालित एक स्कूल में “साइंस इनोवेशन हब” विकसित करने जा रही है। मुख्य बिंदु दिल्ली साइंस इनोवेशन हब में सभी आधुनिक और नवीनतम सुविधाएं शामिल हैं, जैसे एक प्लेनेटेरियम जो छात्रों को वैज्ञानिक संस्कृति और स्वभाव का उन्नत ज्ञान प्रदान करने के लिए एक संग्रहालय है। इनोवेशन हब की मदद से छात्र अपनी बढ़ती शैक्षिक जरूरतों को पूरा करने में सक्षम होंगे। यह हब इसलिए विकसित किया जाएगा क्योंकि, हमेशा पर्याप्त शैक्षिक बुनियादी ढांचा प्रदान करने की सार्वजनिक मांग होती है, ताकि छात्रों को उनके घरों के पास गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सके। परियोजना लागत  ढाई साल में 5 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से साइंस इनोवेशन हब तैयार होगा। इसमें एक सभागार, एक प्लेनेटेरियम, एक पुस्तकालय, विज्ञान और प्रौद्योगिकी वस्तुओं के साथ एक संग्रहालय, नवीनतम नवाचारों और प्रवृत्तियों की कला और मॉडल अनुभवात्मक दीर्घाएं, संग्रहणीय, उपकरण, सिमुलेशन सिस्टम उपकरण और सामग्री शामिल होगी। इनोवेशन...

 28 फरवरी : राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (National Science Day)

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First Published: February 28, 2022 | Last Updated:February 28, 2022 प्रतिवर्ष 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है, इसका उद्देश्य लोगों में विज्ञान के महत्व और इसके अनुप्रयोग का संदेश फैलाना है। महत्व 28 फरवरी, 1928 को भौतिक विज्ञानी सी.वी. रमन द्वारा रमन प्रभाव की खोज को चिह्नित करने के लिए इस दिवस को मनाया जाता है। इस खोज के लिए सी.वी. रमन को 1930 में भौतिकी में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। पृष्ठभूमि राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की स्थापना केंद्र सरकार द्वारा 1986 में राष्ट्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी संचार परिषद की मांग के आधार पर की गई थी। पहली बार राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 28 फरवरी 1987 को मनाया गया था। इस दिवस को लोगों के दैनिक जीवन में उपयोग किए जाने वाले विज्ञान के महत्व के बारे में संदेश फैलाने और विज्ञान व प्रौद्योगिकी को लोकप्रिय बनाने के लिए मनाया जाता है। रमन प्रभाव इस घटना में, पारदर्शी माध्यम से गुजरने के बाद प्रकाश की किरण का कुछ हिस्सा बिखर जाता है। प्रकाश के प्रकीर्णन की इस घटना को रमन स्कैटरिंग कहा जाता है और प्रकीर्ण...

11 फरवरी : विज्ञान में महिलाओं व बालिकाओं के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस (International Day of Women and Girls in Science)

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First Published: February 11, 2022 | Last Updated:February 10, 2022 प्रतिवर्ष को 11 फरवरी को विज्ञान में महिलाओं व बालिकाओं के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस (International Day of Women and Girls in Science) मनाया जाता है। इस दिवस को संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिवर्ष 2015 से मनाया जा रहा है।  इसका उद्देश्य विज्ञान व प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका पर प्रकाश डालना है। मुख्य बिंदु इस दिवस को संयुक्त राष्ट्र द्वारा विश्व भर में विज्ञान व प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महिलाओं को बढ़ावा देने वाले संगठनों के साथ मिलकर मनाया जाता है। महिलाओं व बालिकाओं को विज्ञान व प्रौद्योगिकी क्षेत्र में बढ़ावा देना अति आवश्यक है। वर्तमान में विश्व में महिलाओं अनुसंधानकर्ता केवल 30% है। STEM (Science, Technology, Engineering and Mathematics) क्षेत्र में महिलाओं की हिस्सेदारी पुरुषों की अपेक्षा कम है। Categories: अंतर्राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Tags:Hindi Current Affairs , Hindi News , International Day of Women and Girls in Science , विज्ञान में महिलाओं व बालिकाओं के लिए अ...

गर्मियों तक पूरी तरह शुरू हो जाएगा जेम्‍स वेब टेलीस्‍कोप, अंतरिक्ष में पहले फोटोन का पता लगाया

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नासा (NASA) ने जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) को श्रेणीबद्ध (align) करने के लिए तीन महीने की प्रक्रिया शुरू की है। इसका मकसद 10 बिलियन डॉलर (लगभग 74,710 करोड़ रुपये) की ऑब्‍जर्वेट्री को शुरू करना है। हाल में इसने प्रकाश के पहले कणों को अपना रास्ता बनाते हुए देखा है। इस साल गर्मियों तक इस ऑब्‍जर्वेट्री के तैयार होने की उम्मीद है। नासा ने बताया है कि जेम्स वेब के नियर इन्फ्रारेड कैमरा (NIRCam) ने स्टारलाइट के पहले फोटॉन का पता लगाया। नासा ने कहा कि इंजीनियरों और वैज्ञानिकों की एक टीम टेलीस्कोप के 18 दर्पणों (mirrors) को श्रेणीबद्ध करने के लिए NIRCam के साथ लिए गए डेटा का उपयोग करके एक नया लेंस बनाएगी। जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप का यह प्रोजेक्‍ट NASA, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी ने मिलकर शुरू किया है। इसका मकसद खगोलविदों को सफल खोजों में मदद करना है।  पिछले साल क्रिसमस के मौके पर जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप को एरियन-5 रॉकेट की मदद से लॉन्च किया गया था। तब से वैज्ञानिकों ने इसे कई फेज से गुजारा है। लॉन्‍च के ठीक एक महीने बाद यह टेलीस्‍कोप पृथ्वी से लगभग 1.5 मिलियन...