73km प्रति सेकंड की स्पीड से फैल रहा यूनिवर्स! NASA बोला- "कुछ तो गड़बड़ है"

हब्बल टेलीस्कोप (Hubble telescope) सबसे पावरफुल ऑब्जर्वेट्रीज (अंतरिक्ष पर नजर रखने वाली वेधशाला) में से एक है जिसने वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड के कई बड़े रहस्यों को समझने और सुलझाने में मदद की है। पिछले 30 सालों के दौरान टेलीस्कोप ने 130 करोड़ से ज्यादा तस्वीरें खींची हैं। अब यह अपने सबसे चुनौती भरे मिशन पर है, जिसमें पता लगाया जा रहा है कि ब्रह्मांड कितनी तेजी से फैलता जा रहा है। इस बारे में NASA ने एक चौंकाने वाला बयान जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि हमारे यूनिवर्स में जरूर कुछ असामान्य हो रहा है।  

पिछले कुछ सालों में तकनीकी ने जिस तरह से विकास किया है, उससे होना ये चाहिए था कि वैज्ञानिक और अच्छे तरीके से ब्रह्मांड के फैलने की घटना की स्टडी कर पाते। लेकिन ऐसा नहीं होता मालूम हो रहा। नासा का कहना है कि ब्रह्मांड के फैलने की दर में अंतर है। यह वैसा नहीं है जैसा कि वैज्ञानिक गणना के अनुसार होना चाहिए। इसमें कुछ असामान्य है। हालिया ऑब्जर्वेशन बताती है कि बिग बैंग (Big Bang) के बाद यूनिवर्स में कुछ असाधारण घटित हो रहा है। 

इससे वैज्ञानिक असमंजस में पड़ गए हैं। इस अजीब घटना को समझने के लिए वैज्ञानिक हब्बल टेलीस्कोप के डेटा को स्टडी कर रहे हैं। इसे वैज्ञानिकों ने स्पेस और टाइम के हिसाब से माइलपोस्ट मार्कर (milepost markers) सेट नाम दिया है। ये माइलपोस्ट हमसे कितनी दूर जाते हैं, इस आधार पर पता लगाया जा सकता है ब्रह्मांड के विस्तार की गति क्या है। 

NASA ने कहा है कि 1990 में लॉन्च होने के बाद Hubble ने 40 से अधिक माइलपोस्ट मार्कर्स को कैलिब्रेट किया है। स्पेस टेलीस्कोप साइंस इंस्टीट्यूट के नोबेल पुरस्कार विजेता एडम रीस ने कहा, "आपको टेलीस्कोप और कॉस्मिक मील मार्कर्स के साथ उच्च कोटि का माप मिल रहा है जो यूनिवर्स के फैलाव की सटीक जानकारी दे रहा है।"   

ब्रह्मांड के फैलाव की स्टडी 1920 में शुरू हुई थी, जब Edwin P Hubble और Georges Lemaitre ने इसके माप दिए थे। Edwin P Hubble के नाम पर ही टेलीस्कोप का नाम भी रखा गया है। हब्बल का कहना था कि हमारी गैलेक्सी से बाहर की अन्य गैलेक्सी धीरे धीरे हमसे दूर होती जा रही हैं। और ये काफी तेजी से हो रहा है। उसके बाद से वैज्ञानिक इस फैलाव को स्टडी करने की कोशिश कर रहे हैं। 

Hubble टेलीस्कोप से इसकी स्टडी शुरू होने के बाद से पता लगने लगा कि अब तक जो मॉडल्स इस फैलाव की गति बता रहे थे, यह उससे कहीं अधिक तेजी से फैलता जा रहा है। इन मॉडल्स में इसके फैलाव की दर 67.5 किलोमीटर प्रति सेकेंड प्रति मेगापार्सेक बताई गई लेकिन हब्बल टेलीस्कोप से ये 73 किलोमीटर प्रतिसेकेंड निकलकर आई।  

इस अंतराल के कारण वैज्ञानिक हैरानी में हैं और वे अपनी स्टडी को अब दोबारा शुरू करने जा रहे हैं। वैज्ञानिकों को अब James Webb Space Telescope के डेटा का इंतजार है, ताकि वे इस रहस्य की गहराई तक जा सकें।

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