मंगल पर आई सर्दी, -80 डिग्री की गला देने वाली ठंड में नासा के Ingenuity हेलिकॉप्टर का सेंसर खराब

मंगल ग्रह की सतह को टटोल रहे नासा के Ingenuity हेलिकॉप्टर के सामने एक समस्या खड़ी हो गई है। इसका एक सेंसर खराब हो गया है जिससे ऑपरेशन में खलल पैदा हो गया है। इस हेलिकॉप्टर के चीफ पायलेट ने बताया कि मंगल के चुनौतीपूर्ण वातावरण में हेलिकॉप्टर का सेंसर खराब हो गया है और उसके ठीक हुए बिना मिशन में आगे बढ़ना मुश्किल होगा। 

NASA के मंगल मिशन पर गए Ingenuity हेलिकॉप्टर ने पिछले दिनों मंगल पर अपनी उड़ान की एक वीडियो भेजी थी जिसे नासा ने शेयर भी किया था। हेलिकॉप्टर ने मंगल की सतह का अद्भभुत नजारा दिखाया था। अब हेलिकॉप्टर के चीफ पायलेट Havard Grip ने एक ब्लॉग पोस्ट के जरिए जानकारी दी है कि इसका सेंसर खराब हो गया है। इसे इनक्लिनोमीटर (inclinometer) कहा जाता है। इसे ठीक करने के लिए एक कम्प्यूटर पैच की जरूरत होगी। 

Ingenuity हेलिकॉप्टर मंगल पर फरवरी 2021 से गया हुआ है जिसके साथ नासा का पर्सेवरेंस रोवर भी है। तब से लेकर अब तक इसने मंगल की सतह पर 28 उड़ानें भरी हैं, जबकि इससे कम उड़ानें ही धरती से प्लान करके भेजा गया था। नासा को इसे भेजने के पीछे पहला मकसद ये जानना था कि क्या कोई हेलिकॉप्टर मंगल पर उड़ सकता है? Ingenuity ने बताया कि हां, उड़ सकता है और उससे ज्यादा भी कुछ कर सकता है। 

मंगल का चुनौतीभरा वातावरण इसके सामने मुसीबतें पैदा कर रहा है। हेलिकॉप्टर के चीफ पायलेट का कहना है कि यह इतने समय के लिए वहां टिक पाएगा, इसकी उम्मीद नहीं थी, इसलिए इसे उस तरह से तैयार करके नहीं भेजा गया था कि वह मंगल पर शीत ऋतु के छोटे दिनों में भी सूरज से यह उतनी ऊर्जा ले सके, जिससे यह चलता रहे। इसलिए रात में इसको बंद करना पड़ता है। इसके बाद यह -80 डिग्री की सर्द रात का सामना करता है, जिसके इसके इलेक्ट्रोनिक पार्ट्स को नुकसान पहुंचता है। बार बार तापमान में बड़ा अंतर झेलने से इसे नुकसान भी अधिक होता है।  

हेलिकॉप्टर के चीफ पायलेट Havard Grip ने बताया कि Ingenuity हेलिकॉप्टर के इनक्लिनोमीटर सेंसर खराब होने की संभावना को पहले से ही ध्यान में रखकर इसके मंगल पर जाने से ही पहले टीम ने एक कम्प्यूटर पैच तैयार कर दिया था। यह पैच दूसरे सेंसर्स से जानकारी लेगा ताकि हेलिकॉप्टर को ये समझ न आए कि उसे इनक्लिनोमीटर सेंसर से जानकारी नहीं मिल रही है। ग्रिप ने कहा कि इस पैच को जल्द ही हेलिकॉप्टर में इंस्टॉल कर दिया जाएगा और वह फिर से उड़ान भर सकेगा। 
 

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