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अब चेस्ट X-Ray से लगाया जा सकेगा कोविड का पता, IIT जोधपुर ने विकसित की तकनीक

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First Published: January 31, 2022 | Last Updated:January 31, 2022 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जोधपुर (IIT-J) के शोधकर्ताओं द्वारा हाल ही में एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित छाती एक्स-रे तकनीक विकसित की गई थी। इस चेस्ट एक्स-रे तकनीक का इस्तेमाल कोविड-19 की स्क्रीनिंग के लिए किया जाएगा। मुख्य बिंदु शोधकर्ताओं की टीम ने COMiT-Net नामक एक गहन शिक्षण-आधारित एल्गोरिथम प्रस्तावित किया है। यह एल्गोरिथम गैर-कोविड प्रभावित फेफड़े को कोविड प्रभावित फेफड़े से अलग करने के लिए छाती के एक्स-रे छवियों में मौजूद असामान्यताओं (abnormalities) की जानकारी एकत्रित करेगा। प्रौद्योगिकी विकसित करने के लिए 2,500 से अधिक छाती एक्स-रे छवियों के साथ प्रयोग किया गया था। इसने लगभग 96.80% संवेदनशीलता हासिल की। इस शोध में इस्तेमाल AI समाधान चिकित्सा के साथ-साथ एल्गोरिथम दोनों दृष्टिकोणों से व्याख्या योग्य है। खोज का महत्व दुनिया भर में कई लहरों में कोविड -19 मामलों की बढ़ती संख्या के बीच, दूरस्थ क्षेत्रों में प्रसंस्करण केंद्रों और परीक्षण किटों की सीमित उपलब्धता के साथ देशों...

मुंह के कैंसर (Oral Cancer) का पता लगाने के लिए नई तकनीक खोजी गई

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First Published: January 29, 2022 | Last Updated:January 29, 2022 पश्चिम बंगाल में गुरु नानक इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज (Guru Nanak Institute of Dental Sciences) के शोधकर्ताओं ने मुंह के कैंसर (oral cancer) का पता लगाने के लिए एक नई विधि बनाई है। नई तकनीक  यह कैंसर के चरणों और पूर्व कैंसर के चरणों में अंतर करने में सक्षम है। यह विभेदीकरण (differentiation) उच्च मानक बायोप्सी रिपोर्ट के माध्यम से किया जाता है। टीम ने एक नया इमेजिंग डिवाइस बनाया है। यह उपकरण ऊतकों में रक्त प्रवाह दर को मापकर कैंसर के चरण की जांच करता है। इस डिवाइस एक रक्त छिड़काव इमेजर है। यह एक आर्द्रता सेंसर, इन्फ्रारेड कैमरा और एक सॉफ्टवेयर इंजन का उपयोग करता है। सॉफ्टवेयर इंजन को इलेक्ट्रॉनिक रूप से नियंत्रित किया जाता है। तकनीक की जरूरत लगभग पांचवीं महिला आबादी कैंसर से पीड़ित है। साथ ही, भारत में पुरुषों में मुंह का कैंसर सबसे आम प्रकार है। 11.28% से अधिक कैंसर मुंह के कैंसर हैं। यदि इसका पता पहले चल जाता है, तो पांच साल तक जीवित रहने की संभावना होती है। बाद के चरणों में, जीवित...

राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (National Technical Textiles Mission) क्या है?

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First Published: January 18, 2022 | Last Updated:January 18, 2022 17 जनवरी, 2022 को कपड़ा मंत्रालय ने विशेष फाइबर और जिओ-टेक्सटाइल के क्षेत्रों में 30 करोड़ रुपये की 20 रणनीतिक अनुसंधान परियोजनाओं को मंजूरी दी। मुख्य बिंदु ये परियोजनाएं सरकार के प्रमुख कार्यक्रम ‘राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन’ के अंतर्गत आती हैं। 20 अनुसंधान परियोजनाओं में से, विशेष फाइबर की 16 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई थी। उसमे शामिल हैं: स्वास्थ्य सेवा में 5 परियोजनाएं औद्योगिक और सुरक्षात्मक क्षेत्र में 4 परियोजनाएं ऊर्जा भंडारण में 3 परियोजनाएं कपड़ा अपशिष्ट पुनर्चक्रण में 3 परियोजनाएं कृषि क्षेत्र में 1 परियोजना जियो-टेक्सटाइल (इन्फ्रास्ट्रक्चर) में 4 परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई। भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास के लिए रणनीतिक परियोजनाओं को मंजूरी देने वाले सत्र में कई प्रमुख भारतीय संस्थानों, उत्कृष्टता केंद्रों और IIT, BTRA, DRDO, आदि सहित सरकारी संगठनों ने भाग लिया। ये परियोजनाएं विशेष रूप से हेल्थकेयर, एनर्जी स्टोरेज, एग्रीकल्चर, इंडस्ट्रियल एंड प्रोटेक्टिव, टेक्सटाइल वे...