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आज मनाई जा रही है कबीर जयंती (Kabir Jayanti)

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First Published: June 14, 2022 | Last Updated:June 14, 2022 आज देश भर में कबीर जयंती मनाई जा रही है। इस दिन महान संत कबीरदास का जन्म हुआ हुआ था। संत कबीर संत कबीर के जन्म वर्ष को लेकर विवाद है। कुछ लोग कहते हैं कि उनका जन्म 1398 में हुआ था, जबकि अन्य कहते हैं कि उनका जन्म 1440 में हुआ था। कबीर का जीवन काशी पर केंद्रित था, जिसे बनारस (वाराणसी) भी कहा जाता है। उनके अनुसार वे कर्मकांड और शारीरिक तपस्या से स्वतंत्र थे। कबीर ने आत्म-समर्पण और ईश्वर की भक्ति में विश्वास किया। कबीर अहिंसा के पक्के समर्थक हैं। कबीर नैतिक जीवन में अहिंसा के पालन पर बल देते है। उन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता पर भी काफी बल दिया। उन्होंने सांप्रदायिक सद्भाव का प्रचार करके और उन सद्गुणों पर जोर देते हुए इस्लाम और हिंदू धर्म के संश्लेषण की कोशिश की, जो दोनों धर्मों के लिए आम थे। वह मूर्ति पूजा के खिलाफ थे। उन्होंने मुस्लिम अनुष्ठानों और मक्का में हज करने की समान रूप से निंदा की। Categories: राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Tags:Hindi Current Affairs , Hindi News , Kabir Jayanti , कबीर ...

आज मनाई जा रही है महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) की जयंती

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First Published: June 2, 2022 | Last Updated:June 2, 2022 महाराणा प्रताप सिंह (Maharana Pratap Singh)  मेवाड़ (वर्तमान राजस्थान) के 13 वें राजा थे। वे भारत के सबसे यशस्वी राजाओं में से एक माने जाते हैं। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार उनका जन्म 9 मई, 1540 को हुआ था। हिंदू कैलेंडर के अनुसार ज्येष्ठ मास की तृतीया तिथि को उनका जन्म हुआ थाहै। आज उनकी जयंती मनाई जा रही है। राणा और मुगल अकबर मेवाड़ के माध्यम से गुजरात के लिए एक सुरक्षित मार्ग स्थापित करना चाहता था। इसलिए, उसने महाराणा प्रताप सिंह  को अन्य राजपूतों की तरह एक जागीरदार बनाने के लिए कई दूत भेजे। राणा ने मना कर दिया। इसलिए हल्दीघाटी का युद्ध लड़ा गया। हल्दीघाटी का युद्ध (Battle of Haldighati) हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा को उनकी बहादुरी के लिए जाना जाता है। यह लड़ाई 18 जून, 1576 को महाराणा और अकबर की सेनाओं के बीच लड़ी गई थी। राणा ने मुगल सेना के 2 लाख सैनिकों के खिलाफ 22,000 सैनिकों के साथ लड़ाई लड़ी। मुगलों का नेतृत्व मान सिंह ने किया था। इस युद्ध में राणा की सेना परास्त हो गईं। पुनर्विजय ...

9 मई: महाराणा प्रताप सिंह (Maharana Pratap Singh) की जयंती

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First Published: May 9, 2022 | Last Updated:May 9, 2022 महाराणा प्रताप सिंह (Maharana Pratap Singh)  मेवाड़ (वर्तमान राजस्थान) के 13 वें  राजा थे। वे भारत के सबसे यशस्वी राजाओं में से एक माने जाते हैं। उनका जन्म 9 मई, 1540 को हुआ था। आज उनकी जयंती मनाई जा रही है। राणा और मुगल अकबर मेवाड़ के माध्यम से गुजरात के लिए एक सुरक्षित मार्ग स्थापित करना चाहता था। इसलिए, उसने महाराणा प्रताप सिंह  को अन्य राजपूतों की तरह एक जागीरदार बनाने के लिए कई दूत भेजे। राणा ने मना कर दिया। इसलिए हल्दीघाटी का युद्ध लड़ा गया। हल्दीघाटी का युद्ध (Battle of Haldighati) हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा को उनकी बहादुरी के लिए जाना जाता है। यह लड़ाई 18 जून, 1576 को महाराणा और अकबर की सेनाओं के बीच लड़ी गई थी। राणा ने मुगल सेना के 2 लाख सैनिकों के खिलाफ 22,000 सैनिकों के साथ लड़ाई लड़ी। मुगलों का नेतृत्व मान सिंह ने किया था। इस युद्ध में राणा की सेना परास्त हो गईं। पुनर्विजय उन्होंने 1582 में 6 साल बाद मुगलों के खिलाफ लड़ाई लड़ी और जीत हासिल की। ​​मुगलों को भयानक हार का सामना करना ...

कर्नाटक में बासव जयंती (Basava Jayanti) मनाई गई

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First Published: May 6, 2022 | Last Updated:May 6, 2022 3 मई, 2022 को प्रसिद्ध दार्शनिक बसवेश्वर (Basaveshwara) की जयंती बासव जयंती (Basava Jayanti) के रूप मनाई गई। बासवन्ना कौन है? कल्याणी चालुक्य/कलचुरी वंश के शासनकाल के दौरान बासवन्ना 12 वीं शताब्दी के कवि, दार्शनिक और समाज सुधारक थे। बासव जयंती कब मनाई जाती है? हिंदू कैलेंडर के अनुसार, बासवन्ना का जन्म वैशाख महीने के तीसरे दिन शुक्ल पक्ष में पड़ता है। यह आमतौर पर अंग्रेजी कैलेंडर के अप्रैल या मई में पड़ता है। यह मुख्य रूप से कर्नाटक, महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश राज्यों में मनाया जाता है। बासवन्ना ने किस संप्रदाय की स्थापना की? बसवन्ना लिंगायतवाद के संस्थापक हैं। लिंगायतवाद क्या है? यह शैव धर्म पर आधारित एक हिंदू संप्रदाय है। लिंगायतवाद 11वीं-12वीं शताब्दी के रामानुज के समान दार्शनिक नींव के साथ योग्य अद्वैतवाद (विशिष्ठ अद्वैत) पर जोर देता है। लिंगायतवाद वेदों और पुराणों के अधिकार को खारिज करता है। बासवन्ना द्वारा कौन से सामाजिक सुधार लाए गए? बासवन्ना जाति व्यवस्था से मुक्त समाज में ...

तमिलनाडु: अंबेडकर की जयंती पर ‘समानता दिवस’ (Equality Day) मनाया जाएगा

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First Published: April 15, 2022 | Last Updated:April 15, 2022 तमिलनाडु ने इस वर्ष से 14 अप्रैल, 2022 को बी.आर. अंबेडकर की जयंती को ‘समानता दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की। इस दिन राज्य भर में शपथ भी ली गई। मुख्य बिंदु राज्य भर के सभी सरकारी कार्यालयों में शपथ ली गई। जातिगत भेदभाव के खिलाफ यह शपथ ली गई थी। डॉ. अम्बेडकर की कृतियों का तमिल में अनुवाद और प्रकाशन भी किया जाएगा। अम्बेडकर प्रतिमा की स्थापना चेन्नई स्थित अंबेडकर मणिमंडपम में डॉ. अम्बेडकर की आदमकद कांस्य प्रतिमा भी लगाई जाएगी। सामाजिक न्याय दिवस 17 सितंबर को पेरियार की जयंती को तमिलनाडु सरकार द्वारा पहले ही सामाजिक न्याय दिवस घोषित किया जा चुका है। अंबेडकर जयंती 14 अप्रैल को, भारत के संविधान के निर्माता भीमराव अम्बेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए प्रतिवर्ष अम्बेडकर जयंती मनाई जाती है। Categories: राज्यों के करेंट अफेयर्स Tags:Equality Day , Hindi Current Affairs , Hindi News , अंबेडकर जयंती , समानता दिवस , सामाजिक न्याय दिवस , हिंदी करेंट अफेयर्स , हिंदी समाचार http...

14 अप्रैल : अंबेडकर जयंती (Ambedkar Jayanti)

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First Published: April 14, 2022 | Last Updated:April 14, 2022 भारत में हर साल 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती (Ambedkar Jayanti) या भीम जयंती मनाई जाती है। इस दिन को अंबेडकर स्मरण दिवस भी कहा जाता है। 2015 से, 14 अप्रैल को भारत में आधिकारिक सार्वजनिक अवकाश के रूप में मनाया जाता है। भीम राव अंबेडकर उनका पूरा नाम भीमराव रामजी अंबेडकर था। अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल, 1891 को हुआ था। उन्होंने जीवन भर समानता के लिए संघर्ष किया।इस प्रकार, उनके जन्मदिन को “समानता दिवस” ​​के रूप में भी मनाया जाता है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में उनके जन्मदिन को अंतर्राष्ट्रीय समानता दिवस के रूप में मनाने की मांग रखी है। उन्हें बाबासाहेब अम्बेडकर के नाम से भी जाना जाता था। 1956 में, वह बौद्ध धर्म में परिवर्तित हो गए। 1936 में, अम्बेडकर ने स्वतंत्र लेबर पार्टी की स्थापना की। अंबेडकर संविधान सभा की मसौदा समिति के अध्यक्ष थे। श्रद्धांजलि 1990 में, अंबेडकर को भारत रत्न से सम्मानित किया गया। 1990 में संसद के सेंट्रल हॉल में उनके चित्र का अनावरण किया गया था। 14 अप्रैल, 1990 और 14 अप्...

महात्मा ज्योतिराव फुले की जयंती मनाई गई

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First Published: April 12, 2022 | Last Updated:April 12, 2022 ज्योतिराव फुले का जन्म 11 अप्रैल, 1827 को हुआ था। वह एक सामाजिक कार्यकर्ता थे, जिन्होंने अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले के साथ हाशिए के समुदायों के बच्चों और महिलाओं के उत्थान के लिए काम किया और महिलाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित किया। मुख्य बिंदु वह महाराष्ट्र से ताल्लुक रखते थे और उन्होंने छुआछूत को मिटाने के लिए कड़ी मेहनत की। ज्योतिराव फुले ने 1848 में पुणे के भिडे वाडा में अपना पहला बालिका विद्यालय शुरू किया था। सत्यशोधक समाज भी उनके अनुयायियों के साथ निम्न जातियों के सभी लोगों के लिए बुनियादी अधिकारों के लिए लड़ने के उद्देश्य से बनाया गया था। उनके संघ में विभिन्न जातियों और धर्मों के लोग थे। एक अन्य सामाजिक कार्यकर्ता विट्ठलराव कृष्णजी वंदेकर ने उन्हें 1888 में ‘महात्मा’ (‘महान आत्मा’) की उपाधि दी थी। प्रारंभिक जीवन उनका जन्म पुणे, ब्रिटिश भारत में माली जाति से संबंधित एक परिवार में हुआ था, जो सब्जियां और फल उगाते थे। उन्होंने कम उम्र में ही अपनी मां को खो दिया था। 1847 में इसी स्कूल स...

भारत की पहली महिला अंतरिक्षयात्री कल्पना चावला (Kalpana Chawla) की जयंती मनाई गई

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First Published: March 19, 2022 | Last Updated:March 19, 2022 17 मार्च, 2022 को भारत की पहली महिला अंतरिक्षयात्री कल्पना चावला की जयंती मनाई गई। 1 फरवरी, 2003 को स्पेस शटल कोलंबिया पृथ्वी के वातावरण  में प्रवेश करते समय नष्ट हो गयी थी, इस दुर्घटना में कल्पना चावला समेत सभी सातों अन्तरिक्षयात्रियों की मृत्यु हो गयी थी। कोलंबिया पृथ्वी पर लैंड करने से केवल 16 मिनट दूर थी। यह कोलंबिया स्पेसक्राफ्ट का 28वां मिशन था। दरअसल यह हादसा शटल के बाएं विंग में एल्युमीनियम हीट इंसुलेटिंग टाइल के क्षतिग्रस्त होने के कारण हुआ था। कल्पना चावला (Kalpana Chawla) कल्पना चावला का जन्म 17 मार्च, 1962 को हरियाणा के करनाल में हुआ था। कल्पना ने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की थी। इसके बाद 1982 में वे अमेरिका चली गयी थी। 1984 में उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्सास से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर ऑफ़ साइंस की डिग्री हासिल की। बाद में उन्होंने पीएचडी भी की। कल्पना चावला ने 1988 में नासा में अपना करियर शुरू किया। अप्रै...

महर्षि दयानंद सरस्वती (Dayananda Saraswati) की जयंती मनाई गई

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First Published: February 28, 2022 | Last Updated:February 28, 2022 महर्षि दयानंद सरस्वती जयंती 26 फरवरी, 2022 को मनाई गई। मुख्य बिंदु महर्षि दयानंद सरस्वती का जन्म 12 फरवरी, 1824 को हुआ था। पारंपरिक हिंदू कैलेंडर के अनुसार, उनका जन्म फाल्गुन कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को हुआ था। इस प्रकार 2022 में यह अवसर 26 फरवरी को मनाया गया। यह दिवस कैसे मनाया जाता है? भारत में, यह दिन सभी वैदिक संस्थानों और धार्मिक प्रतिष्ठानों द्वारा बहुत धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है। कई स्कूल और शैक्षणिक संस्थान वाद-विवाद, निबंध प्रतियोगिता और इस तरह के आयोजनों का आयोजन करते हैं। दयानंद सरस्वती कौन थे? दयानंद सरस्वती आर्य समाज नामक संगठन के संस्थापक थे। उनका जन्म 12 फरवरी, 1824 को गुजरात में हुआ था। उनका मूल नाम मूल शंकर तिवारी था। उनका जन्म करशनजी लालजी कपाड़ी और यशोदाबाई के यहाँ हुआ था। वह एक सामाजिक नेता, भारतीय दार्शनिक और वैदिक धर्म के सुधार आंदोलन थे। वह 1876 में स्वराज “इंडिया फॉर इंडियंस” का आह्वान करने वाले पहले व्यक्ति थे। आर्य समाज (Arya Samaj) आर्य समाज एक...

देश भर में आज मनाई जा रही है छत्रपति शिवाजी महाराज (Chhatrapati Shivaji Maharaj) की जयंती

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First Published: February 19, 2022 | Last Updated:February 19, 2022 आज (19 फरवरी) को महान मराठा शासक छत्रपति  शिवाजी महाराज की जयंती मनाई जा रही है। महाराष्ट्र में 19 फरवरी को छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्मदिन भव्य पैमाने पर मनाया जाता है। छत्रपति शिवाजी (Chhatrapati Shivaji_ शिवाजी का जन्म 19 फरवरी, 1630 में शिवनेरी किले में, जीजाबाई और शाहजी भोंसले के घर हुआ था। शिवाजी एक महान नेता और मराठा राष्ट्र के निर्माता थे। उन्होंने सभी बाधाओं के खिलाफ दक्कन में हिंदू राज्य की स्थापना की, जो शक्तिशाली मुगल के खिलाफ लड़ रहे थे। उन्होंने जन मानस  को मुगल शासक औरंगजेब के अत्याचार के खिलाफ लड़ने के लिए प्रेरित किया और एकजुट किया, उनमें गर्व और राष्ट्रीयता की भावना पैदा की। उन्होंने प्रभावी नागरिक और सैन्य प्रशासन के साथ अपने राज्य को स्थिर किया। वह अपने राज्य में सभी धर्मों और संप्रदायों के प्रति सहिष्णु थे। उन्होंने राजस्व संग्रह में प्रणालियों की शुरुआत की। Categories: राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Tags:Chhatrapati Shivaji , Chhatrapati Shivaji Maharaj , Hindi Curre...

अमर जवान ज्योति (Amar Jawan Jyoti) को राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में क्यों विलीन किया गया?

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First Published: January 21, 2022 | Last Updated:January 21, 2022 इंडिया गेट में स्थित अमर जवान ज्योति का राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (National War Memorial – NWM) में अखंड ज्योति में विलय किया गया। मुख्य बिंदु एक छोटे से समारोह में अमर जवान ज्योति ज्वाला का एक हिस्सा लिया गया और राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में ज्योति के साथ मिला दिया गया, जो इंडिया गेट के दूसरी तरफ 400 मीटर दूर है। इस समारोह की अध्यक्षता एकीकृत रक्षा स्टाफ के प्रमुख एयर मार्शल बी.आर. कृष्णा ने की। अमर जवान ज्योति (Amar Jawan Jyoti) अमर जवान ज्योति का निर्माण भारतीय सैनिकों के लिए एक स्मारक के रूप में किया गया था, जो 1971 के भारत-पाक युद्ध में कार्रवाई में वीरगति को प्राप्त हुए थे। भारत ने 1971 के युद्ध में जीत हासिल की थी, जिससे बांग्लादेश का निर्माण हुआ। अमर जवान ज्योति का उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 26 जनवरी 1972 को किया था। राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (National War Memorial) प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 फरवरी, 2019 को एनडब्ल्यूएम का उद्घाटन किया था राष्ट्रीय युद्ध स्मारक ...