शुक्र ग्रह में ऑक्‍सीजन! Nasa के पार्कर सोलर प्रोब की तस्‍वीरों से साइंटिस्‍ट हैरान

नासा (NASA) के पार्कर सोलर प्रोब (Parker Solar probe) ने शुक्र की पहली तस्‍वीरों को कैद किया है। शुक्र ग्रह  आमतौर पर घने बादलों में लिपटा होता है। नासा के मुताबिक, पार्कर सोलर प्रोब ने हाल ही में दो फ्लाईबाईज के दौरान अपने वाइड-फील्ड इमेजर और WISPR का इस्‍तेमाल करते हुए तस्‍वीरें लीं। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि शुक्र ग्रह की ये तस्‍वीरें इस ग्रह के भूविज्ञान और खनिज संरचना को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेंगी। नासा ने कहा कि ये इमेजेस महाद्वीपीय क्षेत्रों, मैदानों और पठारों जैसी विशेषताओं के बारे में बताती हैं। इस ग्रह के वातावरण में ऑक्सीजन का चमकदार प्रभामंडल (halo) है। शुक्र और पृथ्वी के बीच इस समानता को देखते हुए वैज्ञानिक यह भी जानना चाहते हैं कि शुक्र ग्रह क्यों दुर्गम हो गया और क्‍यों पृथ्‍वी में जीवन का स्‍वागत हुआ। 

नासा के हेडक्‍वॉर्टर में हेलियोफिजिक्स डिवीजन की डिवीजन डायरेक्टर- निकोला फॉक्स ने कहा कि हम पार्कर सोलर प्रोब से मिली तस्‍वीरों से रोमांचित हैं। ये इमेजेस शुक्र ग्रह को लेकर चल रहीं रिसर्च को अप्रत्‍याशित तरीके से आगे ले जा सकती हैं। 

जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स जर्नल में वैज्ञानिकों ने 9 फरवरी को इस नई खोज का पूरा विश्लेषण प्रकाशित किया है। स्‍टडी के प्रमुख लेखक ब्रायन वुड ने कहा कि हाल के समय तक वैज्ञानिकों को इस बारे में ज्‍यादा जानकारी नहीं थी कि शुक्र ग्रह की सतह कैसी दिखती है। इन तस्‍वीरों ने हमारा दृष्टिकोण काफी हद तक बदल दिया है। वुड ने कहा कि शुक्र की सतह का तापमान रात में भी लगभग 460 डिग्री सेल्सियस है। यह इतना गर्म है कि शुक्र की चट्टानी सतह स्पष्ट रूप से चमक रही है।

बहरहाल, वैज्ञानिकों को इन तस्‍वीरों से काफी उम्‍मीद है। उनका मानना है कि इससे शुक्र ग्रह को समझने में और मदद मिलेगी। ग्रह के बारे से विस्‍तार से समझा जा सकेगा। 

वैज्ञानिक यह भी जानना चाहते हैं कि क्‍या शुक्र ग्रह पर कभी जीवन संभव हो सकेगा। शुक्र का वातावरण कार्बन डाइऑक्साइड से भरा हुआ है। इसकी सतह इतनी गर्म है कि सीसा lead भी पिघल जाएगा। यह साबित करता है कि इस ग्रह पर जिंदगी का बच पाना नामुमकिन है। हालांकि वेल्स स्थि‍त कार्डिफ यूनिवर्सिटी Cardiff University के रिसर्चर्स ने पिछले साल शुक्र के वातावरण में फॉस्फीन phosphine के स्रोतों की खोज करके हलचल मचा दी थी। उन्होंने दावा किया था कि पृथ्वी पर कार्बनिक पदार्थों के टूटने से स्वाभाविक रूप से पैदा होने वाली इस गैस का शुक्र पर मिलना वहां जीवन का संकेत हो सकता है। 
 

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