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ये बायोसीमेंट कम कर देगा घर बनाने का खर्च, वीडियो में दिखाया गया बनाने का तरीका

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सिंगापुर में नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (NTU Singapore) के वैज्ञानिकों ने कचरे से बायोसीमेंट बनाने का एक तरीका खोजा है, जिससे यह साधारण सीमेंट के लिए एक ग्रीनर और अधिक टिकाऊ विकल्प बन गया है। बायोसीमेंट एक प्रकार का रिन्यूएबल सीमेंट है, जो हार्डनिंग रिएक्शन के लिए बैक्टीरिया का इस्तेमाल करके मिट्टी को एक ठोस ब्लॉक में बांधता है। बायोसीमेंट अब एनटीयू के वैज्ञानिकों द्वारा दो सामान्य वेस्ट मटेरियल - औद्योगिक कार्बाइड स्लज (कीचड़) और यूरिया (स्तनधारी मूत्र से निकला) का उपयोग करके बनाया गया है। उन्होंने यूरिया को कैल्शियम आयनों के साथ मिलाकर औद्योगिक कार्बाइड कीचड़ में एक कठोर सॉलिड बनाने के लिए एक विधि का आविष्कार किया है। अवक्षेप मिट्टी के कणों को एक साथ बांधता है और जब यह प्रतिक्रिया मिट्टी में होती है, तो उनके बीच गैप को भर देता है, जिसके कारण मिट्टी का एक कॉम्पैक्ट मास होता है। इससे एक बायोसीमेंट ब्लॉक बनता है, जो मजबूत होने के साथ-साथ लंबे समय तक चलने वाला और पानी के लिए अभेद्य होता है। यह रिसर्च Journal of Environmental Chemical Engineering में पब्लिश हुई था। रिसर्चर्स का ...

तुर्की ने अपना आधिकारिक नाम बदलकर तुर्किये (Türkiye) किया

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First Published: June 6, 2022 | Last Updated:June 6, 2022 संयुक्त राष्ट्र में, तुर्की को अब तुर्किये (Türkiye) के नाम से जाना जाएगा। संयुक्त राष्ट्र को मई 2022 में अंकारा से एक अनुरोध प्राप्त हुआ था। नाम को रीब्रांड करने की प्रक्रिया नाम को रीब्रांड करने की प्रक्रिया वर्ष 2021 में शुरू हुई थी। इस नाम को तुर्किये के रूप में चुना गया था जो तुर्की राष्ट्र की संस्कृति, सभ्यता और मूल्यों को बेहतरीन तरीके से दर्शाता है और व्यक्त करता है। स्थानीय लोग अपने देश को तुर्किये के रूप में संदर्भित करते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, इसके अंग्रेजी संस्करण “टर्की” को अपनाया गया था। नाम बदलने का कारण राज्य प्रसारक TRT की एक रिपोर्ट के अनुसार, 1923 में देश की आजादी के बाद ‘तुर्की/टर्की’ शब्द को अपनाया गया था। अतीत में, यूरोपीय लोगों ने ओटोमन राज्य और तुर्किये को कई नामों से संदर्भित किया है। लेकिन जो नाम सबसे ज्यादा अटका है वह है “टर्की”। इस प्रकार, ‘टर्की’ शब्द के लिए Google खोज परिणामों से देश की सरकार खुश नहीं थी। कुछ परिणामों में एक बड़ा पक्षी शामिल था जि...

शरीर के अंदर तंग जगहों पर जानें के लिए तैरने का तरीका बदल देते हैं बैक्टीरिया

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एक नई स्टडी से पता चला है कि बैक्टीरिया तंग जगहों से गुजरते हुए अपने तैरने के पैटर्न को बदलते हैं। अमेरिका में हवाई यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स का कहना है कि बैक्टीरिया के व्यवहार में अचानक आया बदलाव हैरान करने वाला है। उन्होंने पाया कि बैक्टीरिया ने एक लाइन बनाई, और खुली जगहों के विपरीत कैद से बचने के लिए एक सीधी लाइन में तैरना शुरू कर दिया। खुली जगहों में, ये बैक्टीरिया बिना किसी खास पैटर्न के अपने मनमाने ढंग से घूमते हुए दिखाई दिए। बैक्टीरिया लगभग सभी जीवों के शरीर पर या उनके भीतर सहजीवी के रूप में रहते हैं। रिसर्चर्स को उम्मीद है कि उनकी स्टडी यह समझने में मदद कर सकती है कि इंसानी माइक्रोबायोम में बैक्टीरिया कैसे रहते हैं। माइक्रोब्स (सूक्ष्मजीव) अक्सर जटिल रास्ते अपनाते हैं, यहां तक ​​कि शरीर के टिशू के बेहद छोटे छेदों के जरिए भी निकल जाते हैं। यह स्टडी दिखाती है कि तंग जगह बैक्टीरिया के लिए एक संकेत के रूप में काम कर सकते हैं कि जटिल वातावरण से कैसे नेविगेट किया जाए।   इस स्टडी के लिए रिसर्चर्स ने विब्रियो फिशरी (Vibrio fischeri) का इस्तेमाल किया। यह एक रॉड की शेप का जीवाणु होत...