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चांद पर नाम भेज रहा है NASA, आप भी यहां कर सकते हैं रजिस्टर

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नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) ने बीते रविवार को सोशल मीडिया पर अपने फॉलोअर्स के लिए एक जबरदस्त ऑफर निकाला, जिसके बाद स्पेस टेक्नोलॉजी फैन्स को चौंका दिया। अमेरिकी स्पेस एजेंसी ने यूजर्स को Artemis I मिशन के जरिए लाखों लोगों का नाम चांद पर भेजने का फैसला लिया है, जिसके लिए रजिस्ट्रेशन भी चालू है। इस घोषणा के साथ ही ट्विटर पर कई मजेदार प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। NASA ने ट्विटर पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि 3 मिलियन (30 लाख) लोगों के नाम को Artemis I के साथ चांद पर ले जाया जाएगा। स्पेस एजेंसी ने लिखा, (अनुवादित) "आप अपना नाम चंद्रमा पर भेज सकते हैं। कैसे? अपना बोर्डिंग पास प्राप्त करने के लिए साइन अप करें और इस वर्ष #Artemis I पर चंद्रमा के चारों ओर उड़ने वाले लगभग 3 मिलियन "यात्रियों" में शामिल हों। " इस पोस्ट में एक वीडियो भी है, जिसमें चंद्रमा घूमता दिखाई दे रहा है।   Artemis I मिशन में 30 लाख लोगों के नामों को एक फ्लैश ड्राइव में स्टोर करके स्पेस में ले जाया जाएगा। आप अपने नाम को रजिस्टर कराने के लिए इस वेबसाइट पर जा सकते हैं और अपना नाम...

चांद पर जीवन की तलाश में चीन निकला एक कदम आगे, तैयार कर रहा खास सिस्टम!

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पृथ्वी के अलावा कहीं दूसरे ग्रह पर जीवन को संभव बनाया जा सकता है, इसे लेकर सालों से गहन शोध किया जा रहा है। धरती के अलावा किसी दूसरी दुनिया में रहने की बात जब आती है तो सबसे पहली संभावना चांद पर तलाशी जाती है। चांद ही पृथ्वी के नजदीक एक मात्र ऐसा उपग्रह है जहां पर मनुष्य इस कोशिश को हकीकत बनाने का सपना देखता आया है। चांद पर मनुष्य के रहने लायक वातावरण बनाने के लिए गहन शोध किए जा रहे हैं। इसमें जीवन की कुछ मूलभूत जरूरतें जैसे कि पानी, हवा और लम्बे वक्त चलने वाले ऊर्जा स्रोत आदि के बारे में अध्य्यन किया जा रहा है।  चीन के वैज्ञानिकों ने इसी संबंध में एक स्टडी की है जिसमें उन्होंने कहा है कि चांद की मिट्टी में ऐसे एक्टिव तत्व हैं जो कार्बन डाइऑक्साइड को ऑक्सीजन और ईंधन या ऊर्जा में बदल सकते हैं। चीन की ओर से पिछले साल चांद पर एक बेनाम मिशन भेजा गया था। यह स्टडी चांद पर से पिछले साल लाई गई उसी मिट्टी के नमूनों पर की गई है। Joule नाम के जर्नल में इस स्टडी को प्रकाशित भी किया गया है। अब शोधकर्ता इस बारे में जांच करने में लगे हुए हैं कि क्या चांद पर मौजूद मिट्टी मानव बस्ती बसाने के लिए उ...

वैज्ञानिकों ने नई स्टडी से पता लगाया चांद पर कहां से आया होगा पानी!

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पृथ्वी के बाहर जीवन तलाशने के लिए इन्सान हमेशा से ही उत्सुक रहा है। जब से नासा ने चांद पर पानी के होने की पुष्टि की है, कई शोध इसको लेकर हो चुके हैं कि चांद पर पानी का स्रोत क्या हो सकता है। अब एक नई शोध ने बहुत ही अजब नतीजा पेश किया है। इसने कहा है कि चांद पर पानी का स्रोत होने का कारण ज्वालामुखी हो सकते हैं। हम जानते हैं कि चांद पर पुराने समय में कई ज्वालामुखी फूट चुके हैं।  चांद पर ज्वालामुखीय गतिविधियां 4.2 खरब साल पहले शुरू हुई होंगी। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि ज्वालामुखी फटने की घटनाएं 1 अरब साल पहले तक चांद पर रही होंगीं। इसकी सतह पर दिखने वाले बड़े बड़े धब्बे ज्वालामुखीय चट्टानों के ही मैदान हैं जो बड़े ज्वालामुखी विस्फोटों के कारण बने हैं। वैज्ञानिक ये समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या इन विस्फोटों से गैसें निकली होंगी, जो इसके वातावरण में कैद हुई होंगीं? और क्या ये गैसें ठंडी होकर बर्फ के रूप में दोबारा से मंगल की सतह पर गिरी होंगी, जहां पर सूर्य की रोशनी नहीं पहुंच पाती है।  वैज्ञानिकों ने कहा है कि यह एक संभावना हो सकती है। "हमारा मॉडल यह अनुमान लगाता है कि कुल H...

वैज्ञानिकों ने की चांद की मिट्टी पर की पौधे उगाने की कोशिश, नतीजे देख रह गए हैरान!

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आपने चंद्रमा पर पौधे उगाने के बारे में सोचा है? वैज्ञानिकों ने चांद पर तो नहीं, लेकिन इससे आई मिट्टी पर बीज उगाने में सफलता हासिल कर ली है। चांद से मिट्टी के ये नमूने 1969 और 1972 में नासा के मिशनों के दौरान इकट्ठे किए गए थे, जिन पर वैज्ञानिकों ने पौधे उगाए हैं। धरती के पौधों का दूसरी दुनिया की मिट्टी में उग पाना मानवता के लिए बहुत बड़ी सफलता है। इससे संभावना पैदा होती है कि धरती पर पनपने वाले पौधों को दूसरे ग्रहों पर भी उगाया जा सकता है।  शोधकर्ताओं ने बताया कि उन्होंने अरबिडोप्सिस थालियाना (Arabidopsis thaliana) नाम के एक कम फूल वाले खरपतवार के बीज 12 छोटे कंटेनरों में लगाए। ये कंटेनर बहुत छोटे हैं जो केवल मनुष्य की उंगली की टिप के बराबर हैं। इनमें केवल 1 ग्राम चांद की मिट्टी डाली गई, जिसे सही अर्थों में लूनर रिगोलिथ (lunar regolith) कहा जाता है। यह मिट्टी नुकीले कणों और ऑर्गेनिक मैटिरियल की कमी के चलते धरती की मिट्टी से बहुत अलग है, इसलिए वैज्ञानिकों को शंका थी कि शायद पौधे न उगें।  यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा में हॉर्टीकल्चर साइंसेज के प्रोफेसर एना लिसा पॉल ने कहा, "जब हमने पह...

नासा की डराने वाली खबर! खो जाएगा धरती का इकलौता चांद, न होगी चांदनी, न दिखेगा सूर्य ग्रहण ...

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NASA ने एक डराने वाली खबर दी है। मंगल ग्रह का चंद्रमा एक दिन इसके करीब आते-आते इसकी सतह से टकरा जाएगा और धरती का चंद्रमा हमेशा के लिए धरती से दूर हो जाएगा। नासा ने कहा है कि मंगल ग्रह का चंद्रमा धीरे-धीरे इसकी सतह के करीब आ रहा है। इसी तरह से धरती का चंद्रमा इसकी सतह से धीरे-धीरे दूर होता जा रहा है। इस गति का अंत ये होगा कि मंगल का चंद्रमा इसकी सतह से टकरा कर टुकडों में बिखर जाएगा और धरती की रातें एक समय बाद हमेशा के लिए अंधेरी हो जाएंगी।  हाल ही में नासा के पर्सवेरेंस रोवर ने मंगल के चंद्रमा फोबोस की शानदार तस्वीरे ली हैं। नासा ने इन्हें शेयर करने के साथ-साथ एक और तथ्य से पर्दा उठाया है। मंगल के दो चंद्रमा हैं- फोबोस और डीमोस। इसका फोबोस मून धीरे-धीरे लाल ग्रह की सतह के करीब आ रहा है। नासा ने अपनी वेबसाइट पर एक पोस्ट में इसकी मंगल के करीब आने की चाल के बारे में भी बताया है। जिसके मुताबिक, फोबोस हर 100 साल में 6 फीट यानि 1.8 मीटर से मंगल के करीब सरकता जा रहा है। इस हिसाब से 5 करोड़ साल बाद यह मंगल की सतह से टकरा कर चूर चूर हो जाएगा। इसके उलट इसका दूसरा चांद डीमोस इससे दूर चला जाएग...

इंसान को चांद पर ले जाने वाले SLS रॉकेट की टेस्टिंग में आई प्रॉब्‍लम, Nasa ने लिया यह फैसला

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने अपने स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) के अंतिम बड़े परीक्षण में एक बार फिर देरी कर दी है। नासा ने बताया है कि मोबाइल लॉन्चर में प्रेशर बनाए रखने में आ रहे इशू के बाद ‘वेट ड्रेस रिहर्सल' को सस्‍पेंड कर दिया गया है। गौरतलब है कि मोबाइल लॉन्‍चर ही मिशन के लॉन्‍च होने तक रॉकेट को सपोर्ट देता है। यह टेक्निशियंस को रॉकेट में सेफ्टी के साथ प्रणोदक (propellants) लोड करने से रोकता है। बताया जा रहा है कि नासा के इंजीनियर इस इशू को सॉल्‍व करने के लिए काम कर रहे हैं। एजेंसी ने अपडेट किया है कि वह सोमवार को आर्टेमिस I (Artemis I) अनक्रूड मिशन का फाइनल टेस्‍ट फिर शुरू करने का लक्ष्य बना रही है। स्‍पेस लॉन्‍च सिस्‍टम (SLS) का इस्‍तेमाल इंसान को एक बार फ‍िर से चंद्रमा पर और आगे चलकर मंगल ग्रह पर ले जाने के लिए किया जाएगा।  अमेरिका के कैनेडी स्पेस सेंटर में 322-फुट के स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट को परखने के लिए वेट ड्रेस रिहर्सल शुक्रवार को शुरू हुई थी। इसे रविवार तक पूरा कर लिया जाना था, लेकिन मोबाइल लॉन्‍चर के कुछ पंखे इसके अंदर पॉजिटिव प्रेशर नहीं बना सके। ...

Nasa के Artemis-3, 4 और 5वें मून मिशन पर भी चल रहा काम, इंसान को दोबारा चांद पर उतारने की है तैयारी

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नासा (NASA) के मून मिशन आर्टिमिस-1 (Artemis I) की लॉन्चिंग होना अभी बाकी है। इस बीच नासा और अमेरिका में उसके तमाम सहयोगी दूसरे आर्टेमिस लॉन्च के लिए स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट पर काम कर रहे हैं। यह पहला क्रू आर्टेमिस मिशन होगा। यानी इसके जरिए एक बार फ‍िर इंसान को चांद पर उतारा जाएगा। नासा ने कहा है कि SLS रॉकेट पर काम कर रहे वैज्ञानिकों की टीमों ने दूसरे आर्टेमिस मिशन में ‘बेहतरीन प्रगति' की है। अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा है कि उसकी टीमें आर्टेमिस मिशन के प्रमुख हिस्सों को भी टेस्‍ट कर रही हैं, जिन्‍हें पहले दो मिशन के बाद लॉन्‍च किया जाना है। ये आर्टिमिस-3, 4 और 5 मिशन होंगे।  आर्टेमिस मिशन नासा के सबसे महत्वाकांक्षी प्रोग्राम्‍स में से एक है। इसका मकसद 1970 के दशक के बाद पहली बार इंसान को चंद्रमा पर उतारना है। नासा का लक्ष्य लंबे समय के लिए चंद्रमा पर इंसान की मौजूदगी स्‍थापित करना है। इसके साथ ही मंगल पर जाने के लिए चंद्रमा को लॉन्चपैड में बदलना है। आर्टिमिस-1 इस जटिल सीरीज का पहला हिस्‍सा है। वहीं, SLS रॉकेट दुनिया का सबसे ताकतवर रॉकेट होने जा रहा है, जो मिशन को तेजी से आग...

NASA ने सॉफ्ट टॉय को पहना दिए अंतरिक्ष यात्री के कपड़े, चांद पर जाने की पूरी तैयारी

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा अगले साल की शुरुआत में चंद्रमा पर अपना पहला आर्टेमिस मिशन लॉन्‍च कर रही है, जो कई मायनों में खास होने वाला है। कॉमिक स्ट्रिप, 'पीनट्स' का मशहूर और दिल को छू लेने वाला कैरेक्‍टर 'स्‍नूपी' इस मिशन का हिस्‍सा होगा, यानी वो चंद्रमा पर जाएगा। इससे पहले 1969 में भी इस मानवरूपी बीगल यानी शिकारी को चंद्रमा के मिशन पर भेजा गया था और यह चंद्रमा की सतह पर उतरने वाला दुनिया का पहला बीगल बना था। अब 60 साल बाद इतिहास खुद को दोहराएगा। इस बार यह काफी हद तक अलग होगा, क्‍योंकि यह स्‍टफ्ड स्‍नूपी, चंद्रमा के चारों ओर उड़कर, ओरियन स्‍पेसक्राफ्ट पर जीरो ग्रैविटी इंडिकेटर के रूप में काम करेगा यह एक मानवरहित मिशन है, जिसमें स्‍नूपी की जिम्‍मेदारी काफी अहम होने वाली है।  स्नूपी को नासा का ओरियन क्रू सर्वाइवल सिस्टम सूट पहनाया जाएगा। नारंगी रंग के इस सूट को उसी मटीरियल से बनाया गया है, जिस मटीरियल वाले सूट को भविष्य के आर्टेमिस मिशन पर एस्ट्रोनॉट द्वारा पहना जाएगा। नासा ने ट्विटर पर इस ड्रेस को पहने स्नूपी की एक फोटो शेयर करते हुए कहा है कि एस्ट्रोनॉट स्नूपी स्‍...