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इंसान अपने शरीर के इस अंग से भी ले सकते हैं सांस, जानकर रह जाएंगे दंग

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वैज्ञानिकों द्वारा तरह-तरह की स्टडी की जाती है, जिसमें कई ऐसे तथ्य सामने आते हैं, जो आपको चौंका सकते हैं। एक लेटेस्ट स्टडी में भी ऐसी जानकारी निकलकर सामने आई है, जिसे जानकर आप दंग रह जाएंगे, या यूं कहो की आप उसे मानने के लिए शायद राजी भी न हो। वैज्ञानिकों की एक टीम ने पता लगाया है कि गुदा से सांस लेना संभव है। जी हां, आपने सही पढ़ा, इस स्टडी में दावा किया गया है कि यह खोज भविष्य में इंसानों की भी जान बचाने के काम आएगी। Science Direct ने MED में पब्लिश एक रिसर्च का हवाला देते हुए बताया कि गुदा से सांस लेना भी संभव है। वैज्ञानिकों के एक समूह ने कछुओं के धीमे मेटाबॉलिज्म के आधार पर सूअरों और चूहों पर कई प्रयोग किए। इसमें म्यूकोसल लाइनिंग को पतला करने के लिए जानवरों की आंतों को साफ किया गया, जिससे खून के प्रवाह में बाधा को कम किया जा सके। इसके बाद उन जानवरों को एक ऐसे कमरे में रखा गया जहां ऑक्सीजन नहीं थी। ऐसा माना जाता है कि क्योंकि कछुओं के पास इस तरह की परत होती है, वे अपने गुदा के जरिए सांस लेने में सक्षम होते हैं, जिसकी वजह से वो सर्दियों में जीवित रहने में सक्षम होते हैं। रिपोर्ट...

पूर्णिमा पर आज शाम दिखाई देगा ‘स्‍ट्रॉबेरी मून’, जानें इसके बारे में सबकुछ

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चंद्रमा आज बेहद खास अंदाज में हमारे सामने आने वाला है। आज शाम पूर्णिमा पर चांद का जो रूप नजर आएगा उसे दुनिया में स्‍ट्रॉबेरी मून (Strawberry Moon) के नाम से जाना जाता है, लेकिन खास बात यह है कि आज चांद ना तो स्‍ट्रॉबेरी के जैसा दिखाई देगा, ना ही उसकी चमक में गुलाबीपन होगा, फ‍िर भी इसे स्‍ट्रॉबेरी मून कहने के पीछे लॉजिक है। यह हम आपको आगे बताएंगे, लेकिन उससे जरूरी बात यह है कि भारतीय समय के अनुसार पूर्णिमा पर चांद का दीदार शाम 5.22 बजे से किया जा सकेगा। आज चंद्रमा, पृथ्वी के चारों ओर अपनी कक्षा में निकटतम बिंदु पर होगा। इसे पेरिगी (perigee) कहा जाता है। इसी वजह से चंद्रमा ‘सुपरमून' जैसा दिखाई देगा। एक्‍सपर्ट के मुताबिक, इस दौरान चंद्रमा का आकार बड़ा और चमकीला नजर आता है। आसामान साफ होने पर इसकी चमक देखते ही बनती है।    पृथ्‍वी के 26 हजार किलोमीटर नजदीक आएगा चांद  रिपोर्टों के अनुसार, पृथ्‍वी और चंद्रमा के बीच की जो दूरी है, मंगलवार को वह करीब 26 हजार किलोमीटर कम हो जाएगी। जैसा कि हमने आपको बताया आज चंद्रमा, पृथ्वी के चारों ओर अपनी कक्षा में निकटतम बिंदु पर होगा। इसे पेरिगी कहा ज...

ये बायोसीमेंट कम कर देगा घर बनाने का खर्च, वीडियो में दिखाया गया बनाने का तरीका

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सिंगापुर में नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (NTU Singapore) के वैज्ञानिकों ने कचरे से बायोसीमेंट बनाने का एक तरीका खोजा है, जिससे यह साधारण सीमेंट के लिए एक ग्रीनर और अधिक टिकाऊ विकल्प बन गया है। बायोसीमेंट एक प्रकार का रिन्यूएबल सीमेंट है, जो हार्डनिंग रिएक्शन के लिए बैक्टीरिया का इस्तेमाल करके मिट्टी को एक ठोस ब्लॉक में बांधता है। बायोसीमेंट अब एनटीयू के वैज्ञानिकों द्वारा दो सामान्य वेस्ट मटेरियल - औद्योगिक कार्बाइड स्लज (कीचड़) और यूरिया (स्तनधारी मूत्र से निकला) का उपयोग करके बनाया गया है। उन्होंने यूरिया को कैल्शियम आयनों के साथ मिलाकर औद्योगिक कार्बाइड कीचड़ में एक कठोर सॉलिड बनाने के लिए एक विधि का आविष्कार किया है। अवक्षेप मिट्टी के कणों को एक साथ बांधता है और जब यह प्रतिक्रिया मिट्टी में होती है, तो उनके बीच गैप को भर देता है, जिसके कारण मिट्टी का एक कॉम्पैक्ट मास होता है। इससे एक बायोसीमेंट ब्लॉक बनता है, जो मजबूत होने के साथ-साथ लंबे समय तक चलने वाला और पानी के लिए अभेद्य होता है। यह रिसर्च Journal of Environmental Chemical Engineering में पब्लिश हुई था। रिसर्चर्स का ...

विश्व बैंक खाद्य संकट के लिए 30 बिलियन डालर की सहायता देगा

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First Published: May 23, 2022 | Last Updated:May 23, 2022 विश्व बैंक द्वारा चल रही खाद्य सुरक्षा को कम करने के लिए की जाने वाली कार्रवाइयों की घोषणा की गई है। विश्व बैंक इस संकट को कम करने के लिए नई और मौजूदा परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए 30 बिलियन डालर तक का निवेश करेगा। मुख्य बिंदु  अगले 15 महीनों में दुनिया भर में चल रही खाद्य असुरक्षा (food insecurity) को दूर करने के लिए पोषण, कृषि, पानी, सामाजिक सुरक्षा और सिंचाई जैसे क्षेत्रों में वित्त पोषण प्रदान किया जाएगा। वित्तपोषण में ऐसे प्रयास भी शामिल होंगे जो उर्वरक और खाद्य उत्पादन को बढ़ावा देने, व्यापार को सुविधाजनक बनाने, खाद्य प्रणालियों को बढ़ाने और दुनिया भर के कमजोर उत्पादकों और परिवारों का समर्थन करने में मदद करेंगे। विश्व बैंक अगले 15 महीनों में चल रहे खाद्य संकट से निपटने के लिए 12 अरब डॉलर मूल्य की नई परियोजनाएं तैयार करने के लिए कई देशों के साथ मिलकर काम कर रहा है। विश्व बैंक के मौजूदा पोर्टफोलियो में क्या शामिल है? विश्व बैंक के मौजूदा पोर्टफोलियो में उन परियोजनाओं के लिए 18.7 बिलि...

GI कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देगा वाणिज्य मंत्रालय

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First Published: March 25, 2022 | Last Updated:March 25, 2022 वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय नए GI टैग वाले कृषि उत्पादों की पहचान कर रहा है ताकि उन्हें नए गंतव्यों में निर्यात किया जा सके। मुख्य बिंदु  भौगोलिक संकेत (Geographical Indication – GI) टैग एक unique identifier है जो किसी उत्पाद को दिया जाता है, जो उस उत्पाद की उत्पत्ति के क्षेत्र को परिभाषित करता है। यह टैग उत्पाद की उत्पत्ति को उस क्षेत्र की बौद्धिक संपदा के रूप में भी दर्शाता है। लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, वाराणसी में निर्यात हब बनाने के लिए किसान उत्पादक कंपनियों, किसान उत्पादक संगठनों और निर्यातकों को जोड़ने पर भी सरकार द्वारा बहुत जोर दिया गया है। देश के कृषि क्षेत्र ने निर्यात में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, विशेष रूप से महामारी के दौरान इस प्रकार एक उभरते हुए प्रमुख वैश्विक खाद्य और कृषि उत्पाद आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत का स्थान मजबूत किया है। भारत से कौन से GI उत्पाद निर्यात किए जाते हैं? बासमती चावल और दार्जिलिंग चाय भारत से निर्यात किए जाने वाले दो सबसे लोकप्...

पश्चिम बंगाल को 125 मिलियन डॉलर का ऋण देगा विश्व बैंक

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First Published: March 12, 2022 | Last Updated:March 12, 2022 राज्य में सामाजिक सुरक्षा सेवाओं के माध्यम से गरीब और कमजोर समूहों की मदद करने के लिए विश्व बैंक द्वारा पश्चिम बंगाल को 125 मिलियन अमरीकी डालर के IBRD (International Bank for Reconstruction and Development) ऋण की पेशकश की गई है। मुख्य बिंदु पश्चिम बंगाल में ‘जय बांग्ला’ नामक एक छत्र मंच के माध्यम से देखभाल सेवाएं, सामाजिक सहायता और नौकरी देने के लिए 400 से अधिक कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। इस IBRD के ऋण से राज्य को समावेशी सामाजिक सुरक्षा परियोजना की क्षमता विकसित करने में मदद मिलेगी, जो महिलाओं, आदिवासी और अनुसूचित जाति के परिवारों और आपदा-संभावित तटीय क्षेत्रों में कमजोर आबादी पर केंद्रित है। यह परियोजना सामाजिक देखभाल सेवाओं के लिए एक टेलीकंसल्टेशन नेटवर्क की स्थापना के साथ-साथ केस प्रबंधन कार्यकर्ताओं के एक कैडर को भी वित्तपोषित करेगी जो बुजुर्गों की देखभाल पर मार्गदर्शन प्रदान कर सकते हैं और घरों को स्वास्थ्य सेवाओं और सुविधाओं से जोड़ सकते हैं। यह परियोजना राज्य के कार्यबल में महिलाओं...

बारिश से फसल ख़राब होने वाले किसानों को मुआवजा देगी दिल्ली सरकार

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First Published: January 31, 2022 | Last Updated:January 31, 2022 दिल्ली सरकार ने हाल ही में किसानों को 20,000 रुपये प्रति एकड़ की मंजूरी दी है। इन किसानों को बेमौसम बारिश से नुकसान हुआ है।बारिश का पानी उनके खेतों में घुस गया और उनकी फसल को नुकसान पहुंचा। राज्य सरकार ने लगभग 29,000 एकड़ के लिए कुल 53 करोड़ रुपये आवंटित किए। मुख्य बिंदु  सितंबर-अक्टूबर 2021 में बेमौसमी बारिश के कारण राजधानी के आसपास के किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा। इन बारिशों के कारण, आसपास के नालों का पानी गंभीर क्षति के कारण खेतों में बह गया। इस मुद्दे को हल करने के लिए, दिल्ली सरकार ने मुआवजा राशि आवंटित की है। राज्य सरकार ने नुकसान का आकलन करने के लिए एक टीम भेजी थी। टीम द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर धनराशि आवंटित की गई है। यदि नुकसान 70% या उससे कम है, तो मुआवजे का भुगतान 70% की दर से किया जाना है। यदि नुकसान 70% से अधिक है तो 100% मुआवजा देना होगा। पृष्ठभूमि दिल्ली सरकार ने हाल ही में क्षेत्र के फसल क्षेत्र का आकलन करने के लिए एक अध्ययन किया। इस अध्ययन के अनुस...