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मंगल पर आई सर्दी, -80 डिग्री की गला देने वाली ठंड में नासा के Ingenuity हेलिकॉप्टर का सेंसर खराब

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मंगल ग्रह की सतह को टटोल रहे नासा के Ingenuity हेलिकॉप्टर के सामने एक समस्या खड़ी हो गई है। इसका एक सेंसर खराब हो गया है जिससे ऑपरेशन में खलल पैदा हो गया है। इस हेलिकॉप्टर के चीफ पायलेट ने बताया कि मंगल के चुनौतीपूर्ण वातावरण में हेलिकॉप्टर का सेंसर खराब हो गया है और उसके ठीक हुए बिना मिशन में आगे बढ़ना मुश्किल होगा।  NASA के मंगल मिशन पर गए Ingenuity हेलिकॉप्टर ने पिछले दिनों मंगल पर अपनी उड़ान की एक वीडियो भेजी थी जिसे नासा ने शेयर भी किया था। हेलिकॉप्टर ने मंगल की सतह का अद्भभुत नजारा दिखाया था। अब हेलिकॉप्टर के चीफ पायलेट Havard Grip ने एक ब्लॉग पोस्ट के जरिए जानकारी दी है कि इसका सेंसर खराब हो गया है। इसे इनक्लिनोमीटर (inclinometer) कहा जाता है। इसे ठीक करने के लिए एक कम्प्यूटर पैच की जरूरत होगी।  Ingenuity हेलिकॉप्टर मंगल पर फरवरी 2021 से गया हुआ है जिसके साथ नासा का पर्सेवरेंस रोवर भी है। तब से लेकर अब तक इसने मंगल की सतह पर 28 उड़ानें भरी हैं, जबकि इससे कम उड़ानें ही धरती से प्लान करके भेजा गया था। नासा को इसे भेजने के पीछे पहला मकसद ये जानना था कि क्या कोई हेलिकॉप्टर मंगल...

मंगल ग्रह से Nasa के इनसाइट लैंडर ने भेजी अपनी ‘आखिरी सेल्‍फी’, जानें क्‍या होगा मिशन का

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) ने साल 2018 में मंगल ग्रह के लिए इनसाइट (Insight) लैंडर को लॉन्‍च किया था। बीते दिनों हमने आपको बताया था कि नासा के इस मंगल मिशन को झटका लगा है। उसका इनसाइट लैंडर बर्बाद होने की ओर है। यह लैंडर खुद पर जमा हुई धूल की वजह से अपनी बिजली खो रहा है और संभवत: जुलाई के बाद सर्विस नहीं दे सकेगा। बहरहाल, इनसाइट लैंडर ने अपनी लेटेस्‍ट  सेल्फी ली है, जिसमें वह धूल की मोटी परत से ढका हुआ दिखाई देता है। माना जा रहा है कि यह इनसाइट लैंडर की आखिरी सेल्‍फी होगी।  23 मई को रिलीज की गई इस इमेज में इनसाइट लैंडर को धूल से ढका हुआ देखा जा सकता है। बीते दिनों ने नासा ने बताया था कि सौर ऊर्जा से चलने वाला इनसाइट लैंडर अब बहुत कम बिजली बना पा रहा है। शुरू में लैंडर में एक घंटे 40 मिनट के लिए इलेक्ट्रिक ओवन को बिजली देता था। अब यह वक्‍त घटकर 10 मिनट रह गया है।    साल 2018 में मंगल ग्रह पर उतरने के बाद से इनसाइट लैंडर ने वहां 1,300 से अधिक भूकंपों को रिकॉर्ड किया है। हाल ही में इसने मंगल ग्रह पर आए अब तक के सबसे बड़े भूकंप को रिकॉर्ड किया था, जिसकी तीव्रता 5 मापी गई थी। य...

मंगल ग्रह पर ‘दूसरी दुनिया’ का मलबा! जानें नासा के Ingenuity हेलीकॉप्‍टर को क्‍या मिला

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मंगल ग्रह (Mars) पर जीवन के संकेत तलाशने के लिए अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने पर्सवेरेंस रोवर  (Perseverance rover) को भेजा है। पिछले साल फरवरी में मंगल ग्रह की सतह पर पर्सवेरेंस रोवर के उतरने के दौरान उसका एक कॉम्‍पोनेंट (बैकशेल) अलग हो गया था। इसकी तस्‍वीर सामने आई है। पिछले हफ्ते अपनी 26वीं उड़ान के दौरान Ingenuity ने हवा में 159 सेकंड के दौरान 1,181 फीट की दूरी तय करते हुए 10 तस्वीरें लीं। इनमें उस कॉम्‍पोनेंट (बैकशेल) या लैंडिंग कैप्सूल के टॉप हाफ हिस्से को भी दिखाया गया है। रोवर के पैराशूट और बैकशेल 1.3 मील की ऊंचाई पर रोवर से अलग हो गए थे। वह रोवर से उत्तर-पश्चिम में एक मील से अधिक दूर लैंड हुए थे।  लगभग 15 फीट व्यास वाला बैकशेल लगभग 78 मील प्रति घंटे की रफ्तार से जमीन से टकराया और बिखर गया। वहीं, पैराशूट अपनी जगह पर बरकरार लगता है। नासा के इंजीनियरों ने इन तस्‍वीरों को टटोलना शुरू कर दिया है। पर्सवेरेंस के पैराशूट सिस्‍टम पर काम करने वाले इंजीनियर इयान क्‍लार्क कहते हैं कि एक तस्वीर एक हजार शब्‍दों के बराबर है।  बैकशेल के अवशेषों की स्‍टडी करने से नासा को उसके अगल...

मंगल से सैंपल लेकर आएगा लॉकहीड मार्टिन का रॉकेट, Nasa ने दिया कॉन्‍ट्रैक्‍ट

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अमेरिकी स्‍पेस एजेंसी नासा (NASA) ने बताया है कि लॉकहीड मार्टिन (Lockheed Martin) के स्‍पेस डिविजन ने रॉकेट बनाने के लिए उसका कॉन्‍ट्रैक्‍ट हासिल किया है। यह रॉकेट 2030 के दशक में मंगल ग्रह से पहला रॉक सैंपल लेकर लौटेगा। नासा के मुताबिक, यह ‘छोटा, हल्का रॉकेट' दूसरे ग्रह से उड़ान भरने वाला पहला रॉकेट होगा, जो मंगल की सतह से सैंपल लाएगा। नासा का पर्सवेरेंस रोवर (Perseverance Rover) एक साल पहले मंगल ग्रह पर लैंड करने के बाद विभिन्न इलाकों से सैंपल इकट्ठा कर रहा है।  इस मिशन का मकसद मंगल ग्रह पर जीवन के निशान ढूंढना है। लेकिन यह तभी मुमकिन होगा, जब इन सैंपल्‍स का विश्‍लेषण पृथ्वी पर प्रयोगशालाओं में किया जाएगा। इन सैंपल्‍स को इकट्ठा करके एक जटिल ऑपरेशन के तहत पृथ्वी पर वापस लॉन्च किया जाएगा। लॉकहीड मार्टिन का रॉकेट इसमें प्रमुख भूमिका निभाएगा।  नासा के अनुसार, रॉकेट बनाने के लिए हुए कॉन्‍ट्रैक्‍ट का संभावित मूल्य 194 मिलियन डॉलर (लगभग 1451 करोड़ रुपये) है। नासा के हेडक्‍वॉर्टर में साइंस के एसोसिएट एडमिनिस्‍ट्रेटर थॉमस जुर्बुचेन ने कहा कि पृथ्वी पर लाए जाने के बाद उन सैंपल्‍स की स...

मंगल ग्रह के ऊपर से खींचीं सेल्‍फी, चीन के मार्स ऑर्बिटर ने किया कमाल

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चीन के पहले इंडिपेंडेंट इंटरप्लेनेटरी मिशन ‘तियानवेन -1' (Tianwen-1) ने नए साल का पहला सरप्राइज दिया है। इस आर्बिटर ने मंगल ग्रह के नॉर्थ पोल के उपर से बेहतरीन सेल्‍फी ली हैं। इन इमेज में मिशन से जुड़े सोलर एंटीना के अलावा आर्बिटर के एक हिस्‍से का क्‍लोजअप शॉट नजर आता है। इसने मंगल ग्रह की उत्तरी आइस कैप को भी दिखाया है। इन बेहतरीन तस्‍वीरों को क्लिक करने के लिए तियानवेन -1 ने एक छोटे कैमरा को मंगल ग्रह के उपर हवा में उड़ाया। कैमरे ने Wi-Fi के जरिए फोटोज को ऑर्बिटर में भेजा और इस तरह ये इमेज हासिल हुईं। तियानवेन-1 ने मई 2021 में उसके जूरोंग रोवर (Zhurong rover) को मंगल ग्रह पर उतारने में मदद की थी।  इन तस्‍वीरों में मंगल की परिक्रमा करने वाला स्‍पेसक्राफ्ट भी दिखाई देता है। वे ऑर्बिटर की गोल्‍डन बॉडी को दिखाते हैं। तस्‍वीरों में इसके सिल्वर हाई-गेन एंटीना भी दिखाई देते हैं, जो कम्‍युनिकेशन के लिए इस्‍तेमाल किए जाते हैं। सोशल मीडिया पर इन तस्वीरों ने सभी को अपनी ओर खींचा है, इनमें मंगल ग्रह पर अपने मिशन भेज रहीं अंतरिक्ष एजेंसियां और रिसर्च में जुटे लोग भी शामिल हैं।    तियानवे...