इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन के लिए उड़े Nasa के 4 एस्‍ट्रोनॉट, बिना मिट्टी के उग रहे पौधों पर करेंगे रिसर्च

स्‍पेसएक्‍स (SpaceX) के जिस लॉन्‍च की बात हमने आज बताई थी, वह हो गया है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) के लिए चार एस्‍ट्रोनॉट्स को लेकर स्‍पेसएक्‍स का फॉल्‍कन 9 रॉकेट दोहपर करीब डेढ़ बजे उड़ा। कैनेडी स्‍पेस सेंटर से लॉन्‍च हुए इस मिशन में अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री केजेल लिंडग्रेन, बॉब हाइन्स और जेसिका वॉटकिंस के साथ यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के इतालवी मेंबर सामंथा क्रिस्टोफोरेटी भी शामिल थे। ये सभी अगले 6 महीने के लिए मिशन पर निकले हैं और 17 घंटे का सफर करके इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन (ISS) पर पहुंचेंगे। लॉन्‍च को नासा की वेबसाइट और सोशल मीडिया पर लाइव स्‍ट्रीम किया गया। 

एक न्‍यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अरबपति एलन मस्‍क की कंपनी स्‍पेसएक्‍स ने 40 घंटे के अंतराल में एक मिशन को ISS से पृथ्‍वी पर लैंड कराकर दूसरे मिशन के लिए उड़ान भरी है। यह नासा के लिए अंतरिक्ष के सफर पर जाने वाली प्रमुख ‘टैक्‍सी' बन गई है, जिसकी सेवाएं 2020 से ली जा रही हैं।  

इससे पहले अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी रूस के रॉकेट सोयुज पर निर्भर थी, जिसकी जगह अब स्‍पेसएक्‍स के फॉल्‍कन 9 रॉकेट ने ले ली है। क्रू-4 मिशन के तहत ISS पर गया अंतरिक्ष यात्रियों का दल वहां क्रू-3 मिशन के चार अन्‍य यात्रियों को जॉइन करेगा। उन्‍हें वहां करीब 5 महीने हो गए हैं और अब जल्‍द वापसी की योजना है। हालांकि इसकी तारीख का ऐलान होना अभी बाकी है। इसके अलावा तीन रूसी यात्री भी वहां मौजूद हैं।  

क्रू4 मिशन के कमांडर 49 साल के डॉ केजेल लिंडग्रेन हैं। वह इमरजेंसी मेडिसन फ‍िजिश‍ियन भी हैं। ISS पर यह उनकी दूसरी यात्रा है। इससे पहले साल 2015 में उन्‍होंने 141 दिन वहां बिताए थे। उस अभियान के दौरान उन्होंने दो स्पेसवॉक किए थे। करीब 100 से ज्‍यादा साइंस प्रोजेक्‍ट्स में भी हिस्‍सा लिया था। 

मिशन एक्‍सपर्ट के रूप में अपनी पहली अंतरिक्ष उड़ान पर जा रहीं जेसिका वाटकिंस एक भूविज्ञानी हैं। 33 साल की जेसिका ने मंगल और पृथ्वी पर होने वाले भूस्खलन की वजहों का अध्ययन करते हुए डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की है। इस मिशन के पायलट बॉब हाइन्स हैं। 47 साल के बॉब अमेरिकी एयरफोर्स में पायलट रहे चुके हैं। उनके पास 3500 घंटे से ज्‍यादा की उड़ान का अनुभव है। 

क्रू-4 की टीम अंतरिक्ष में मिट्टी के बिना बढ़ते पौधों पर चल रही रिसर्च समेत सैकड़ों प्रयोगों को आगे बढ़ाएगी और अगले 6 महीनों तक उन पर नजर रखेगी । 
 

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