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इंसान अपने शरीर के इस अंग से भी ले सकते हैं सांस, जानकर रह जाएंगे दंग

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वैज्ञानिकों द्वारा तरह-तरह की स्टडी की जाती है, जिसमें कई ऐसे तथ्य सामने आते हैं, जो आपको चौंका सकते हैं। एक लेटेस्ट स्टडी में भी ऐसी जानकारी निकलकर सामने आई है, जिसे जानकर आप दंग रह जाएंगे, या यूं कहो की आप उसे मानने के लिए शायद राजी भी न हो। वैज्ञानिकों की एक टीम ने पता लगाया है कि गुदा से सांस लेना संभव है। जी हां, आपने सही पढ़ा, इस स्टडी में दावा किया गया है कि यह खोज भविष्य में इंसानों की भी जान बचाने के काम आएगी। Science Direct ने MED में पब्लिश एक रिसर्च का हवाला देते हुए बताया कि गुदा से सांस लेना भी संभव है। वैज्ञानिकों के एक समूह ने कछुओं के धीमे मेटाबॉलिज्म के आधार पर सूअरों और चूहों पर कई प्रयोग किए। इसमें म्यूकोसल लाइनिंग को पतला करने के लिए जानवरों की आंतों को साफ किया गया, जिससे खून के प्रवाह में बाधा को कम किया जा सके। इसके बाद उन जानवरों को एक ऐसे कमरे में रखा गया जहां ऑक्सीजन नहीं थी। ऐसा माना जाता है कि क्योंकि कछुओं के पास इस तरह की परत होती है, वे अपने गुदा के जरिए सांस लेने में सक्षम होते हैं, जिसकी वजह से वो सर्दियों में जीवित रहने में सक्षम होते हैं। रिपोर्ट...

शरीर के अंदर तंग जगहों पर जानें के लिए तैरने का तरीका बदल देते हैं बैक्टीरिया

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एक नई स्टडी से पता चला है कि बैक्टीरिया तंग जगहों से गुजरते हुए अपने तैरने के पैटर्न को बदलते हैं। अमेरिका में हवाई यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स का कहना है कि बैक्टीरिया के व्यवहार में अचानक आया बदलाव हैरान करने वाला है। उन्होंने पाया कि बैक्टीरिया ने एक लाइन बनाई, और खुली जगहों के विपरीत कैद से बचने के लिए एक सीधी लाइन में तैरना शुरू कर दिया। खुली जगहों में, ये बैक्टीरिया बिना किसी खास पैटर्न के अपने मनमाने ढंग से घूमते हुए दिखाई दिए। बैक्टीरिया लगभग सभी जीवों के शरीर पर या उनके भीतर सहजीवी के रूप में रहते हैं। रिसर्चर्स को उम्मीद है कि उनकी स्टडी यह समझने में मदद कर सकती है कि इंसानी माइक्रोबायोम में बैक्टीरिया कैसे रहते हैं। माइक्रोब्स (सूक्ष्मजीव) अक्सर जटिल रास्ते अपनाते हैं, यहां तक ​​कि शरीर के टिशू के बेहद छोटे छेदों के जरिए भी निकल जाते हैं। यह स्टडी दिखाती है कि तंग जगह बैक्टीरिया के लिए एक संकेत के रूप में काम कर सकते हैं कि जटिल वातावरण से कैसे नेविगेट किया जाए।   इस स्टडी के लिए रिसर्चर्स ने विब्रियो फिशरी (Vibrio fischeri) का इस्तेमाल किया। यह एक रॉड की शेप का जीवाणु होत...