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इंसान की आंख जैसी यह क्‍या चीज है मंगल ग्रह पर? स्‍पेस एजेंसी ने समझाया

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मंगल ग्रह पर दुनियाभर की अंतरिक्ष एजेंस‍ियों ने अपने मिशन भेजे हैं। इन्‍हीं में से एक मिशन के तहत यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के मार्स एक्सप्रेस मिशन ने लाल ग्रह के दक्षिणी गोलार्ध में गड्ढे की आकृति वाले क्षेत्र, एओनिया टेरा (Aonia Terra) में एक इमेज को कैप्‍चर किया है। पहली नजर में देखने पर ऐसा लगता है कि ग्रह पर एक विशालकाय आंख मौजूद है, जो हमेशा खुली रहती है। हालांकि हकीकत में ऐसा कुछ नहीं है। तस्‍वीर भले ही आंखनुमा कोई स्‍ट्रक्‍चर हो, पर यह इस ग्रह की जियोलॉजी को बेहतर तरीके से दिखा सकती है। माना जाता है कि लगभग 4 अरब साल पहले इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर ऐसे गड्ढे उभर आए थे और यह सब हमारे सोलर सिस्‍टम के शुरुआती समय में हुई उथल-पुथल का नतीजा था।  कुछ दिन पहले ESA ने एक बयान जारी किया था। उससे ऐसा लग रहा था कि एजेंसी कोई साइंस फिक्शन हॉरर फिल्म लिखने की योजना बना रही है। उसके स्‍टेटमेंट का टाइटल था- ‘मार्स स्लीप्स विद वन आई ओपन'। अपने स्‍टेटमेंट में ईएसए ने बताया है कि यह इमेज और ऐसे गड्ढे आज से 3.5 से 4 अरब साल पहले लिक्विड वॉटर के लिए किसी तरह की सप्‍लाई में मदद करते...

Milky Way गैलेक्सी में एक अनजान चीज से निकल रही हैं X-Ray, वैज्ञानिक बोले- है नया तारा!

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अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को हमारी गैलेक्सी Milky Way में एक अजब वस्तु खोज में पता चली है। इसे MAXI J1816-195 नाम दिया गया है और यह X-ray लाइट छोड़ रही है। वैज्ञानिकों को पहली बार इसके बारे में 7 जून को पता चला था। इसे जापान की स्पेस एजेंसी के ऑल स्काई एक्स रे इमेज (MAXI) के माध्यम कैप्चर किया गया है। इस खोज पर प्रकाश खगोल भौतिक शास्त्री हितोशी निगेरो और उनकी टीम ने डाला जो जापान की निहोन यूनिवर्सिटी से हैं। उन्होंने एस्ट्रोनॉमर टेलीग्राम में एक नोटिस के रूप में पोस्ट किया कि एक नए एक्स-रे स्रोत का पता लगाया गया है।   एस्ट्रोनॉमर एलेस्सांडरो पेट्रूनो द्वारा संकलित किए गए पल्सर डेटाबेस के अनुसार, यह वस्तु 30 हजार प्रकाश वर्ष की दूरी में स्थित है। उन्होंने बताया कि इसकी लोकेशन Serpens, Scutum और Sagittarius तारामंडल के प्लेन में कहीं है। यह वस्तु यूं तो काफी अधिक चमकीली दिखाई दे रही थी लेकिन वैज्ञानिक MAXI डेटा के माध्यम से इसकी पहचान नहीं कर सके। बाद में, पेंसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के एक खगोल भौतिकशास्त्री, जेमी केनेआ और उनके सहयोगियों ने इसके असल स्थान का निरीक्षण करने के लिए नील ...